भारतीय राजव्यवस्था के महत्वपूर्ण प्रश्न (क्रमांक सहित, व्याकरण एवं वर्तनी शुद्ध)
‘पंथनिरपेक्ष’, ‘समाजवादी’ तथा ‘अखंडता’ शब्द संविधान की उद्देशिका में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए।
‘वन्दे मातरम्’ के रचयिता बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय हैं। यह गीत सर्वप्रथम 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया था।
15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक भारत ब्रिटिश राष्ट्रमंडल का एक अधिराज्य (Dominion) था।
26 जनवरी 2002 से भारतीय ध्वज संहिता, 2002 लागू हुई, जिसके अनुसार आम नागरिकों, निजी संस्थाओं तथा शैक्षणिक संस्थाओं को राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार प्राप्त है।
29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में प्रारूप समिति का गठन किया।
15 नवम्बर 1948 को संविधान के प्रारूप पर प्रथम वाचन प्रारम्भ हुआ।
3 जून 1947 की योजना के बाद संविधान सभा का पुनर्गठन हुआ तथा इसकी सदस्य संख्या 299 रह गई।
4 अप्रैल 2007 को आंध्र प्रदेश में पुनः विधान परिषद का गठन किया गया।
42वाँ संविधान संशोधन स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया था।
42वें संविधान संशोधन को ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) कहा जाता है।
42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में मौलिक कर्तव्य जोड़े गए तथा उन्हें संविधान के भाग-4(क) में स्थान दिया गया।
52वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 दल-बदल विरोधी कानून से संबंधित है।
86वें संविधान संशोधन द्वारा एक अतिरिक्त मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया, जिससे उनकी संख्या 11 हो गई।
अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 तथा 30 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं।
आकस्मिक निधि राष्ट्रपति के व्ययाधीन होती है।
आपातकाल में मौलिक अधिकारों के निलंबन की व्यवस्था जर्मनी के संविधान से प्रेरित मानी जाती है।
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में उच्चतम न्यायालय ने उद्देशिका को संविधान का अभिन्न अंग माना।
उपाधियों का अंत अनुच्छेद 18 में वर्णित है।
संवैधानिक उपचारों के अधिकार को संविधान की आत्मा और हृदय कहा गया है।
कार्यपालिका को न्यायपालिका से पृथक करने का निर्देश अनुच्छेद 50 में दिया गया है।
सिखों को कृपाण धारण करने का अधिकार अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्राप्त है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(क) में निहित है।
बाल श्रम का निषेध अनुच्छेद 24 में किया गया है।
समान नागरिक संहिता का उल्लेख अनुच्छेद 44 में किया गया है।
संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना की सिफारिशों के आधार पर हुआ था।
केंद्रीय मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है।
गोवा को वर्ष 1961 में भारतीय संघ में सम्मिलित किया गया।
छुआछूत का उन्मूलन अनुच्छेद 17 में वर्णित है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के समय कांग्रेस के अध्यक्ष जे. बी. कृपलानी थे।
स्वतंत्रता प्राप्ति के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली थे।
झंडा समिति के अध्यक्ष जे. बी. कृपलानी थे।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने संवैधानिक उपचारों के अधिकार को संविधान का हृदय और आत्मा कहा था।
प्रथम वित्त आयोग का गठन वर्ष 1951 में किया गया था।
प्रथम लोकसभा अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर थे।
जम्मू-कश्मीर राज्य का अपना संविधान था, जिसे एक पृथक संविधान सभा द्वारा निर्मित किया गया था और यह 26 जनवरी 1957 को लागू हुआ था।
वी. वी. गिरि ऐसे कार्यवाहक राष्ट्रपति थे जिन्होंने त्यागपत्र देकर राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा और विजयी हुए।
देश में प्रथम राष्ट्रीय आपातकाल वर्ष 1962 में लगाया गया था।
दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद संभालने वाले व्यक्ति गुलजारीलाल नंदा थे।
धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा को केवल सिफारिश करने का अधिकार प्राप्त है।
धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
धार्मिक व्यय हेतु कर लगाने का निषेध संविधान के अनुच्छेद 27 में वर्णित है।
नए राज्यों के निर्माण का अधिकार संसद को प्राप्त है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है।
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं।
नीलम संजीव रेड्डी राष्ट्रपति बनने से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष रह चुके थे।
प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम वर्ष 1951 में पारित किया गया था।
प्रथम लोकसभा की पहली बैठक 13 मई 1952 को हुई थी।
प्रथम लोकसभा को 4 अप्रैल 1957 को भंग किया गया था।
प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन एवं मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को देता रहे।
प्रधानमंत्री पद पर सबसे कम अवधि (13 दिन) तक रहने वाले व्यक्ति अटल बिहारी वाजपेयी थे।
प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने वाले प्रथम प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई थे।
प्रधानमंत्री बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है, जबकि अधिकतम आयु की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।
प्रधानमंत्री सामान्यतः लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन का नेता होता है।
प्रारूप समिति का गठन 29 अगस्त 1947 को किया गया था।
प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे।
स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
भारत का राष्ट्रपति राष्ट्र का संवैधानिक प्रमुख होता है।
भारत का राष्ट्रीय पंचांग शक संवत पर आधारित है, जिसे 22 मार्च 1957 से अपनाया गया।
भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल, राष्ट्रीय पशु बाघ, राष्ट्रीय वृक्ष बरगद, राष्ट्रीय फल आम, राष्ट्रीय पक्षी मोर तथा राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन है।
भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ है, जो ‘आनन्दमठ’ उपन्यास से लिया गया है।
भारत की उद्देशिका में प्रयुक्त ‘गणराज्य’ शब्द का तात्पर्य है कि राष्ट्राध्यक्ष वंशानुगत नहीं होगा।
डॉ. जाकिर हुसैन तथा फखरुद्दीन अली अहमद ऐसे राष्ट्रपति थे जिनका निधन कार्यकाल के दौरान हुआ।
भारत के उपराष्ट्रपति की तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति से की जाती है।
मोहम्मद हिदायतुल्ला ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में दायित्व निभाया था।
भारत के राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के रचयिता रवीन्द्रनाथ ठाकुर (टैगोर) हैं।
भारत के राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति ब्रिटेन के सम्राट के समान मानी जाती है।
भारत में गणतांत्रिक शासन व्यवस्था फ्रांस के संविधान से प्रेरित मानी जाती है।
संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से प्रेरित है।
भारतीय संविधान में एकल नागरिकता (Single Citizenship) की व्यवस्था ब्रिटिश संविधान से ग्रहण की गई है।
भारतीय संविधान में नागरिकता संबंधी प्रावधान अनुच्छेद 5 से 11 तक वर्णित हैं।
भारतीय संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर किया गया था।
भारतीय संसद, राष्ट्रपति भवन तथा सर्वोच्च न्यायालय पर वर्ष भर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है।
भाषायी आधार पर गठित होने वाला पहला राज्य आंध्र प्रदेश था।
भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन वर्ष 1956 में किया गया।
मंत्रिपरिषद का कोई सदस्य बिना संसद का सदस्य बने अधिकतम छह माह तक मंत्री पद पर रह सकता है।
मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
मंत्रिपरिषद के तीन स्तर होते हैं— कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री एवं उपमंत्री।
मौलिक अधिकार तथा राष्ट्रपति पर महाभियोग की व्यवस्था अमेरिका के संविधान से ग्रहण की गई है।
मौलिक अधिकारों की रक्षा उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय करते हैं।
मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा पूर्व सोवियत संघ के संविधान से ली गई है।
मौलिक कर्तव्य 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए थे।
मूल संविधान में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 525 निर्धारित की गई थी।
राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव राज्यसभा के सदस्य करते हैं।
राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसे कभी भंग नहीं किया जाता।
राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त होते हैं।
राज्यसभा का पदेन सभापति भारत का उपराष्ट्रपति होता है।
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व संविधान के भाग-4 में वर्णित हैं।
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।
राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है।
राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः पाँच वर्ष का होता है।
राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक कहलाता है।
राष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।
राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति एवं एकल संक्रमणीय मत प्रणाली पर आधारित है।
राष्ट्रपति को पद की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं।
राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संसद द्वारा संचालित की जाती है।
राष्ट्रपति लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के सदस्यों को नामित कर सकता था। (यह प्रावधान 104वें संविधान संशोधन, 2020 द्वारा समाप्त कर दिया गया है।)
राष्ट्रपति राज्यसभा में साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र के 12 सदस्यों को नामित करता है।
राष्ट्रपति शासन संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत लगाया जाता है।
राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राज्य की कार्यपालिका राष्ट्रपति के अधीन कार्य करती है।
लोकसभा का कार्यकाल सामान्यतः पाँच वर्ष का होता है।
लोकसभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा किया जाता है।
लोकसभा का विघटन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
लोकसभा अध्यक्ष का निर्वाचन लोकसभा के सदस्य करते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष अपने पद से त्यागपत्र उपाध्यक्ष को देता है।
लोकसभा में धन विधेयक केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा पर प्रस्तुत किया जा सकता है।
लोकसभा वित्तीय मामलों में राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली है।
सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है।
सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई थी।
सर्वोच्च न्यायालय का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
सर्वोच्च न्यायालय संविधान का संरक्षक एवं व्याख्याता है।
न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त है।
भारत में एकीकृत न्यायपालिका की व्यवस्था है।
उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायिक निकाय होता है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय रिट जारी कर सकता है।
भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है।
निर्वाचन आयोग का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 324 में किया गया है।
भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) लोक वित्त का संरक्षक कहलाता है।
वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत किया जाता है।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 315 में किया गया है।
भारत का महान्यायवादी (Attorney General) देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है।
महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
संविधान का अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित है।
संविधान का भाग-3 मौलिक अधिकारों से संबंधित है।
संविधान का भाग-4 राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों से संबंधित है।
संविधान का भाग-4(क) मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है।
संविधान का भाग-5 संघ सरकार से संबंधित है।
संविधान का भाग-6 राज्य सरकारों से संबंधित है।
संविधान का भाग-9 पंचायती राज व्यवस्था से संबंधित है।
73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित है।
74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम नगरपालिकाओं से संबंधित है।
पंचायतों में महिलाओं के लिए कम-से-कम एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा 74वें संविधान संशोधन द्वारा प्रदान किया गया।
भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत लिखित संविधान माना जाता है।
भारतीय संविधान 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत, अधिनियमित एवं आत्मार्पित किया गया था।
भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा थे।
संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे।
संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार बी. एन. राव थे।
संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
उद्देश्य प्रस्ताव 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया था।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान की प्रस्तावना से प्रेरित है।
संविधान सभा को संविधान निर्माण में 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन का समय लगा।
संविधान सभा की कुल 11 बैठकें तथा 165 दिनों तक कार्यवाही चली।
संविधान निर्माण पर लगभग 64 लाख रुपये का व्यय हुआ था।
संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसम्बर 1946 को आयोजित हुई थी।
संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को आयोजित हुई थी।
संविधान सभा के प्रथम अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा थे।
संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद निर्वाचित हुए थे।
भारत का संविधान मूल रूप से 22 भागों, 395 अनुच्छेदों और 8 अनुसूचियों का था।
वर्तमान में भारतीय संविधान विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है।
संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों का उल्लेख किया गया है।
संविधान का भाग-III मौलिक अधिकारों का वर्णन करता है।
संविधान का भाग-IV राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों से संबंधित है।
संविधान का भाग-IV(क) मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है।
संविधान का अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों के अधिकार से संबंधित है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था।
भारत में एकल नागरिकता की व्यवस्था है।
भारतीय संविधान संसदीय शासन प्रणाली को स्वीकार करता है।
भारतीय शासन प्रणाली ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली से प्रेरित है।
संघीय व्यवस्था के साथ सशक्त केंद्र भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषता है।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भारत को "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य" कहा गया है।
संविधान द्वारा नागरिकों को छह मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं।
शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21(क) के अंतर्गत मौलिक अधिकार है।
86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा शिक्षा का अधिकार जोड़ा गया था।
संविधान के अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के संगठन का प्रावधान किया गया है।
संविधान के अनुच्छेद 51(क) में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है।
राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा अनुच्छेद 352 के अंतर्गत की जाती है।
राज्य आपातकाल (राष्ट्रपति शासन) अनुच्छेद 356 के अंतर्गत लागू किया जाता है।
वित्तीय आपातकाल का प्रावधान अनुच्छेद 360 में किया गया है।
भारत में अब तक वित्तीय आपातकाल कभी लागू नहीं किया गया है।
राष्ट्रीय आपातकाल अब तक 1962, 1971 और 1975 में लगाया गया था।
44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 ने आपातकाल संबंधी प्रावधानों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए।
भारत का सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली में स्थित है।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश हरिलाल जेकिसुंदास कानिया थे।
उच्चतम न्यायालय अभिलेख न्यायालय (Court of Record) है।
संविधान की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त है।
न्यायिक पुनरावलोकन भारतीय न्यायपालिका की एक महत्वपूर्ण शक्ति है।
भारत निर्वाचन आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए उत्तरदायी है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है।
भारत में मतदान की आयु 18 वर्ष है।
61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई।
लोकसभा के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है।
राज्यसभा के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित है।
राष्ट्रपति पद हेतु न्यूनतम आयु 35 वर्ष निर्धारित है।
उपराष्ट्रपति पद हेतु न्यूनतम आयु 35 वर्ष निर्धारित है।
राज्यपाल बनने के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।
भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल भी पाँच वर्ष का होता है।
राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः पाँच वर्ष का होता है।
लोकसभा का सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।
राज्यसभा एक स्थायी सदन है।
राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है।
प्रत्येक दो वर्ष बाद राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
संविधान का अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समानता तथा विधियों के समान संरक्षण की गारंटी देता है।
अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग अथवा जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध करता है।
अनुच्छेद 16 लोक नियोजन में अवसर की समानता प्रदान करता है।
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है।
