बैंकिंग भ्रष्‍टाचार से रूबरू : सन 2005 से पूर्व की नोट के सम्‍बन्‍ध में



आखिरकार मुझे बैंकिंग अव्यवस्था से दो चार होना पड़ा, जिसके दोषी पूर्ण रूपेण बैंक के अधिकारी/कर्मचारी गण है। कैश डिपॉजिट मशीन मे 2005 से पहले की वो जो जमा नहीं हो सकी उसे जमा करने के लिये भाभी जी आज 11 बजे स्टेट बैंक की लूकरगंज की शाखा पर गई। करीब 1 बजे नम्बर आया तो कैशियर ने मशीन में नोट डाला और नोट मशीन ने स्वीकार नहीं किया तब कैशियर बोला कि यह नोट 2005 से पहले की है और यह शाखा में जमा नही होगी इसे जमा करने के लिये आरबीआई कानपुर में जाना होगा। भाभी जी भी वापस आ गई।  


करीब 4 बजे कोर्ट से घर आया तो मुझे घटना का पता चला और मैंने आबीआई की गाईडलाइस खोजी और आरबीआई की मुम्‍बई शाखा मे फोन करने लूकरगंज ब्रांच की शिकायत की, आरबीआई की ओर से मुझे कहा गया कि हमने 1 दिसम्बर को इस सम्बन्ध में दिशानिर्देश जारी कर दिये है।

तत्पश्चात आरबीआई के दिशानिर्देश की कॉपी लेकर मैं भाभी जी के साथ बैंक 4 बजकर 30 मिनट पर पहुँचा। बैंक का गेट बंद था, मैंने गार्ड को बुलाया और कहा कि मैनेजर से कहो कि एक वकील साहब जरूरी काम से आये है। गार्ड गया और लौट कर आया तो बोला कि मैनेजर साहब ने कहा है कि व्यस्त हूँ कल मिलेंगे, मैंने भी गार्ड से कहा कि मैनेजर से बोल दो कि कल एफआईआर होने के बाद ही मुलाकात होगी और यह सुनकर फिर से गार्ड मैनेजर के पास गया और वापस आकर गेट खोल दिया।

मेरे अंदर गया और मैनेजर से कहा कि आरबीआई की गाइडलांइस 1 दिसम्बर को आ चुकी है उसके बाद भी आप लोग घंटों लाइन में लगे ग्राहकों को गलत जानकारी देकर वापस कर दे रहे हो, इसका क्या औचित्य है क्या आपके ऊपर आबीआई की गाईडलांइस लागू नहीं होती है। मैनेजर तपाक से बोले कि बहुत कानून जानते हो कितने बड़े वकील हो जाओ करवा दो एफआईआर, मैं किसी से डरता नहीं हूँ, वकील गुंडे होते ही है, कही भी गुंडाई करने चले आते है।

उसके बाद मैंने कहा जितना बड़ा वकील हूँ आपके लिये पर्याप्त हूँ, और आप लोगों की अकर्मण्यता मुझे जैसे वकीलों को आप जैसे पढ़े लिखे अधिकारियों को नियम कायदे समझाने के लिये आना पड़ता है। अगर आपके द्वारा तत् समय गलत जानकारी देकर पैसा जमा करने से इंकार न किया गया हो तो मुझे पैसे जमा कर लिये गये होते तो मुझे यहाँ आने की जरूरत न पड़ती। वास्तव में आप जैसों के कारण ही जनता ज्यादा परेशान है।

मेरे और मैनेजर की मध्य वाद-विवाद के बीच में, बैंक कैशियर द्वारा बिना गाईडलांइस पढ़े सन 2005 की नोटों को सायंकाल 4 बज कर 45 मिनट पर जमा कर लिया, अर्थात आरबीआई के गाईडलांइस की जानकारी होने के बाद भी ग्राहकों को जानबूझकर गुमराह किया जा रहा है।

इस घटना से मुझे यही प्रतीत हो रहा है कि बैंक कमियों द्वारा ग्राहकों को जागरूकता के अभाव में जानबूझकर परेशान किया जा रहा है और ग्राहकों की भीड़ को कम करके अपने परिचितों के काले धन को सफेद किया जा रहा है।

नोट - आपके पास भी वर्ष 2005 से पूर्व की नोट हो तो उसे आपने बैंक के अपने खाते में जमा करें। इसे बैंक में जमा करने के लिये दिसम्बर 2016 तक कोई रोक नहीं है। किसी को भी कम दाम पर इसे बदलने के लिये न दे।



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1 comment:

Ajit Mishra said...

It's more useful to us please attach rbi guidelines.