गूगल पर प्रतिबन्‍ध तो नही लग गया है ?



आज इलाहाबाद में मध्‍य दोपहरियॉं के बाद से गूगल, जीमेल, आरकुट, ब्‍लागर, ब्‍लागवाणी सहित अनेकों साईट को झटका लग गया है। आज दोपहर में बहुत तेज आँधी आई और पानी भी बरसा और इन साईटों पर काफी असर पड़ा। यह प्रभाव सिर्फ इलाहाबाद भर में था या विश्‍वव्‍यापी असर था यह अभी जानकारी नही मिल पाई है। अभी रात 9 बजे रामचन्‍द्र मिश्र जी से पूछा कि क्‍या हाल-चाल है गूगल के? तो उत्‍तर बदहाली के ही मिले ओर पता चला कि याहू भी संकट में है। काफी साईटे काफी तीव्रता से खुल रही है, किन्‍तु कुछ साईटों का न खुलना समस्‍या का विषय है। कहीं यह गूगल समूह पर प्रतिबन्‍ध तो नही ?

अभी के लिये इतना ही ..............

यह पोस्‍ट ब्‍लाग राईटर से कर रहा हूँ, पता नही होती है कि भी नही ?
Technorati : गूगल पर प्रतिबन्‍ध तो नही लग गया है


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ब्रह्मचर्यासन से करें स्वप्नदोष, तनाव और मस्तिष्क के बुरे विचारों को दूर



ब्रह्मचर्यासन - प्राय: भोजन के बाद योगासन नहीं किये जाते किन्‍तु कुछ आसन ऐसे भी होते हैं जो भोजन के बाद भी किये जाते हैं। ऐसे ही आसनों में से एक है ब्रह्मचर्यासन। इस आसन को रात्रि-भोजन के बाद सोने से पहले करने से विशेष लाभ होता है। इस आसन को नियमित से करने के ब्रह्मचर्य-पालन में सहायता मिलती है जिससे अखंड ब्रह्मचर्य की सिद्धि होती है। यह आसन ब्रहमचर्य की साधना के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है इसलिए इस आसन को ब्रह्मचर्यासन का नाम दिया गया है। इस आसन से मानसिक संतुलन बनाकर मन को शांति प्रदान की जा सकती है। ब्रहमचारी साधना का अनुपालन करने के लिए ब्रह्मचारी लोग इस आसन को लगाते है।

Brahmacharyaasan Yoga Mudra Health Benefits

ब्रह्मचर्यासन की विधि Brahmacharyasana ki Vidhi

 समतल भूमि पर दरी या कम्बल बिछाकर बैठ जाएं। अब दोनों पैरों के बीच में अंतर रखते हुए सामने की तरफ फैला दें। इसके बाद बाएं पैर को घुटने से मोड़कर शरीर की ओर खींच ले और दाहिने पैर की जंघा के पास रखें। अब बाएं पैर की एड़ी से दबाव बनाकर पैर के तलवे को जांघ से सटाकर अंगूठे व उंगलियों को दाहिने पैर के घुटने से दबा दें। अब दाहिने पैर को भी इसी तरह से मोड़कर बाएं पैर की जंघा और घुटने के बीच रखे ताकि एड़ी बायीं पैर की जंघा संधि पर दबाव बनाए तथा अंगूठे व उंगलियों के बीच आ जाएं। धड़ को सीधा और आराम की अवस्था में रखें। दोनों हाथों को सीधे फैलाकर घुटनों पर रख दें और हथेलियां खुली हुई व सीधी होनी चाहिए। तर्जनी उंगली और अंगूठा एक दूसरे से स्पर्श करते हुए रहने चाहिए।

ब्रह्मचर्यासन के लाभ : Brahmacharyasana ke Fayde / Benefits in hindi

  1. इस आसन द्वारा रक्त संचार सुचारू रूप से होने लगता है।
  2. इसके द्वारा वीर्य को संरक्षित करके वीर्य वृद्धि की जाती है।
  3. आधा सीसी दर्द के दौरान इस आसन से बहुत आराम मिलता है।
  4. यदि कोई अप्रिय घटना बहुत प्रयत्न करने के बाद भी नहीं भुलाई जा रही हो तो इस आसन का अभ्यास करने से कुछ दिनों व्यक्ति उस घटना को भूल सकता है।
  5. इस आसन से ब्रह्मचर्य साधको में काम भाव और कामुकता के भाव ख़त्म हो जाते है और ब्रह्मचर्य पर भी नियंत्रण किया जा सकता है।
  6. इस आसन से युवावस्था में बहुत लाभ मिलते है इससे स्वप्नदोष, मस्तिष्क में बुरे विचार और तनाव जैसी समस्या से मुक्ति मिल सकती है।
  7. पचास वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति इस आसन द्वारा अलौकिक शक्ति को प्राप्त कर सकते है। 8. इस आसन से स्त्री और पुरुष दोनों को समान रूप से लाभ मिलता है।

Brahmacharyasana Yoga Mudra Health Benefits 


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हिन्‍दू विवाह



हिन्‍दू विवाह एक संस्‍कार हुआ करता था किन्‍तु भारत सरकार के द्वारा हिन्‍दू‍ विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार अब न यह संस्‍कार है और न ही संविदा। अपितु यह दोनो का समन्‍वय हो गया है। भारत सरकार के इस अधिनियम से निश्चित रूप से हिन्‍दू भावाओं को आधात पहुँचा है क्‍योकि यह हिन्‍दू धर्म की मूल भावानाओं का अतिक्रमण करता है तथा संविधान की मूल भावनाओं का उल्‍लंघन करता है।

हिन्‍दू विवाह जहॉ जन्‍मजन्‍मान्‍तर का संबध माना जाता था इसे एक खेल का रूप दे दिया गया है तथा हिन्‍दुओं की प्रचीन पद्धति को न्‍यायालय को मुहाने पर खड़ा कर दिया गया, जिसे परमात्‍मा भी भेद नही सकते थे। महाभारत में स्‍त्री पुरूष का अर्ध भाग है तथा पुरूष बिना स्‍त्री के पूर्णत: प्राप्‍त नही कर सकता है। धर्म के लिये पुरूष तथा उपयोगी होता है जबकि उसके साथ उसकी धर्म प‍त्‍नी साथ हो, अन्‍यथा पुरूष कितना भी शक्तिशाली क्‍यो न हो वह धर्मिक आयोजनों का पात्र नही हो सकता है। 

रामायण में भगवान राम भी सीता आभाव में धर्मिक आयोजन के योग्‍य नही हु‍ऐ थे। रामायण कहती है कि पत्नी को पति की आत्‍मा का स्‍वरूप माना गया है। पति अपनी पत्नि भरणपोषण कर्ता तथा रक्षक है।

हिन्दू विवाह एक ऐसा बंधन है जिसमें जो शरीर एकनिष्‍ठ हो जाते है, किन्‍तु वर्तमान कानून हिन्‍दू विवाह की ऐसी तैसी कर दिया है। हिन्‍दू विवाह को संस्‍कार से ज्‍यादा संविदात्‍मक रूप प्रदान कर दिया है जो हिन्‍दू विवाह के स्‍वरूप को नष्‍ट करता है। हिन्‍दू विवाह में कन्‍यादान पिता के रूप में दिया गया सर्वोच्‍च दान होता है इसके जैसा कोई अन्‍य दान नही है।

विवाह के पुश्‍चात एक युवक और एक युवती अपना वर्तमान अस्तित्‍व को छोड़कर नर और नारी को ग्रहण करते है। हिन्‍दू विवाह एक बंधन है न की अनुबंध, विवाह वह पारलौकिक गांठ है जो जीवन ही नही मृत्‍यु पर्यन्‍त ईश्‍वर भी नही मिटा सकता है किन्‍तु भारत के कुछ बुद्धि जीवियों ने हिन्‍दू विवाह की रेड़ मार कर रख दी है इसको जितना पतित कर सकते थे करने की कोशिश की है। भगवान मनु कहते है कि पति और पत्नि का मिलन जीवन का नही अपितु मृत्‍यु के पश्चात अन्‍य जन्‍मों में भी य सम्‍बन्‍ध बरकरार रहता है। हिन्‍दू विवाह पद्धिति में तलाक और Divorce शब्‍द का उल्‍लेख नही मिलता है जहॉं तक विवाह विच्‍छेन का सम्‍बन्‍ध है तो उसे शब्‍द संधि द्वारा बनाया गया। अत: हिन्‍दु विवाह अपने आप में कभी खत्‍म होने वाला सम्‍बन्‍ध नही है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार मानव जीवन को चार आश्रमों (ब्रम्हचर्य आश्रम, गृहस्थ आश्रम, सन्यास आश्रम तथा वानप्रस्थ आश्रम) में विभक्त किया गया है और गृहस्थ आश्रम के लिये पाणिग्रहण संस्कार अर्थात् विवाह नितांत आवश्यक है। हिंदू विवाह में शारीरिक संम्बंध केवल वंश वृद्धि के उद्देश्य से ही होता है।

वयस्‍कता प्राप्‍त करने पर,संतानों को मनमानी करने का फैसला निश्चित रूप से हिन्‍दू ही नही अपितु पूर भरतीय समाज के लिये गलत था। क्‍या मात्र 18 वर्ष की सीमा पार करने पर ही पिछले 18 वर्षो के संबध की तिलाजंली देने के लिये पर्याप्‍त है? है

1914 के गोपाल कृष्‍ण बनाम वैंकटसर में मद्रान उच्‍च न्‍यायाल ने हिन्‍दु विवाह को स्‍पष्‍ट करते हुये कहा कि हिन्‍दू विधि में विवाह को उन दस संस्‍कारों में एक प्रधान संस्‍कार माना गया है जो शरीर को उसके वंशानुगत दोषों से मुक्‍त करता है।

इस प्रकार हम देखेगें तो पायेगें कि हिन्‍दू विवाह का उद्देश्‍य न तो शारीरिक काम वासना को तृप्‍त करना है वरन धार्मिक उद्देश्‍यों की पूर्ति करना है। आज हिन्‍दू विवाह को कुछ अधिनियमों ने संविदात्मक रूप प्रदान कर दिया है तो हिन्‍दू विवाह के उद्देश्‍यों को छति पहुँचाता है।

अभी बातें खत्‍म नही हुई और बहुत कुछ लिखना और कहना बाकी है। समय मिलने पर इस संदर्भ में बाते रखूँगा।


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महाशक्ति, ऐडसेंस और 163.83 डालर



अगरस्‍त 2007 में श्री रामचन्‍द्र मिश्र जी से मिलना हुआ था तो उन्‍होने मुझे बताया था कि उनके अब तक 70 से 75 डालर हो गये है। फिर उनके ही ब्‍लाग पर सू‍चना मिली की उनके 100 डालर अक्‍टूबर 2007 में पूरे हो गये थे और करीब 111 डालर का पहला चेक उन्‍हे प्राप्‍त हुआ था। इस बार होली पर श्री रामचन्‍द्र भाई साहब से पुन: मिलना हुआ तो जानकारी प्राप्‍त हुई कि उनके इसी माह पुन: शतक लगाने वालें है (सम्‍भवत: अब तक लग भी गया हो)

इस बाबत जब मै पहली बार राम चन्‍द्र भाई साहब से अगरस्‍त 2007 में पहली बार मिला था, तो उन्‍हे तो मैने उन्‍हे पहली बार बताया था कि नवम्‍बर 2006 से अगस्‍त 2007 तक 35 डालर जुटे है। उनसे फिर मुलाकात हुई और उन्‍होने अपनी प्रति बताई और मेरी प्रगति के बारे में पूछा। मैने उन्‍हे बताया कि मुझे फरवरी 2007 के पहले हफ्ते तक लगभग 86 डालर जुड चुकें है, और उसके बाद कि स्थिति मुझे ज्ञात नही है क्‍योकि यह एडसेंस एकाउन्‍ट में खाते से संचालित नही होता है यह मेरे बड़े भइया के खाते से चलता है, मेरा पहला खाता किन्‍्ही कारणों से बंद हो चुका है :)

रात्रि करीब 10.15 तक मै उनके घर से वापस आया और भइया से एडसेंस खाते के बारे में जानना चाहा। उन्‍होने कहा कि रात्रि काफी हो गई है कल देख लेना। पर मै कहाँ मानने वाला था और कम्‍प्‍युटर चालू कर दिया। भइया का खाता खुलते ही हमें गूगल की तरफ से होली का तौहफा मिल गया मै 86 डालर से सीधे 145 डालर पर पहुँच गया था। निश्चित रूप से होली पर इससे बड़ा उपहार क्‍या हो सकता था?

महीना खत्‍म होने के साथ-साथ (अभी 2 दिन बाकी है) 164 के आस पास पहुँच गया हूँ, सम्‍भव है कि अगले दो दिनों में 170 डालर तक पहुँच सकता है। किन्‍तु अभी तक यह कागजी खाना पूर्ति है क्‍योकि रामचन्‍द्र भाई साहब से पता चला कि 50 डालर के बाद अभी कोई पिन आना है वह अभी तक नही आया है। खैर देस सबेर आ जायेगा। :)

अभी इतना ही शेष फिर......


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