अनुच्छेद 18 उपाधियों के अंत से संबंधित है।
अनुच्छेद 19 नागरिकों को छह प्रकार की स्वतंत्रताएँ प्रदान करता है।
अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण प्रदान करता है।
अनुच्छेद 21 जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण से संबंधित है।
अनुच्छेद 21(क) 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।
अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी एवं निरोध के संबंध में संरक्षण प्रदान करता है।
अनुच्छेद 23 मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी का निषेध करता है।
अनुच्छेद 24 चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों एवं खानों में नियोजित करने का निषेध करता है।
अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है।
अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है।
अनुच्छेद 27 किसी विशेष धर्म के प्रचार हेतु कर लगाने का निषेध करता है।
अनुच्छेद 28 धार्मिक शिक्षा से संबंधित प्रावधानों का वर्णन करता है।
अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण से संबंधित है।
अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थाएँ स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्रदान करता है।
अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों के अधिकार से संबंधित है।
अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का वर्णन किया गया है।
अनुच्छेद 38 सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय पर आधारित व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश देता है।
अनुच्छेद 39 समान वेतन एवं समान अवसर के सिद्धांत को प्रोत्साहित करता है।
अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के संगठन का निर्देश देता है।
अनुच्छेद 41 कार्य, शिक्षा एवं लोक सहायता के अधिकार से संबंधित है।
अनुच्छेद 42 मानवीय कार्य-दशाओं तथा प्रसूति सहायता का प्रावधान करता है।
अनुच्छेद 43 श्रमिकों के लिए निर्वाह योग्य वेतन की व्यवस्था का निर्देश देता है।
अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता से संबंधित है।
अनुच्छेद 45 बालकों की प्रारंभिक शिक्षा एवं देखभाल से संबंधित है।
अनुच्छेद 46 अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य दुर्बल वर्गों के हितों की उन्नति से संबंधित है।
अनुच्छेद 47 पोषण स्तर एवं जनस्वास्थ्य में सुधार का निर्देश देता है।
अनुच्छेद 48 कृषि एवं पशुपालन के संगठन से संबंधित है।
अनुच्छेद 48(क) पर्यावरण एवं वन संरक्षण से संबंधित है।
अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की सुरक्षा का प्रावधान करता है।
अनुच्छेद 50 कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के पृथक्करण से संबंधित है।
अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को प्रोत्साहित करने का निर्देश देता है।
मौलिक कर्तव्यों का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 51(क) में किया गया है।
वर्तमान में भारतीय नागरिकों के 11 मौलिक कर्तव्य हैं।
मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था।
86वें संविधान संशोधन द्वारा एक अतिरिक्त मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया।
राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान एवं संविधान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा कहलाता है।
भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया है।
राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे "सत्यमेव जयते" अंकित है।
"सत्यमेव जयते" वाक्य मुण्डक उपनिषद से लिया गया है।
भारत का राष्ट्रगान "जन-गण-मन" है।
राष्ट्रगान के गायन की निर्धारित अवधि लगभग 52 सेकंड है।
भारत का राष्ट्रीय गीत "वन्दे मातरम्" है।
"वन्दे मातरम्" के रचयिता बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय हैं।
भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है।
भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर है।
भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल है।
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद है।
भारत का राष्ट्रीय फल आम है।
भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन है।
भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर शक संवत् पर आधारित है।
भारत का राष्ट्रीय खेल आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है।
भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न है।
पद्म पुरस्कारों में पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री शामिल हैं।
भारत रत्न की स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी।
पद्म पुरस्कारों की स्थापना भी वर्ष 1954 में की गई थी।
संविधान दिवस प्रतिवर्ष 26 नवम्बर को मनाया जाता है।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रतिवर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है।
राष्ट्रीय विधि दिवस 26 नवम्बर को मनाया जाता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस 31 अक्टूबर को मनाया जाता है।
राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को मनाया जाता है।
राष्ट्रीय महिला दिवस 13 फरवरी को मनाया जाता है।
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 24 दिसम्बर को मनाया जाता है।
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रैल को मनाया जाता है।
संविधान सभा की प्रथम बैठक संविधान हॉल (वर्तमान संसद भवन के केंद्रीय कक्ष) में हुई थी।
संविधान सभा में विभिन्न समितियों का गठन संविधान निर्माण कार्य को सुचारु रूप से संपन्न करने हेतु किया गया था।
प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे।
संघ शक्ति समिति के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे।
संघ संविधान समिति के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे।
प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
मौलिक अधिकार समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
अल्पसंख्यक उपसमिति भी सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में कार्यरत थी।
संविधान सभा में महिलाओं की संख्या 15 थी।
संविधान सभा में कुल 11 अधिवेशन आयोजित किए गए।
संविधान की मूल प्रति हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हस्तलिखित है।
संविधान की मूल प्रति पर 24 जनवरी 1950 को हस्ताक्षर किए गए।
भारत का राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति का संवैधानिक प्रमुख होता है।
संविधान का अनुच्छेद 52 राष्ट्रपति के पद का प्रावधान करता है।
संविधान का अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होने का प्रावधान करता है।
राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति द्वारा किया जाता है।
राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।
राष्ट्रपति बनने के लिए लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता आवश्यक है।
राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।
राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को देता है।
राष्ट्रपति को पद की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं।
राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संविधान में निर्धारित है।
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे।
भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल थीं।
भारत के वर्तमान संवैधानिक ढाँचे में राष्ट्रपति नाममात्र का कार्यपालिका प्रमुख माना जाता है।
वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मंत्रिपरिषद में निहित होती है।
राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है।
प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है।
संविधान का अनुच्छेद 74 मंत्रिपरिषद से संबंधित है।
संविधान का अनुच्छेद 75 मंत्रियों की नियुक्ति एवं कार्यकाल से संबंधित है।
प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता सामान्यतः प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है।
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे।
सबसे अधिक समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले व्यक्ति जवाहरलाल नेहरू थे।
प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का गठन करता है।
मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच संपर्क सूत्र का कार्य करता है।
प्रधानमंत्री नीति-निर्धारण में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
उपराष्ट्रपति का पद संविधान के अनुच्छेद 63 में वर्णित है।
भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
उपराष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।
भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे।
राज्यसभा संसद का उच्च सदन कहलाती है।
लोकसभा संसद का निम्न सदन कहलाती है।
भारतीय संसद राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनती है।
संसद की विधायी शक्ति संघ सूची और समवर्ती सूची के विषयों तक विस्तृत है।
संसद को अवशिष्ट विषयों पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।
लोकसभा के सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने जाते हैं।
राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने जाते हैं।
राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 निर्धारित की गई है।
लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 निर्धारित की गई थी।
धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
धन विधेयक पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष का होता है।
राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है।
संसद का संयुक्त अधिवेशन राष्ट्रपति द्वारा बुलाया जाता है।
संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।
संविधान का अनुच्छेद 79 संसद से संबंधित है।
संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान अनुच्छेद 108 में है।
भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की व्यवस्था है।
मतदान का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है।
अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा में आरक्षण का प्रावधान है।
संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग से संबंधित है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
निर्वाचन आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों का संचालन करता है।
भारत में प्रथम आम चुनाव 1951-52 में संपन्न हुए थे।
निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है।
सर्वोच्च न्यायालय संविधान का अंतिम व्याख्याकार है।
सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई थी।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
सर्वोच्च न्यायालय को मूल, अपीलीय और परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार प्राप्त है।
संविधान का अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेने की अनुमति देता है।
न्यायिक पुनरावलोकन सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण शक्ति है।
जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा न्यायपालिका द्वारा विकसित की गई है।
उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायिक निकाय होता है।
संविधान का अनुच्छेद 214 प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय के प्रावधान से संबंधित है।
उच्च न्यायालय को अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहते हैं।
भारत में न्यायपालिका स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मानी जाती है।
संविधान का संरक्षक एवं रक्षक सर्वोच्च न्यायालय है।
भारतीय लोकतंत्र का आधार संविधान, विधि का शासन तथा स्वतंत्र न्यायपालिका है।
संविधान का अनुच्छेद 1 भारत को "राज्यों का संघ" घोषित करता है।
संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को नए राज्यों को संघ में सम्मिलित करने का अधिकार प्राप्त है।
संविधान का अनुच्छेद 3 राज्यों की सीमाओं, क्षेत्रफल एवं नाम में परिवर्तन से संबंधित है।
संसद को राज्यों के पुनर्गठन का अधिकार प्राप्त है।
भारत वर्तमान में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित है।
संघ सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची का उल्लेख संविधान की सातवीं अनुसूची में किया गया है।
संघ सूची के विषयों पर केवल संसद कानून बना सकती है।
राज्य सूची के विषयों पर सामान्यतः राज्य विधानमंडल कानून बनाता है।
समवर्ती सूची के विषयों पर संसद एवं राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
समवर्ती सूची में संघर्ष की स्थिति में संघ का कानून प्रभावी होता है।
अवशिष्ट शक्तियाँ संसद को प्राप्त हैं।
संविधान की सातवीं अनुसूची भारत की संघीय व्यवस्था का आधार है।
वित्त आयोग का गठन प्रत्येक पाँच वर्ष बाद किया जाता है।
वित्त आयोग राष्ट्रपति को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करता है।
भारत का प्रथम वित्त आयोग वर्ष 1951 में गठित किया गया था।
वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित किया जाता है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
CAG को भारत की लोक वित्त प्रणाली का संरक्षक कहा जाता है।
CAG की रिपोर्ट राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल को प्रस्तुत की जाती है।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) एक संवैधानिक निकाय है।
UPSC का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 315 में किया गया है।
संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
भारत के महान्यायवादी का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 76 में किया गया है।
महान्यायवादी भारत सरकार का सर्वोच्च विधिक सलाहकार होता है।
महान्यायवादी संसद की कार्यवाही में भाग ले सकता है, किंतु मतदान नहीं कर सकता।
राज्य के महाधिवक्ता का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 165 में किया गया है।
राज्य का महाधिवक्ता राज्य सरकार का प्रमुख विधिक सलाहकार होता है।
पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा 73वें संविधान संशोधन द्वारा दिया गया।
73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1992 में पारित किया गया था।
पंचायतों से संबंधित प्रावधान संविधान के भाग-9 में वर्णित हैं।
ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की मूल इकाई है।
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की संस्तुति बलवंत राय मेहता समिति ने की थी।
भारत में पंचायती राज व्यवस्था का प्रथम शुभारंभ 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान में हुआ था।
नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा 74वें संविधान संशोधन द्वारा दिया गया।
नगरपालिकाओं से संबंधित प्रावधान संविधान के भाग-9(क) में वर्णित हैं।
जिला योजना समिति का प्रावधान संविधान में किया गया है।
महानगर योजना समिति का प्रावधान भी संविधान में निहित है।
संविधान की दसवीं अनुसूची दल-बदल विरोधी कानून से संबंधित है।
दसवीं अनुसूची को 52वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था।
संविधान की नौवीं अनुसूची भूमि सुधार कानूनों के संरक्षण से संबंधित है।
नौवीं अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ी गई थी।
संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची पंचायतों के कार्यों से संबंधित है।
संविधान की बारहवीं अनुसूची नगरपालिकाओं के कार्यों से संबंधित है।
भारतीय संविधान में वर्तमान में 12 अनुसूचियाँ हैं।
संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त भाषाओं का उल्लेख है।
वर्तमान में आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ सम्मिलित हैं।
संविधान की पहली अनुसूची राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों का विवरण देती है।
संविधान की दूसरी अनुसूची राष्ट्रपति, राज्यपाल, न्यायाधीशों आदि के वेतन-भत्तों से संबंधित है।
संविधान की तीसरी अनुसूची विभिन्न पदाधिकारियों की शपथ एवं प्रतिज्ञान से संबंधित है।
संविधान की चौथी अनुसूची राज्यसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व से संबंधित है।
संविधान की पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों एवं अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन से संबंधित है।
संविधान की छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है।
भारत में विधि का शासन (Rule of Law) की अवधारणा ब्रिटेन से ग्रहण की गई है।
संसदीय शासन प्रणाली ब्रिटिश संविधान से प्रेरित है।
मौलिक अधिकारों की अवधारणा अमेरिकी संविधान से प्रेरित है।
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं।
मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा पूर्व सोवियत संघ के संविधान से ली गई है।
न्यायिक पुनरावलोकन की अवधारणा अमेरिका से ग्रहण की गई है।
संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से प्रेरित है।
समवर्ती सूची की अवधारणा ऑस्ट्रेलिया से ग्रहण की गई है।
स्वतंत्र न्यायपालिका का सिद्धांत अमेरिका से प्रेरित है।
राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया अमेरिका से ग्रहण की गई है।
गणराज्य की अवधारणा फ्रांस से प्रेरित मानी जाती है।
स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरित हैं।
भारतीय संविधान विश्व के विभिन्न संविधानों का समन्वित एवं विशिष्ट दस्तावेज है।
संविधान भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है।
संविधान नागरिकों के अधिकारों एवं कर्तव्यों का संरक्षक है।
संविधान शासन की शक्तियों को सीमित एवं नियंत्रित करता है।
भारतीय संविधान का मूल उद्देश्य न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व पर आधारित समाज की स्थापना करना है।
संविधान की प्रस्तावना को संविधान की आत्मा एवं दर्शन का संक्षिप्त सार माना जाता है।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के आदर्शों का उल्लेख किया गया है।
प्रस्तावना में भारत को संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित किया गया है।
संविधान की प्रस्तावना में "हम भारत के लोग" शब्द जनता की सर्वोच्चता को व्यक्त करते हैं।
केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना था।
संविधान की मूल प्रस्तावना में "समाजवादी", "पंथनिरपेक्ष" और "अखंडता" शब्द नहीं थे।
