अलसी के औषधीय गुण तथा विभिन्न बीमारियों में उपयोग व फायदे



अलसी के बीज के फायदे हृदय रोग के लिए
Flax Seeds for Heart in Hindi
 जटिल समस्या के लिए अचूक औषधि है अलसी
जटिल समस्या के लिए अचूक औषधि है अलसी
अलसी को तीसी भी कहा जाता है यह सम-शीतोष्ण प्रदेशों का पौधा है। रेशेदार फसलों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। इसके रेशे से मोटे कपड़े, डोरी, रस्सी और टाट बनाए जाते हैंऔीइसके बीज से तेल निकाला जाता है। अलसी का तेल खाने के साथ साथवार्निश, रंग, साबुन, रोगन, पेन्ट तैयार करने में किया जाता है। चीन सन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। रेशे के लिए सन को उपजाने वाले देशों में रूस, पोलैण्ड, नीदरलैण्ड, फ्रांस, चीन तथा बेल्जियम प्रमुख हैं और बीज निकालने वाले देशों में भारत, संयुक्त राज्य अमरीका तथा अर्जेण्टाइना के नाम उल्लेखनीय हैं। सन के प्रमुख निर्यातक रूस, बेल्जियम तथा अर्जेण्टाइना हैं।

अलसी भारतवर्ष में भी पैदा होती है। लाल, श्वेत तथा धूसर रंग के भेद से इसकी तीन उपजातियाँ हैं इसके पौधे दो या ढाई फुट ऊँचे, डालियां बंधती हैं, जिनमें बीज रहता है। इन बीजों से तेल निकलता है, जिसमें यह गुण होता है कि वायु के संपर्क में रहने के कुछ समय में यह ठोस अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। विशेषकर जब इसे विशेष रासायनिक पदार्थों के साथ उबला दिया जाता है। तब यह क्रिया बहुत शीघ्र पूरी होती है। इसी कारण अलसी का तेल रंग, वारनिश और छापने की स्याही बनाने के काम आता है। इस पौधे के एँठलों से एक प्रकार का रेशा प्राप्त होता है जिसको निरंगकरलिनेन (एक प्रकार का कपड़ा) बनाया जाता है। तेल निकालने के बाद बची हुई सीठी को खली कहते हैं जो गाय तथा भैंस को बड़ी प्रिय होती है। इससे बहुधा पुल्टिस बनाई जाती है।

आयुर्वेद में अलसी को मंद सुगंधयुक्त, मधुर, बल कारक, किंचित कफवात-कारक, पित्त नाशक, स्निग्ध, पचने में भारी, गरम, पौष्टिक, कामोद्दीपक, पीठ के दर्द ओर सूजन को मिटानेवाली कहा गया है। गरम पानी में डालकर केवल बीजों का या इसके साथ एक तिहाई भाग मुलेठी का चूर्ण मिलाकर, क्वाथ (काढ़ा) बनाया जाता है, जो रक्तअतिसार और मूत्र संबंधी रोगों में उपयोगी कहा गया है।

अलसी असरकारी ऊर्जा, स्फूर्ति व जीवटता प्रदान करता है। अलसी, तीसी, अतसी, कॉमन फ्लेक्स और वानस्पतिक लिनभयूसिटेटिसिमनम नाम से विख्यात तिलहन अलसी के पौधे बागों और खेतों में खरपतवार के रूप में तो उगते ही हैं, इसकी खेती भी की जाती है। इसका पौधा दो से चार फुट तक ऊंचा, जड़ चार से आठ इंच तक लंबी, पत्ते एक से तीन इंच लंबे, फूल नीले रंग के गोल, आधा से एक इंच व्यास के होते हैं। इसके बीज और बीजों का तेल औषधि के रूप में उपयोगी है। अलसी रस में मधुर, पाक में कटु (चरपरी), पित्तनाशक, वीर्यनाशक, वात एवं कफ वर्घक व खांसी मिटाने वाली है। इसके बीज चिकनाई व मृदुता उत्पादक, बलवर्घक, शूल शामक और मूत्रल हैं। इसका तेल विरेचक (दस्तावर) और व्रण पूरक होता है।

अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में लगाकर किया जाता है। इसके साथ यह चोट, मोच, जोड़ों की सूजन, शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने से शीघ्र लाभ पहुंचाती है। एंटी फ्लोजेस्टिन नामक इसका प्लास्टर डॉक्टर भी उपयोग में लेते हैं। चरक संहिता में इसे जीवाणु नाशक माना गया है। यह श्वास नलियों और फेफड़ों में जमे कफ को निकाल कर दमा और खांसी में राहत देती है।

इसकी बड़ी मात्रा विरेचक तथा छोटी मात्रा गुर्दो को उत्तेजना प्रदान कर मूत्र निष्कासक है। यह पथरी, मूत्र शर्करा और कष्ट से मूत्र आने पर गुणकारी है। अलसी के तेल का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल आता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुण दर्शाता है। अलसी के काढ़े से एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है। उदर रोगों में इसका तेल पिलाया जाता हैं।

