वैदिक कर्मकाण्ड के सोलह संस्कार




वैदिक कर्मकाण्ड के अनुसार निम्न सोलह संस्कार होते हैं:
  • गर्भाधान संस्कारः उत्तम सन्तान की प्राप्ति के लिये प्रथम संस्कार।
  • पुंसवन संस्कारः गर्भस्थ शिशु के बौद्धि एवं मानसिक विकास हेतु गर्भाधान के पश्चात दूसरे या तीसरे महीने किया जाने वाला द्वितीय संस्कार।
  • सीमन्तोन्नयन संस्कारः माता को प्रसन्नचित्त रखने के लिये, ताकि गर्भस्थ शिशु सौभाग्य सम्पन्न हो पाये, गर्भाधान के पश्चात् आठवें माह में किया जाने वाला तृतीय संस्कार।
  • जातकर्म संस्कारः नवजात शिशु के बुद्धिमान, बलवान, स्वस्थ एवं दीर्घजीवी होने की कामना हेतु किया जाने वाला चतुर्थ संस्कार।
  • नामकरण संस्कारः नवजात शिशु को उचित नामप्रदान करने हेतु जन्म के ग्यारह दिन पश्चात् किया जाने वाला पंचम संस्कार।
  • निष्क्रमण संस्कारः शिशु के दीर्घकाल तक धर्म और मर्यादा की रक्षा करते हुए इस लोक का भोग करने की कामना के लिये जन्म के तीन माह पश्चात् चौथे माह में किया जाने वला षष्ठम संस्कार।
  • अन्नप्राशन संस्कारः शिशु को माता के दूध के साथ अन्न को भोजन के रूप में प्रदानकिया जाने वाला जन्म केपश्चात् छठवें माह में किया जाने वालासप्तम संस्कार।
  • चूड़ाकर्म (मुण्डन) संस्कारः शिशु के बौद्धिक, मानसिक एवं शारीरिक विकास की कामना से जन्म के पश्चात् पहले, तीसरे अथवा पाँचवे वर्ष में किया जाने वाला अष्टम संस्कार।
  • विद्यारम्भ संस्कारः जातक को उत्तमोत्तम विद्या प्रदान के की कामना से किया जाने वाला नवम संस्कार।
  • कर्णवेध संस्कारः जातक की शारीरिक व्याधियों से रक्षा की कामना से किया जाने वाला दशम संस्कार।
  • यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कारः जातक की दीर्घायु की कामना से किया जाने वाला एकादश संस्कार।
  • वेदारम्भ संस्कारः जातक के ज्ञानवर्धन की कामना से किया जाने वाला द्वादश संस्कार।
  • केशान्त संस्कारः गुरुकुल से विदा लेने के पूर्व किया जाने वाला त्रयोदश संस्कार।
  • समावर्तन संस्कारः गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने की कामना से किया जाने वाला चतुर्दश संस्कार।
  • पाणिग्रहण संस्कारःपति-पत् नी को परिणय-सूत्र में बाँधने वाला पंचदश संस्कार।
  • अन्त्येष्टि संस्कारः मृत्योपरान्त किया जाने वाला षष्ठदश संस्कार।
उपरोक्त सोलह संस्कारों में आजकल नामकरण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म (मुण्डन), यज्ञोपवीत (उपनयन), पाणिग्रहण और अन्त्येष्टि संस्कार ही चलन में बाकी रह गये हैं। 


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पहला दिन...



आज दिनाँक  9 नवम्‍बर 2011, हाईकोर्ट में माननीय न्‍यायमूर्ति वाय के सिं‍ह और न्‍यायमूर्ति डी गुप्ता की डिविजन बेंच के सामने अपीयर हुआ.. दिल मे हल्‍की सी घबराहट और मगर एक विश्वास की मुझे आज अपीयर होना है।  मै अपीयर हुआ अपनी बात रखा, बहुत ही अच्‍छा लगा.. ऑफ्टर लंच माननीय न्‍यायमूर्ति सभाजीत यादव जी की कोर्ट मे अपीयर हुआ.... आज जब 11 बजे मुझे कहा गया कि आपको अपीयर होना है तो मेरी कोई तैयारी नही थी और अजीब पन था किन्‍तु जब बेंच के बारे मे पता चला तो दृंढ निश्चिय किया कि आज तो मुझे इस कोर्ट मे अपनी बात तो रखनी ही है। आज मेरे साथ मेरे साथ मेरे कॉलेज के फेन्डस भी थे तो लॉ फर्स्ट इयर के स्‍टूडेंट थे.... अपने दोस्‍तो के सामने और पापा जी की ना मौजूदगी मे जिम्‍मेदारी निभाना बड़ा मजेदार रहा। :)

आज से पहले कैट, लेबर कोर्ट और इण्‍ड्रस्ट्रियल कोर्ट मे तो कई बार पैरवी कि किन्‍तु आज का दिन तो कुछ खास ही रहा... जैसा सुना था वैसा पाया भी कि बेंच नये अधिवक्ताओ को सपोंर्ट करती है.. क्‍योकि मैने महसूस भी किया कि कुछ गलतियाँ मेरे से हुई थी। अंत भला तो सब भला... आज दिन अपने आप मे मेरे लिये एक महत्‍वपूर्ण दिन बन गया।


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साबरमती के सन्त के अनोखे कमाल..




दे दी हमें बरबादी चली कैसी चतुर चाल?
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल.

उन्नीस सौ इक्किस में असहयोग का फरमान,
गान्धी ने किया जारी तो हिन्दू औ मुसलमान.
घर से निकल पड़े थे हथेली पे लिये जान,
बाइस में चौरीचौरा में भड़के कई किसान.

थाने को दिया फूँक तो गान्धी हुए बेहाल,
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल.

गान्धी ने किया रद्द असहयोग का ऐलान,
यह देख  भड़क   उट्ठे   कई   लाख   नौजवान,
बिस्मिल ने लिखा इसपे-ये कैसा है महात्मा!
अंग्रेजों से  डरती है  सदा   जिसकी   आत्मा.

निकला जो इश्तहार वो सचमुच था बेमिसाल,
साबरमती के   सन्त   तूने   कर   दिया  कमाल.

पैसे की जरूरत थी बड़े  काम  के लिये,
लोगों की जरूरत थी इन्तजाम के लिये,
बिस्मिल ने   नौजवान इकट्ठे   कई    किये,
छप्पन जिलों में संगठक तैनात कर दिये.

फिर लूट लिया एक दिन सरकार का ही माल,
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल.

चालीस   गिरफ्तार   हुए   जेल  में   गये,
कुछ भेदिये भी बन के इसी खेल में गये,
पेशी हुई तो जज से कहा  मेल   में   गये,
हम भी हुजूर चढ़ के उसी रेल में गये.

उनमें बनारसी भी था गान्धी का यक दलाल,
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल.

उसने किया अप्रूव ये सरकारी खजाना,
बिस्मिल ने ही लूटा है वो डाकू है पुराना,
गर छोड़ दिया उसको तो रोयेगा ज़माना,
फाँसी लगा के ख़त्म करो उसका फ़साना.

वरना वो मचायेगा दुबारा वही बबाल.
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल.

बिस्मिल के साथ तीन और दार पर चढ़े,
जज्वा ये  उनका   देख नौजवान सब   बढे,
सांडर्सका वध करके भगतसिंह निकल पड़े,
बम  फोड़ने असेम्बली   की  ओर   चल   पड़े.

बम फोड़ के पर्चों को  हवा में  दिया उछाल.
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल.

इस सबकी सजा मौत भगत सिंह को मिली,
जनता  ने  बहुत  चाहा पे  फाँसी नहीं टली,
इरविन  से  हुआ  पैक्ट तो चर्चा वहाँ चली,
गान्धी ने कहा  दे  दो  अभी  देर  ना भली.

वरना  ये  कराँची  में  उठायेंगे  फिर  सवाल.
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल.

जब हरिपुरा चुनाव में गान्धी को मिली मात,
दोबारा से त्रिपुरी में हुई फिर ये करामात,
इस पर सवाल कार्यसमिति में ये उठाया,
गान्धी ने कहा फिर से इसे किसने जिताया?

या तो इसे निकालो या फिर दो मुझे निकाल.
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल.

इस पर  सुभाष  कांग्रेस  से  निकल   गये,
जिन्दा मशाल बन के अपने आप जल गये,
बदकिस्मती  से  जंग  में जापान गया हार,
मारे  गये  सुभाष ये  करवा  के  दुष्प्रचार,

नेहरू के लिये कर दिया अम्नो-अमन बहाल.
साबरमती के सन्त तूने कर  दिया  कमाल.

आखिर में जब अंग्रेज गये घर से निकाले,
था ये सवाल  कौन  सियासत को सम्हाले,
जिन्ना की जिद थी मुल्क करो उनके हवाले,
उस  ओर  जवाहर  के  थे अन्दाज  निराले.

बँटवारा करके मुल्क में नफरत का बुना जाल.
साबरमती के सन्त तूने   कर दिया  कमाल.
यह रचना KRANT M.L.Verma जी की है .... इसका श्रेय उनको ही दीजिए... मैने इस रचना को प्रवाह दिया है... 



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सेक्‍युलर देशों में भी चर्च का हस्‍तक्षेप



  • इंग्‍लैण्‍ड  - इंग्‍लैण्‍ड के राजा/रानी का एंग्लीकेन चर्च का सदस्‍य होना अनिवार्य है। 24 बिशप व 2 आर्कविशप, संसद के उच्‍च सदन House of Lords के सदस्‍य मनोनित होते हैं। 
  • इटली   - वहाँ का संविधान कहता है कि "कैथोलिक मत के ईसाई तत्‍व ही सार्वजनिक शिक्षा की नींव और शिखर दोनों है" शिक्षकों और उपदेशकों को चर्च अधिकारियों की सम्‍मति लेनी पड़ती है, अन्‍यथा वे पद से बर्खास्‍त कर दिये जाते है। 
  • पुर्तगाल- शिक्षा चर्च के अधिकारियो की सम्‍मति से ही होनी अनिवार्य है।
  • कोलम्बिया - कैथोलिक मत के अतिरिक्त किसी भी अन्‍य को अपने पूजा घर से बाहर प्रचार की अनिमति नही है।
  • डेनमार्क - यहाँ का राष्‍ट्रीय चर्च लूथेरियन चर्च है। इसी चर्च को राज करने का अधिकार है और चर्च की सभी गति‍विधियों के लिये धन सरकार द्वारा दिया जाता है। 
  • नार्वे - राजा सदै लूथेरियन चर्च का अनुयायी होगा, आधे से अधिक मन्‍त्रियों का चयन चर्च करेगा। सभी विद्यालयो मे ईसाई मत की शिक्षा अनिवार्य है।
  • स्‍वीडन - ईसाईयों के अतिरिक्त अन्‍य मत के व्‍यक्तियों को अने बच्‍चों की शिक्षा के लिये विद्यालय चलाने पर प्रतिबन्‍ध है।
  • अमेरिका - वहाँ के न्‍यायालयों ने अमेरिका को ईसाई देश माना है। "अमेरिका के बहुसंख्‍यक लोगा ईसाई होने के कारण हमारे कानून और संस्‍थाएँ ईसा के उपदेशों से अनुप्राणित होनी चाहिए!" हमारी नीतियों का प्रारम्‍भ ईसाई मत द्वारा हुआ है। हमारी न्‍याय व्‍यवस्‍था की मूल चेतना वही है। सरकारी प्रशासन के पार्वभूमि में ईसाई मत है। कुल मिला कर ईसाई मत देश के कानून का हिस्‍सा है। - अमेरिकन चर्च लॉ0
 एक प्रश्‍न
आखिर क्‍यों जब भारत मे हिन्‍दू विधि विधान से नैतिक शिक्षा, योग शिक्षा, दीप प्रज्ज्‍वल, सरसवती वंदना अथवा वंदेमातरम् आदि से सेकुलर छवि कैसे भ्रष्‍ट हो जाती है?