42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा इन शब्दों को प्रस्तावना में जोड़ा गया।
भारतीय लोकतंत्र सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित है।
भारत में प्रत्येक नागरिक को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर मतदान का अधिकार प्राप्त है।
निर्वाचन प्रक्रिया लोकतांत्रिक शासन की आधारशिला मानी जाती है।
भारतीय लोकतंत्र में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों का विशेष महत्व है।
संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग की स्थापना का प्रावधान करता है।
भारत निर्वाचन आयोग चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण करता है।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है।
संसद भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च विधायिका है।
संसद कानून निर्माण का प्रमुख संस्थान है।
संसद जनता की आकांक्षाओं एवं हितों का प्रतिनिधित्व करती है।
संसद की स्वीकृति के बिना कोई कर नहीं लगाया जा सकता।
संसद संघीय वित्त पर नियंत्रण रखती है।
संसद कार्यपालिका को उत्तरदायी बनाती है।
संसदीय प्रश्नकाल कार्यपालिका पर नियंत्रण का महत्वपूर्ण साधन है।
शून्यकाल भारतीय संसदीय प्रणाली की एक विशिष्ट देन है।
अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
लोकसभा को लोकप्रिय सदन कहा जाता है।
राज्यसभा को स्थायी सदन कहा जाता है।
राज्यसभा संघीय ढाँचे में राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है।
संसद की संप्रभुता संविधान की सीमाओं के अधीन है।
भारत में संविधान सर्वोच्च है, संसद नहीं।
न्यायपालिका संविधान की सर्वोच्चता की रक्षा करती है।
न्यायपालिका नागरिकों के मौलिक अधिकारों की संरक्षक है।
सर्वोच्च न्यायालय संविधान का अंतिम व्याख्याकार है।
सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक कहा जाता है।
उच्च न्यायालय राज्यों की न्यायिक व्यवस्था का सर्वोच्च निकाय है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की मूल विशेषता है।
न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की मूल संरचना का भाग है।
मूल संरचना सिद्धांत का प्रतिपादन केशवानंद भारती वाद में किया गया था।
संसद संविधान की मूल संरचना को परिवर्तित नहीं कर सकती।
संघवाद भारतीय संविधान की मूल संरचना का अंग है।
धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान की मूल संरचना का भाग है।
लोकतंत्र भारतीय संविधान की मूल संरचना का एक आवश्यक तत्व है।
विधि का शासन (Rule of Law) भारतीय संविधान की आधारभूत विशेषता है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना में सम्मिलित है।
मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं।
सामाजिक न्याय भारतीय संविधान का प्रमुख उद्देश्य है।
आर्थिक न्याय का उद्देश्य संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करना है।
राजनीतिक न्याय सभी नागरिकों को समान राजनीतिक अवसर प्रदान करता है।
समानता का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है।
स्वतंत्रता का अधिकार व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक है।
बंधुत्व की भावना राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करती है।
राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता संविधान के प्रमुख उद्देश्यों में से है।
संविधान विविधता में एकता की भावना को प्रोत्साहित करता है।
भारतीय संविधान सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावी साधन है।
संविधान सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना का लक्ष्य रखता है।
भारतीय संविधान कल्याणकारी राज्य की स्थापना का समर्थन करता है।
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को मूर्त रूप देते हैं।
नीति-निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।
मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा संरक्षित एवं प्रवर्तनीय हैं।
संविधान नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है।
मौलिक कर्तव्यों का उद्देश्य राष्ट्र के प्रति नागरिकों में उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है।
पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद एवं सुधार की भावना का विकास नागरिकों का कर्तव्य है।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रगान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
संविधान का पालन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
भारतीय संविधान विश्व के सर्वश्रेष्ठ लोकतांत्रिक दस्तावेजों में से एक माना जाता है।
भारतीय संविधान सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।
भारतीय संविधान शासन, प्रशासन एवं न्याय व्यवस्था का आधार है।
संविधान भारत की लोकतांत्रिक परंपरा का मूल स्रोत है।
संविधान नागरिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
संविधान शासन की शक्तियों को संतुलित एवं नियंत्रित करता है।
संविधान नागरिकों और राज्य के मध्य संबंधों को परिभाषित करता है।
भारतीय संविधान परिवर्तनशील एवं गतिशील दस्तावेज है।
संविधान समय-समय पर संशोधनों के माध्यम से विकसित होता रहा है।
भारतीय संविधान लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक है।
संविधान राष्ट्रीय विकास एवं सामाजिक प्रगति का मार्गदर्शक है।
भारतीय संविधान का अंतिम उद्देश्य एक न्यायपूर्ण, समतामूलक एवं समावेशी समाज की स्थापना करना है।
संविधान भारतीय गणराज्य की आधारशिला है।
भारतीय संविधान राष्ट्र की एकता, अखंडता, लोकतंत्र तथा विधि के शासन का सर्वोच्च आधार है।
भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहाँ शासन की अंतिम शक्ति जनता में निहित है।
भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया था।
संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के आधार पर हुआ था।
संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित एवं आत्मार्पित किया।
संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जिसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
संविधान भारत को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है।
भारतीय संघ की एकता एवं अखंडता संविधान द्वारा संरक्षित है।
भारत में संसदीय शासन प्रणाली लागू है।
भारत में द्विसदनीय संसदीय व्यवस्था है।
राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है।
लोकसभा को जनता का सदन कहा जाता है।
राज्यसभा को राज्यों की परिषद कहा जाता है।
संविधान के अनुसार मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए उत्तरदायी है।
प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रधान होता है।
मंत्रिपरिषद की वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री में निहित होती है।
राष्ट्रपति की सभी कार्यपालिका शक्तियाँ मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयोग की जाती हैं।
लोकसभा अध्यक्ष सदन की कार्यवाही का संचालन करता है।
लोकसभा अध्यक्ष सदन की गरिमा एवं अनुशासन बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होता है।
राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति कार्य करता है।
संसद का मुख्य कार्य कानून बनाना है।
संसद वित्तीय मामलों पर सर्वोच्च नियंत्रण रखती है।
वार्षिक बजट संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
बजट को संविधान में वार्षिक वित्तीय विवरण कहा गया है।
भारत की संचित निधि का उल्लेख संविधान में किया गया है।
आकस्मिक निधि अप्रत्याशित व्यय के लिए उपयोग में लाई जाती है।
लोक लेखा समिति संसद की एक महत्वपूर्ण वित्तीय समिति है।
प्राक्कलन समिति सरकारी व्यय में मितव्ययिता के सुझाव देती है।
लोक उपक्रम समिति सार्वजनिक उपक्रमों के कार्यों की समीक्षा करती है।
वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के मध्य वित्तीय संबंधों का निर्धारण करता है।
संघवाद भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता है।
भारत में संघीय व्यवस्था के साथ एकात्मक झुकाव पाया जाता है।
संविधान संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करता है।
संघ सूची राष्ट्रीय महत्व के विषयों से संबंधित है।
राज्य सूची स्थानीय एवं प्रादेशिक महत्व के विषयों से संबंधित है।
समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
भारतीय संघ अविनाशी है, जबकि राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन किया जा सकता है।
संसद राज्यों की सीमाओं, नाम और क्षेत्रफल में परिवर्तन कर सकती है।
भारतीय नागरिकता एकल नागरिकता पर आधारित है।
नागरिकता संबंधी मूल प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 तक वर्णित हैं।
संसद को नागरिकता संबंधी कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।
नागरिकता अधिनियम, 1955 भारतीय नागरिकता का प्रमुख कानून है।
मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।
समानता का अधिकार लोकतंत्र का आधार है।
स्वतंत्रता का अधिकार व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास में सहायक है।
शोषण के विरुद्ध अधिकार मानव गरिमा की रक्षा करता है।
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार भारत की धर्मनिरपेक्षता को सुदृढ़ करता है।
सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करते हैं।