तनाव के क्षणों में शांत व स्थिर बनाए रखने में सहायक है। कैंसर रोधी हार्मोन्स की सक्रियता बढ़ाता है। अलसी इस धरती का सबसे शक्तिशाली पौधा है। कुछ शोध से ये बात सामने आई कि इससे दिल की बीमारी, कैंसर, स्ट्रोक और मधुमेह का खतरा कम हो जाता है। इस छोटे से बीच से होने वाले फायदों की फेहरिस्त काफी लंबी है,​​ जिसका इस्तेमाल सदियों से लोग करते आए हैं। इसके रेशे पाचन को सुगम बनाते हैं, इस कारण वजन नियंत्रण करने में अलसी सहायक है। रक्त में शर्करा तथा कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है। जोड़ों का कड़ापन कम करता है। प्राकृतिक रेचक गुण होने से पेट साफ रखता है। हृदय संबंधी रोगों के खतरे को कम करता है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है। त्वचा को स्वस्थ रखता है एवं सूखापन दूर कर एग्जिमा आदि से बचाता है। बालों व नाखून की वृद्धि कर उन्हें स्वस्थ व चमकदार बनाता है। इसका नियमित सेवन रजोनिवृत्ति संबंधी परेशानियों से राहत प्रदान करता है। मासिक धर्म के दौरान ऐंठन को कम कर गर्भाशय को स्वस्थ रखता है। अलसी का सेवन त्वचा पर बढ़ती उम्र के असर को कम करता है। अलसी का सेवन भोजन के पहले या भोजन के साथ करने से पेट भरने का एहसास होकर भूख कम लगती है। प्राकृतिक रेचक गुण होने से पेट साफ रख कब्ज से मुक्ति दिलाता है। 

अलसी कैसे काम करती है
अलसी के चमत्कार को दुनिया ने माना है, आधुनिक युग में स्त्रियों की यौन-इच्छा, कामोत्तेजना, चरम-आनंद विकार, बांझपन, गर्भपात, दुग्धअल्पता की महान औषधि है। स्त्रियों की सभी लैंगिक समस्याओं के सारे उपचारों से सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी। (व्हाई वी लव और ऐनाटॉमी ऑफ लव) की महान लेखिका, शोधकर्ता और चिंतक हेलन फिशर भी अलसी को प्रेम, काम-पिपासा और लैंगिक संसर्ग के लिए आवश्यक सभी रसायनों जैसे डोपामीन, नाइट्रिक ऑक्साइड, नोरइपिनेफ्रीन, ऑक्सिटोसिन, सीरोटोनिन, टेस्टोस्टिरोन और फेरोमोन्स का प्रमुख घटक मानती है।

सबसे पहले तो अलसी आप और आपके जीवनसाथी की त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनायेगी। आपके केश काले, घने, मजबूत, चमकदार और रेशमी हो जायेंगे। अलसी आपकी देह को ऊर्जावान और मांसल बना देगी। शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी गहेगी, न क्रोध आयेगा और न कभी थकावट होगी। मन शांत, सकारात्मक और दिव्य हो जायेगा। अलसी में ओमेगा-3 फैट, आर्जिनीन, लिगनेन, सेलेनियम, जिंक और मेगनीशियम होते हैं जो स्त्री हार्मोन्स, टेस्टोस्टिरोन और फेरोमोन्स (आकर्षण के हार्मोन) के निर्माण के मूलभूत घटक हैं। टेस्टोस्टिरोन आपकी कामेच्छा को चरम स्तर पर रखता है।

अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट और लिगनेन जननेन्द्रियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं, जिससे कामोत्तेजना बढ़ती है। इसके अलावा ये शिथिल पड़ी क्षतिग्रस्त नाड़ियों का कायाकल्प करती हैं जिससे मस्तिष्क और जननेन्द्रियों के बीच सूचनाओं एवं संवेदनाओं का प्रवाह दुरुस्त हो जाता है। नाड़ियों को स्वस्थ रखने में अलसी में विद्यमान लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटीन, फोलेट, कॉपर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस तरह आपने देखा कि अलसी के सेवन से कैसे प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, दिव्य सम्भोग का दौर चलता है, देह के सारे चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर शिव और उमा की रति-क्रीड़ा का उत्सव बन जाता है, समाधि का रूप बन जाता है।
रिसर्च और वैज्ञानिक आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों के रहस्य को जानने और मानने लगे हैं। अलसी के बीज के चमत्कारों का हाल ही में खुलासा हुआ है कि इनमें 27 प्रकार के कैंसररोधी तत्व खोजे जा चुके हैं। अलसी में पाए जाने वाले ये तत्व कैंसररोधी हार्मोन्स को प्रभावी बनाते हैं, विशेषकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर व महिलाओं में स्तन कैंसर की रोकथाम में अलसी का सेवन कारगर है। दूसरा महत्वपूर्ण खुलासा यह है कि अलसी के बीज सेवन से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा तीव्रतर होती है। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा के उपचार में उपयोगी है।

