मक्का काबा मे विराजित प्रसिद्ध मक्‍केश्‍वर महादेव शिवलिंग



काबा और भगवान शिव 
'काबा' अरब का प्राचीन मन्दिर है। जो मक्का शहर में है। विक्रम की प्रथम शताब्दी के आरम्भ में रोमक इतिहास लेखक 'द्यौद्रस् सलस्' लिखता है - यहाँ इस देश में एक मंदिर है, जो अरबों का अत्यन्त पूजनीय है। इस कथन से इस बात को बल मिलता है कि काबा और भगवान शिव का कोई न कोई प्राचीन जुड़ाव जरूर है। पूरा विश्‍व आज काबा का सच को जानने को उत्सुक है किन्तु वर्तमान परिदृश्‍य में काबा में गैर-इस्‍लमिक या कहे कि गैर मुस्लिम का जाना प्रतिबंधित है इस कारण काबा के अंदर क्या है और इसके पीछे सच का बहुत खुलासा आज तक नहीं हो पाया है।
क्या मक्का पहले मक्केश्वर महादेव शिवलिंग था 
क्या मक्का पहले मक्केश्वर महादेव शिवलिंग था
मक्का मदीना का सच 
मक्का मदीना का सच
makkeswar shivling (मक्केश्वर शिवलिंग)
Makkeswar Shivling मक्केश्वर शिवलिंग Makka Madina Shivling

इस्लामिक मान्यता से इतर काबा शरीफ का इतिहास
सम्पूर्ण विश्व क्या भारत के लोग ही यह कटु सत्य स्वीकार नहीं कर सकते कि इस्लाम ने हिन्दू की आस्था माने जाने वाले असंख्य मंदिर तोड़े है और उनके स्थान पर उसी मंदिर के अवशेष से मस्जिदों को निर्माण करवाया। मक्का का इतिहास के बारे इसी बात से पता चलता है कि इस्‍लामिक विध्वंसक गतिविधियां इतनी प्रचंडता के साथ की जाती थी कि तक्षशिला विश्वविद्यालय और सोमनाथ मंदिर विध्वंस किये गये, तो भारत से हजारों किलो मीटर दूर काबा और मक्‍का मे क्या हुआ होगा, इसके बारे में कह पाना बिना अध्ययन के बहुत उचित नहीं होगा।

इस्लाम नींव इस आधार पर रखी गई कि दूसरों के धर्म का अनादर करों और उनको नेस्‍तानाबूत और पवित्र स्थलों को खंडित कर वहाँ मस्जिद और मकबरे का निर्माण किया जाए। इस काम बाधा डालने वाले जो लोग भी सामने आये उन लोगों को मौत के घाट उतार दिया जाये। भले ही वे लोग मुस्लिमों को परेशान न करते हो। मुहम्मद साहब और मुसलमानों के हमले से मक्‍का और मदीना के आस पास का पूरा इतिहास बदल दिया गया। इस्लाम एक तलवार पे बना धर्म था है और रहेगा और इसका अंत भी उस से ही होगा किंतु पी एन ओक ने सिद्ध कर दिया है मक्केश्वर शिवलिंग ही हजे अस्वद है। मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं।

काबा में शिव और मक्का मदीना का रहस्य
द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूप नंद सरस्वती का मानना है कि मक्का में मक्केश्वर महादेव मंदिर है। मुहम्मद साहब भी शैव थे, इसलिए वे मक्केश्वर महादेव को मानते थे। एक बार वहां लोगों ने बुद्ध की मूर्ति लगा थी, वह इसके बहुत विरोधी थें। अरब में मुहम्मद पैगम्बर से पूर्व शिवलिंग को 'लात' कहा जाता था। मक्का के काबा में जिस काले पत्थर की उपासना की जाती रही है, भविष्य पुराण में उसका उल्लेख मक्केश्वर के रूप में हुआ है। इस्लाम के प्रसार से पहले इजराइल और अन्य यहूदियों द्वारा इसकी पूजा किए जाने के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। इराक और सीरिया में सुबी नाम से एक जाति थी यही साबिईन है। इन साबिईन को अरब के लोग बहुदेववादी मानते थे। कहते हैं कि साबिईन अर्थात नूह की कौम। माना जाता है कि भारतीय मूल के लोग बहुत बड़ी संख्या में यमन में आबाद थे, जहां आज भी श्याम और हिन्द नामक किले मौजूद हैं। विद्वानों के अनुसार सऊदी अरब के मक्का में जो काबा है, वहां कभी प्राचीनकाल में 'मुक्तेश्वर' नामक एक शिवलिंग था जिसे बाद में 'मक्केश्‍वर' कहा जाने लगा।
अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है 'मक्केश्वर लिंग' (मक्केश्वर महादेव)
अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है 'मक्केश्वर लिंग' (मक्केश्वर महादेव)
मक्का के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है नॉन-मुस्लिम्स का अंदर जाना माना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं।
मक्का के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है नॉन-मुस्लिम्स का अंदर जाना माना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं।