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भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (Mobile Number Portability) सुविधा



भारत मे मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) सुविधा को 20 जनवरी 2011 से लागू किया गया। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) सुविधा उपयोगकर्ताओं को एक ही लाइसेंस सेवा क्षेत्र में अपने मौजूदा मोबाइल नंबर के साथ किसी नए मोबाइल सेवा प्रदाता का उपयोग करने की अनुमति प्रदान करती है। नई मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी एक नया सिम कार्ड प्रदान करेगी।
भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (Mobile Number Portability) सुविधा
 
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की सुविधा ग्राहक एक अरसे से प्रतीक्षा कर रहे थे क्‍योकि वह अपनी मौ‍जूदा कम्‍पनी की सेवा से संतुष्‍ट न होकर भी वर्तमान नम्‍बर को बंद करके ही नई कम्‍पनी मे जा सकते थे किन्‍तु मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के कारण अब उपभोक्‍ताओ को नई कम्‍पनी मे जाने के लिये वर्तमान नम्‍बर को बदलने की जरूरत नही होगी और वर्तमान नम्‍बर को जारी रखते हुये नई नये सेवा प्रदाताओ की सेवा का उपयोग कर सकते है। पोर्टेबिलिटी संबंधी कार्य सात कार्य दिवसों के अंदर पूरा हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर पूर्व सेवा क्षेत्रों में इस काम के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है।
 
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी को लेकर आम जन मे कुछ धारणाऍं है जिसे निम्‍न प्रश्‍नो के अंतर्गत दूर किया जा सकता है।
 
एमएनपी सुविधा का लाभ कौन ले सकता है?
कोई भी मोबाइल फोन उपयोगकर्ता, जो प्री-पेड या पोस्ट-पेड (जीएसम/सीडीएमए) सेवा का उपयोग कर रहा है, किसी अन्य सेवा प्रदाता कंपनी का उपयोग कर सकता है।
  • पोर्टिंग के लिए आवेदन करने की तिथि से पहले किसी भी मामले में सामान्य बिलिंग चक्र के अनुसार उपयोगकर्ता का कोई भी बकाया बिल या बकाया राशि शेष नहीं रहनी चाहिए।
  • किसी भी पोर्टिंग के लिए अनुरोध एक नए कनेक्शन की सक्रियता की तारीख या अंतिम पोर्टिंग की समाप्ति के 90 दिनों के भीतर प्रभावी होगा।
  • मोबाइल नंबर के स्वामित्व में परिवर्तन के लिए कोई भी अनुरोध प्रक्रिया में नहीं होना चाहिए।
  • उपयोगकर्ता ने लाइसेंस सेवा क्षेत्र के भीतर पोर्टिंग के लिए आवेदन किया हो।
  • संबंधित मोबाइल नंबर के पोर्टिंग को न्यायालय के किसी भी कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं किया गया हो।
  • पोर्टिंग अनुरोध में वर्णित अद्वितीय पोर्टिंग कोड मोबाइल की मांग की संख्या के लिए दाता संचालक द्वारा आवंटित अद्वितीय पोर्टिंग कोड से मिलना चाहिए।
  • उपयोगकर्ता ने वर्तमान कनेक्शन से बाहर निकलने के लिए दिए गए नियमों का पालन किया है।

मैं कैसे एक नए मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी के लिए पोर्ट कर सकता हूं?
प्रक्रिया के मुख्य चरण निम्न प्रकार हैं:-
  • उपयोगकर्ता को अपने मोबाइल नंबर की पोर्टिंग के लिए नएमोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी के सेवा केन्द्र या अधिकृत विक्रेता के पास जाना होगा। इसके पश्चात एक सेवा पंजीकरण फार्म भरें एवं प्रक्रिया के लिए पोर्टिंग शुल्क का भुगतान करें।
  • उपयोगकर्ता को अपने यूपीसी (अद्वितीय पोर्टिंग कोड) को प्राप्त करने के लिए अपने मोबाइल नंबर से, जिसे वह पोर्ट करवाना चाहता है, दाता संचालक को 1900 पर एक संदेश भेजना होगा।
  • एमएनपी सुविधा का लाभ लेने के लिए उपयोगकगर्ता को पोर्ट लिखकर संदेश अपने दस अंकों के मोबाइल नंबर के साथ 1900 पर भेजना होगा और इसके पश्चात उपयोगकर्ता संदेश के माध्यम से ही अपना यूपीसी पोर्टिंग कोड प्राप्त करेगा। (उदाहरण के लिए PORT 9999999999 लिखें और फिर इसे 1900 पर भेज दें)
  • संदेश प्राप्त होने पर दाता संचालक एक स्वचालित प्रणाली के माध्यम से उपयोगकर्ता का अद्वितीय पोर्टिंग कोड तुरंत संदेश के द्वारा उसे भेजेगा। उपयोगकर्ता को यह अद्वितीय पोर्टिंग कोड पोर्टिंग के लिए आवेदन करने समय आवेदन पत्र में भरना होगा।
  • किसी मामले में अगर उपभोक्ता का कॉलर लाइन पहचान (सीएलआई) दस अंकों के मोबाइल नंबर के साथ मेल नहीं खाता है, तो उसे अद्वितीय पोर्टिंग कोड आवंटित नहीं किया जा सकता लेकिन एक संदेश के माध्यम से उपयोगकर्ता को यह सूचित किया जाता है कि उसका कॉलर लाइन पहचान (सीएलआई) दस अंकों के मोबाइल नंबर के साथ मेल नहीं हो रहा है।
  • अद्वितीय पोर्टिंग कोड जो कि उपयोगकर्ता को आवंटित किया जाता है आवेदन की तिथि से पंद्रह दिनों तक या कई बार नंबर जो पोर्ट हो चुका है, जो भी पहले हो, तक मान्य होता है।
  • जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर पूर्व के सेवा क्षेत्रों में अद्वितीय पोर्टिंग कोड की वैद्यता आवेदन की तिथि से तीस दिनों तक या कई बार नंबर जो पोर्ट हो चुका हो, जो भी पहले हो, तक होगी, चाहे अनुरोधों की संख्या उपयोगकर्ता के द्वारा बनाई गई हो।
  • नई सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा उपयोगकर्ता को एक नया सिम कार्ड जारी किया जायेगा।
  • पोर्टिंग अनुरोध के अनुमोदन के पश्चात नएमोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी को सूचित किया जाएगा।
 
पोर्टिंग शुल्क
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के अनुसार एक नए नेटवर्क पर पलायन की लागत 19 रुपए है। बहरहाल, नए ऑपरेटरों के पास उपयोगकर्ताओं को फीस माफ करने या छूट देने का विकल्प मौजूद होगा। भारत संचार निगम लिमिटेड व एयरसेल ने संभावित ग्राहकों के लिए शुल्क माफ किया है।
 
नए मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी को पोर्ट करने में कितना समय लगता है?
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के अनुसार, किन्ही भी 7 कार्यदिवस के अंदर पोर्टिंग का कार्य पूरा हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर पूर्व सेवा क्षेत्रों में 15 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है।
 
बाधित सेवा अवधि क्या है?
यह 2 घंटे की वह अवधि है जब आपकी मोबाइल सेवाओं को बाधित किया जायेगा। वास्तविक समय आपको हमारे द्वारा संदेश के माध्यम से बताया जायेगा।
 
क्या मैं पोर्टिंग के लिए आवेदन करने के पश्चात अपने अनुरोध को रद्द कर सकता हूं? क्या मुझे भुगतान की गई राशि वापस मिलेगी?
हां, आप पोर्ट के लिए आवेदन करने के 24 घंटों के भीतर अपने नएमोबाइल सेवा प्रदाता के साथ अपना अनुरोध रद्द कर सकते हैं।
 
क्या मुझे नए मोबाइल सेवा प्रदाता के पास पोर्ट करने से पहले अपनी मौजूदा सेवाओं को बंद कराने की आवश्यकता है?
नहीं, आपको अपनी मौजूदा सेवाओं को रद्द करने की कोई आवश्यकता नहीं है। अगर आप एक बार सफलता से नएमोबाइल सेवा प्रदाता के पास पोर्ट कर लेते हैं तो आपकी अपने मौजूदा मोबाइल सेवा प्रदाता की सेवाएं स्वत: ही समाप्त हो जाएंगी।
 
पोर्टिंग प्रक्रिया के दौरान क्या मैं वर्तमान सेवाओं का उपयोग कर सकता हूं?
हां, आप इस प्रक्रिया के दौरान आप अपनी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं, सिर्फ अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा को छोड़कर, जो आपके पोर्टिंग अनुरोध के पश्चात आपके वर्तमान मोबाइल सेवा प्रदाता के द्वारा निलंबित कर दी जाती है।
 
मैं एमएनपी के लिए कहां आवेदन कर सकता हूं?
इसके लिए आपको मोबाइल सेवा प्रदाता के सेवा केंद्र अथवा प्राधिकृत डीलर के पास जाकर पोर्टिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए सेवा पंजीकरण फॉर्म भरकर आगे की प्रक्रिया के लिए पोर्टिंग शुल्क का भुगतान करें।
 
एमएनपी के लिए मुझे कितना भुगतान करने की आवश्यकता होगी?
एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क पर अपना नंबर स्थानांतरित करने की लागत 19 रुपए है। हालांकि, नए ऑपरेटर के पास शुल्क माफ करने अथवा अन्य छूट देने का विकल्प होगा। भारतीय संचार निगम लिमिटेड ने अपने संभावित ग्राहकों के लिए यह शुल्क माफ किया है।
 
समय पर सेवा ना मिलने पर अपनी शिकायत कहां कर सकते हैं?
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
 
क्या मैं अपने नंबर को एक से अधिक बार पोर्ट कर सकता हूं?
आप एक से अधिक मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों को एक ही समय में पोर्टिंग का अनुरोध नहीं कर सकते। इसके अलावा आपको वर्तमान मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी की 90 दिनों की सदस्यता के साथ पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करना चाहिए।


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कांग्रेस नीत सरकार के हाथो मे आतंकी तो सुरक्षित है किन्‍तु भारतीय नही



देश को आतंक के ऐसे खौफ़ नाक चेहरे से हमेशा रूबरू होना पड़ रहा है। हम मूक दर्शक होकर अपनो को मरने दे रहे है, इससे बड़ा राष्‍ट्रीय शर्म और क्‍या हो सकता है। अभी दिल्‍ली धमाको के सदमे से ऊबरी भी नही थी कि मीडिया हाऊसो को भेजे ईमेल के द्वारा भारत सरकार फिर से आंतकी हमलो की खुली चुनौ‍ती दी गई किन्‍तु अभी भी हम विचार मंथन से अतिरि‍क्त कुछ भी कदम उठा पाने के असक्षम है।
हम ऐसे आतंकियो को रोक पाने मे क्‍यो असक्षम है जबकि अमेरिका और इग्‍लैंड जैसे राष्‍ट्र 2001 और 2005 के प्रथम आतंकी हमलो के बाद कोई बड़ा हमला नही देखा किन्‍तु हमने संसद पर हमले के बाद 50 से अधिक आतंकी हमले झेले है और आज भी झेल रहे है। इसका क्‍या कारण है कि अमेरिका और इंग्‍लैण्‍ड ने फिर ऐसे दर्द नाक मंजर नही क्‍यो नही देखा क्‍योकि उनके देश मे आंतकियो को धर्म नही देखा जाता, आतंकियो को आन द स्‍पॉट उसके अंजाम पर पर पहुँचा दिया जाता है। परन्‍तु भारत की स्थिति भिन्‍न है भारत को सेक्‍युलर देश दिखाने के लिये आंतकियो को धर्म के नाम पर संगरक्षण दिया जाता है यही कारण है कि संसद पर हमले का मुख्‍य आरोपी अफ़जल गुरू और मुम्‍बई हमलो का एक मात्र जिन्‍दा अभियुक्त को कोर्ट से सजा-ए-मौत हो जाने के बाद भी हमारी सरकार ऐसे खतरनाक आतंकी को सिर्फ इसलिये संरक्षण दे रही है क्‍योकि वह मुस्लिम है और सरकार खुलकर हिन्‍दूवादी संगठनो को आंतकी घोषित करने पर तुली है। आतंकी का कोई धर्म नही होता है किन्‍तु इसे भी इग्‍नोर नही किया जा सकता है कि जितने भी आतंकी भारत तथा विश्‍व के अन्‍य देशो पर हमले किये है उनमे मुस्लिम ही निकलते है और तो और जहाँ भी मुस्लिम बहुल्य इलाके है वहाँ आंतकी गतिविधिया होती रहती है इससे चीन भी अछूता नही है।
कांग्रेस नीत सरकार के हाथो मे आतंकी तो सुरक्षित है किन्‍तु भारतीय नही
आजादी के वक़्त और फिर उसके बाद आज तक कांग्रेस की 'मुसलमानों के प्रति तुष्‍टीकरण नीति' ने इस देश की खूब दुर्दशा कराई है... उपर से सच्‍चर जैसी कमेटी और सपोलो को दुग्‍धपान करने की नीति को पोषण देने की है। जिन लोको को हम आरक्षण के देकर तकनीकि शिक्षा दे रहे है वही तो ऐसी शिक्षा का उपयोग आतंकी गतिविधियो मे कर रहे है। आज भारत के समक्ष जितनी भी आतंकी गतिविधिया होती है हम चाह कर के भी उन पर लगाम इसलिये नही लगा पा रहे है क्‍योकि हमारी सरकार की सोच ही विभेद पूर्ण है वह आतंक को नही देखती वह आतंकी का धर्म देखती है। इन सब का श्रेय सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की 'मुस्लिम तुष्‍टीकरण' की राजनीति को जाता है... कांग्रेस की सत्‍ता लोलुप्‍ता नीति का ही परिणाम है कि हम आंतकी की खूनी चेहरा दशकों से देख रहे हैं और न जाने अभी और कब तक भोगते रहेंगे।
दिल्‍ली हाईकोर्ट मे बम विस्‍फोट मे सिर्फ 12 वकील और नागरिक मारे गये दिल्‍ली सरकार ने मौत की कीमत 4 लाख रूपये घोषित कर दी है यदि कल की तरीख़ मे ऐसा कोई हमला एक मात्र प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी अथवा राहुल गांधी पर हुआ होता तो भारत के लिये आज का दिन सामान्‍य न होता, इन किसी की मौत पर आज भारत मे आपातकाल जैसी स्थिति देखने को मिल सकती थी। क्‍योकि इनकी जान की कीमत है और जनता तो कीड़े माकौड़े की तरह सिर्फ वोट देने के लिये बनी हुई है। राहुल गांधी को अस्‍पाताल मे राजनीति खेलते हुये शर्म नही आई कि जो परिवार मौत के सदमे मे थे वहाँ राहुल गांधी वोट बटोरने गये थे। गांधी परिवार की निजता निजता है और हम जनता को राहुल कभी भी किसी भी हालत मे देखने जा सकते है चाहे मरीज नग्‍न अवस्था मे ही क्‍यो न हो और देश की सुपर पीएम को क्‍या रोग है यह जानने का अधिकार जनता को नही है।
ढाका से आये हमारे प्रधानमंत्री का यह बयान कि हम आतंकियो से नही हारेगे जैसे आतंकियो और सरकार के बीच शतरंज का खेल हो रहा हो और जनता प्‍यादो की भाति पिटने के लिये है। अब समय है कि हम शासन को अपने हाथ मे ले क्‍योकि यह सरकार कही से भी किसी भी स्‍तर पर जन भावना के लिये काम करने के लिये विफल रही है। हमें सच स्‍वीकार करना होगा कि कांग्रेस नीत सरकार के हाथो मे आतंकी तो सुरक्षित है किन्‍तु भारतीय नही।


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क्या आप कटती हुई गायों को बचाना चाहते है ?