अलसी का सेवन कैसे करे
अलसी का सेवन कैसे करे
  • अलसी को धीमी आँच पर हल्का भून लें। फिर मिक्सर में पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख लें। रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ लें। इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखें। अलसी सेवन के दौरान पानी खूब पीना चाहिए। इसमें फायबर अधिक होता है, जो पानी ज्यादा माँगता है।
  • हमें प्रतिदिन 30 – 60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये, 30 ग्राम आदर्श मात्रा है। अलसी को रोज मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिये. डायबिटीज के रोगी सुबह शाम अलसी की रोटी खायें।
  • कैंसर में बुडविग आहार-विहार की पालना पूरी श्रद्धा और पूर्णता से करना चाहिये। इससे ब्रेड, केक, कुकीज, आइसक्रीम, चटनियाँ, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं।
  • अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।
  • पथरी, सुजाक एवं पेशाब की जलन में अलसी का फांट पीने से रोग में लाभ मिलता है। अलसी के कोल्हू से दबाकर निकाले गए (कोल्ड प्रोसेस्ड) तेल को फ्रिज में एयर टाइट बोतल में रखें। स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द में यह तेल पंद्रह मि.ली. मात्रा में सुबह-शाम पीने से काफी लाभ मिलेगा।
  • अलसी के साबुत बीज कई बार हमारे शरीर से पचे बिना निकल जाते हैं इसलिए इन्हें पीसकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। 20 ग्राम (1 टेबलस्पून) अलसी पाउडर को सुबह खाली पेट हल्के गर्म पानी के साथ लेने से शुरुआत करें। आप इसे फल या सब्जियों के ताजे जूस में मिला सकते हैं या अपने भोजन में ऊपर से बुरक कर भी खा सकते हैं।
  • दिन भर में 2 टेबलस्पून (40 ग्राम) से ज्यादा अलसी का सेवन न करें।
  • साबुत अलसी लंबे समय तक खराब नहीं होती लेकिन इसका पाउडर हवा में मौजूद ऑक्सीजन के प्रभाव में खराब हो जाता है, इसलिए ज़रूरत के मुताबिक अलसी को ताज़ा पीसकर ही इस्तेमाल करें। इसे अधिक मात्रा में पीसकर न रखें। बहुत ज्यादा सेंकने या फ्राई करने से अलसी के औषधीय गुण नष्ट हो सकते हैं और इसका स्वाद बिगड़ सकता है।
  • अलसी खाने से कुछ लोगों को शुरुआत में कब्ज हो सकती है। ऐसा होने पर पानी ज्यादा पिएं। अलसी खून को पतला करती है इसलिए यदि आपको ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो इसके सेवन से पहले डॉक्टर से परामर्श कर लें।
  • अलसी के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़नेवाले प्रभावों पर हालांकि कोई बड़ी रिसर्च नहीं हुई है लेकिन पारंपरिक ज्ञान में Flax seed को बहुत गुणकारी माना गया है। इसके उपयोग से कोलेस्ट्रॉल के लेवल में कमी आना देखा गया है।
अलसी अलसी के लाभ

अलसी के बीज के 20 फायदे, अलसी कैसे खायें (अलसी के लाभ)
  • अगर आप चाहती हैं की आपके त्वचा स्वस्थ, चिकनी और चमकदार रहे तो, रोज़ 1 से 2 चम्मच अलसी अपने रूटीन में शामिल करें। इसमें पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा में कोलेजन प्रोडक्शन और नई सेल्स के बनने को बढ़ावा देते हैं जिससे त्वचा पर उम्र के साथ होने वाले बदलाव कम दिखाई देते हैं।
  • अलसी आपकी देह को ऊर्जावान, बलवान और मांसल बना देगी। शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी गहेगी, न क्रोध आयेगा और न कभी थकावट होगी। मन शांत, सकारात्मक और दिव्य हो जायेगा।
  • अलसी के बीज में विटामिन ई बालों की जड़ों और सिर की त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं और झड़ते हुए बालों और गंजेपन को रोकने में मदद करते हैं। यह सोरायसिस (Psoriasis) से संबंधित बालों के झड़ने से उबरने में भी लोगों की मदद कर सकते हैं।
