सेक्‍स शिक्षा कितना जरूरी ?



सेक्‍स शिक्षा कितना जरूरी ?
 
आज के दौर में जिस प्रकार हमारा समाज पतन की ओर जा रहा है उससे तो यह पता चलता है कि अगर हम अपने परिवेश के अवाश्‍यक सुधार यह स्थिति और भी भयावह होती जायेगी। आज धीरे धीरे कुसंस्कृति को बचाने के लिये सेक्‍स शिक्षा जैसे षड़यंन्‍त्रों का आड़ लिया जा रहा है।
 
आज के पेपर में महिला दिवस की पूर्व संध्‍या पर एक चित्र प्रकाशित हुआ था जिसमें चलती बस में एक युवक अश्‍लील इशारे कर रहा था। क्‍या यही सेक्‍स शिक्षा का स्‍वरूप होगा? अगर संस्‍कृतिक पतन से समाज का उत्‍थान सम्‍भव है तो यह सोचना और समझना विचारकों को सबसे बड़ी भूल होगी।
 
स्‍कूली छात्रों में सेक्‍स शिक्षा पर जोर देना कोमल पौधों को गरम जल से सिंचित करने के समान होगा। क्‍योकि जो बालक और बालिकाऐं जिनके खेलने की दिन होने चाहिऐ हम उन्‍हे वासना की शिक्षा दे का प्रयास कर रहे है। कुछ दिनों पूर्व समाचार पत्र के एक खबर पढ़ा था कि कुछ 9 से 14 वर्ष के करीब आधा दर्जन बच्‍चों ने एक 12 वर्षीय बालिका के साथ बलात्कार किया। क्‍या आज के बालको में यौन शिक्षा इतनी जागृत हो गई है कि वह इस पर काबू नही रख पा रहे है या आज कल की फिल्‍में से इस वर्ग को इतनी सेक्‍स शिक्षा मिल जा रही है कि उन्‍हे इसके आगे कुछ सिखने की जरूरत नही है।
 
आज आत्‍याधुनिक पाश्‍चात सोच ही हमारे समाज के पतन का मुख्‍य कारण है, क्‍योकि आज के आधुनिक समाज में हमने हयाई छोड़कर बेहायाई अपना ली है और बेहया के लिया अच्‍छे और गलत में कोई अन्‍तर नही दिखता है। यही कारण है कि आज बहुत बड़ा वर्ग स्‍कूली शिक्षा प्रणाली में सेक्‍स शिक्षा का सर्मथन कर रहा है कि मै स्‍कूली शिक्षा प्रणाली में सेक्‍स शिक्षा का हिमायती नही हूँ, क्‍योकि मुझें नही लगता है कि इतना जरूरी है क्‍योकि यह वर्ग कुम्‍हार के कच्‍चे घड़े की भांति है जो अभी पानी डलाने योग्‍य नही है। जब कुम्‍हार र्निजीव घड़े को मौत के मुँह में नही जाने देता तो मानव कुछ वर्ग आज असमयिक इस शिक्षा के पक्ष में क्‍यों खड़ा है? इसके पीछे हो सकती है बहुत बड़ी साजिश हो रही है हमें इन साजिशों अपने बालमनों को बचाना होगा।
 
मै सेक्‍स शिक्षा का विरोधी नही हूँ किन्तु इतना जरूर चाहूँगा कि इस शिक्षा को स्‍नातक स्‍तर से पहले दिये जाने का विरोधी हूँ। अगर आज के दौर में यह शिक्षा स्‍कूली बच्‍चों में दी गई तो इसके भयंकर परिणाम होगें बाल वर्ग जो पढ़ेगा और देखता है उससे करने के प्रति जरूर उत्‍सुक होगा। यह एक सोचनीय प्रश्‍न है ?


Share:

5 comments:

अरुण said...

आप गलत है हमारे हिसाब से सरकार बिल्कुल ठीक जा रही है,बंदे पर पढना आये ना आये पर उसे सेक्स के बारे मे जरूर ज्ञान होना चाहिये आखिर सरकार को एंडस के बारे मे भी तो कार्यक्रम चलाने है ना..ज्यादातर एन जी ओ नेताओ और उन के लगेलुतरो के ही तो होते है..:)

Gyandutt Pandey said...

आपने जो विषय लिया है, उसपर जम कर बहस हो सकती है। जैसे हमारे स्कूली छात्र दिनों में सह शिक्षा के विषय पर हुआ करती थी।

Udan Tashtari said...

विचारणीय एवं गंभीर मुद्दा..

भुवनेश शर्मा said...

माफ करें प्रमेंद्र भाई पर मैं आपसे रत्‍ती भर भी सहमत नहीं हूं.

आजकल स्‍नातक स्‍तर से पहले ही बच्‍चे क्‍या क्‍या देख और क्‍या क्‍या कर डालते हैं. हर जगह सीडी डीवीडी लाइब्रेरी खुली हुई हैं. शहरों में तो घर-घर में इंटरनेट आ रहा है. उसके अलावा मस्‍तराम तो हर कहीं उपलब्‍ध है. आप कहां कहां और किस-किससे बचाएंगे बच्‍चों को. आप खुद ही सच-सच बताईये कि क्‍या स्‍नातक से पहले आप दूध के धुले थे और कुछ भी नहीं जानते थे इन मामलों में ना ही कोई इस संबंध मे उत्‍सुकता थी.


और जहां तक संबंध है आधुतिकता सीखकर आदमी बेहयाई सीखता है तो जान लें कि आज भी बहुत दूर-दराज के गांवों में नीले गगन के तले और खेतों में क्‍या-क्‍या होता है और ये मैं जोर-जबर्दस्‍ती वाली बात नहीं कर रहा हूं बल्कि ये सब सहमति से होता है.

प्रमेन्‍द्र जी इन बातों को स्‍वीकारिये, चीजों को दूसरे नजरिए से देखने का भी प्रयास कीजिए, इस प्रकार की एकतरफा सोच से आप अपना कुछ भी भला नही कर सकेंगे. हमारे समाज मे भी बहुत विकृतियां हैं. हां पर सेक्‍स एजूकेशन का क्‍या मॉडल हो यह बात अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है. इस पर जमकर बहस होनी चाहिए.

Neeraj Rohilla said...

मैं कक्षा ८-९वीं अथवा १२-१३ वर्ष की उम्र में यौन शिक्षा देने का हिमायती हूँ । सम्भवत: आप यौन शिक्षा और सेक्स के बारे में जानकारी दोनों को एक समझ रहे हैं, ऐसा आपकी पोस्ट से लग रहा है ।

जब मुद्दे की बात करें तो अलंकारो के प्रयोग की बजाय तर्कों का प्रयोग करें तो आसानी होगी । कोमल पौधों और कुम्हार के कच्चे घडे पढने में अच्छे लगते हैं लेकिन इससे आप कोई तर्क नहीं निकाल रहे हैं । मुझे नहीं पता कि महिला दिवस पर कौन सा चित्र प्रकाशित हुआ लेकिन अगर आप उसका उदाहरण देकर यौन शिक्षा पर कोई टिप्पणी कर रहे हैं तो उस चित्र को भी आपकी पोस्ट में स्थान मिलना चाहिये ।

भुवनेशजी की बात से पूरी तरह सहमत हूँ । इस पोस्ट में और कुछ खास दिखा नही है, आपकी अगली पोस्ट पर अपनी टिप्पणी दूँगा ।