प्रिय भारतवासियों,
उत्तर प्रदेश के बिजनेसमेन (व्यापारीगण) अब स्वचालित आधुनिक मशीन से युक्त कत्लखाने गायों को काटने के लिए बहुत जल्द बनाने जा रहे है ताकि गायों को तीव्र गति से काटा जा सके, उनके मांस को विदेशों में भेजा जा सके और उन्हें बहुत बड़ा लाभ प्राप्त हो सके | अगर ये लोग इसमें कामयाब हो जाते है तो फिर इन कत्लखानो की संख्या पूरे भारत में बहुत तेजी से बढ़ेगी | पूरे देश के लोग इन कत्लखानो को खोलने का पुरजोर विरोध कर रहे है और उत्तर प्रदेश की सरकार ने कहा है कि अगर एक करोड़ लोग भी कत्लखाने खोलने का विरोध करें और इस आन्दोलन की हिमायत करें तो स्वचालित आधुनिक मशीन से युक्त कत्लखाने खोलने की इजाजत व्यापारियों को नहीं दी जाएगी|
हम गायों की पूजा करते है | भारतीय होने के नाते और मानवता के नाते हम ऐसा होते हुवे हरगिज नहीं देख सकते ................ कृपया आप अपना समर्थन अवश्य दें |
अगर आपको लगता है कि इस तरह के कत्लखाने नहीं खुलने चाहिए तो आप कृपा करके 0522-3095743 पर एक मिस कोल जरूर करे| एक घंटी बजने के बाद कोल अपने आप डिस-कनेक्ट हो जाएगी |
जिस तरह से आपने अन्ना हजारे के जन लोकपाल बिल के आन्दोलन को सफल बनाया उसी तरह से आप अपना समर्थन दें | इसमें आपका कोई खर्चा नहीं है, बल्कि आपके इस एक मिस कोल से प्रतिदिन कटने वाली हजारों लाखों गायें बच जाएगी |कृपया आप अपने मोबाइल से मिस्कोल जरूर करें और इसे जितने लोगों तक पंहुचा सके पहुचाये |
मैने मिस कोल कर दिया है ........ अब आपकी बारी है क्‍योकि क्‍या आप अपनी माँओ को कटते देख सकते है ? अभी मिस कोल करे - नंबर है - 05223095743



तो वह कौन से गुण हैं जो देसी गाय को पावन बनाते हैं जबकि वो विदेशी नस्लों की गायों के मुकाबले कम दूध देती है?
विश्व हिन्दू परिषद की गोरक्षा समिति के हुकुमचंद कहते हैं, "हमारी देसी गाय जब बछड़े को जन्म देती है तब वो दूध देती है. विदेशी नस्ल की गाय के दूध देने के लिए बछड़ा होना ज़रूरी नहीं है. देसी गाय का दूध जल्दी पच जाता है जबकि भैंस और विदेशी नस्ल की गाय के दूध को पचने में ज़्यादा वक़्त लगता है."
देशी भारतीय गाय का घी के फायदे

देशी भारतीय गाय का घी के फायदे

गोरक्षा समिति के अनुसार देसी गाय का सिर्फ़ दूध ही नहीं, उसका गोबर भी गुणकारी होता है जिससे बीमारियां दूर होती हैं. वहीं विदेशी नस्ल की गायों के गोबर से बीमारियां पैदा होती हैं. करनाल स्थित राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो के एक शोध में देसी गाय के दूध की गुणवत्ता को भी विदेशी नस्ल की गायों से बेहतर बताया गया है. मगर भारत में अब देसी गायों के मुकाबले विदेशी नस्ल की गाय ज़्यादा लाभकारी साबित हो रही है क्योंकि वो ज़्यादा दूध देती है. इसी वजह से इन्हें पालने का चलन बढ़ रहा है.
 
देशी भारतीय गाय का घी के फायदे
देशी भारतीय गाय का घी के फायदे
  • गाय के घी को अमृत कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। काली गाय का घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है। गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है।
  • दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ढीक होता है।
  • सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, सर दर्द ठीक हो जायेगा।
  • नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तारो ताजा हो जाता है।
  • गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।
  • हाथ पाव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ढीक होता है।
  • 20-25 ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है।
  • फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है।
  • गाय के घी की झाती पर मालिश करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है।
  • सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।
  • अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें।
  • गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है।
  • जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाइ खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, हर्दय मज़बूत होता है।
  • यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन संतुलित होता है यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
  • गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है।
  • देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।
  • गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।
  • गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है।
  • गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बहार निकल कर चेतना वापस लोट आती है।
  • गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है।
  • गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है।
  • गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ठीक हो जाता है।
  • गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।
  • स्वस्थ व्यक्ति भी हर रोज नियमित रूप से सोने से पहले दोनों नशिकाओं में हल्का गर्म (गुनगुना ) देसी गाय का घी डालिए ,गहरी नींद आएगी, खराटे बंद होंगे और अनेको अनेक बीमारियों से छुटकारा भी मिलेगा।


अच्छा लगा हो तो आगे प्रसार दीजिए, फॉरवर्ड कीजिये, और भारतीय भाषाओं में अनुवादित कीजिये, अपने ब्लॉग पर डालिए, मेरा नाम हटाइए, अपना नाम /मोबाईल नंबर डालिए| मुझे कोई आपत्ति नहीं है| मतलब बस इतना है कि ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये|


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मैथली जी आप बधाई के पात्र है



ब्‍लागवाणी आज जनवाणी बन कर उभरा है, यही कारण है कि आज ब्‍लागवाणी के आगे अन्‍य एग्रीगेटरों 20 साबित हो रहा है। यही कारण है ब्‍लागवाणी कुछ लोगों की ऑंख की किरकिरी बना रहता है। अरूण जी का पिछला लेख पढ़ा अच्‍छा लगा और लेख से अच्‍छा एक बात और लगी श्री मैथली जी की टिप्‍पणी 
maithily said...
मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आप ब्लागवाणी को परिवार के साथ देख पांयेगे. जो आप नहीं देखना चाहते उसे आपको जबर्दस्ती नहीं दिखाया जायेगा।

मैथली जी की उपरोक्‍त बात से स्‍पष्‍ट है कि पर्दे की आड़ में ब्‍लागवाणी एक पारिवारिक पार्क बना रहेगा, साथ ही साथ पर्दा हटने पर सब कुछ खुला मिलेगा। यह जरूरी भी है जो कुछ भी बातें आज ब्‍लागजगत में आ रही है हम इसे मन की भड़ास कह सकते है किन्‍तु किसी के मन की भड़ास हर किसी को अच्छी नही लगती है, और जब भड़ास निकलती है तो वह लिहाज भूल जाती है, जैसे कि मोहल्‍ले के चौराहे पर चोखेरबालियों को देखकर आवारें सीटीयॉं मारते है। इन मोहल्‍ले के आवारों की सीटियों पर भी हस्तक्षेप करना होगा। क्‍योकि दिल के दौरे की तरह समय समय पर इन्‍हे अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के दौरे पड़ते रहते है। मनचाही अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता बिल्कुल वैसी ही होनी चाहिऐ जैसी की अरूण जी ने अपने पोस्‍ट पर की थी।

मैने जानना चाहा कि अ‍ाखिर क्‍या बात है कि विवादों में ब्‍लागवाणी को घसीटे जाने का कारण क्‍या है मैने किसी और के ब्‍लाग का परिक्षण करने के अपेक्षा अपने ब्‍लाग को ही टटोलने की कोशिश कि तो निम्‍न नजीते पर पहुँचा, कि ब्‍लावाणी के मायने क्‍या है? और क्‍यो ब्‍लागवाणी को कटघरे में खड़ा किया जाता है। यह नतीजे आपके सामने है।


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प्रेरक प्रसंग - सब समान हैं



काला पानी जाने वाले जहाज पर डकैत और खूनी लोगो के साथ सावरकर जी को क अँधेरे कमरे में रखा गया। सौ से अधिक लोग वही एक कमरें मे कैद थे। सभी के स्‍वच्‍छतागृह की व्‍यवस्‍था नही थी। जिस कोने मे मल का ड्रम भरा था उसी के पास सावरकर जी को बिस्‍तर डालना पड़ा। दुर्गन्‍ध के कारण उनकी नींद हराम हो गई। उनकी बेचैनी देखकर एक घुटा हुआ कैदी उनसे बोला.. बड़े भैया हम लोगों को इसकी आदत सी पड़ गई है। आप उस कोने मे सोइये.. वहाँ भीड़ जरूर है पर गन्‍दगी नही है... यह मै सो जाता हूँ.. आप मेरी जगह जाइये।
 
उसकी इस बात को सुनकर सावरकर जी बड़े प्रभावित हुए और बोल उठे... धन्‍यवाद ! सभी को नाक है और नाक है तो बदबू तो आयेगी ही। आपको भी परेशानी होगी। अब तो मुझे भी काले पानी की सजा भुगतनी है तो मुझे भी ऐसी बातों की आदत करनी ही पड़ेगी.. और यह कह कर यात्रा के अंत तक सावरकर जी वही रहे।
 
इस प्रेरक प्रसंग से हमे यह शिक्षा मिलती है कि कोई कैसा भी हो.. उच्‍च वर्गीय य मध्‍यमवर्गीय सभी को एक समान समझना चाहिये... परिस्थितियाँ कैसी भी हो हमे परिस्थिति के अनुसार ही आपने को ढालना चाहिये।


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एग्रीगेटर बिन चिट्ठाकारी..



हिन्‍दी चिट्ठाकारी आज अपने परिपक्व रूप मे है। मुझे नही पता कि कि आज के समय मे चिट्ठाकारो के लिये एग्रीगेटर कितना उपयोगी है कि नही क्‍योकि मुझे यह भी जानकारी नही है कि कौन कौन से एग्रीगेटर वर्तमान समय है और उनकी स्थिति क्‍या है ?
नारद युग की बादशाहत को जिस प्रकार ब्‍लागवाणी ने तोड़ा और चिट्ठाजगत की चुनौतियो को स्‍वीकार करते हुये अपना वर्चस्‍व कायम रखा वकाई यह तारीफ कबिल था। ब्‍लागवाणी के जाने के क्‍या कारण थे यह आज तक जग-जहिर न हो सके..और ब्लागवाणी की वापसी के सारे प्रयास व्‍यर्थ होने के साथ ब्‍लागवाणी युग का अवसान हो गया। ब्‍लागवाणी अवसान के बाद निश्‍चित रूप से चिट्ठाजगत के पास हिन्‍दी चिट्ठाकारी प्रसारकर्ता के रूप मे आधिपत्‍य धारण करने का अवसर था किन्‍तु ब्‍लागवाणी के जाने के बाद चिट्ठाजगत का मौन पतन नव ब्लागरो के लिये दु:खद रहा।
ब्‍लागवाणी और चिट्ठाजगत के जाने के बाद एग्री‍गेटरो की स्थिति मेरे संज्ञान मे नही है.... वर्तमान मे कौन-कौन से हिन्‍दी एग्रीगेटर काम कर रहे है। क्‍योकि ब्‍लागवाणी और चिट्ठाजगत का अंत हुये एक साल हो रहे है इस एक साल मे मेरे ब्‍लाग पर किसी भी एग्रीगेटर से कोई पाठक नही आये..... यह भी यक्ष प्रश्‍न है कि कि कोई एग्रीगेटर है भी अथवा नही ? अगर है तो उन एग्रीगेटरो मे शामिल होने की प्रक्रिया क्‍या है ?
इतने दिनो बाद एग्रीगेटर की बात क्‍यो छेड़ी गई यह वकाई सोचनीय प्रश्‍न है। इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि एग्रीगेटर से हटने के कारण नये ब्‍लागो और ब्‍लागरो से सम्‍पर्क स्‍थापित न हो पाना, ब्‍लाग जगत की नवीन हलचलो से अनिभिज्ञ्यता प्रमुख है।
किसी को वर्तमान समय मे सक्रिय एग्रीगेटर के बारे मे जानकारी हो तो देने का कष्‍ट करे।


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जहाँ चाह वहाँ राह



यह प्रयाग स्‍टेशन पर खड़ी सारनाथ एक्‍सप्रेस है...जिसका प्रयाग स्‍टेशन पर कोई स्‍टॉपेज नही है पर जब यह रूकती है तो करीब 3-4 सौ यात्री रोजना चढ़ते और उतरते है...बिना स्‍टापेज के यह ट्रेन इस स्‍टेशन पर रूकती कैसे है..इससे तो यही पता चलता है कि जहाँ चाह वहाँ राह... 300-400 यात्री कम नही होते है... :)

28 PLP PHULPUR
13:36 13:37

2
29 JNH JANGHAI JN
14:18 14:19

2
30 BOY BHADOHI
15:03 15:04

2
31 BSB VARANASI JN
16:10 16:30

2


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श्री पद्मनाभस्वामी मंदिरः न बने सरकारी गुलाम



आखिर क्‍यो हिन्‍दु धर्मिक स्‍थलो से प्राप्‍त सम्‍पदा को ही सरकारी नियत्रण मे लेने का प्रयास किया जाता है ? हाल मे ही दक्षिण के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के विष्‍णु मे लाखो करोड़ की सम्‍पत्ति प्राप्‍त हो रही है। क्‍या भारतीय इतिहास मे कभी जामा मस्जिद या किसी चर्च से प्राप्‍त सम्‍पति को सरकारी सम्‍पत्ति धोषित किया गया ? यदि नही तो हिन्‍दुओ के साथ ही ऐसा क्‍यो ?
माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश पर पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहखाने में बंद वस्तुओं की सूची बनाने के दौरान बेशकीमती खजाने का पता चला, इसमें सोने की वस्तुएं, जूलरी, बर्तन और करोड़ों रुपये कीमत के बहुमूल्य पत्थर शामिल हैं। इस मंदिर का देख भाल त्रावणकोर राज परिवार की ओर से नियुक्त एक ट्रस्‍ट करता रहा है। यह सम्‍पदा इतने सालो से सुरक्षित है इसका मललब यही निकाला जाना चाहिये कि राज परिवार ने इस धन का कभी गलत इस्‍तेमाल नही किया। यदि सरकार के हाथ मे यह सम्‍पदा होती तो 1 रूपये मे 5 पैसे ही जनता तक पहुँचे वाली कहावत ही चरित्रार्थ होती और पूरा पैसा स्‍विस बैक के नेताओ की एकाउन्‍ट मे चला गया होता है।
इस मंदिर के सरकारी नियंत्रण का पूर्ण विरोध होना चाहिये..यह हिन्‍दू समाज का मंदिर है और यह पैसा हिन्‍दू समान के लिये ही खर्च होना चाहिये। जाँच के दौरान उन हिन्‍दु रीति रिवाजो और मान्‍यताओ का भी पूर्ण पालन करना चाहिये जो कि सदियो से चली आ रही है।