  • अलसी पुरूष को कामदेव तो स्त्रियों को रति बनाती है, अलसी बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्र स्खलन व स्तम्भन दोष में बहुत लाभदायक है। अर्थात स्त्री-पुरुष की समस्त लैंगिक समस्याओं का एक-सूत्रीय समाधान है। इस तरह आपने देखा कि अलसी के सेवन से कैसे प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, जबरदस्त अश्वतुल्य स्तंभन होता है, जब तक मन न भरे सम्भोग का दौर चलता है, देह के सारे चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है, समाधि का रूप बन जाता है।
  • अलसी में ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और कोलोन कैंसर से बचाने का गुण पाया जाता है। इसमें पाया जाने वाला लिगनन कैंसर से बचाता है। यह हार्मोन के प्रति संवेदनशील होता है और ब्रेस्ट कैंसर के ड्रग टामॉक्सीफेन पर असर नहीं डालता है।
  • अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, आर्जिनीन एवं लिगनेन जननेन्द्रियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं, जिससे शक्तिशाली स्तंभन तो होता ही है साथ ही उत्कृष्ट और गतिशील शुक्राणुओं का निर्माण होता है। इसके अलावा ये शिथिल पड़ी क्षतिग्रस्त नाड़ियों का कायाकल्प करते हैं जिससे सूचनाओं एवं संवेदनाओं का प्रवाह दुरुस्त हो जाता है। नाड़ियों को स्वस्थ रखने में अलसी में विद्यमान लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटीन, फोलेट, कॉपर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ओमेगा-3 फैट के अलावा सेलेनियम और जिंक प्रोस्टेट के रखरखाव, स्खलन पर नियंत्रण, टेस्टोस्टिरोन और शुक्राणुओं के निर्माण के लिए बहुत आवश्यक हैं। कुछ वैज्ञानिकों के मतानुसार अलसी लिंग की लंबाई और मोटाई भी बढ़ाती है।
  • अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, जिंक और मेगनीशियम आपके शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टिरोन हार्मोन और उत्कृष्ट श्रेणी के फेरोमोन ( आकर्षण के हार्मोन) स्रावित होंगे। टेस्टोस्टिरोन से आपकी कामेच्छा चरम स्तर पर होगी। आपके साथी से आपका प्रेम, अनुराग और परस्पर आकर्षण बढ़ेगा। आपका मनभावन व्यक्तित्व, मादक मुस्कान और शटबंध उदर देख कर आपके साथी की कामाग्नि भी भड़क उठेगी।
  • आप पिसे हुए अलसी के बीज का सेवन दही में डालकर कर सकते हैं। अलसी के फायदे लेने के लिए आप अलसी के तेल का इस्तेमाल आप खाद्य समाग्री को पकाने के लिए कर सकते हैं।
  • आपका हर्बल चिकित्सक आपकी सारी सेक्स सम्बंधी समस्याएं अलसी खिला कर ही दुरुस्त कर देगा क्योंकि अलसी आधुनिक युग में स्तंभनदोष के साथ साथ शीघ्र स्खलन, दुर्बल कामेच्छा, बांझपन, गर्भपात, दुग्ध अल्पता की भी महान औषधि है। सेक्स संबन्धी समस्याओं के अन्य सभी उपचारों से सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी। बस 30 ग्राम रोज लेनी है।
  • यदि आपको डायबिटीज है, तो किसी भी तरह से अलसी की 25 ग्राम मात्रा को अपनी डाइट में शामिल कर लें। आप चाहें तो इस मात्रा को कुछ भागों में बाँट सकते हैं। और फिर दिनभर में किसी भी तरह से इसका सेवन कर सकते हैं।
  • सबसे पहले तो अलसी आप और आपके जीवनसाथी की त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनायेगी। आपके केश काले, घने, मजबूत, चमकदार और रेशमी हो जायेंगे।
    तेल तड़का छोड़ कर, नित घूमन को जाय।
    मधुमेह का नाश हो, जो जन अलसी खाय।।
    नित भोजन के संग में, मुट्ठी अलसी खाय।
    अपच मिटे, भोजन पचे, कब्जियत मिट जाये।।
    घी खाये मांस बढ़े, अलसी खाये खोपड़ी।
    दूध पिये शक्ति बढ़े, भुला दे सबकी हेकड़ी।।
    धातुवर्धक, बल-कारक, जो प्रिय पूछो मोय।
    अलसी समान त्रिलोक में, और न औषध कोय।।
    जो नित अलसी खात है, प्रात पियत है पानी।
    कबहुं न मिलिहैं वैद्यराज से, कबहुँ न जाई जवानी।।
    अलसी तोला तीन जो, दूध मिला कर खाय।
    रक्त धातु दोनों बढ़े, नामर्दी मिट जाय।।

     अलसी खाने के फायदे और नुकसान

    अलसी खाने के फायदे और नुकसान