संवैधानिक उपचारों का अधिकार मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय रिट जारी कर सकता है।
अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय रिट जारी कर सकता है।
बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा हेतु जारी की जाने वाली रिट है।
परमादेश (Mandamus) किसी सार्वजनिक अधिकारी को कर्तव्य पालन हेतु निर्देशित करती है।
प्रतिषेध (Prohibition) रिट अधीनस्थ न्यायालय को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकती है।
उत्प्रेषण (Certiorari) रिट अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को निरस्त करने हेतु जारी की जाती है।
अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) किसी पदाधिकारी के अधिकार की वैधता की जाँच करती है।
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व शासन के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
नीति-निर्देशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना का लक्ष्य रखते हैं।
कल्याणकारी राज्य की अवधारणा नीति-निर्देशक तत्वों में निहित है।
ग्राम स्वराज की अवधारणा महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित है।
समान नागरिक संहिता का प्रावधान नीति-निर्देशक तत्वों में किया गया है।
मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्व संविधान की आत्मा के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं।
मौलिक कर्तव्य नागरिकों में राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करते हैं।
संविधान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का उत्तरदायित्व है।
प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना नागरिकों का कर्तव्य है।
उत्कृष्टता की ओर निरंतर प्रयास करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य माना गया है।
माता-पिता या अभिभावकों का 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा दिलाना मौलिक कर्तव्य है।
न्यायपालिका संविधान की संरक्षक संस्था है।
सर्वोच्च न्यायालय देश का सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है।
न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता को सुनिश्चित करता है।
न्यायिक सक्रियता जनहित की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जनहित याचिका ने न्याय को आम नागरिकों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विधि का शासन लोकतांत्रिक प्रशासन की आधारशिला है।
संविधान के समक्ष सभी नागरिक समान हैं।
लोकतंत्र का वास्तविक आधार जागरूक नागरिक होते हैं।
भारतीय संविधान नागरिकों को अधिकार, स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय प्रदान करने वाला सर्वोच्च विधिक दस्तावेज है।
भारतीय संविधान विश्व के सबसे व्यापक एवं विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है।
भारतीय संविधान लोकतंत्र, गणराज्य, धर्मनिरपेक्षता एवं समाजवाद के सिद्धांतों पर आधारित है।
संविधान नागरिकों और राज्य के बीच संबंधों को विनियमित करता है।
संविधान शासन की शक्तियों को सीमित एवं नियंत्रित करता है।
संविधान विधि के शासन (Rule of Law) को स्थापित करता है।
भारत में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
संविधान सामाजिक न्याय की स्थापना का आधार प्रदान करता है।
संविधान आर्थिक न्याय को प्रोत्साहित करता है।
संविधान राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता सर्वोच्च शक्ति का स्रोत होती है।
चुनाव लोकतंत्र का आधारभूत तत्व हैं।
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक शासन की पहचान हैं।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता है।
संविधान नागरिकों को समान अवसर प्रदान करने का प्रयास करता है।
सामाजिक समानता लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है।
भारतीय संविधान सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास करता है।
अस्पृश्यता का उन्मूलन भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं।
संविधान कमजोर वर्गों के उत्थान को प्रोत्साहित करता है।
आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय की अवधारणा से संबंधित है।
भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र की रक्षा करती है।
न्यायपालिका संविधान की संरक्षक संस्था है।
सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों का संरक्षक है।
न्यायपालिका शासन के अन्य अंगों पर संवैधानिक नियंत्रण रखती है।
न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखता है।
संविधान संशोधन की व्यवस्था संविधान को लचीला एवं गतिशील बनाती है।
भारतीय संविधान कठोरता एवं लचीलेपन का समन्वय है।
संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परंतु उसकी मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती।
मूल संरचना सिद्धांत भारतीय न्यायपालिका का महत्वपूर्ण योगदान है।
संविधान की सर्वोच्चता भारतीय शासन व्यवस्था की मूल विशेषता है।
भारतीय संघ राज्यों का संघ है, न कि राज्यों के बीच किया गया कोई समझौता।
भारतीय संघ की एकता एवं अखंडता संविधान द्वारा सुरक्षित है।
संसद राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर कानून बनाती है।
राज्य विधानमंडल राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाता है।
समवर्ती सूची संघ और राज्य दोनों को विधायी अधिकार प्रदान करती है।
आपातकालीन परिस्थितियों में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ जाती हैं।
राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संघीय व्यवस्था पर एकात्मक प्रभाव बढ़ जाता है।
राष्ट्रपति शासन राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता की स्थिति में लगाया जाता है।
वित्तीय आपातकाल संविधान का एक विशेष प्रावधान है।
अब तक भारत में वित्तीय आपातकाल कभी लागू नहीं किया गया है।
संविधान नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करता है।
मौलिक अधिकार लोकतंत्र की आत्मा माने जाते हैं।
संवैधानिक उपचारों का अधिकार अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी है।
मौलिक अधिकार व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करते हैं।
शिक्षा का अधिकार सामाजिक विकास का आधार है।
शिक्षा लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने का प्रभावी माध्यम है।
भारतीय संविधान महिला एवं पुरुष दोनों को समान अधिकार प्रदान करता है।
संविधान लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करता है।
संविधान बालकों के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष प्रावधान करता है।
बाल श्रम का निषेध सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण अंग है।
संविधान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
सांस्कृतिक विविधता भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण विशेषता है।
भारतीय संविधान राष्ट्रीय एकता के साथ सांस्कृतिक बहुलता को भी महत्व देता है।
संविधान विभिन्न धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करता है।
धर्मनिरपेक्षता भारतीय राज्य की आधारभूत विशेषताओं में से एक है।
भारतीय राज्य किसी विशेष धर्म को राजधर्म के रूप में स्वीकार नहीं करता।
सभी नागरिकों को अपनी पसंद का धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्राप्त है।
संविधान सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।
बंधुत्व की भावना राष्ट्रीय एकीकरण का आधार है।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता संविधान के प्रमुख उद्देश्यों में सम्मिलित हैं।
संविधान राष्ट्रीय विकास का मार्गदर्शक दस्तावेज है।
संविधान शासन की वैधता का आधार है।
भारत का लोकतंत्र संविधान द्वारा संरक्षित एवं संचालित होता है।
संविधान नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति आस्था विकसित करता है।
संविधान का पालन प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है।
लोकतंत्र में अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी समान महत्व है।
संविधान नागरिकों को उत्तरदायी एवं जागरूक बनने की प्रेरणा देता है।
भारतीय संविधान विश्व के अनेक संविधानों के श्रेष्ठ तत्वों का समन्वित स्वरूप है।
संविधान भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है।
भारतीय संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित राष्ट्र निर्माण का आधार है।
संविधान भारत की राजनीतिक व्यवस्था की आधारशिला है।
संविधान प्रशासनिक संस्थाओं के संगठन एवं कार्यप्रणाली का निर्धारण करता है।
संविधान शासन के विभिन्न अंगों के बीच शक्तियों का संतुलन स्थापित करता है।
संविधान नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ राज्य के दायित्व भी निर्धारित करता है।
भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो समयानुसार विकसित होता रहता है।
संविधान लोकतांत्रिक शासन को स्थायित्व प्रदान करता है।
भारतीय संविधान राष्ट्रीय हित एवं जनकल्याण के बीच संतुलन स्थापित करता है।
संविधान का अंतिम लक्ष्य एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और समावेशी समाज की स्थापना है।
संविधान नागरिकों को राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।