मक्का के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है नॉन-मुस्लिम्स का अंदर जाना माना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं। मक्का मदीना के शिवलिंग का रहस्य क्‍या है इसे इस्‍लाम पंथियों द्वारा सदा से छिपाया जा रहा है।

मुसलमानों के पैगम्‍बर मुहम्मद एक ऐसे विध्वंसक गिरोह का नेतृत्व करते थे जो धन और वासना के पुजारी थे। मुहम्मद ने मदीना से मक्का के शांतिप्रिय मुर्तिपूजकों पर हमला किया और जबरदस्त नरसंहार किया। मक्का का म‍दीना के अपना अलग अस्तित्व था किन्तु मुहम्मद साहब के हमले के बाद मक्का मदीना को एक साथ जोड़कर देखा जाने लगा। जबकि मक्‍का के लोग जो कि शिव के उपासक माने जाते है। मुहम्मद की टोली ने मक्का में स्थापित कर वहां पे स्थापित की हुई 360 में से 359 मूर्तियाँ नष्ट कर दी और सिर्फ काला पत्थर सुरक्षित रखा जिसको आज भी मुस्लिमों द्वारा पूजा जाता है। उसके अलावा अल-उज्जा, अल-लात और मनात नाम की तीन देवियों के मंदिरों को नष्ट करने का आदेश भी मुहम्मद ने दिया और आज उन मंदिरों का नामों निशान नहीं है (हिशम इब्न अल-कलबी, 25-26)। इतिहास में यह किसी हिन्दू मंदिर पर सबसे पहला इस्लामिक आतंकवादी हमला था। उस काले पत्थर की तरफ आज भी मुस्लिम श्रद्धालु अपना शीश जुकाते है। किसी हिंदू पूजा के दौरान बिना सिला हुआ वस्त्र या धोती पहनते हैं, उसी तरह हज के दौरान भी बिना सिला हुआ सफेद सूती कपड़ा ही पहना जाता है।
मक्‍का मे विराजित प्रसिद्ध मक्‍केश्‍वर महादेव शिवलिंग
जिस प्रकार हिंदूओं की मान्यता होती है कि गंगा का पानी शुद्ध होता है ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी अबे जम-जम के पानी को पाक मानते हैं। जिस तरह हिंदू गंगा स्नान के बाद इसके पानी को भरकर अपने घर लाते हैं ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी मक्का के अबे जम-जम का पानी भर कर अपने घर ले जाते हैं। ये भी एक समानता है कि गंगा को मुस्लिम भी पाक मानते हैं और इसकी आराधना किसी न किसी रूप में जरूर करते हैं।

जिस प्रकार हिंदूओं की मान्यता होती है कि गंगा का पानी शुद्ध होता है ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी अबे जम-जम के पानी को पाक मानते हैं। जिस तरह हिंदू गंगा स्नान के बाद इसके पानी को भरकर अपने घर लाते हैं ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी मक्का के अबे जम-जम का पानी भर कर अपने घर ले जाते हैं। ये भी एक समानता है कि गंगा को मुस्लिम भी पाक मानते हैं और इसकी आराधना किसी न किसी रूप में जरूर करते हैं।