    • अलसी का सेवन जोड़ों के दर्द से दिलाये राहत (Flaxseed for joint pain in Hindi Flaxseed) अलसी जोड़ों की हर तकलीफ पर असरदार है। इसे खाने से खून पतला हो जाता है, जिसकी वजह से पैरों में रक्त का प्रवाह सही ढंग से होता है और दर्द जैसी समस्याएँ दूर हो जाती हैं। जोड़ों के दर्द के लिए अलसी के पाउडर को सरसों के तेल के साथ गर्म करें और ठंडा होने के बाद जोड़ों पर लगा लें। अलसी का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद है। इसमें ओमे-3 एसिड पाया जाता है, जो कि दिल के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। एक चम्मच अलसी में 1.8 ग्राम ओमेगा-3 पाया जाता है। इसके प्रयोग से जुड़ें फायदों और नुकसान भी है।
    • अलसी के औषधीय गुण मधुमेह के लिए - Flaxseed for Diabetes in Hindi अलसी के दैनिक सेवन से टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर में सुधार लाया जा सकता है। एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग 2 महीनो  के लिए अलसी के लीज के सप्लीमेंट का सेवन करते हैं, उनके रक्त-शर्करा के स्तर पर सकरात्मक प्रभाव पड़ता है।
    • अलसी के तेल की मालिश से करें बालों की समस्याओं का समाधान - Flaxseed for Hair problem in Hindi Flaxseed अलसी में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड की उच्च मात्रा बालों के लोच में वृद्धि करता है और उनके टूटने की संभावना कम करता है। अलसी के फायदे खोपड़ी में सीबम के उत्पादन को प्रोत्साहित करते हैं, इस प्रकार फलक और रूसी को रोकते हैं।
    • अलसी के फायदे कैंसर के लिए - Flaxseeds for Cancer in Hindi अलसी में एंटीऑक्सीडेंट कैंसर से सुरक्षा प्रदान करते हैं। हाल के अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अलसी स्तन, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर के विकास के जोखिम को कम कर सकते हैं। अलसी के बीज का पाउडर और अलसी का तेल दोनों ही अल्फा-लिनोलेनिक एसिड, ओमेगा -3 फैटी एसिड से समृद्ध है जो कैंसर के खिलाफ फायदेमंद है।
    • अलसी के फायदे बनायें त्वचा सुन्दर और चमकदार – Flaxseed for skin in Hindi Flaxseed अलसी और इसके तेल में कई त्वचा के अनुकूल पोषक तत्व होते हैं जो त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। लिग्नान और ओमेगा 3 फैटी एसिड के उच्च स्तर, आपके पेट को साफ रखते है और त्वचा रोगों को रोकते हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड त्वचा कोशिकाओं के स्वस्थ विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। अलसी के फायदे में इसकी अलसी की नियमित खपत, त्वचा की जलन, चकत्ते, सूजन और लालिमा को कम कर सकती है। अलसी में आवश्यक फैटी एसिड त्वचा को हाइड्रेटेड और मॉइस्चराइज करते रहें, इस प्रकार मुँहासे और छालरोग जैसी त्वचा की समस्याओं को रोकते है।
    • अस्थमा वालों के लिए लाजवाब - सर्दी, खांसी, जुकाम में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। अस्थमा में यह चाय विशेष उपयोगी है। अस्थमा वालों के लिए एक और नुस्खा भी है।
    • एलर्जी का कारण - अलसी का अधिक मात्रा में सेवन हानिकारक प्रतिकूल प्रभाव का कारण भी बन सकता है। इसके कारण पेट दर्द, मितली आना और उलटी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, अलसी को खाने से सांस लेने में समस्या और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत हो सकती है।
    • कफ पिघलाने में मददगार - अलसी के बीजों का मिक्सी में तैयार किया गया दरदरा चूर्ण 15 ग्राम, मुलेठी पांच ग्राम, मिश्री 20 ग्राम, आधे नींबू के रस को उबलते हुए 300 ग्राम पानी में डालकर बर्तन को ढक दें। इस रस को तीन घंटे बाद छानकर पिएं। इससे गले व श्वास नली में जमा कफ पिघल कर बाहर निकल जाएगा।
    • गैस की समस्या बढ़ जाती है - अलसी में फाइबर ज्यादा मात्रा में पाये जाने के कारण कई बार यह पेट में गैस या ऐंठन जैसी समस्या होने का भी कारण होती है। कई बार इसे बिना तरल पदार्थ के लेने से कब्ज की भी समस्या हो जाती है।
    • घाव भरने में देरी - यदि आप अलसी का सेवन करते हैं और आपको कोई चोट लग जाती है तो अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा -3 खून जमने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। ऐसे में आपके कोई चोट लगने पर खून बहना रुक नहीं नहीं पाता।
