अमृत वचन स्‍वामी राम तीर्थ (Amrit Vachan Swami Ram Tirath)



स्वामी रामतीर्थ : जीवन परिचय एवं आदर्श वचन
अमृत वचन  स्‍वामी राम तीर्थ (Amrit Vachan Swami Ram Tirath)
"किसी देश की उन्नति छोटे विचार के बड़े आदमियों पर नही, अपि‍तु बड़े विचार के छोटे आदमियों पर निर्भर है।" - स्‍वामी रामतीर्थ

स्वामी रामतीर्थ का जीवन परिचय

स्वामी रामतीर्थ का जन्म 22 अक्टूबर 1873 को पंजाब प्रांत (वर्तमान पाकिस्तान) के गुजरांवाला जिले के मुरारीवाला गाँव में हुआ था। उनका बाल्यकाल अत्यंत अभावों में बीता, किंतु उनकी प्रतिभा असाधारण थी। उन्होंने गणित विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में लाहौर के फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज में गणित के प्राध्यापक बने।

स्वामी रामतीर्थ बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। उन्होंने वेद, उपनिषद, भगवद्गीता तथा भारतीय दर्शन का गहन अध्ययन किया। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यास ग्रहण किया और वेदांत के प्रचार-प्रसार में स्वयं को समर्पित कर दिया।

उन्होंने जापान, अमेरिका तथा अन्य देशों की यात्राएँ कीं और भारतीय संस्कृति, वेदांत तथा आत्मज्ञान का संदेश विश्वभर में पहुँचाया। उनके ओजस्वी भाषणों से हजारों लोग प्रभावित हुए। वे भारत के आध्यात्मिक वैभव के महान दूत थे।

स्वामी रामतीर्थ का जीवन अत्यंत अल्पकालीन रहा। 17 अक्टूबर 1906 को मात्र 32 वर्ष की आयु में गंगा नदी में जल-समाधि लेकर उन्होंने अपने नश्वर शरीर का त्याग किया। उनका जीवन त्याग, आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम और आत्मज्ञान का अद्भुत उदाहरण है।

स्वामी रामतीर्थ के आदर्श वचन
  1. "अपने को दुर्बल समझना सबसे बड़ा पाप है।"
  2. "मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है।"
  3. "सफलता का रहस्य आत्मविश्वास में निहित है।"
  4. "संसार को बदलने से पहले स्वयं को बदलो।"
  5. "जिसने स्वयं को जीत लिया, उसने संसार को जीत लिया।"
  6. "प्रेम ही जीवन है और स्वार्थ मृत्यु है।"
  7. "उठो, जागो और अपने भीतर की दिव्य शक्ति को पहचानो।"
  8. "मनुष्य ईश्वर का अंश है; इसलिए वह असीम शक्ति का स्वामी है।"
  9. "भय ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।"
  10. "जिस क्षण तुम निर्भय हो जाते हो, उसी क्षण तुम स्वतंत्र हो जाते हो।"
  11. "कार्य ही पूजा है और सेवा ही धर्म है।"
  12. "राष्ट्र की उन्नति उसके जागृत और चरित्रवान नागरिकों पर निर्भर करती है।"
  13. "आत्मज्ञान से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं है।"
  14. "सच्चा धर्म मनुष्य को प्रेम, सेवा और त्याग की शिक्षा देता है।"
  15. "अपने भीतर सोई हुई शक्तियों को जगाओ, वही सफलता का मार्ग है।"
  16. "जो स्वयं पर विश्वास नहीं करता, वह ईश्वर पर भी विश्वास नहीं कर सकता।"
  17. "विपत्तियाँ मनुष्य को मजबूत बनाने के लिए आती हैं, तोड़ने के लिए नहीं।"
  18. "आनंद बाहर नहीं, अपने भीतर खोजो।"
  19. "समस्त विश्व मेरा परिवार है और समस्त मानवता मेरे अपने हैं।"
  20. "मनुष्य सीमित शरीर नहीं, असीम आत्मा है।"

स्वामी रामतीर्थ का संदेश

स्वामी रामतीर्थ का संपूर्ण जीवन आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति, आत्मज्ञान और विश्वबंधुत्व का संदेश देता है। वे मानते थे कि प्रत्येक मनुष्य में ईश्वर का अंश विद्यमान है और यदि वह अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान ले, तो असंभव को भी संभव बना सकता है। उनका जीवन हमें निर्भय बनने, आत्मबल बढ़ाने, राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने और मानवता की सेवा करने की प्रेरणा देता है।


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