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चिट्ठाकारी के पाँच साल... छठे साल मे कदम



आज 30 जून है मेरी चिट्ठाकारी के 5 साल पूरे हो रहे है.. और 6वें साल मे कदम रख रहा हूँ। 30 जून 2006 को मेरी पहली पोस्‍ट प्रकाशित हुई थी... दुर्भाग्‍यवस आज वो नही है। मेरे सर्वाधिक खुशी इस बात की भी हो रही है कि आज के दिन मै अपने 5 सालो मे सर्वाधिक व‍िजिट को मै पार कर रहा हूँ... अभी तक 658 पेज लोड हो चुके है सम्‍भवत: रात 12 बजे तक 800 पार हो जायेगी... अभी तक कल के पेज लोड़ 680 था...
434 प्रविष्ठियां और 3238 टिप्पणियां यह बताती है कि लगातार आपका सहयोग व मार्गदर्शन मिला इसके लिये अभार,
आपका अपना महाशक्ति


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देश में हो रहे पांच प्रकार की लूट का समाधान – भारत स्वाभिमान – स्वामी रामदेव



लूट:
(1) इलाज के नाम पर पूरे देश में प्रति वर्ष लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की लूट हो रही है। अनावश्यक दत्ता, अनावश्यक परीक्षण पर गैर जरुरी आँपरेशन का रोज खतरनाक खेल, ho रहा है।
(2) शराब, तम्बाकू, गुटखा, अफीम व चर्स आदि नशीले सेवन से देश के प्रति वर्ष लगभग 10 लाख करोड़ रुपया बर्बाद हो रहे है।
(3) विदेशी कम्पनियों द्वारा साबुन, शैम्पू, टूथपैस्ट, क्रीम, पाउडर, आचार, चटनी, चिप्स, कोकाकोला व पेप्सी आदि शून्य तकनीकी से बनी बहुत ही गैरजरुरी अनुपयोगी व स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुएं बैचकर भारत से प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख करोड़ रुपये की लूट हो रही है। तथा देश का धन विदेशी लोगों के हाथों में जाने से देश आर्थिक दृष्टि से कमजोर हो रहा है।
(4) यूरिया, डी,ए,पी व अन्य हानिकारक खाद व जहरीले कीटनाशकों से एक ओर जहाँ धरती माता की कोख (खेत) व इंसान का पेट विषैला हो रहा है वहीं गो व पशुधन आधारित कृषि व्यवस्था न होने से प्रतिवर्ष लाखों गायों व अन्य पशुधन का बर्बरता के साथ कत्लखानों में वध हो रहा है। प्रतिवर्ष इन जहरीली खाद व कीटनाशकों से देश के लगभग 5 लाख करोड़ रुपये नष्ट हो रहा है।
(5) टैक्स जस्टिस नेटवर्क, ट्रांसपेरेंसी इन्टरनेशनल, प्रवर्तन निदेशालय, केन्द्रीय सतर्कता आयोग अन्य राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के अनुसार पूरी दुनिया में अब तक 11.5 ट्रिलियन डालर क्रास बार्डर ब्लैकमनी जमा है। भारतीय मुद्रा के अनुसार उसकी कीमत 518 लाख करोड रुपये है तथा इसमें से आधा 258 लाख करोड भारत के बेईमान लोगों का है। अभी भी यह लूट का सिलसिला रुका नहीं है। प्रतिवर्ष 1.6 ट्रिलियन डाँलर अभी भी देश की सीमाओं से बाहर काला धन जमा होता है। अर्थात प्रतिवर्ष अभी भी लगभग 72 लाख करोड रुपये दुनिया के बेईमान लोग अपने-अपने देशों से लूटकर दूसरे देशों में जमा करते है। अत: ये भ्रष्टाचार व काला धन मात्र राष्ट्रीय ही नही एक अन्तराष्ट्रीय समस्या है। इस 72 लाख करोड रुपये में आधा रुपये एशियन देशों का है और इसमें भी आधा अर्थात 18 लाख करोड रुपये भारत का प्रति वर्ष विदेशी बैंकों में जमा हो रहा है। इस धनराशि को यदि महीने व दिनों में विभाजित करें तो प्रतिमाह 1 लाख 50 हजार करोड, प्रतिदिन 4931.5 करोड, प्रतिघंटा 206 करोड एवं प्रति मिनट 3 करोड 42 लाख रुपये की लूट हो रही है। नक्सलवाद, माओवाद, आंतकवाद, गरीबी व बेरोजगारी आदि समस्त ज्वलंत सम्स्याओं व चुनौतियों का मूल कारण भ्रष्टाचार, काला धन एवं पक्षपात की गलत नीतियाँ एवं व्यवस्थाएं भी है व बेरोजगारी आदि समस्त ज्वलंत समस्याओं व चुनौतियों का मूल कारण भ्रष्टाचार, काला धन एवं पक्षपात की गलत नीतियाँ एवं व्यवस्थाएं भी है। जहाँ एक ओर देश के लोग ईमानदारी से मेहनत करके देश के विकास में लगे है और प्रति वर्ष 50 से 60 लाख करोड की जी.डी.पी, देकर देश को ताकतवर बना रहे है वहीं दूसरी और हमारी घटिया सोच, गलत नीतियों व भ्रष्टाचार पर अंकुश न होने से देश का लगभग 50 लाख करोड रुपये प्रतिवर्ष बेरहमी व बेदर्दी से लूटा जा रहा है व देश का विनाश हो रहा है और हमारे अपने घर के 5 लाख रुपये लूटने, नष्ट या बर्बाद होने पर हमे कितता कष्ट होता है। हम 120 करोड देशभक्त, जागरुक-संवेदनशील भारतीयों के होते देश का प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख करोड रुपये लुटता रहता है और हम मौन होकर यह सब देख रहे इससे बडी शर्म, अपमान या बेबसी की बात और क्या हो सकती है? इस लूट के लिए जिम्मेदार कौन? समाज के ताकतवर बडे लोग, चाहे वह बडे डाक्टर्स, हाँस्पिटल्स हो, या फिर बडे व्यापारी, बडे अधिकारी, पर सबसे ज्यादा जिम्मेदार है बडे नेता जिनके हाथों में इस देश की सर्वोच्च सत्ता व शक्ति है। भ्रष्टाचार के लिए तो वे 100 फीसदी सीधे जिम्मेदार ही साथ ही दुसरी लूट में भी उनकी भागीदारी है। चाहे बडे हाँस्पिटल्स हो, दवा निर्माता कम्पनियाँ, हो या फिर शराब तम्बाकू या अन्य नशा बनाने वाली कम्पनियाँ हों अथवा विदेशी कम्पनियां जिनके साथ कुछ रसूखदार ताकतवर नेताओं की पार्टनरशिप होती और कई बार तो वे सीधे तौर पर खुद ही मालिक होते हैं।

लूट का समाधान !
(1) नित्य नियमानुसार योगाभ्यास करें, रोगी होने से बचें तथा रोगी योग करके निरोगी बनें। योगाभ्यास, नियमित व संयमित जीवन व आयुर्वेद की आयु व स्वास्थ्य वर्धक जडी-बूटियों का प्रयोग करें।
(2) नशामुक्त जीवन जीने का संकल्प लें। योगाभ्यास से रोग मुक्ति के साथ स्वत: नशामुक्ति भी मिलती है। नशे से तन, धन, मन, आत्मा व धर्म की हानि के बारे में खुद समझे औरों को समझाएं।
(3) 100 प्रतिशत स्वदेशी को अपनाने का व्रत या संकल्प लें। शून्य तकनीकों से बनी विदेशी वस्तुएं खासतौर पर साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, क्रीम, पाउडर, ब्रेड, बिस्कुट, चिप्स, कोकाकोला व पेप्सी आदि का प्रयोग कभी न करें। गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्यवर्धक सस्ते व स्वदेशी उत्पादों की उपलब्धता प्रत्येक प्रान्त व जिला स्तर पर करवाने तथा रोग, नशा व बेरोजगारी मुक्त, पूर्ण स्वस्थ, संस्कारवान व समृद्घ गांवों के निर्माण हेतु 600 जिलों में पतंजलि ग्रामोंद्योग योजना शीघ्र ही प्रारम्भ कर रहे हैं।
(4) विष मुक्त अन्न (आँर्गेनिक फूड) खाएं व गो-दूध व गोघृत आदि के सेवन को प्रोत्साहन दें। जब उपभोक्ता के रुप में हम आँर्गेनिक बाजार तैयार करेंगें तो किसान भी धीरे-धीरे विष मुक्त कृषि की नीति को अवश्य अपनायेंगें।
(5) भ्रष्टाचार का पूरी ताकत से विरोध करें। न रिश्वत लें और न दें। भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए भारत स्वाभिमान के सदस्य, कार्यकर्ता व शिक्षक बनकर भारत स्वाभिमान की नीतियों का प्रचार करें।


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स्‍पीक एशिया का झूठ पर झूठ और रही जनता को लूट



युवाओ को बरगलाने वाली स्‍पीक एशिया ऑनलाईन पर सरकारी शिकंजा कसता जा रहा है। नई खबरो के मुताबिक सिंगापुर के यूनाइटेड ओवरसीज बैंक ने स्पीक एशिया के खातों को बंद कर दिया है। जबकि स्‍पीक एशिया ग्राहको को बरगलाने मे कोई कसर नही छोड़ रही है, इस घटना क्रम के बाद स्पीक एशिया ने एक बयान में कहा, ‘सिंगापुर में हमारे खातों को फ्रीज नहीं किया गया है, बल्कि हम सिर्फ कंपनी के खातों को दूसरे बैंक में ले जा रहे हैं।' कम्‍पनी दूसरे बैंक मे खाता खोलने की बात कर रही है जबकि सिंगापुर में नया बैंक अकाउंट खोलने में छह माह से भी ज्यादा का समय लगेगा। ऐसे में किसी भी निवेशक को पैसे वापस नहीं किए जा सकते हैं।

जबकि भारत मे भी कड़ा कदम उठाते हुये रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के एजीएम आर माहेश्वरी ने साफ कर दिया है कि भारत में स्पीक एशिया को कारोबार करने या गैर बैंकिंग वित्तीय संस्था के रूप में काम करने की अनुमति नहीं दी गई है। शुक्रवार सुबह कंपनी के खाते फ्रीज किए जाने की खबर मिलते ही राजधानी के निवेशकों में खलबली मच गई।

ग्राहको को बरगलाने के मामले मे स्‍पीक एशिया जरा भी पीछे नही दिख रही है है, वह सार्वजनिक स्‍थानो पर झूठ पर झूठ बोले जा रही है।
कम्‍पनी ने कहा था कि आईसीआईसीआई, बाटा, एयरटेल, नेस्ले उसके ग्राहक, यह तथ्य झूठ पाए गए, भारत में तीन ऑफिस खुलने की बात कही जबकि अभी तक एक भी ऑफिस नहीं है। कई रिटेल कंपनियों के पार्टनर बनने की बात कही थी किन्‍तु हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। सिंगापुर में कारोबार करने की बात की थी किन्‍तु तथ्यों से मेल नहीं खाई।
स्‍पीक एशिया का भारत में करीब 19 लाख लोगों को डायरेक्ट एजेंट बना चुकी स्पीक-एशिया के खातों में 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की रकम जमा है और यह पूरा पैसा भारत से बाहर जा चुका है या जाने की प्रक्रिया में है। भारत के युवा वर्ग को इस प्रकार चालो मे फंसने से बचना चाहिये। और उद्यमिता की ओर रूख करना चाहिये।


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Speak Asia की खुल रही पोल कुछ बैंको ने किये खातों को फ्रीज



ऑनलाइन सर्वे के नाम पर लाखों लोगों से करोड़ों रुपये वसूल रही "स्पीक एशिया" पर शिकंजा कसता जा रहा है। स्‍टार न्‍यूज और फिर आज तक पर स्‍पीक एशिया से सम्‍बन्‍धित फर्जी बाड़े की खबरो से स्‍पीक एशिया के फ्रेन्‍चा‍ईजियों के खाते जिन बैंको मे है उन्‍होने प्रभावी कदम उठाना शुरू कर दिया है। देश के दो प्रमुख बैंक आईसीआईसीआई बैंक और आईएनजी वैश्य बैंक ने देश भर में स्पीक एशिया से ताल्लुक रखने वाले खातों को फ्रीज कर दिया है और बाकायदा इसकी पुष्टि कर दी है।