    • पेट की समस्याएं - अलसी या कोई भी फ्लैक्सीड्स अधिक मात्रा में खाना आपको नुकसान पहुंचा सकता है। इसी तरह अलसी में मौजूद लैक्सेटिव दस्त, सीने में जलन और बदहजमी जैसी पेट की समस्याएं भी बना सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप प्रतिदिन 30 ग्राम अलसी से ज्यादा सेवन न करें।
    • मधुमेह को नियंत्रित रखता है - अलसी का सेवन मधुमेह के स्तर को नियंत्रित रखता है। अमेरिका में डायबिटीज से ग्रस्त लोगों पर रिसर्च से यह सामने आया है कि अलसी में मौजूद लिगनन को लेने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।
    • सेक्स समस्या के लिए अचूक औषधि है अलसी  - अलसी में पाए जाने वाले ये तत्व कैंसर रोधी हार्मोन्स को प्रभावी बनाते हैं, विशेषकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर व महिलाओं में स्तन कैंसर की रोकथाम में अलसी का सेवन कारगर है।
    • हृदय से जुड़ी बीमारियां - अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा-3 जलन को कम करता है और हृदय गति को सामान्य रखने में मददगार होता है। ओमेगा-3 युक्त भोजन से धमनियां सख्त नहीं होती है। साथ ही यह श्वेत रक्त कणिका को ब्लड धमनियों की आंतरिक परत पर चिपका देता है।
    सेक्स संबन्धी समस्याओं के उपचारों में सर्वश्रेष्ठ है अलसी / अलसी का सेवन कैसे करे
    • हर्बल चिकित्सक में सेक्स सम्बंधी सारी समस्याएं अलसी दुरुस्त कर देगा क्योंकि अलसी आधुनिक युग में स्तंभनदोष के साथ साथ शीघ्रस्खलन, दुर्बल कामेच्छा, बांझपन, गर्भपात, दुग्धअल्पता की भी महान औषधि है। सेक्स संबन्धी समस्याओं के अन्य सभी उपचारों से सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी। बस 30 ग्राम रोज लेनी है।
    • अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, आर्जिनीन एवं लिगनेन जननेन्द्रियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं, जिससे शक्तिशाली स्तंभन तो होता ही है साथ ही उत्कृष्ट और गतिशील शुक्राणुओं का निर्माण होता है। इसके अलावा ये शिथिल पड़ी क्षतिग्रस्त नाड़ियों का कायाकल्प करते हैं जिससे सूचनाओं एवं संवेदनाओं का प्रवाह दुरुस्त हो जाता है। नाड़ियों को स्वस्थ रखने में अलसी में विद्यमान लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटीन, फोलेट, कॉपर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ओमेगा-3 फैट के अलावा सेलेनियम और जिंक प्रोस्टेट के रखरखाव, स्खलन पर नियंत्रण, टेस्टोस्टिरोन और शुक्राणुओं के निर्माण के लिए बहुत आवश्यक हैं। कुछ वैज्ञानिकों के मतानुसार अलसी लिंग की लंबाई और मोटाई भी बढ़ाती है।
    • अलसी के सेवन से प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, जबर्दस्त अश्वतुल्य स्तंभन होता है, जब तक मन न भरे सम्भोग का दौर चलता है, देह के सारे चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है, समाधि का रूप बन जाता है।
    • अलसी बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्रस्खलन व स्थम्भन दोष में बहुत लाभदायक है।
    • महिलाओं में योनि शुष्कता की समस्या आम होती है। यह समस्या साधारणतः रजोनिवृत्ति के समय शुरू होती है। इस समस्या के कारण शारीरिक संबंध स्थापित करने में दर्द होता है या पूर्ण संतुष्टि नहीं मिल पाती है। वैसे तो इसके लिए बाजार में कई तरह के लेपमिल जाते हैं। लेकिन प्राकृतिक उपचार करना ही सबसे सुरक्षित उपाय होता है। अलसी का बीज योनि शुष्कता की समस्या से निजात दिलाने में बहुत मदद करती है। अलसी का बीज फाइटोएस्ट्रोजेन और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का मूल स्रोत होता है। जिसके कारण यह शरीर में एस्ट्रोजेन के स्तर को बढ़ाने और योनि के शुष्कता को कम करने में बहुत मदद करती है।
