ब्‍लागर/चिट्ठाकार पर निबन्‍ध



  1. यह मानव जाति में एक विशेष प्रकार का कुत्ता होता है जो भौकता ज्‍यादा है और कटता कम है।
  2. चिट्ठाकार के परिवार में कई सदस्‍य होते है।
  3. इसके पिता का नाम डेक्‍सटाप होता है क्‍योकि ज्‍यादातर समय उसे घूरता रहता है।
  4. माता का नाम सीप‍ीयू है, जो इसकी सभी कमियों को नज़र अंदाज करती है।
  5. इसकी प्रेमी/प्रेमिका माऊस होती है, जिसके बदन पर वह हमेशा हाथ फिराता रहता है।
  6. लेख/पोस्‍ट इसके पति/पत्नि होते है, क्‍योकि इनमें लड़ई झगड़ा, भड़ास प्रेम सभी का मेल मिलता है।
  7. गुमनाम टिप्‍पणी, भद्र टिप्‍पणी, अभद्र टिप्‍पणी इसने बच्‍चों का नाम है, क्‍योकि ये चुलबुले होते है, बच्‍चे कितने भी खराब क्‍यो न हो, अच्‍छे ही होते है।
  8. की‍बोर्ड इसका नौकर होता है, जिसे समय बेसमय-बेरहम होकर मारता है।
  9. इसे रह रहे कर पोस्टिग और टिप्‍पणी प्राप्‍त करने के दौरे पड़ते है।
  10. उपरोक्‍त बातों से कहा जाता सकता है कि आदमी की तरह दिखने वाला बिना सींग पूछ का यह प्राणी मनुष्‍य नही होता है।
यह निबन्‍ध जूनियर हाईस्‍कूल स्‍तर(कक्षा-8) का है इसलिये निदेशानुसार सिर्फ 10 लाईन लिखने को कहा गया है।


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13 comments:

Udan Tashtari said...

इसे रह रहे कर पोस्टिग और टिप्‍पणी प्राप्‍त करने के दौरे पड़ते है।

--हा हा!! आप भी मजबूर थे दस लाईन में लिखने को..वरना तो उपन्यास लिख डालते, :) विषय ही ऐसा है.

दीपक भारतदीप said...

मित्रवर,
आपका लेखक पसंद आया। इस पर मैंने कुछ पंक्तियां लिखीं हैं जिन्हें मैं सायंकाल अपने ब्लाग पर लिखूंगा। यह एक हास्य कविता है और मैं सुबह वह नहीं लिखता। अगर आपको उसमें कुछ बुरा लगे तो क्षमा कर देना क्योंकि वह मैंने मित्रवत स्नेह के कारण लिखी हैं और मैं चाहता हूं कि मित्रवर समीरलाल ‘उडन तश्तरी‘ को शायद वह पसंद आयें और वह मुझे भी टिप्पणी लिखें।
दीपक भारतदीप

अरुण said...

का लिखे समीर भाई के लिये को हमारा भी मान लीजीये :)

सजीव सारथी said...

गहरा शोध .....वाह

siddharth said...

मैं आपको दस में साढ़े-नौ नम्बर देता हूँ। फुल मार्क्स एलाऊ नहीं है।

Shiv Kumar Mishra said...

सिद्धार्थ जी ने कंजूसी कर दी. हम तो आपको पूरे दस नम्बर देंगे. बहुत शानदार लिखा है.
पुराणिक जी आते होंगे...निबंध वालों को वे टॉप करा देते हैं.

pallavi trivedi said...

badhiya research kiya hai....

mahashakti said...

उड़न जी,अरूण जी, सजीव जी, सिद्धार्थ जी, शिव जी, पल्‍लवी जी आप सभी का बहुत बहुत धन्‍यवाद, पुन: आइयेगा।

दीपक जी, आप लिखें हम शाम या कल तक आपके दरवाजे पर जरूर दस्‍तक देगें।

Gyandutt Pandey said...

वाह, वाह, मस्त लपेटा है कम्प्यूटरी कीट को!

महेंद्र मिश्रा said...

10 me se 10 bahut khoob umda

मैथिली said...

वाह
हमारी ओर से दस में से बीस.

हर्षवर्धन said...

वाह वाह , वाह वाह

mehek said...

bahut hi badhiya niband raha:):):):),agar hum blogging board exam ke teacher hote ,is niband ke liye aage ke sawal haal kiye bina hi pehla number pradan karte,hans hans ke lotpot ho rahe hai hum sab gharwale:):)i read it to my family members ,they enjoyed it very much thanks for the smiles