मक्का मदीना का सच
मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इस सम्बन्ध में प्रख्यात प्रसिद्ध इतिहासकार स्व0 पी.एन.ओक ने अपनी पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में समझाया है कि मक्का और उस इलाके में इस्लाम के आने से पहले से मूर्ति पूजा होती थी। हिंदू देवी-देवताओं के मंदिर थे, गहन रिसर्च के बाद उन्होंने यह भी दावा किया कि काबा में भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है। पैगंबर मुहम्मद ने हमला कर मक्का की मूर्तियां तोड़ी थीं। यूनान और भारत में बहुतायत में मूर्ति पूजा की जाती रही है, पूर्व में इन दोनों ही देशों की सभ्यताओं का दूरस्थ इलाकों पर प्रभाव था। ऐसे में दोनों ही इलाकों के कुछ विद्वान काबा में मूर्ति पूजा होने का तर्क देते हैं। हज करने वाले लोग काबा के पूर्वी कोने पर जड़े हुए एक काले पत्थर के दर्शन को पवित्र मानते हैं जो कि हिन्‍दूओं का पवित्र शिवलिंग है। वास्तव में इस्लाम से पहले मिडिल-ईस्ट में पीगन जनजाति रहती थी और वह हिंदू रीति-रिवाज को ही मानती थी।
 काबा के अंदर क्या है
काबा और भगवान शिव
मक्का शिव मंदिर
मक्‍केश्‍वर महादेव शिव
एक प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार है कि काबा में “पवित्र गंगा” है। जिसका निर्माण महा पंडित रावण ने किया था, रावण शिव भक्त था वह शिव के साथ गंगा और चन्द्रमा के महात्मा को समझता था और यह जानता था कि कभी शिव को गंगा से अलग नहीं किया जा सकता। जहाँ भी शिव होंगे, पवित्र गंगा की अवधारणा निश्चित ही मौजूद होती है। काबा के पास भी एक पवित्र झरना पाया जाता है, इसका पानी भी पवित्र माना जाता है। इस्लामिक काल से पहले भी इसे पवित्र (आबे ज़म-ज़म) ही माना जाता था। रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावड़ को एक शिवलिंग प्रदान किया जिसे लंका में स्थापित करने का कहा और बाद जब रावड़ आकाश मार्ग से लंका की ओर जाता है पर रास्ते में कुछ ऐसे हालत बनते हैं की रावण को शिवलिंग धरती पर रखना पड़ता है। वह दुबारा शिवलिंग को उठाने की कोशिश करता है पर खूब प्रयत्न करने पर भी लिंग उस स्थान से हिलता नहीं। वेंकटेश पण्डित के अनुसार यह स्थान वर्तमान में सऊदी अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है। साऊदी अरब के पास ही यमन नामक राज्य भी है जहाँ श्री कृष्ण ने कालयवन नामक राक्षस का विनाश किया था। जिसका जिक्र श्रीमद भगवत पुराण में भी आता है।
मक्का मदीना की फोटो जिसमें मक्केश्वर महादेव है
मक्का मदीना की फोटो जिसमें मक्केश्वर महादेव है
पहले राजा भोज ने मक्का में जाकर वहां स्थित प्रसिद्ध शिव लिंग मक्केश्वर महादेव का पूजन किया था, इसका वर्णन भविष्य-पुराण में निम्न प्रकार है :-
"नृपश्चैवमहादेवं मरुस्थल निवासिनं !
गंगाजलैश्च संस्नाप्य पंचगव्य समन्विते :
चंद्नादीभीराम्भ्यचर्य तुष्टाव मनसा हरम !
इतिश्रुत्वा स्वयं देव: शब्दमाह नृपाय तं!
गन्तव्यम भोज राजेन महाकालेश्वर स्थले !! "

चित्रों की प्रमाणिकता में शिव लिंग और मक्का
मक्का स्थित प्रचीन शिव लिंग


 मक्का की आन्तरिक संरचना और भगवान शिव लिंग
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251 टिप्‍पणियां:

«सबसे पुराना   ‹पुराने   251 का 201 – 251
बेनामी ने कहा…

कृष्ण की एक ही पत्नी थी ।
कोई अलग अलग स्त्रियां nhi थी।।।

और भगवन शिव शंकर महादेव की भी एक ही पत्नी थी आदि शक्ती जिन्होने बार बार जन्म लेकर शिव से विवाह किया था।।।।।

कोई सन्देह है तो शिव पुराण और गूगल पढ़्ह कर देख सकते हो।।।।


हर हर महादेव

बेनामी ने कहा…

Waah my dear gjb.....JAI MATA KI....
Inka kya ye to aise jinko khud nhi pata ki ye kon h to sanatan Dharm ko kya janenge

HARPREET SINGH ने कहा…

Kya lingeshwer lga rakha shiv ko to koi Dikat nahi tum logo ko Shiva ne them de rakha Kya hai pathar ko shiv ka ling bana Dete ho jab ki feet me kha hai ki bhagwan ka koi Roop nahi to shiv ke ling ka Kya Matlab

Siddhesh ने कहा…

Allah Is fraud , sale mohammad ne kuch chele banaye aur kahne laga allah allah murge ki tarah. Dharm ka na aadi hota hai na ant Sanatan tha hai aur hai,Islam ek soach hai keval

बेनामी ने कहा…

Allah is fraud

Unknown ने कहा…

Jai shree ram

Kalpesh ने कहा…

Zhiyad yani asur, rakshas ve unke roza me bhi mans matan khate hai, ham Hindu uphas me mans nahi khate.

Vande mataram,
Yadi chatrapati shivaji Maharaj ne ladhai n ki hoti to Hindustan ko muslman banate

बेनामी ने कहा…

In musalmano ko poocho makka jab ye jate h to inko jo visa diya jata h wo Hindu ke nam se hota h koi ijjat nhi inki waha fir bhi ghak marane jate h Pakistan me mujahir kahlate have besharm bolte have. ..............

बेनामी ने कहा…

Tumko agar tumhara deen sachcha lagta hai to aao ek mukabla ho jaye
My whatsapp number 9519207395

बेनामी ने कहा…

Ham hindustani itne, hai ki jitne muslim contries Mill kar bante ho yaha tak ki tumhare makka me bhi hai mahadev to jise tum chumte ho aur ha waha pahle mandir tha aur aaj bhi Hai aur kal bhi rahega dost aur ganga ka paani kitna bhi ganda q na ho phir bhi vo sudh rahega hamesa ab makka me bhi banega mandir to bolo har har mahadev.
JAI SHREE RAM

बेनामी ने कहा…

Hhh

Unknown ने कहा…

Ye kutte ki dum h nahi sudhrenge . Na manege .. bhai hindu se muslim bane h inko nhi pata .bhens ke samne been bajana hoga

Unknown ने कहा…

Ye kutte ki dum h nahi sudhrenge . Na manege .. bhai hindu se muslim bane h inko nhi pata .bhens ke samne been bajana hoga

Mayank Chauhan ने कहा…

@abdul agar jalte sariye se Teri chamdi udhedi jaye Teri maa ki izzat looti jaye to Arab mein bhi dusre dharam 2 din m AA jayega

Gopal Singh ने कहा…

सब सनातन धर्म से ही बने है कोई शक नही है
ओर एक दिन ये सब नष्ट हो जायेंगे और सत्य ही शेष रहेगा

Unknown ने कहा…

Naved Khan sabse purana dharam Islam Hai iska bas tumhein bharam Hai .
Sabse purana dhram hindu Hai tum samjha apna madrsa wala logic Bhool jao jaha par bas nikah halala hota Hai

Hindu ने कहा…

abe babu kuch malum hai nahi lab lab kar rahe ho ,,,, tum jaiso ko samjhna murkhata hai ramayan padd ,bhagwat gita dhayan se padd pata chalega ki krishna ji ki kitni patniyan thi,, aur haa pahle aapne dharm ke bare me apne kisi jankar mulle se pata karo chutiyo se nahi ,,,,,,,,,,,,,,,, jai shree rammmmmm

Hindu ने कहा…

abe babu kuch malum hai nahi lab lab kar rahe ho ,,,, tum jaiso ko samjhna murkhata hai ramayan padd ,bhagwat gita dhayan se padd pata chalega ki krishna ji ki kitni patniyan thi,, aur haa pahle aapne dharm ke bare me apne kisi jankar mulle se pata karo chutiyo se nahi ,,,,,,,,,,,,,,,, jai shree rammmmmm

बेनामी ने कहा…

Pahle ramayan ko padd dhyan se ch........

बेनामी ने कहा…

Gjjk

Unknown ने कहा…

Mohammad ki jibrail be gyan Diya tha ya Viagra ki tablet

Raj Pavan ने कहा…

Teri maa ki gand me land ,,bhagwan ko Gali deta hai suwar ki aulad ,pahle Teri maa se puch shadi se pale kon we mama ne chooda tha, itihas pado kitno ne Teri dadi Nani ko choda or tu Musalman ho Gaya,

Raj Pavan ने कहा…

Islam se pahle kaba kya tha ,suwar ki aulad

mayank ch. shekhar ने कहा…

Dekhiye bhaiyon yeh baat bilkul sahi hai hum dharm ko lekar bahot si baatein banate hai kabhi hindu to kabhi muslim vivaad banate hai.
Sach yeh hai ki sanatan dharm hi sabse purana hai jisey bade bade historian ne mana hai ..christ ko manne wala christian hogaya mohammed ne apna baat failaya to musalman hogaya aur mahavir jain ne jab alne karmo ko logon ko kaha to jain dharm ayaa ..mere pyare musalman bhaiyon agar aapko kabhi debate karna hai to satya aur tathya per jaye islam ke bare me sabse pehle kisne kaha yeh aapko sayad nahi pata hoga macca madina aur shivling... Main musalman bhaiyon se kuch puchna chahta hun ki gita ya quran kya hai ....aapko wo bhi nahi pata hoga saansarik gyan ki do pustak hai jo alag alag bhasa me likhi hai ..kabhi time miley to islam aur sanatan ko janiye.... Akhir aisa humesh kyun hota hai ki aaplog jo humare apne hai humse alag prove karna chahte hai sabse imp baat dharm apna kar kya milega insaan bano pehle aur iss duniya me insaan ki jarurat dharam pracharak ki nahi ..nahi to kuch din me aaplogon ki tarah kuch log aayenge aur bolenge main ram rahim dharm ka hun...aur kuch bolenge main owaisi dharma ka hun ... Shame on you guys aapke paas dimaag hai usey use karo.....be your self baaki sab drama hai sanatan dharm sabse purana hai

arif ने कहा…

Dharam bahut hai maanle wale bhi bahut hai to apne apne dharam ko manna chahiye n ki ek dusre ke dharamo ko bura kahna chahiye kyoki kisi bhi dharm m galat karne ko nhi kaha gaya hai aur jisne bura kiya wo acchha nhi aur jo acchha nhi wo bura aur mene to kisika kuch nhi bigada aur upar wale ko hi ek hi dharam chalana hota to wo ek hi dharam ko badate aur dusre dharam me bacchha hi paida n hote par dharam jaruri hai ek hi dharam se identity same ho jati upar wala to acchaai ka sandes lekar apne kisi ko bhejta h kisi n kisi roop m to wo bechara poojne lagta h hisni na kisi upadhi ke rup m aur fir naya dharam bechara aam admi ki to achi bajti hai in powerfull logo ki ladaiyo ke bich m aur m manta hu o sab dharam manta hu nhi to kisi ko nhi mujhe uperwale se mtlb hai aur me jay hind na bolke jay bharat bolu to chalega kyoki ab india hindustan nhi rha isme sab dharam h jay bharat aur allahu akbar aur jay shri ram

arif ने कहा…

R

Unknown ने कहा…

To phir Muhammad paigambar ko Muslimo ka janmdata kha jata h isake father Muslim nhi the kya

abhishek dixit ने कहा…

Har har mahadev ....
Jai shreee ram ..
Jai shree mahakal

Tumhare liye tumhare allah hai to hamre liye mahadev...
Fark kya padta hai
Tumhari manokamnai allah puri karte hai to hamari mahadev

Dono ek saman hai

Na allah alag hai
Na mahadev

बेनामी ने कहा…

मक्‍का काबा मे विराजित प्रसिद्ध मक्‍केश्‍वर महादेव शिवलिंग

Unknown ने कहा…

आज जहां भी मुस्लिम धर्म हैं, वहाँ मारकाट मची है सभी यूरोपियन देश गोले बरसा रहे हैं.सभी मुस्लिम देश आतंकवादियों से लड रहे हैं.परिणाम क्या होगा आप ही बतायें????

बेनामी ने कहा…

Past aur feature me keyo jate ho.present me katue bacha paida hua hai to bolo.note-maka madina me gair Muslim (Hindu sikh ishayo) ko jana keyo mana hai.ek kahni hai sort me jis din koee hindu maka me siwling pr pani ya khun (Hindu apna) sache mn se chadayega ya arpan karega us din muslimo ka sarawnas ho jayega.aur isi ko muslim qamt kahte hai.

harshal tagare ने कहा…

Dekho nafees bhai me bi esi hajaaro baat likh sakta hu jo shayad aapki in baat pe had se jada bhari pade pr itihaas me hui har chiz ke pichhe kuch kaaran avashya the jinhe jane bina tippani krna bs apna gussaa nikalna he or kya esi baate krne se apke allaah khush honge aap pr garv krenge in sex ki bato ko lekr to bedhidhak kijie or ye mere un sabhi hindu bhaiyo ke lie bi he

VARUN MADDHESHIYA ने कहा…

हरामी है साले मुल्ले कुत्ते साले ये लोग सुद्ध मध्र्चोद होते है और वो भी बहुत ही बड़े वाले माधरचोद...

बेनामी ने कहा…

Sahi Kaha bhai
All Muslims in India are converted either in greed of money or in greed of eating Non Vegetarian food s .
.
A day will come when they will realize the Genuine Religion of the world and will b reconverted into Hinduism .

Har Har Mahadev

Jai Bharat

Unknown ने कहा…

Naved khan read above article and improve ur knowledge what mougal dynasty did against hindu

sunil kumar pandey ने कहा…

Aap bhi hindu ham bhi hindu samasya kya hai islam ki shuruwat kab hui isse pale muhammad sahab ka kya dharma tha bataiye.mskka me hinduo ka pravesh varjit hai par dandiya me aapko rokana galat.kami aap me nahi hamare nikamme digvijay jaise hijde netao me hai.

बेनामी ने कहा…

33 crore nhi 33 prakar hota hai bhai

बेनामी ने कहा…

Bhagwan 1 h uske bande anek kese ho skte h.
Konsa dharam sikhata h ki Apas me bair kro or vo shivling ho ya allah per h toh hamre hi liye jb hum hi thik ni h uske bande toh us upar vale ko kitna bura lgta hoga. socha h kabhi.. Yhi katuta yhi jahrilapan, yhi avishvas yhi negitivity, yhi bedbhav hamari duniya ko vinash se bhi buri sitithi me lakar khada kr dega ki.. Jb Hindu Log Apne Shiv se or Muslman log Apne Allah se Maut ki bhikh mangege or unko vo bhi naseeb ni hongi Kyoki unke sir pr Responsibility hogi.
Insan hi banjao bs kisi dharam ko follow krna chod do. or karte bhi ho toh koi negitivity mat palo.. kyonki koi ni sikhta yeh negitivity esa jina mtlb Apni life kharab krna toh h hi bt Hum yhi knowlege apni aange vali generation of b de hi rahe honge... jo isse bura ni ho skta neg. ka bijh bo rhe h. uparvale pr kisi ka copyright ni h vo sbke h..Hathjod kr vinti h..

बेनामी ने कहा…

बात म दम हे वीरे

बेनामी ने कहा…

Sahi kha,aapki bat 100 % satya he.

Unknown ने कहा…

Sacchai ka matlab hi nahi pata maullo ko...tabhi to har sach bolne pe jhut ka sahara leyte hay....gadha kabhi ghora nahi ban sakta. ....

Unknown ने कहा…

सौ बात की एक बात सबका मालि‍क एक है ाा

बेनामी ने कहा…

abe bawle aankh ke andhe tujhe kambodia indoneshia dikha nahi diye jahaan hazaro saal purane mandir aaj bhi apna seena taane khade hai. ye samast dharati sanatan hindu dharam walo ki hai tabhi to shyam n hind ramla muhmmad ke paida hone se pahle ke arab me hai

बेनामी ने कहा…

simple hai sbka apna bhgwan hai koi ghlt ni jo jisko manta shi hai haan jdi je sabat hota hai ki wha sirf islam hai to islam hoga koi problem ni aap gangajal chdado shivling per sab sahmne ajayega jdi kuj na hua jitne hindu muslman bnjaye jdi kuj hua fr shahmne hi

Unknown ने कहा…

Vaha par ganga jal ak din garror chdaga dekhna hai sir gi ye din jald see jald a Jaya har har mahadev good is my life

Unknown ने कहा…

Bhai Islam aur musalman ki bat alag rakh ke bat karte Hain.
Sabse pahle Adam aur satrupa (hawwa)aye, shrilanka me Adam ka pair pada uska nisan ab bhi haI, aisa Jankari al quran aur hadis me hai.dono jameen par aaye magar alag alag jagah .dono bahut rote the dharti par .phir Adam ko ek bat yad aaye ..Adam ne dekha tha Allah(ishwar) ke yaha Allah ke naam ke bagal me Muhammad naam likha tha.lekin Adam ko bhi pata nahi tha ye kinka name hai. Allah se duwa kiye ya Allah apke naam ke bagal me arsh par jo मोहम्मद नाम लिखा है उसी के सदके हम दोनों को मिला दे अल्लाह ने उनकी दुआ को सुना और मक्का तो पहले बक्का नाम से जाना जाता था वहां से 2 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी है वहां पर हाजी लोग जाते हैं ऊंची पहाड़ी पर अल्लाह ने आदम और हव्वा को मिलाया फिर मक्का में आदम और अल्लाह की तरफ से भेजे गए फरिश्तों ने मिलकर काबा शरीफ का निर्माण किया दिन बीतता गया नूह अलैहिस्सलाम का टाइम आया इनको हिंदू धर्म में जलप्लावन मनु बोलते हैं नूह अली सलाम की लोग बात नहीं मानते उस जमाने में बहुत बुराई हो गई थी ईश्वर अल्लाह को लोग नहीं मानते नूह अली सलाम को अल्लाह ने हुक्म दिया नाव बनाने के लिए और उसमें अपने सभी बेटों समेत अल्लाह को मानने वालों के साथ हर तरह के जानवरों में से नाव में लेकर सवार होने के लिए कहा फिर जल प्रलय आया जो लोग कश्ती में थे सभी लोग बच गए बाकी सारी दुनिया खत्म हो गई इस जल प्रलय में काबा शरीफ भी मिट्टी में मिल गया था जो लोग बचे थे फिर से नई दुनिया की शुरुआत हुई फिर से लोगों ने बुराई के उपाय ढूंढ लिया फिर से जिन्हें हम नबियों के पिता कहते हैं इब्राहिम अलैहिस्सला को अल्लाह ने चुना इब्राहिम को यहूदी धर्म में अब्राहम ईसाई धर्म में अब्राहम कहते हैं और हिंदू धर्म में ब्रहमा कहते हैं इब्राहिम की पत्नी का नाम सायरा था ईसाई और यहूदी धर्म में सारा कहता है और हिंदू धर्म में सरस्वती कहते हैं सायरा से एक पुत्र का जन्म हुआ जिनका नाम इसहाक था इसहाक इसराइल में रह गए इब्राहिम की एक और पत्नी थी जिनका नाम हाजरा था इनसे एक और पुत्र का जन्म हुआ इस पुत्र का नाम इस्माइल था ईश्वर की तरफ से हुकुम हाजरा और इस्माइल को मक्का पहले का नाम बक्का में ले जाकर छोड़ दिया जाए काबा शरीफ से 21 मीटर की दूरी पर हाजरा और उनके बेटे इस्माइल को इब्राहिम अली सलाम में ले जाकर छोड़ दिया जब यह लोग वहां पर पहुंचे स्माइल बहुत छोटे थे उनके पैर के रगड़ से जमजम का पानी निकला

कुछ दिनों बाद इनकी जिंदगी मजे में पड़ने लगी और यहां पर पानी की वजह से तिजारती लोग रुकने लगे मक्का चमकने लगा इन्होंने बकरी पालन किया था इससे इनकी जिंदगी कट रही थी


अब चलते हैं इजराइल जिसको फिलिस्तीन और इस्राइल भी बोला जाता हैं यहां पर थी सायरा और इसहाक और इनके साथ इब्राहिम, फिलिस्तीन में मुसलमानों का तीसरा सबसे बड़ा पवित्र स्थल मस्जिदे अक्सा मौजूद है और यहूदी ईसाई के लिए सबसे बड़ा पवित्रा स्थल मस्जिदे अक्सा से सटा हुआ ही है अब भक्तगणों एक बात ठीक से समझ लीजिए ईसाई यहूदी और इस्लाम धर्म के लिए इब्राहिम के बेटे इसहाक की फैमिली से मूसा याकूब दाऊद सुलेमान ईसा मसीह मतलब जितने भी नबी आए सभी इसहाक की फैमिली से थे इन सभी नबी को तीनों धर्मों के लोग मानते हैं और तीनों धर्मों के लोगों के किताब में इनका नाम मौजूद है आज भी तीनों धर्मों के लोग ईसा मसीह के फिर से वापस आने का इंतजार कर रहे हैं और ईसा मसीह के आने के साथ में दुनिया के सामने मेहंदी अली सलाम भी जाहिर होंगे जो मुहम्मद साहब के फैमिली से जाहिर होंगे


अब लौटते हैं मक्का

Unknown ने कहा…


इब्राहिम कुछ सालों बाद सायरा और इसहाक को छोड़कर हाजरा और इस्माइल का हाल-चाल जानने मक्का पहुंचे थे उसी टाइम ईश्वर ने इब्राहिम से अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने के लिए कहा था इब्राहिम अपने बेटे को कुर्बान कर रहे थे तभी उनके बेटे के जगह पर एक जानवर कुर्बान हो गया इसीलिए मुसलमान कुर्बानी करते हैं जो काबा शरीफ नूह की जल प्रलय में मिट्टी में दब गया था उसको ईश्वर के हुकुम से ईश्वर ने जगह दिखाया और फिर से इस्माइल और इब्राहिम काबा शरीफ की दीवार जोड़ी

उधर इजराइल में इसहाक की फैमिली बढ़ती रही इधर मक्का में इस्माइल की फैमिली बढ़ते रहें इसहाक की बाद बाद उनके फैमिली से नबी आते गए लगभग 2000 साल बाद इसहाक की फैमिली से ईसा मसीह नबी बन कर आए


ईसा मसीह के बाद इसहाक की फैमिली से कोई नबी नहीं आए
ईसा मसीह की जाने के 600 साल बाद अब मक्का में इस्माइल की फैमिली से दुनिया के लिए अंतिम नबी मोहम्मद आए

अगर भरोसा नहीं तो इब्राहम टू मोहम्मद फैमिली ट्री Google में सर्च कर लीजिए या फिर आदम टू मोहम्मद ट्री सब समझ में आ जाएगा

मुहम्मद कल्कि अवतार थे या नहीं बहुत सारी बुक मार्केट में मौजूद है Google पर भी सर्च कर ले मिल जाएंगे

अब बेहतर होगा मोहम्मद और इस्लाम पर आप लोग उंगली नहीं उठाएं क्योंकि तो प्रूफ हो गया मोहम्मद ईसा मसीह और अब्राहम के फैमिली से थे और ईश्वर ने पहले ही तय करके इसहाक को इजराइल और इस्माइल को मक्का में रख apna kam karata raha... dosto log jahil the ab ishwar ko itne NabI q bhejne pade har time book padhiye al quran hindi me padhiye sab Jankari mil jaayega...

Unknown ने कहा…

Inasaniyat se bada koi dharam nahi hai na Hindu na Muslim na Sikh na ishai yahi sachchai hai

Unknown ने कहा…

Sahi baat hai bhai

Varun Tiwari ने कहा…

Islam ka MATLAB hai us ishwar ko salam jiska airth hai param pita parmeshwar ko salam

Unknown ने कहा…

We Are Indian💖
Jai Shri ram💖
Bharat Mata ki jai🇮🇳💖

Jai shiv shankar🙏🏻

Pakistan Murdabad

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