भारतीय संविधान राष्ट्र की एकता, अखंडता, लोकतंत्र और विधि के शासन का सर्वोच्च संरक्षक है।
भारतीय संविधान विश्व के सबसे व्यापक एवं विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है।
भारतीय संविधान लोकतंत्र, गणराज्य, धर्मनिरपेक्षता एवं समाजवाद के सिद्धांतों पर आधारित है।
संविधान नागरिकों और राज्य के बीच संबंधों को विनियमित करता है।
संविधान शासन की शक्तियों को सीमित एवं नियंत्रित करता है।
संविधान विधि के शासन (Rule of Law) को स्थापित करता है।
भारत में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
संविधान सामाजिक न्याय की स्थापना का आधार प्रदान करता है।
संविधान आर्थिक न्याय को प्रोत्साहित करता है।
संविधान राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता सर्वोच्च शक्ति का स्रोत होती है।
चुनाव लोकतंत्र का आधारभूत तत्व हैं।
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक शासन की पहचान हैं।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता है।
संविधान नागरिकों को समान अवसर प्रदान करने का प्रयास करता है।
सामाजिक समानता लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है।
भारतीय संविधान सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास करता है।
अस्पृश्यता का उन्मूलन भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं।
संविधान कमजोर वर्गों के उत्थान को प्रोत्साहित करता है।
आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय की अवधारणा से संबंधित है।
भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र की रक्षा करती है।
न्यायपालिका संविधान की संरक्षक संस्था है।
सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों का संरक्षक है।
न्यायपालिका शासन के अन्य अंगों पर संवैधानिक नियंत्रण रखती है।
न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखता है।
संविधान संशोधन की व्यवस्था संविधान को लचीला एवं गतिशील बनाती है।
भारतीय संविधान कठोरता एवं लचीलेपन का समन्वय है।
संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परंतु उसकी मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती।
मूल संरचना सिद्धांत भारतीय न्यायपालिका का महत्वपूर्ण योगदान है।
संविधान की सर्वोच्चता भारतीय शासन व्यवस्था की मूल विशेषता है।
भारतीय संघ राज्यों का संघ है, न कि राज्यों के बीच किया गया कोई समझौता।
भारतीय संघ की एकता एवं अखंडता संविधान द्वारा सुरक्षित है।
संसद राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर कानून बनाती है।
राज्य विधानमंडल राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाता है।
समवर्ती सूची संघ और राज्य दोनों को विधायी अधिकार प्रदान करती है।
आपातकालीन परिस्थितियों में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ जाती हैं।
राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संघीय व्यवस्था पर एकात्मक प्रभाव बढ़ जाता है।
राष्ट्रपति शासन राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता की स्थिति में लगाया जाता है।
वित्तीय आपातकाल संविधान का एक विशेष प्रावधान है।
अब तक भारत में वित्तीय आपातकाल कभी लागू नहीं किया गया है।
संविधान नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करता है।
मौलिक अधिकार लोकतंत्र की आत्मा माने जाते हैं।
संवैधानिक उपचारों का अधिकार अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी है।
मौलिक अधिकार व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करते हैं।
शिक्षा का अधिकार सामाजिक विकास का आधार है।
शिक्षा लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने का प्रभावी माध्यम है।
भारतीय संविधान महिला एवं पुरुष दोनों को समान अधिकार प्रदान करता है।
संविधान लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करता है।
संविधान बालकों के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष प्रावधान करता है।
बाल श्रम का निषेध सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण अंग है।
संविधान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
सांस्कृतिक विविधता भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण विशेषता है।
भारतीय संविधान राष्ट्रीय एकता के साथ सांस्कृतिक बहुलता को भी महत्व देता है।
संविधान विभिन्न धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करता है।
धर्मनिरपेक्षता भारतीय राज्य की आधारभूत विशेषताओं में से एक है।
भारतीय राज्य किसी विशेष धर्म को राजधर्म के रूप में स्वीकार नहीं करता।
सभी नागरिकों को अपनी पसंद का धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्राप्त है।
संविधान सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।
बंधुत्व की भावना राष्ट्रीय एकीकरण का आधार है।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता संविधान के प्रमुख उद्देश्यों में सम्मिलित हैं।
संविधान राष्ट्रीय विकास का मार्गदर्शक दस्तावेज है।
संविधान शासन की वैधता का आधार है।
भारत का लोकतंत्र संविधान द्वारा संरक्षित एवं संचालित होता है।
संविधान नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति आस्था विकसित करता है।
संविधान का पालन प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है।
लोकतंत्र में अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी समान महत्व है।
संविधान नागरिकों को उत्तरदायी एवं जागरूक बनने की प्रेरणा देता है।
भारतीय संविधान विश्व के अनेक संविधानों के श्रेष्ठ तत्वों का समन्वित स्वरूप है।
संविधान भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है।
भारतीय संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित राष्ट्र निर्माण का आधार है।
संविधान भारत की राजनीतिक व्यवस्था की आधारशिला है।
संविधान प्रशासनिक संस्थाओं के संगठन एवं कार्यप्रणाली का निर्धारण करता है।
संविधान शासन के विभिन्न अंगों के बीच शक्तियों का संतुलन स्थापित करता है।
संविधान नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ राज्य के दायित्व भी निर्धारित करता है।
भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो समयानुसार विकसित होता रहता है।
संविधान लोकतांत्रिक शासन को स्थायित्व प्रदान करता है।
भारतीय संविधान राष्ट्रीय हित एवं जनकल्याण के बीच संतुलन स्थापित करता है।
संविधान का अंतिम लक्ष्य एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और समावेशी समाज की स्थापना है।
संविधान नागरिकों को राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।
भारतीय संविधान राष्ट्र की एकता, अखंडता, लोकतंत्र और विधि के शासन का सर्वोच्च संरक्षक है।
भारतीय संविधान विश्व के सबसे विस्तृत लोकतांत्रिक संविधानों में से एक है।
भारतीय संविधान का निर्माण लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष एवं कल्याणकारी राज्य की स्थापना के उद्देश्य से किया गया था।
संविधान राज्य की सभी संस्थाओं के अधिकार एवं कर्तव्यों को निर्धारित करता है।
संविधान शासन की शक्तियों के दुरुपयोग पर नियंत्रण स्थापित करता है।
संविधान नागरिकों की स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों का संरक्षण करता है।
लोकतांत्रिक शासन में संविधान सर्वोच्च विधिक दस्तावेज होता है।
संविधान की सर्वोच्चता भारतीय शासन प्रणाली की आधारभूत विशेषता है।
संविधान नागरिकों को न्याय प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है।
संविधान के अनुसार सभी नागरिक विधि के समक्ष समान हैं।
भारतीय लोकतंत्र में जनमत का विशेष महत्व है।
चुनाव जनता की संप्रभुता की अभिव्यक्ति का माध्यम हैं।
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन लोकतंत्र की सफलता का आधार हैं।
संविधान प्रत्येक नागरिक की गरिमा की रक्षा करता है।
मौलिक अधिकार व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं।
संविधान सामाजिक एवं आर्थिक विषमताओं को कम करने का प्रयास करता है।
समाजवादी व्यवस्था का उद्देश्य संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण है।
भारतीय संविधान अवसर की समानता पर बल देता है।
संविधान कमजोर वर्गों के संरक्षण हेतु विशेष व्यवस्थाएँ प्रदान करता है।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
भारतीय संविधान समावेशी विकास की अवधारणा को प्रोत्साहित करता है।
संविधान महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
महिलाओं को समान अवसर एवं समान अधिकार प्रदान करना संविधान का उद्देश्य है।
संविधान बालकों के हितों की रक्षा हेतु विशेष प्रावधान करता है।
बाल विवाह, बाल श्रम एवं शोषण के विरुद्ध संवैधानिक संरक्षण उपलब्ध है।
शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी साधन मानी जाती है।
संविधान शिक्षा के प्रसार को राष्ट्रीय विकास का आधार मानता है।
पर्यावरण संरक्षण संविधान की महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रतिबद्धताओं में से एक है।
राज्य एवं नागरिक दोनों पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्तरदायी हैं।
वन, वन्यजीव एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण राष्ट्रीय दायित्व है।
संविधान सतत विकास की अवधारणा को समर्थन प्रदान करता है।