चूकिं भारत में स्‍पीक एशिया का कोई पंजीकृत दफ्तर न होने के कारण बैंक खातों के लिए जरूरी केवाईसी (अपने ग्राहक को जानो) मानकों को पूरा नहीं करती। इसलिए स्‍पीक एशिया(Speak Asia) नाम से कोई भी बैंक खाता नहीं है। इसी कमी को पूरा करने के लिये स्‍पीक एशिया न देश भर में तमाम फ्रेंचाइजी बना रखे हैं, ताकि वह इन फ्रेंचाइजी के जरिये अपना बैंक खाता बना सके और अपना गोरखधंधा जारी रखे। इनमें से कुछ चुनिंदा नाम हैं – ग्रो रिच एसोसिएट्स, स्पीक इंडिया ऑनलाइन, बालाजी एसोसिएट्स, ऋषिकेष इनवेस्टमेंट्स, बीटीसी वर्ल्ड, श्रीराम इनफोटेक, स्टार एंटरप्राइसेज, एबीएन रिसर्च ऑनलाइन व ब्रह्मनाथ एंटरप्राइसेज सहित पूरे देश मे इसका जाल फैला हुआ है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्‍ली व महाराष्ट्र जैसे राज्‍यो में 100 से ज्‍यादा फ्रेंचाइजी हैं। स्‍पीक एशिया अपनी वेबसाईट पर फेंचाइजी का नाम और उनके बैंकों के नाम व खाता संख्‍या की जानकारी अपनी साइट पर दी हुई है। इनके खाते आईसीआईसीआई बैंक, आईएनजी वैश्य बैंक, जम्‍मू कश्‍मीर बैक, भारतीय स्टेट बैंक व फेडरल बैंक समेत करीब दर्जन भर बैंकों में हैं। इन तमाम खातों में जमा रकम बाद इन फ्रेचाइंजियों द्वारा मुंबई के पंजीकृत एक कंपनी तुलसियाटेक के खातों में चली जाती है, जहां से इसे सिंगापुर की कंपनी हरेन वेंचर्स के खाते में सर्वे सॉफ्टेवेयर खरीदने के नाम पर डाल दिया जाता है। हरेन वेंचर्स की प्रमुख हरेन्दर कौर हैं। हरेन्दर कौर ही स्पीक एशिया की मुख्य प्रवर्तक हैं।

स्पीक एशिया जिस सिंगापुर की कंपनी है, और कहा जाता है कि इसकी मुख्‍या शाखा वर्जिन आईलैंड मे है। सिंगापुर मे भी पिरामिड मार्केटिंग स्कीमों या एमएलएम कंपनियों को गैर-कानूनी करार दिया गया है और तो और अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, जापान, मलयेशिया, नीदरलैंड व डेनमार्क जैसे देशों ने इस तरह की कंपनियों पर बैन लगा रखा है। सबसे बड़ा यक्ष प्रश्‍न आज यह है कि भारत जैसे विशाल बेरोजगारी वाले देश मे यहाँ कि सरकार इसे क्‍यो पोषण दे रही है ? क्‍या सरकार का कोई प्रभावी तंत्र इसे संचालित कर रहा है? यह एक गम्‍भीर व सोचनीय मुद्दा है। क्‍योकि भारत वह देश है जहाँ की 70 फीसदी युवा बेरोजगार है और इतनी ही अबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है। इस वर्ग से 12 हजार रूपये की बड़ी राशि चपत करना शायद किसी सरकार के लिये बड़ी बात न हो किन्‍तु यह राशि उस परिवार के लिये काफी सपने पूरे करने वाली होती है।


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सूक्ति और सद् विचार साहित्‍य से



  • देवता न बड़ा होता है, न छोटा, न शक्तिशाली होता है, न अशक्त । वह उतना ही बड़ा होता है जितना बड़ा उसे उपासक बनाना चाहता है। - हज़ारीप्रसाद द्विवेदी (पुनर्नवा, पृ. 22)
  • संसार में नाम और द्रव्य की महिमा कोई आज भी ठीक-ठीक नहीं जान पाया। -शरतचंद्र चट्टोपाध्याय (शेष परिचय,पृ.31)
  • परंपरा को स्वीकार करने का अर्थ बंधन नहीं, अनुशासन का स्वेच्छा से वरण है। -विद्यानिवास मिश्र (परंपरा बंधन नहीं, पृ.53 )
  • असाधारण प्रतिभा को चमत्कारिक वरदान की आवश्यकता नहीं होती और साधारण को अपनी त्रुटियों की इतनी पहचान नहीं होती कि वह किसी पूर्णता के वरदान के लिए साधना करे। -महादेवी वर्मा (सप्तपर्णा, पृ.49)
  • हम ऐसा मानने की ग़लती कभी न करें कि अपराध, आकार में छोटा या बड़ा होता है। -महात्मा गाँधी (बापू के आशीर्वाद, 268)
  • मनुष्य का अहंकार ऐसा है कि प्रासादों का भिखारी भी कुटी का अतिथि बनना स्वीकार नहीं करेगा। -महादेवी वर्मा (दीपशिखा, चिंतन के कुछ क्षण)
  • केवल हृदय में अनुभव करने से ही किसी चीज़ को भाषा में व्यक्त नहीं किया जा सकता । सभी चीज़ों को कुछ सीखना पड़ता है और यह सीखना सदा अपने आप नहीं होता । -शरतचन्द्र (शरत पत्रावली, पृ. 60)
  • सभी लोग हिंसा का त्याग कर दें तो फिर क्षात्रधर्म रहता ही कहाँ है ? और यदि क्षात्रधर्म नष्ट हो जाता है तो जनता का कोई त्राता नहीं रहेगा । -लोकमान्य तिलक (गीतारहस्य, पृ.32)
  • पश्चिम में आने से पहले भारत को मैं प्यार ही करता था, अब तो भारत की धूलि ही मेरे लिए पवित्र है। भारत की हवा मेरे लिए पावन है, भारत अब मेरे लिए तीर्थ है। - विवेकानन्द (विवेकानन्द साहित्य, खण्ड 5, पृष्ठ 203)
  • देश की सेवा करने में जो मिठास है, वह और किसी चीज़ में नहीं है। - सरदार पटेल (सरदार पटेल के भाषण, पृष्ठ 259)
  • अपने देश या अपने शासक के दोषों के प्रति सहानुभूति रखना या उन्हें छिपाना देशभक्ति के नाम को लजाना है, इसके विपरित देश के दोषों का विरोध करना सच्ची देशभक्ति है। - महात्मा गाँधी (सम्पूर्ण गाँधी वाङ्मय, खण्ड 41, पृष्ठ 590)
  • देश प्रेम हो और भाषा-प्रेम की चिन्ता न हो, यह असम्भव है। -महात्मा गाँधी (गांधी वाड्मय, खंड 19, पृ. 515)
  • प्रत्येक भारतवासी का यह भी कर्त्तव्य है कि वह ऐसा न समझे कि अपने और अपने परिवार के खाने-पहनने भर के लिए कमा लिया तो सब कुछ कर लिया। उसे अपने समाज के कल्याण के लिए दिल खोलकर दान देने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। - महात्मा गाँधी (इंडियन ओपिनियन, दिनांक अगस्त 1903)
  • गंगा की पवित्रता में कोई विश्वास नहीं करने जाता। गंगा के निकट पहुँच जाने पर अनायास, वह विश्वास पता नहीं कहाँ से आ जाता है। -लक्ष्मीनारायण मिश्र (गरुड़ध्वज, पृ0 79)
  • सत्य, आस्था और लगन जीवन-सिद्धि के मूल हैं। -अमृतलाल नागर (अमृत और विष, पृ0 437)
  • उदारता और स्वाधीनता मिल कर ही जीवनतत्त्व है। -अमृतलाल नागर (मानस का हंस, पृ0 367)
  • जीवन अविकल कर्म है, न बुझने वाली पिपासा है। जीवन हलचल है, परिवर्तन है; और हलचल तथा परिवर्तन में सुख और शान्ति का कोई स्थान नहीं। -भगवती चरण वर्मा (चित्रलेखा, पृ0 24) 

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अंग्रेजो के जमाने के देशभक्त अधिवक्ता






उत्तर प्रदेश मे उत्तर प्रदेश बार काउसिल उत्तर प्रदेश के प्रथम मतदाता 95 वर्ष के श्री वीरेन्‍द्र कुमार सिंह चौधरी "दद्दा" को वोट दिलवाने का सौभाग्‍य मुझे प्राप्‍त हुआ। दद्दा दादा का एक अधिवक्ता के रूप मे पंजीयन सन् 1941 का है, कुछ मेरे दोस्‍त कहते है कि ये तो अंग्रेजो के जमाने के वकील है। सच मे दद्दा को जीवन राष्‍ट्र को ही सम्‍पर्पित रहा है, हर समय उनके मन मे आज भी देश के लिये कुछ करने की ही रहती है। दद्दा ने अपने 25 मतो का पूरा उपयोग किया। दद्दा उत्तर प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता भी रहे है।

कल दद्दा को कुछ शारीरिक तकलीफ के कारण दद्दा डाक्‍टर केडी त्रिपाठी को दिखाकर गये थे आज कुछ आराम है वो पापा जी को फोन कर के कह रहे थे कि डाक्‍टर साहब से पूछ लीजिए कि आज आराम है कहे तो कल दो मुकदमे लगे है। वो भी देख लिये जाये... 95 साल की उम्र मे भी काम के प्रति‍ निष्‍ठा विरले और महान लोगो मे ही होती है। ऐसे है दद्दा जी।

मतदान करते समय फोटो खीचना, गलत था कि किन्‍तु कुछ गलतिया इतनी खूबसूरत और जरूरी होती है जिन्‍हे हम करने को मजबूर होते है।


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स्पीक एशिया: भारत से सिंगापुर तक फर्जीवाड़ा



सिंगापुर में पंजीकृत कंपनी स्पीक एशिया ऑनलाइन के बारे में वहां की सरकार का कहना है कि यह कंपनी नियमों का पालन नहीं कर रही है.

स्टार न्यूज़ की तफ्तीश में पता चला है कि यह कंपनी सिंगापुर में भी फर्जीवाड़ा कर रही है.

ग़ौरतलब है कि स्पीक एशिय़ा नामक अब तक लाखों लोगों को चुना लगाने में जुटी हुई है.

सिंगापुर सरकार के मुताबिक स्पीक एशिया ऑनलाइन ने ना तो सही समय पर अपनी कंपनी की सालाना बैठक कराई है और ना ही सही समय पर अपने अकाउंट्स ऑडिट कराए हैं.

इसी वजह से सिंगापुर सरकार ने स्पीक एशिया को नॉन-कंप्लायंस का सर्टिफिकेट दिया है यानि सिंगापुर सरकार ने आगाह कर दिया है कि निवेशक ऐसी कंपनियों से बचकर रहे जो नियमों का उल्लंघन करती हैं.

सिंगापुर के कानून के हिसाब से किसी भी पब्लिक लिमिटेड कंपनी को हर चार महीने में और प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को छह महीने में अपने अकाउंट्स का लेखा-जोखा देना पड़ता है लेकिन स्पीक एशिया ने आखिरी बार पिछले साल मई में अपने अकाउंट्स की रिपोर्ट दी थी.

स्टार न्यूज पहले ही खुलासा कर चुका है कि कैसे स्पीक एशिया देश में फर्जीवाड़ा कर रही है.

स्पीक एशिया के स्कीम के मुताबिक आप एक साल के लिए 11 हजार रूपए देकर 52 हज़ार रुपए कमाने का लालच देती है. कंपनी का ये भी दावा है कि भारती एयरटेल, नेस्ले, बाटा और आईसीआईसीआई बैंक जैसे कंपनिया उसकी क्लाइंट हैं लेकिन जब स्टार न्यूज ने पड़ताल की तो इन सभी कंपनियों ने ये साफ कर दिया कि वो स्पीक एशिया से कोई सर्वे नहीं करातीं.


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अक्षय तृतीया और कुछ अपनी बात



आज अक्षय तृतीय है, सर्व प्रथम अक्षय तृतीया पर्व की बहुत बहुत हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ। इस दिन के विषय मे कहा जाता है कि अक्षय तृतीया सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। हिन्‍दू ध‍ार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं। नवीन वस्त्र, आभूषण आदि धारण करने और नई संस्था, समाज आदि की स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। अत: इसदिन किसी न किसी महत्‍वपूर्ण कार्य की शुरूवात की जा सकती है।
 
काफी दिनो से कोई ब्‍लाग पोस्‍ट नही किया था लगा कि आज करना ठीक रहेगा। अक्टूबर 2009 से गृह निर्माण कार्य आदि की व्‍यस्‍ताओ मे कुछ समझ मे ही नही आया। अब काम सामाप्‍ति पर है फर्श और रंग-रोगन का कार्य शेष है। फर्श के लिये मार्बल की बात हुई तो स्‍थानीय मार्केट से लोगो ने लेने के बजाय कुछ जानकरो ने कहा कि 7000-8000 फीट के लिये मार्बल लेना है तो राजस्‍थान से सीधे उठवा लेना ही उचित होगा। पत्‍थर अच्‍छा का अच्‍छा और सस्‍ता भी मिल जायेगा। अब इस पर भी विचार चल रहा है। सम्‍भत: जुलाई के मध्‍य तक पूरा काम हो जायेगा। किसी को राजस्‍थान मे मॉर्बल के बारे मे जानकारी हो, जरूर बातये।

फिर जल्‍दी है ...