    • अलसी के नियमित सेवन से स्त्रियों के स्तनों में वृद्धि होती है। गर्भवती स्त्री के स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए भी इसे खाने की सलाह दी जाती है। साथ ही अलसी के बीज महिलाओं में सेक्स के प्रति दिलचस्प‍ी जाग्रत करते हैं। यौनांगों में जलन और योनि संकुचन जैसी बीमारियों के लिए तो इसे अचूक औषधि माना गया है। इसके अलावा मासिक धर्म से संबंधित परेशानियों में भी इसके द्वारा इलाज किया जाता है। अलसी के लगातार सेवन से चेहरे पर भी कांति आती है।
    • संक्षेप में हम कह सकते है कि अलसी महिलाओं में सेक्स की इच्छा जगाती है, अलसी सेक्स संबन्धी समस्याओं में सर्वश्रेष्ठ है, अलसी सेक्स संबन्धी समस्याओं के उपचारों में सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है, अलसी शीघ्र पतन को दूर करने सावधिक असरदार है, गुप्त रोगो क़ी चमत्कारी दवा है भी अलसी है, सेक्स संबन्धी समस्याओं के उपचारों अलसी से अंत में अलसी सेक्स की हर समस्या का अंत करने में सहायक है।
    अलसी के बीज के 20 फायदे, अलसी कैसे खायें
    Alsi ke Fayde aur Alsi ka sevan Kaise Karen
    • अलसी किडनी संबंधित समस्याओं में भी लाभकारी है। डायबिटीज़, कैंसर, ल्यूपस, और आर्थ्राइटिस आदि रोगों में भी इसके प्रभावों पर रिसर्च की जा रही है। 
    • अलसी के आयुर्वेदिक फायदे : आयुर्वेद में अलसी को मंदगंधयुक्त, मधुर, बल कारक, किंचित कफवात-कारक, पित्तनाशक, स्निग्ध, पचने में भारी, गरम, पौष्टिक, कामोद्दीपक, पीठ के दर्द ओर सूजन को मिटाने वाली कहा गया है। 
    • अलसी के बीज ( Flaxseeds ) रक्‍तचाप अर्थात ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने, हाइपरटेंशन के रोगियों के लिए, ब्लड शुगर कंट्रोल में अत्यंत लाभदायक है। 
    • अलसी के बीज Omega 3 fatty acids का बहुत अच्छा स्रोत माने जाते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की कैप्सूल्स का यह अच्छा विकल्प भी है। डाईटिशियन और डाक्टर भी आजकल इसे खाने की सलाह देते है। 
    • अलसी के बीज एंटी बैकटिरियल, एंटी फंगल और एंटी वायरल होते है। इनका उपयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक-क्षमता बढाता है। 
    • अलसी के बीज और इसके तेल (जिसे flaxseed oil या linseed oil भी कहते हैं) में Alpha-linolenic Acid (ALA) नामक तत्व होता है जो एक प्रकार का ओमेगा-3 फ़ैटी एसिड (omega-3 fatty acid) है और इसमें चिकित्सकीय गुण होते हैं। 
    • अलसी के बीज का उपयोग खान-पान में पूर्व सभ्यता काल से हो रहा है। भारत में भी यह आयुर्वेदिक उपचारों, भोज्य पदार्थ बनाने में प्रयुक्त होता रहा है। विज्ञान की नई खोजो से पता चला है कि अलसी कई प्रकार के रोगों और सामान्य स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। दुनिया के अनेक देशों में अलसी या Flaxseed लोकप्रिय और स्वास्थ्यप्रद आहार के रूप में जाना जाता है। 
    • अलसी के बीज में आयरन, जिंक, पोटैशियम, फोस्फोरस, कैल्शियम, विटामिन सी, विटामिन ई, कैरोटीन तत्व पाए जाते हैं। 
    • अलसी के बीज लिग्नांस का बहुत अच्छा स्रोत है, जो कि एस्ट्रोजन और एंटी ओक्सिडेंट गुणों से भरपूर है। इसी वजह से यह औरतों के हार्मोनल बैलेंस के लिए बहुत सहायक होता है। 
    • अलसी बीज का सेवन त्वचा को स्वस्थ और स्निग्ध बनाता है, नाखून को मजबूत और चिकना बनाता है, नेत्र-दृष्टि बरक़रार रखता है, बालों को टूटने से रोकता है और डैंड्रफ भी दूर करता है। यह त्वचा की बीमारियों एक्जिमा, सोराइसिस के उपचार में भी कारगर माना गया है। 
    • अलसी में Poly Unsaturated fatty acids होता है जो कि विशेष रूप से ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और कोलन कैंसर से बचाव करता है। 
    • इन बीजों में पाए जाने वाला अल्फा-लिनोलेनिक एसिड जोड़ो की बीमारी आर्थराइटिस के लिए और सभी तरह के जॉइंट पेन में बहुत राहत दिलाता है। 
    • इन्हें खाली खाएं, हल्का भून कर खाएं अथवा सलाद या दही में मिलाकर खाएं, चाहे तो जूस में मिलाकर पियें। यह जूस के स्वाद को बिना बदले उसकी पोषकता कई गुना बढ़ा देगा। 
    • इसके बीजों को गरम पानी में उबालकर या इसके साथ एक तिहाई भाग मुलेठी का चूर्ण मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से खूनी दस्त और और मूत्र संबंधी रोगों में लाभ होता है। 
    • ओमेगा-3 फ़ैटी एसिड हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। ये सबसे अधिक मात्रा में समुद्री मछलियों से प्राप्त होता है लेकिन शाकाहारी लोग पर्याप्त मात्रा में अलसी का सेवन करके इसके लाभ प्राप्त कर सकते हैं। माना जाता है कि अलसी हमारे दिल को स्वस्थ रखती है। 
    • गर्भवती स्त्रियों और स्तनपान कराने वाली माताओं को अलसी का सेवन अवश्य करना चाहिए। आज भी शहरों और कस्बों के कई परिवारों में ऐसी स्त्रियों को अलसी के बने लड्डू और अन्य भोज्य पदार्थ दिए जाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे पूर्वज अलसी का महत्व अच्छी तरह जानते थे पर हम इन्हें भुलाकर सिर्फ दवाइयां खाने में विश्वास करने लगे। 
    • महिलाओं में रजो-निवृत्ति के दौरान होने वाली समस्याओं में भी अलसी के उपयोग से राहत मिलती है। यह देखा गया है कि माइल्ड मेनोपॉज़ की समस्या में रोजाना लगभग 40 ग्राम पिसी हुई अलसी खाने से वही लाभ प्राप्त होते हैं जो हार्मोन थैरेपी से मिलते हैं। 
    • यह बीज फाइबर से भरपूर होते हैं अतः यह वजन घटाने में भी बहुत कारगर है। 
    • यह बीज विटामिन बी काम्प्लेक्स, मैगनिशियम, मैगनीस तत्वों से भरपूर है जोकि कोलेस्ट्रोल को कम करते है।
    अलसी खाने के क्या हैं फायदे
    • अलसी के बीज ही नहीं, इसका तेल भी बहुत गुणकारी है। इसके तेल से चेहरे पर मसाज करने से चेहरे पर चमक आती है।
    • अलसी में ओमेगा 3 भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से शरीर में खून का संचार सही बना रहता है और थक्के भी नहीं जमते हैं।
    • अलसी में बहुत फाइबर भी होता है जो कोलेस्ट्रोल को नियंत्रण में रखता है।
    • अलसी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट बढ़ती उम्र के लक्षणों को दिखने नहीं देते।
    • अलसी वजन कम करने में भी मददगार है।
    • इतना ही नहीं बल्कि अलसी अस्थमा, डायबिटीज और हड्डियों की प्रॉब्लम से लड़ने में मदद करता है।
    • कोलेस्ट्रोल के साथ-साथ अलसी खून में शुगर लेवल को भी कंट्रोल में रखता है।
    अलसी के नुकसान - Flax-seed Side Effects in Hindi
    • अलसी के बीज का सेवन जादा करने से गैस की समस्या बढ़ जाती है।
    • अलसी का अधिक मात्रा में सेवन एलर्जिक रिऐक्शन का कारण भी बन सकता है। इसके कारण पेट दर्द, मितली आना और उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं,  इसके सेवन से सांस लेने में समस्या और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत हो सकती है।
    • अलसी के बीज का उच्च मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह आंतों में रुकावट पैदा कर सकता है।
    • अलसी में फाइबर ज्यादा मात्रा में पाये जाने के कारण कई बार यह पेट में गैस या ऐंठन जैसी समस्या होने का भी कारण होती है। कई बार इसे बिना तरल पदार्थ के लेने से कब्ज की भी समस्या हो जाती है।
    • अलसी में साइनाइड यौगिकों की थोड़ी मात्रा होती है, जिससे शरीर पर न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, इसका बड़ी मात्रा में उपभोग नहीं किया जाना चाहिए।
    • क्योंकि अलसी के बीज में उच्च मात्रा में फाइबर पाया जाता है, स्वास्थ्य उद्देश्यों के लिए अलसी के बीज का सेवन करते समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए अन्यथा यह जठरांत्र (gastrointestinal) पर दुष्प्रभाव डाल सकते हैं।
    • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अलसी के बीज की खुराक लेने से बचना चाहिए।
    • जिन लोगों को निम्न रक्तचाप हो, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे उनका ब्लडप्रेशर और लो हो जाता है।
    • मधुमेह की  दवा के साथ अगर आप अलसी के बीज का सेवन करते है तो अपने ब्लड में शर्करा की जांच करते रहें।
    अलसी का पौधा 
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