भारतीय संविधान राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को सर्वोच्च महत्व देता है।
राष्ट्रीय एकीकरण लोकतांत्रिक स्थिरता का आधार है।
संविधान भाषाई, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करता है।
भारत की विविधता उसकी लोकतांत्रिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार है।
धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना को व्यक्त करती है।
भारतीय राज्य सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार करता है।
किसी भी नागरिक के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी प्रदान करता है।
संविधान राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक बहुलता के बीच संतुलन स्थापित करता है।
संविधान भारतीय राष्ट्रवाद को लोकतांत्रिक एवं समावेशी स्वरूप प्रदान करता है।
संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका भारतीय शासन व्यवस्था के तीन प्रमुख अंग हैं।
विधायिका कानून बनाती है।
कार्यपालिका कानूनों को लागू करती है।
न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या एवं संरक्षण करती है।
शक्तियों का पृथक्करण लोकतांत्रिक शासन का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
नियंत्रण एवं संतुलन (Checks and Balances) की व्यवस्था शासन में उत्तरदायित्व सुनिश्चित करती है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
विधि का शासन लोकतंत्र का मूल आधार है।
भारत में सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान उत्तरदायी हैं।
संविधान शासन को जनहित के अनुरूप संचालित करने का आधार प्रदान करता है।
संविधान राष्ट्रीय विकास की दिशा निर्धारित करता है।
संविधान सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी साधन है।
संविधान राष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता का आधार है।
भारतीय संविधान लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता के आदर्शों को साकार करने का माध्यम है।
संविधान नागरिकों में कर्तव्यपरायणता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है।
नागरिकों का सक्रिय सहयोग लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है।
संविधान नागरिकों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है।
संविधान राष्ट्रीय चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लोकतंत्र केवल अधिकारों पर नहीं, बल्कि कर्तव्यों पर भी आधारित होता है।
राष्ट्र की उन्नति जागरूक, शिक्षित और उत्तरदायी नागरिकों पर निर्भर करती है।
भारतीय संविधान लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक है।
संविधान सामाजिक न्याय, आर्थिक प्रगति और राजनीतिक स्थिरता का आधार है।
संविधान शासन और नागरिकों के मध्य विश्वास का सेतु है।
संविधान राष्ट्रीय हितों और व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं में संतुलन स्थापित करता है।
संविधान राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा का आधारभूत दस्तावेज है।
भारतीय संविधान आधुनिक भारत के निर्माण का मार्गदर्शक है।
संविधान भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है।
संविधान नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और स्वतंत्रताओं का संरक्षक है।
संविधान राष्ट्र के समग्र विकास का आधार प्रदान करता है।
भारतीय संविधान एक सशक्त, समावेशी, लोकतांत्रिक और कल्याणकारी राष्ट्र की स्थापना का मूल आधार है।
भारतीय संविधान नागरिकों को लोकतांत्रिक शासन में भागीदारी का अवसर प्रदान करता है।
संविधान शासन को उत्तरदायी एवं पारदर्शी बनाने का आधार है।
भारतीय लोकतंत्र की सफलता संविधान के प्रति आस्था पर निर्भर करती है।
संविधान नागरिक स्वतंत्रता एवं राष्ट्रीय हितों में संतुलन स्थापित करता है।
भारतीय संविधान मानव गरिमा की रक्षा को विशेष महत्व देता है।
संविधान सभी नागरिकों को समान सम्मान प्रदान करता है।
सामाजिक न्याय भारतीय संविधान की मूल प्रेरणा है।
संविधान का उद्देश्य शोषणमुक्त समाज की स्थापना करना है।
भारतीय संविधान कमजोर एवं वंचित वर्गों के संरक्षण का समर्थन करता है।
संविधान सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देता है।
संविधान राष्ट्रीय जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना का आधार है।
लोकतांत्रिक शासन में कानून का शासन सर्वोपरि होता है।
भारतीय संविधान विधि की सर्वोच्चता को स्वीकार करता है।
संविधान शासन को संविधानबद्ध एवं सीमित बनाता है।
संविधान किसी भी प्रकार की निरंकुशता का विरोध करता है।
संविधान लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्थायित्व प्रदान करता है।
स्वतंत्र न्यायपालिका संविधान की रक्षा का प्रमुख साधन है।
न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की अंतिम संरक्षक है।
न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखता है।
संविधान शासन के प्रत्येक अंग को उसके अधिकार एवं सीमाएँ निर्धारित करता है।
भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
विचारों की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक समाज की महत्वपूर्ण विशेषता है।
संविधान शांतिपूर्ण एवं वैधानिक विरोध के अधिकार को मान्यता देता है।
लोकतंत्र में जनमत का सम्मान आवश्यक है।
संविधान विविध मतों एवं विचारों के सह-अस्तित्व को स्वीकार करता है।
भारतीय संविधान सहिष्णुता एवं बहुलवाद की भावना को प्रोत्साहित करता है।
धर्मनिरपेक्षता भारतीय लोकतंत्र का आधारभूत सिद्धांत है।
सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान भारतीय राज्य की नीति है।
संविधान धार्मिक स्वतंत्रता एवं सामाजिक सद्भाव दोनों को महत्व देता है।
राष्ट्रीय एकता संविधान का सर्वोच्च लक्ष्य है।
संविधान राष्ट्र की अखंडता की रक्षा हेतु विशेष प्रावधान करता है।
भारत की संप्रभुता संविधान द्वारा संरक्षित है।
संविधान राष्ट्रीय सुरक्षा एवं लोकतांत्रिक अधिकारों में संतुलन स्थापित करता है।
आपातकालीन प्रावधान राष्ट्रहित की रक्षा के लिए बनाए गए हैं।
संविधान संकट की परिस्थितियों में शासन की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
संविधान संघ और राज्यों के मध्य सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है।
सहकारी संघवाद भारतीय शासन व्यवस्था की महत्वपूर्ण अवधारणा है।
केंद्र और राज्य मिलकर राष्ट्रीय विकास में योगदान देते हैं।
संविधान राष्ट्रीय संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग का मार्गदर्शन करता है।
संविधान आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।
भारतीय संविधान कल्याणकारी राज्य की स्थापना का समर्थन करता है।
राज्य का दायित्व जनकल्याण को बढ़ावा देना है।
नीति-निर्देशक तत्व राज्य को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की दिशा प्रदान करते हैं।
संविधान गरीबी, अशिक्षा एवं असमानता को दूर करने की प्रेरणा देता है।
शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार कल्याणकारी राज्य के प्रमुख उद्देश्य हैं।
संविधान वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आधुनिक विचारधारा को प्रोत्साहित करता है।
संविधान राष्ट्रीय विकास में शिक्षा की भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है।
ज्ञान एवं शिक्षा लोकतांत्रिक सशक्तिकरण के आधार हैं।
संविधान अनुसंधान, नवाचार एवं प्रगति को अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करता है।
शिक्षा का अधिकार सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है।
संविधान पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्रीय दायित्व मानता है।
स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भावी पीढ़ियों के हित में आवश्यक है।
पर्यावरणीय संतुलन सतत विकास का आधार है।
संविधान प्रकृति एवं मानव के मध्य संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
नागरिकों का कर्तव्य है कि वे पर्यावरण की रक्षा करें।
संविधान सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को महत्वपूर्ण मानता है।
राष्ट्रीय धरोहरों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
संविधान सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को महत्व देता है।
भारत की सांस्कृतिक विविधता संविधान द्वारा संरक्षित है।
संविधान राष्ट्रीय एकता के साथ सांस्कृतिक बहुलता को भी स्वीकार करता है।
संविधान भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण को प्रोत्साहित करता है।
राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
राष्ट्रध्वज राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।
राष्ट्रगान राष्ट्रीय एकता और सम्मान का प्रतीक है।
संविधान राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ बनाने का माध्यम है।
संविधान नागरिकों में राष्ट्रभक्ति और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है।
जागरूक नागरिक लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं।
संविधान नागरिकों को अधिकारों के साथ कर्तव्यों के पालन की भी प्रेरणा देता है।
भारतीय संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता तथा राष्ट्रीय एकता पर आधारित आधुनिक भारतीय राष्ट्र का मूल आधार है।
Share:

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें