संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो



संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो॥
युग के साथ मिल के सब, कदम बढ़ाना सीख लो।
एकता के स्वर में गीत, गुनगुनाना सीख लो।
भूलकर भी मुख में, जाति-पंथ की न बात हो।
भाषा, प्रांत के लिए, कभी न रक्तपात हो॥
फूट का भरा घड़ा है, फोड़कर बढ़े चलो ॥१॥
संगठन गढ़े चलो.............॥

आ रही है आज, चारों ओर से यही पुकार
हम करेंगे त्याग, मातृभूमि के लिए अपार॥
कष्ट जो मिलेंग, मुस्कुराकर सब सहेंगे हम।
देश के लिए सदा, जियेंगे और मरेंगे हम।
देश का ही भाग्य, अपना भाग्य है, यह सोच लो॥२॥
संगठन गढ़े चलो.................॥


Share:

4 comments:

Anonymous said...

बढ़िया देशभक्ति से लबरेज ... बापू और शास्त्री जयंती की शुभकामना .....

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया जज़्बा.

गाँधी जयंति की मुबारकबाद!

Arvind Bhatt (Jagrook Nagrik) said...

जय श्री राम

Arvind Bhatt (Jagrook Nagrik) said...

रमजान में किसी मुस्लिम भाई ने यह नही कहा कि अल्लाह का नाम लेकर आतंकी जो हत्याएं कर रहे है वो हराम है ।
सूर्य नमस्कार, वन्देमातरम, या भारत माता की जय पर एतराज़ समझ मे आ जायेगा अगर वे इन हत्यारों को भी गैर धार्मिक घोषित कर दें ।