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तनु वेड्स मनु



एक अच्‍छी कहानी और उत्तर प्रदेश के परिवेश पर बनी फिल्‍म तनु वेड्स मनु आखिरकार आज देख ही लिया। वकाई यह फिल्‍म पता नही कितने दर्शको को बांध पायी होगी किन्‍तु मुझे बांधने मे कामयाब रही। इस फिल्‍म को मैने तब देखने का फैसला किया था जब मैने अन्तिम फिल्‍म धोबी घाट देखी थी।

मुझे फिल्‍मो पर लिखना इतना भी पंसद है किन्‍तु कभी-कभी कुछ पर लिखना पड़ ही जाता है। अन्तिम बार मैने किसी फिल्‍म नही जमी - "वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई" पर लिखा था। तनु वेड्स मनु मे माधवन ने अपनी छव‍ि के आधार पर काम किया ही साथ-साथ कंगना रनौत ने भी वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई की अपेक्षा और भी निखर कर आयी है। इस पूरी मूवी मे मैने इस बैनर को बहुत मिस किया क्‍योकि यह था ही नही। :)


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महिलाओ के प्रति हिंसा



कुछ माह पूर्व उत्तर प्रदेश की न्‍यायिक राजधानी इलाहाबाद मे मुख्‍यमंत्री मायावती का संघन दौरा होता है उसी मे एक महिला मुख्‍यमंत्री के पैरो मे गिर कर कहती है कि, हमार बलात्‍कार हुआ है और न्‍याय नाही मिला। मुख्‍यमंत्री के समक्ष यह महिला अपनी व्‍यथा बता पाने मे सफल हुई और इसका परिणाम हुआ कि डीजीपी शाम तक उक्त बलात्कार की जॉच करने स्‍वयं पहुँचे। आज महिलाओ के प्रति अपराध मे सर्वप्रथम सूची मे बलात्‍कार की घटना आती है, इस अपराधिक घटना के बाद बलात्कार पीडित महिला को न्‍याय की आस मे अपना आत्‍मसम्‍मान तक छोड़ना पड़ता है, तब पर भी वर्तमान प्रशासनिक व्‍यवस्‍था में न्‍याय की कोई गांरटी नही होती।
हाल के दिनो बलात्‍कार की घटनओ मे बेतहाशा वृद्धि हुई है।बलात्‍कार की घटनाऍं दिल्‍ली-मुम्‍बई जैसे बड़े नगरो को सीमाओ को तोड़ते हुई इलाहाबाद जैसे मझोले तथा बांदा, रायबरेली और और औरैया जैसे छोटे शहरो मे पैर पसार चुकी है। बांदा मे जिस प्रकार सत्‍ता पक्ष का विधायक बलात्कार करता है और उल्‍टे बलात्‍कार पीडिता को चोरी के फर्जी मामले मे फंसाकर जेल मे डाल दिया जाता है, उक्त घटनाऍं यह सो‍चने पर मजबूर करती है आज भी भारत की शासन व्‍यवस्‍था कानून पर नही प्रभावी तत्‍वो के प्रभाव पर चलती है। भले ही बाद मे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उक्त घटना को स्‍वसंज्ञान मे लिया और शीलू की रिहायी को आदेश देती है। शीलू जैसे हजारो मामलो मे से कुछ ही मामलो मे त्‍वरित प्रक्रिया देखने को मिलती है, जहाँ मीडिया की सक्रियता पर ही प्रशासन चेतता है।
मैने देश के विभिन्‍न शहरो की कुछ‍ दिनो की खबरो पर गौर किया तो मेरठ मे दो नाबालिग किशोरियों के साथ बलात्‍कार, आगरा मे नाबालिग लडकी के साथ सामूहिक बलात्कार, रायबरेली मे बलात्कार के आरोप में किशोर गिरफ्तार किया गया, फतेहपुर व उन्नाव में बलात्कार का प्रयास युवको को गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार की न जाने कितनी घटनाऍ पूरे देश मे घट रही है जिनसे तो कुछ ही सामने आ पाती है और बहुत सी लोक-लाज और दंबगो के प्रभाव से उभारी जाती है और न ही उभरने दिया जाता है। न्‍याय की देरी और न्‍यायिक व्‍यवस्‍था की लचर व्‍यवस्‍था के कारण आज भी भारतीय परिवेश मे बलात्‍कार की घटनाओ को दबा ले जाना उचित माना जाता है।
आखिर कब तक हम सामाजिक डर से ऐसे अपराधो को सहते चले आयेगे? जब सामाजिक डर से अपराध करने की प्रवृत्ति मे कोई कमी नही आती तो अपराध के को सहने की प्रवृत्ति क्‍यो? क्‍या यह वही भारत है जहाँ 'नारी सर्वत्र पूज्यते' की आवधारणा विद्यामन रही है? किन्‍तु वर्तमान समय मे भारतीय संस्कृति का जिस प्रकार ह्रास किया जा रहा है उसी का परिणाम है कि बलात्कार की घटनाऍं घटित हो रही है। इसका मूल कारण है कि आज पारिवारिक मूल्‍य टूट रहे है, मार्यादा-लोक-लाज और मर्यादा की सीमा रेखा को लांघा जा रहा है। यह सो‍चनीय विषय है कि जिस उम्र मे युवाओ को अपने कॅरियर और एजूकेशन की ओर सोचना चाहिये वो इस उम्र मे बलात्‍कार जैसे कृत्‍य कर रहे होते है। कभी भी बलात्‍कार जैसी घटनाओ को रोकने के लिये कोई उपाय क्‍यो नही सोचा गया? इस पर हमें विचार करना होगा क्‍योकि अगर हम आज के समय मे इस विषय पर विचार न किया गया तो हमारे देश मे अमेरिका से भी भीभत्‍स रूप देखने को को मिलेगा। सन 1990 ई. की FBI रिपोर्ट से पता चलता है कि अमेरिका में उस साल 1,02555 बलात्कार की घटनाएँ दर्ज की गयी रिपोर्ट में यह बात भी बताई गयी है कि इस तरह की कुल घटनाओं में से केवल 16 प्रतिशत ही प्रकाश में आ पाई हैं इस प्रकार 1990 ई. की बलात्कार की घटना का सही अंदाज़ा लगाने के लिए उपरोक्त संख्या को 6.25 गुना करके जो योग सामने आता है वह है 6,40,968 इस पूरी संख्या को 365 दिनों में बनता जाये तो प्रतिदिन के लिहाज से 1756 संख्या सामने आती है। अगर हम भारत से अमेरिका की तुलना करें तो जनसंख्‍या के मामले में हम उससे 6 गुणा अधिक होते है, यदि हम प‍ाश्‍चात संस्‍कृति का अनुकारण करते रहे तो भारत मे भी 10 हजार प्रति दिन बलात्‍कार की घटनाऍं दर्ज होगी। यह भी विचारणीय बात है राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी रिपोर्ट भारत में अपराध (2009) के मुताबिक लड़कियों के साथ उनके ही रिश्तेदारों द्वारा बलात्कार किए जाने की घटना में तीस प्रतिशत का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2009 में जहां इस तरह के 404 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2008 में इस तरह के 309 मामले दर्ज किए गए थे और इनमें पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही 21,397 बलात्कार की घटनाओं में 94.9 प्रतिशत मामलों में पीड़ित लड़की उस व्यक्ति से परिचित थी। इससे साफ स्‍पष्‍ट होता है कि हम नैतिक पथभ्रष्ठता की ओर उन्मुख हो रहे है। उक्त रिपोर्ट की बाते उजागर करती है कि भारतीयों मे जो पारिवारिक रिश्‍तो की मर्यादा जो महिलाओ को सुरक्षा प्रदान करती थी उसे पाश्‍चात्‍य संस्‍कृति की आड़ मे हम तार-तार करते जा रहे है।
 
आज नेता नगरी मे बलात्‍कार की सजा क्‍या हो इस विषय पर विचार किया जा रहा है, नेता विपक्ष सुषमा स्‍वाराज ने फांसी की सजा चाहती है किन्‍तु क्‍या इससे बलात्‍कार की घटनाऍं कम हुई है ? बलात्‍कार के बाद हत्‍या के अपराध मे अन्तिम बार धनंजय चटर्जी को फाँसी दी गई, उसके बाद भी बलात्‍कार के बाद हत्‍या के मामलो मे कोई कमी नही आयी। हम यह क्‍यो विचार नही करते है कि बलात्‍कार की घटना कम हो या बिल्‍कुल न हो। ऐसा नही है कि हम बलात्‍कार की प्रवृत्ति पर रोक नही लगा सकते है दिक्कत ये है कि हम इस विषय पर सोचते नही है। वकाई आज अगर अगर कोई शक्ति है जो बलात्‍कार की घटनाओं पर अंकुश लगा सकता है तो भारतीय परम्‍परा को जीवित रखना, नौनिहालो को सेक्‍स शिक्षा देने के बजाय ऐसी शिक्षा प्रदान करता जिससे वो बलात्‍कार की पथ जाने के बजाय संस्‍कार के पथ पर जाये।


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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बात



संघ के बारे में तरह-तरह के विचार प्रस्तुत किए गए है लेकिन अधिकांश पूर्वाग्रह से प्रेरित कहे जा सकते है। आखिर कोई यह समझने का प्रयास क्यों नहीं करता कि क्या कारण है कि संघ विचार परिवार तमाम अवरोधों के बावजूद बढता ही जा रहा है। संघ ने विचार की धरातल पर जहां सभी वादों- समाजवाद, साम्यवाद, नक्सलवाद को पटखनी दी हैं वहीं राजनीतिक क्षेत्र में भी कांग्रेस के वर्चस्व को तोड़ा है। पहले भारतीय राजनीति गैर कांग्रेसवाद के आधार पर चलती थी अब यह गैर भाजपावाद हो गया है। संघ के सभी आनुषांगिक संगठन आज अपने-अपने क्षेत्र के क्रमांक एक पर है। भारतीय मजदूर संघ, विद्यार्थी परिषद्, विद्या भारती, स्वदेशी जागरण मंच, भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद् आदि...सेवा के क्षेत्र में वनवासी कल्याण आश्रम, सेवा भारती की सक्रियता प्रशंसनीय है। इस पर बहस होनी चाहिए कि कांग्रेस और वामपंथ का आधार क्यों सिकुड़ रहा है और संघ भाजपा के प्रति जन-समर्थन क्यों बढ़ रहा हैं। पिछले पंजाब और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में माकपा-भाकपा और माले का खाता क्यों नहीं खुल पाया। कांग्रेस पिछले कई चुनावों से लगातार पराजय का मुंह क्यों देख रही है। देश की जनता अब समझदार हो गई है। वह देखती है कि कौन उसके लिए ईमानदारीपूर्वक काम कर रहा है और कौन केवल एयरकंडीशन कमरों में बैठकर महज जुगाली कर रहा है। समाजसेवा के नाम पर कांग्रेस-वामपंथियों की क्या उपलब्धि है। इस बात में दम है कि 'अंधेरे की शिकायत करते रहने से कहीं बेहतर है एक दिया जलाना'।
हम देखते हैं कि 1885 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जहां आंतरिक कलह और परिवारवाद के कारण दिन-प्रतिदिन सिकुड़ती जा रही है, वहीं 1925 में दुनिया को लाल झंडे तले लाने के सपने के साथ शुरू हुआ भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन आज दर्जनों गुटों में बंट कर अंतिम सांसें ले रहा है। इनके विपरीत 1925 में ही स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिनोंदिन आगे बढ़ रहा है।
आज यदि गांधी के विचार-स्वदेशी, ग्राम-पुनर्रचना, रामराज्य-को कोई कार्यान्वित कर रहा है तो वह संघ ही है। महात्मा गांधी का संघ के बारे में कहना था- 'आपके शिविर में अनुशासन, अस्पृश्यता का पूर्ण रूप से अभाव और कठोर, सादगीपूर्ण जीवन देखकर काफी प्रभावित हुआ' (16.09.1947, भंगी कॉलोनी, दिल्ली)।
आज विभिन्न क्षेत्रों में संघ से प्रेरित 35 अखिल भारतीय संगठन कार्यरत हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, वैकल्पिक रोजगार के क्षेत्र में लगभग 30 हजार सेवा कार्य चल रहे हैं। राष्ट्र के सम्मुख जब भी संकट या प्राकृतिक विपदाएं आई हैं, संघ के स्वयंसेवकों ने सबसे पहले घटना-स्थल पर पहुंच कर अपनी सेवाएं प्रस्तुत की हैं।
संघ में बौध्दिक और प्रत्यक्ष समाज कार्य दोनों समान हैं। संघ का कार्य वातानुकूलित कक्षों में महज सेमिनार आयोजित करने या मुट्ठियां भींचकर अनर्गल मुर्दाबाद-जिंदाबाद के नारों से नहीं चलता है। राष्ट्र की सेवा के लिए अपना सर्वस्व होम कर देने की प्रेरणा से आज हजारों की संख्या में युवक पंचतारा सुविधाओं की बजाय गांवों में जाकर कार्य कर रहे हैं। संघ के पास बरगलाने के लिए कोई प्रतीक नहीं है और न कोई काल्पनिक राष्ट्र है। संघ के स्वयंसेवक इन पंक्तियों में विश्वास करते हैं-'एक भूमि, एक संस्कृति, एक हृदय, एक राष्ट्र और क्या चाहिए वतन के लिए?'
संघ धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करता। इसके तीसरे सरसंघचालक बाला साहब देवरस ने उद्धोष किया कि 'अस्पृश्यता यदि पाप नहीं है तो कुछ भी पाप नहीं है।' बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का कहना था- 'अपने पास के स्वयंसेवकों की जाति को जानने की उत्सुकता तक नहीं रखकर, परिपूर्ण समानता और भ्रातृत्व के साथ यहां व्यवहार करने वाले स्वयंसेवकों को देखकर मुझे आश्चर्य होता है' (मई, 1939, संघ शिविर, पुणे)।
संघ की दिनोंदिन बढ़ती ताकत और सर्वस्वीकार्यता देखकर उसके विरोधी मनगढ़ंत आरोप लगाकर संघ की छवि को विकृत करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हमें स्वामी विवेकानंद का वचन अच्छी तरह याद है: 'हर एक बड़े काम को चार अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है: उपेक्षा, उपहास, विरोध और अंत में विजय।' इसी विजय को अपनी नियति मानकर संघ समाज-कार्य में जुटा हुआ है। (संकलन)


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हमारी गलतियों का अनुकरण की धारणा



आम तौर पर आज दौर मे कॉपी-पेस्‍ट का जमाना रह गया है। बहुत समय पहले मैने अपनी पुरानी ऑर्कुट प्रोफाइल में अपने स्‍वाभाव के बारे मे कुछ बाते लिखी थी। यह बात करीब सन् 2007 की है, यह वाक्‍य था कि एक समान्‍य आदमी की तरह जिन्‍दगी जीने वाला, किन्‍तु सोच थोड़ा हट के। मित्रता कम ही करता हूँ जिससे करता हूँ, बिन्‍दास करता हूँ। सच में दोस्‍ती के मायने समझने की कोशिस कर रहा हूँ कि दोस्‍ती कहते किसे है? क्‍या आपस मे बात करना और गप्‍पे मारना या किसी अच्‍दे होटल या रेस्‍त्रां मे जा कर साथ जीभ के स्‍वाद में वृद्धि करना, यही दोस्‍ती है?
जल्‍दबाजी मे टाईपिंग करने मे मेरे से बहुत गलतियाँ होती थी और उसी गतली का परिणाम रहा कि अच्‍छे की जगह अच्‍दे लिख गया ओर काफी दिनो मे मेरा ध्‍यान न जाने के कारण वह अच्‍दे ही रहा गया। इसके बाद किन्‍ही कारणो से मुझे आर्कुट की प्रोफाइल वर्ष 2010 मे डिलीट करनी पड़ी और उसी के साथ मेरा सब कुछ डिलीट हो गया।


आज मै ऑर्कुट पर था और अचानक एक प्रोफाइल ऐसी मिल गई जिसमे यह कथन लिखा हुआ था। जब मैने अच्‍दे शब्‍द को ऑर्कुट पर सर्च किया तो करीब 162 प्रोफाइल पर यह शब्‍द मिला। मतलब की कुछ 162 लोगो ने इसे अपने प्रोफाइल पर कॉपी कर कर लगाया किन्‍तु किसी ने अच्‍दे को अच्‍छे मे बदलने की कोशिश नही की। अगर कॉपी करते समय पढ़ा जाता तो वाकई अच्‍दे को ठीक करके प्रोफाइल मे रखा जा सकता था आज तीन साल बीत रहे है इस कथन को किन्‍तु लगता है कि हमारी पकी-पकाई खाने की धारण ही बन गई और साथ ही साथ गलतियों का अनुकरण करने की।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि आज हमारी हमारे विषय मै अपनी स्वयं की कोई मौलिक सोच नही है। 162 व्‍यक्तियों की विचार भावनाऍं एक दूसरे से काफी मिलती है किन्‍तु वो एक दूसरे से कभी नही मिले। :) और तो और कुछ की प्रोफाइल मे यह चेतावनी भी मिली की --
*******वैधानिक चेतावनी******
orkut धारकों से अनुरोध है कि ऊपर लिखे गये content को तोड़-मरोड़ कर अथवा किसी भी प्रकार से अपने profile में use ना करें । धर-दबोंचे जाने पर 5000 रू. दण्ड अथवा 6 महीने की कैद या दोंनो हो सकते हैं।


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एक नये समय की शुरूवात



नारायण नारायण


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झड़ते बालों से बचने के लिए घरेलू नुस्खे और उपचार



 झड़ते बालों से बचने के लिए घरेलू नुस्खे और उपचार
आज के प्रदूषण भरे वातावरण में बालों के झड़ने की समस्या आम हो गई है। इस समस्या से सौ लोगों में से नब्बे लोग ग्रस्त हैं। 50 से 100 बाल तो रोज़ ही झड़ते हैं मगर जब यह संख्या बढ़ जाती है तब चिंता करने की ज़रूरत होती है। त्वचा विशेषज्ञ के अनुसार बालों का पतला होना और गंजेपन के लक्षण को एलोपीशीया कहते हैं। बहुत लोगों को तीस के उम्र में ही बालों के झड़ने की समस्या शुरू हो जाती है। इस समस्या के वैसे तो बहुत कारण होते हैं जैसे, शरीर में हार्मोनल बदलाव, तनाव या खराब जीवनशैली‍ आदि। बालों के झड़ने की समस्या का कारण खोजना तो ज़रूरी होता है मगर उससे पहले कुछ घरेलु उपचारों की सहायता से आप बालों का झड़ना कम कर सकते हैं-

झड़ते बालों से बचने के लिए घरेलू नुस्खे और उपचार
  • झड़ते बालों से बचने के लिए रात में मेथी के बीजों को पानी में भिगो देना चाहिए। सुबह उठने पर इन्हे पीसकर लेप जैसा बना लेना चाहिए और फिर इस लेप को बालों पर लगाना चाहिए। ऐसा कुछ दिनों तक करने से रोगी के बाल झड़ना रुक जाते हैं।
  • बाल झड़ने बेर के पत्तों को पीसकर इसमें नींबू का रस मिलाकर सिर पर लगाने से बाल दोबारा उगने लगते हैं।
  • ताजा धनिये का रस या गाजर का रस बालों की जड़ों में लगाने से रोगी व्यक्ति के बाल झड़ने बंद हो जाते हैं।
  • सिर में जिस जगह से बाल झड़ गये हैं उस जगह पर प्याज का रस लगाने से बाल दोबारा उग आते हैं।
  • खोपरे (नारियल) के तेल को मुलेठी, ब्राह्मी, मेहंदी के पत्ते डाल कर उबालें और ठंडा होने के बाद बोतल में भरकर रखें और नियमित रूप से बालों की मालिश करें। इससे बाल घने, काले, चमकीले तो होंगे ही साथ ही दिमाग को भी पोषण मिलेगा।
  • बाल झड़ते हैं तो गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाएं। नहाने से पहले इस पेस्ट को सिर पर लगा लें। 15 मिनट बाद बाल गरम पानी से सिर को धोएं। ऐसा करने पर कुछ ही दिनों बालों के झडऩे की समस्या दूर हो जाएगी।
  • दालचीनी और शहद के मिश्रण काफी कारगर रहता है। आयुर्वेद के अनुसार इनके मिश्रण से कई बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। त्वचा और शरीर को चमकदार और स्वस्थ बनाए रखने के लिए इनका उपयोग करना चाहिए।
  • गाजर को पीसकर लेप बना लें। फिर इस लेप को सिर पर लगाये और दो घंटे के बाद धो दें। ऐसा प्रतिदिन करने से बाल झड़ने बंद हो जाते हैं।
  • गंजेपन को दूर करने के लिए रात को सोते समय नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर सिर की मालिश करनी चाहिए।
  • आंवला, ब्राह्मी तथा भृंगराज को एकसाथ मिलाकर पीस लें। फिर इस मिश्रण को लोहे की कड़ाही में फूलने के लिए रखना चाहिए और सुबह के समय में इसको मसल कर लेप बना लेना चाहिए। इसके बाद इस लेप को 15 मिनट तक बालों में लगाएं। ऐसा सप्ताह में दो बार करने से बाल झड़ना रुक जाते हैं तथा बाल कुदरती काले हो जाते हैं।
  • मेंहदी बालों को रंग करने का प्राकृतिक पदार्थ है। यह बालों को मज़बूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। मेंहदी को जब सरसों के तेल के साथ मिलाया जाता है तब यह और अच्छी तरह से काम करती है। एक बर्तन में 250 मिलीलीटर सरसों का तेल लें और उसमें लगभग 60ग्राम सूखा और धुला हुआ मेंहदी का पत्ता डालकर उबालें। मिश्रण को तब तक उबालें जब तक कि पत्ता पूरी तरह से जल न जाय। उसके बाद सूती के कपड़े में मिश्रण को छान लें।फिर उसको ठंडा करके हवाबंद जार में रख दें। मिश्रण को नियमित रूप से बालों में लगाने से अच्छा परिणाम मिलेगा।
  • केरला में बालों को घना करने के लिए नारियल तेल और जपाकुसुम का इस्तेमाल किया जाता है। जपाकुसुम बालों को नवजीवन प्रदान करता है, रूसी के समस्या से निजात दिलाने में मदद करता है। यहाँ तक कि जपाकुसुम के नियमित इस्तेमाल से बालों का झड़ना कम होता है। ज़रूरत के अनुसार जपाकुसुम के फूल लें और उनको पीसकर तिल के तेल या नारियल के तेल में डालकर पेस्ट बना लें। फिर उसको सिर और बालों पर लगाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें और सूखने के बाद ठंडा पानी और माइल्ड शैंपू से धो लें।
  • रात को तांबे के बर्तन में पानी भरकर रखें। सुबह के समय उठते ही इस पानी को पी लें। इसके साथ ही आधा चम्मच आंवले के चूर्ण का सेवन भी करे। इससे कुछ ही समय में बालों के झड़ने का रोग ठीक हो जाता है।
  • गुड़हल के फूल तथा पोदीने की पत्तियों को एक साथ पीसकर थोड़े से पानी में मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को सप्ताह में कम से कम दो बार आधे घण्टे के लिए बालों पर लगाना चाहिए। ऐसा करने से बाल झड़ना रुक जाते हैं तथा बाल सफेद भी नहीं होते हैं।
  • लगभग 80 ग्राम चुकन्दर के पत्तों के रस को सरसों के 150 ग्राम तेल में मिलाकर आग पर पकाएं। जब पत्तों का रस सूख जाए तो इसे आग पर से उतार लें और ठंडा करके छानकर बोतल में भर लें। इस तेल से प्रतिदिन सिर की मालिश करने से बाल झड़ने रुक जाते हैं तथा बाल समय से पहले सफेद भी नहीं होते हैं।
  • कलौंजी को पीसकर पानी में मिला लें। इस पानी से सिर को कुछ दिनों तक धोने से बाल झडना बंद हो जाते हैं तथा बाल घने भी होना शुरु हो जाते हैं। नीम की पत्तियों और आंवले के चूर्ण को पानी में डालकर उबाल लें और सप्ताह में कम से कम एक बार इस पानी से सिर को धोएं। ऐसा करने से कुछ ही समय में बाल झड़ना बंद हो जाता है।
  • प्याज़ और लहसुन में सल्फर होता है जो कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। ये बालों को उगने में मदद करते हैं। इसलिए बालों के संबंधित औषधि में इनका इस्तेमाल किया जाता है। जरूरत के अनुसार प्याज़ को बारीक काट लें। फिर उनको निचोड़कर रस निकाल लें। उस रस को सिर पर लगाकर पंद्रह-बीस मिनटों के लिए छोड़ दें। उसके बाद माइल्ड शैंपू से धो लें। लहसुन के कुछ फाँकों को पीस लें और उनको ज़रूरत के अनुसार नारियल के तेल में मिलाकर कुछ मिनटों तक उबालें। उसके बाद गुनगुना गर्म अवस्था में सिर पर लगायें। इस उपचार को हफ़्ते में तीन-चार बार करें।
  • नारियल एक ऐसा प्राकृतिक पदार्थ है जो बालों को कन्डिशन करने और बालों के विकास में मदद करता है। नारियल के दूध में प्रोटीन, मिनरल और फैट होता है जो बालों के टूटने के प्रक्रिया को कम करने में मदद करता हैं। उसी तरह नारियल तेल भी बालों को जड़ से सिरे तक मजबूत करने में मदद करता है।  नियमित रूप से नारियल के तेल से सिर पर मालिश करने से बालों का झड़ना कम हो जाता है।
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तुमने जो मूर्ती पूजा का अपराध किया है:गौड



प्रस्तुत लेख बाइबल की पुस्तक एज़ेकिअल के अध्याय २३ का अनुवाद है. इसमें बैअल का गौड़ अपने एक चुने हुए पुरुष को उदाहरण दे कर मूर्तिपूजा का अपराध करने वालों के सम्बन्ध में समझा रहा है. कहीं आप भूल न जाएँ, इसलिए एक बार पुनः बता दूं की ये शब्द, बाइबल तथा चर्च के अनुसार, गौड के हैं.

23:1 The word of the LORD came to me:
लॉर्ड गौड ने मुझे संदेश दिया

23:2 “Son of man, there were two women, daughters of same mother.
ए पुरुष, दो महिलायें थीं, जोकि एक ही माता की संतान थीं.

23:3They became whores in Egypt, engaging in whoredom from their youth. In that land their breasts were fondled and their virgin bosoms smothered.
वो मिस्र में वेश्याएं थी, जो युवावस्था से ही वेश्यावृति में लगी थीं. वहाँ उनके वक्ष सहलाए जाते थे और उनके कुंवारे स्तनों से खिलवाड़ होता था.

23:4 The older was named Aholah, and her sister was Aholibah. They were mine and gave birth to sons and daughters. Aholah is Samaria, and Aholibah is Jerusalem.
बड़े वाली का नाम अलोहाह और छोटी बहन का नाम अहोलिबाह था. वो मेरी थीं और उन्होंने पुत्रों तथा पुत्रियों को जन्म दिया था. समारिया तो अलोहाह है और अहोलिबाह है जेरुसलाम.

23:5 “Aholah engaged in prostitution while she still was mine; and she lusted after her lovers, who were Assyrians—warriors
अहोलिहाह ने वेश्यावृति तभी से आरम्भ कर दी थी जब वो मेरी थी; वो अपने अस्सिरियाई प्रेमियों के प्रति वासना रखती थी

23:6 clothed in blue, governors and commanders, all of the desirable young men, and mounted on horses.
जो नीले वस्त्र पहनने वाले योद्धा थे, उनमें से कुछ सैनिक अधिकारी थे तो कुछ राज्य अधिकारी. वे सब आकर्षक युवा थे जो घोड़ों की सवारी करते थे.

23:7 She gave herself as a prostitute to all the elite of the Assyrians and spoiled herself with all the idols of everyone she had a fancy on.
उसने अपने आप को सभी अस्सिरियाई अच्छे पुरुषों के समक्ष एक वेश्या की भांति प्रस्तुत किया और उन लोगों की मूर्तियों से अपने आप को अपवित्र किया जिनके प्रति उस की वासना थी.

23:8 She did not stop the whoredom she began in Egypt, when during her youth men slept with her, fondled her virgin bosom and poured out their lust on her.
जो वेश्यावृति उसने मिस्र में आरम्भ की, उसे उस ने नहीं छोड़ा, जब वो युवा थी तो वो पुरुषों के साथ सोती थी, जो उसके कुंवारे स्तनों को सहलाते थे और उसपर अपनी वासना उंडेलते थे.

23:9 “Therefore I delivered her into the hands of her lovers, the Assyrians, for whom she had always lusted.
इसलिए मैंने उसे उसके प्रेमियों को सौंप दिया, उन्हीं अस्सिरियाई पुरुसोहों को जिनके लिए वो वासना रखती थी.

23:10 They bared her naked, took away her sons and daughters and slew her with the sword. She became notorious among women, and chastisement was inflicted on her.
उन्होंने उसे नग्न किया, उसके पुत्र और पुत्रियों को छीन लिया और उसे तलवार से मार दिया. वो महिलाओं में विख्यात हो गयी थी, और उसे दण्डित किया गया.

23:11 “Her sister Aholibah saw this, yet in her lust and whoredom she was more disgusting than her sister.
उसकी बहन अहोलिबाह ने ये सब देखा, फिर भी वो वेश्यावृति और वासना में वो अपनी बहन से भी अधिक गिरी हुई थी.

23:12 She too lusted for the Assyrians—governors and commanders, warriors in full uniform, mounted horsemen, all desirable young men.
वो भी अस्सिरियाई पुरुषों के प्रति वासना रखती थी जो राज्य अधिकारी तथा सैनिक थे, घोड़ों की सवारी करते थे, और आकर्षक थे.

23:13 I saw that she too polluted herself; both of them chose the same path.
मैंने उसे अपने आप को अपवित्र करते देखा, दोनों ने एक जैसा ही जीवन व्यतीत किया.

23:14 “But she carried her prostitution farther ahead. She saw portraits of men on a wall, figures of Chaldeans portrayed with vermilion,
पर इसने तो अपनी वेश्यावृति को और भी गिरा दिया था. उसने पुरुषों के चित्रों को दीवारों पर देखा, बेबीलोन के पुरुषों के सिन्दूर से बने चित्रों को.

23:15 with belts around their waists and flowing turbans on their heads; all of them looked like Babylonian chariot officers, natives of Chaldea.
जिन्होंने अपनी कमर पर पेटियां बाँध रखी थीं और सर पर लहराती पगड़ियां बाँध रखी थीं; वे सब बेबीलोन के परम्परागत पुरुष थे.

23:16 As soon as she sighted them, she lusted for them and sent messengers for them in Chaldea.
जैसे ही उसने उन्हें देखा, उसकी वासना उनके प्रति जागृत हो गयी और उसने इन पुरुषों के लिए संदेश भेज दिया.

23:17 Then the Babylonians came to her, to her love bed, and in their lust they polluted her. After she had been defiled by them, she turned her back to them in disgust.
तब बेबीलोन के पुरुष उस के पास आ गए, वो उसकी शैय्या पर आ गए और अपनी वासना से उसे अपवित्र कर दिया. जब वो अपवित्र हो गयी तो उसने उन से मुंह मोड़ लिया.

23:18 When she carried on her prostitution openly and displayed her nude body, I turned away from her in disgust, as I had turned away from her sister.
जब उसने अपने को नग्न कर के इस वेश्यावृति को चलाये रखा, तो मैंने घृणा स्वरुप उस से अपना मुख मोड़ लिया, जैसा मैंने उसकी बहन से मोड़ लिया था.

23:19 Yet she became more and more promiscuous as she recalled her youthful days, when she was a harlot in Egypt.
इस पर भी वो और अधिक व्यभिचारी होती गयी और उन दिनों का स्मरण करने लगी जब वो युवा थी और मिस्र में वेश्यावृति करती थी.

23:20 There she lusted after her lovers, who had genitals like that of a donkey and who had  emission like that of a horse.
वहाँ वो अपने प्रेमियों से वासना करती थी, जिनके गुप्तांग गधों जैसे थे और जिन का स्खलन घोड़ों जैसा था.


23:21 So you longed for the obscenity of your youth, when in Egypt your bosom was fondled and your young breasts caressed.
इसलिए तुम अपनी युवावस्था की अश्लीलता की पुनः प्राप्ति के लिए उत्सुक हो उठी, जब मिस्र में तुम्हारे स्तनों से खिलवाड़ हुआ था.

23:22 “Therefore, Aholibah, this is what the Sovereign LORD says: I will excite your lovers against you, those you turned away from in disgust, and I will bring them against you from all sides
इसलिए अहोबिलाह, तुम्हारे शक्तिशाली लॉर्ड का तुम्हारे प्रति कथन है: मैं तुम्हारे प्रेमियों को तुम्हारे विरुद्ध कर दूंगा, जिनसे तुमने मुंह फेर लिया है, मैं उन्हें हर दिशा से तुम्हारे विरुद्ध लाऊंगा.

23:23 the Babylonians and all the men of Chaldeans, Pekod, Shoa & Koa, along with all the handsome young men of Assyria. All of the governors and warriors, chariot officers and all the horse mounted high ranking men.
वो सब घुड़सवार, राज्यपाल, सैनिक, आकर्षक युवक, उच्च अधिकारी जो अस्सिरिया, बेबीलोन, पकोड, शोया, कोया से हैं.

23:24 They will come upon you with their weapons, chariots and wagons and with a throng of people; they will take up positions against you on every side wearing helmets and bearing shields of all sizes. I will hand over you to them for punishment, and you will be punished by them as per their standards.
वो रथों और गाड़ियों पर सवार होकर, शस्त्रों से लैस, तुम्हारे विरुद्ध होंगे और प्रत्येक दिशा से लौह टॉप पहने, बड़े और छोटे ढाल लिए तुम्हारा विरोध करेंगे. मैं तुम्हें उनको सौंप दूंगा और वो अपनी इच्छानुसार तुम्हें दंड देंगे.

23:25 I will direct my jealous wrath against you, and you will be dealt by them with fury. They will cut off your noses and your ears, and the remaining ones will become victim of the sword. Your sons and daughters will be taken away by them and the rest of you will be consumed by fire.
मैं अपना इर्ष्या और क्रोध तुम पर केन्द्रित करूँगा और वो तुमसे क्रूरतापूर्ण व्यवहार करेंगे.
वो तुम्हारे नाक व कान काट लेंगे, और तुम में से जो बच जायेंगे, वो तलवार से मार दिए जायेंगे. वो तुम्हारे बच्चों को तुम से छीन लेंगे और तुम में से जो बच जायेंगे, वो आग में नष्ट हो जायेंगे.

23:26 They will also remove your clothes and take your fine jewelry.
वो तुम्हारे वस्त्र और सुन्दर आभूषण भी छीन लेंगे.

23:27 This way, I will put an end to the vulgarity and whoredom you began in Egypt. You will not look on these things with longing or remember Egypt anymore.
इस प्रकार मैं तुम्हारी अश्लीलता और वेश्यावृति को रोक दूंगा जो तुम ने मिस्र में आरम्भ की थी. तुम उन गतिविधियों को और मिस्र का स्मरण भी नहीं कर पायोगे.

23:28 “For this is what the Sovereign LORD says: I am about to hand you over into the hands of those you hate, to those you turned away from in disgust.
तुम्हारे सर्वशक्तिशाली लॉर्ड का कथन है: मैं तुम्हें उनको सौंपने लगा हूँ जिनसे तुम घृणा करते हो, जिनसे तुमने घृणापूर्वक  मुंह फेर लिया था.

23:29 They will deal with you in hatred and take away everything you have worked for. They will leave you stark naked, and the shame of your prostitution will be exposed. Your lewdness and promiscuity
वो तुमसे घृणा पूर्वक व्यवहार करेंगे और तुमसे सर्वस्व छीन लेंगे. वो तुम्हें नग्न कर के छोड़ देंगे और तुम्हारी वेश्यावृति का सब को पता लगेगा. तुम्हारी अश्लीलता और व्यभिचार,

23:30 have brought this on you, because you lusted after the nations and defiled yourself with their idols.
इसका कारण है, क्योंकि तुमने हीथनों के प्रति वासना रखी और उनकी मूर्तियों से अपने को अपवित्र किया.

23:31 You have gone the way of your sister; so I will put her cup into your hand.
तुमने अपनी बहन की भांति ही आचरण किया है, इसलिए मैं उसका विष तुम्हें देता हूँ.

23:32 “This is what the Sovereign LORD says:    “You will drink your sister’s cup, a cup large and deep; it will bring scorn and derision, for it holds so much.
तुम्हारे सर्वशक्तिशाली लॉर्ड का कथन है: तुम्हें अपनी बहन वाला प्याला पीना पड़ेगा जो बड़ा गहरा है; इस से तुम्हारी खिल्ली उड़ेगी.

23:33 You will be filled with drunkenness and sorrow, the cup of ruin and desolation, the cup of your sister Samaria.
 तुम नशे तथा दुःख से ग्रसित हो जाओगी, मायूसी और विनाश का प्याला, तुम्हारी बहन समारिया का प्याला.

23:34 You will drink it and drain it dry and chew on its pieces—
   and you will tear your breasts. I have spoken, declares the Sovereign LORD.

तुम्हें इसे पूर्ण रूप से पीना होगा और उसके टुकड़ों को भी खाना होगा, और तुम अपने स्तन चीर लोगी. ऐसा मेरा कथन है, ये सर्वशक्तिशाली लॉर्ड ने घोषणा की है.

23:35 “Therefore this is what the Sovereign LORD says: Since you have forgotten me and turned your back on me, you must bear the consequences of your lewdness and prostitution.”
इसलिए सर्वशक्तिशाली लॉर्ड का कहना है: "क्योंकि तुमने मुझे भुला कर मेरी ओर पीठ फेर ली, इसलिए तुम्हें अपनी अश्लीलता और वेश्यावृति का परिणाम भुगतना होगा."

23:36  The LORD said to me: “Son of man, will you judge Oholah and Oholibah? Then confront them with their detestable practices,
लॉर्ड ने मुझ से कहा: " क्या तुम अलोहाह और अहोलिबाह का निर्णय करोगे? उन्हें उनकी नीच गतिविधियों के संबंध में बताओ,

23:37 for they have committed adultery and blood is on their hands. They committed adultery with their idols; they even sacrificed their children, whom they bore to me, as food for them.
क्योंकि उन्होंने व्यभिचार किया है और उनके हाथ खून से रंगे हैं. उन्होंने मूर्तियों के साथ व्यभिचार किया है; उन्होंने अपने उन बच्चों की भी बलि दे दी जो मुझ से उत्पन्न हुए थे, और उनका भक्षण कर लिया.

23:38 They have also done this to me: At that same time they defiled my sanctuary and desecrated my Sabbaths.
इतना ही नहीं, उन्होंने मेरे पवित्र स्थान को अपवित्र किया है.

23:39  On the very day they sacrificed their children to their idols, they entered my sanctuary and desecrated it. That is what they did in my house.
जिस दिन उन्होंने अपने बच्चों की बलि मूर्तियों को दी, उन्होंने मेरे पवित्र स्थान को अपवित्र कर दिया. ये उन्होंने मेरे घर में किया.

23:40 “They even sent messengers for men who came from far away, and when they arrived you bathed yourself for them, applied eye makeup and put on your jewelry.
उन्होंने दूर रहने वाले पुरुषों के लिए संदेश भी भेजे, और जब वो आये तो तुम उनके लिए स्नान कर के, श्रृंगार कर के और आभूषण पहनने लगे.

23:41 You sat on an elegant couch, with a table spread before it on which you had placed the incense and olive oil that belonged to me.
तुम एक सजीली सेज पर बैठ गए, एक वेदी सजाई और उस पर धुप तथा सुगन्धित अगरबत्तियां और तेल का दिया रखा, जो की वास्तविकता में मेरे थे.

23:42 “The noise of a carefree crowd was around her; drunkards were brought from the desert along with men from the rabble, and they put bracelets on the wrists of the woman and her sister and beautiful crowns on their heads.
उसके चारों और एक चिंतामुक्त भीड़ का कोलाहल था; भीड़ में से कई पुरुषों ने तथा रेगिस्तान से आये शराबियों ने उन दोनों बहनों की कलाइयों में कंगन डाले और उन के सरों पर सुन्दर मुकुट रखा.

23:43 Then I said about the one worn out by adultery, ‘Now let them use her as a prostitute, for that is all she is.’
जो व्यभिचार से नष्ट हो चुकी थी, उस समय मैंने उसके सम्बन्ध में कहा, ' हम सब इसका उपयोग एक वेश्या के रूप में करते हैं क्योंकि ये इसी योग्य है.'

23:44 And they slept with her. As men sleep with a prostitute, so they slept with those lewd women, Oholah and Oholibah.
और वो उस के साथ सोये. जिस प्रकार पुरुष एक वेश्या के साथ सोते हैं, आलोहाह तथा अहोलिबाह के साथ.

23:45 But righteous judges will sentence them to the punishment of women who commit adultery and shed blood, because they are adulterous and blood is on their hands.
परन्तु न्यायकारी न्यायाधीश उन्हें उसी प्रकार दंड देंगे जिस प्रकार व्यभिचार करने वाली तथा हत्यारी महिलाओं को देनी चाहिए, क्योंकि वो दोनों चरित्रहीन हैं और उनके हाथ रक्त से सने हैं.

23:46 “This is what the Sovereign LORD says: Bring a mob against them and give them over to terror and plunder.
सर्वशक्तिशाली लॉर्ड का आदेश है: इन्हें दंगाइयों की भीड़ को सौंप दो जो इन्हें आतंकित करे तथा इनको लूट ले.

23:47 The mob will stone them and cut them down with their swords; they will kill their sons and daughters and burn down their houses.
दंगाइयों की भीड़ उन्हें पत्थर मारेगी तथा इन्हें तलवार से काट देगी; वो उनके पुत्रों तथा पुत्रियों को मार दे और इनके घरों को जला कर नष्ट कर दे.

23:48  “So I will put an end to lewdness in the land, that all women may take warning and not imitate you.
इस प्रकार मैं तुम्हारी इस अश्लीलता का अंत कर दूंगा ताकि अन्य महिलायों को इस से चेतावनी मिल जाए और वो तुम्हारा अनुसरण न करें.


23:49 You will suffer the penalty for your lewdness and bear the consequences of your sins of idolatry. Then you will know that I am the Sovereign LORD.”
"तुम अपनी अश्लीलता का दंड पाओगी और तुमने जो मूर्ती पूजा का अपराध किया है, उसका परिणाम भी तुम्हें मिलेगा. उस समय तुम्हें आभास होगा की मैं तुम्हारा सर्वशक्तिशाली लॉर्ड हूँ."

आज भारतवर्ष में इसाइयत का प्रचार ये कह कर किया जाता है की ये एक सहानुभूति, संवेदना, प्रेम तथा मानवीयता से भरा सम्प्रदाय है तथा बाइबल गौड के अपने शब्द हैं. सेक्युलरिस्म के नाम पर इस गौड को राम तथा कृष्ण की तुलना में कहीं श्रेष्ठ दिखा कर परोसा जा रहा है.


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