अखरोट के फायदे, उपयोग और नुकसान



अखरोट : सेहत का खजाना

ड्राई फ्रूट्स सेहत के लिए अत्यंत लाभदायक माने जाते हैं। संतुलित आहार के साथ यदि नियमित रूप से ड्राई फ्रूट्स का सेवन किया जाए, तो यह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होता है। बादाम, किशमिश, खजूर और अखरोट जैसे मेवे न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि अनेक स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करते हैं।

अखरोट एक प्रकार का सूखा मेवा है, जिसका उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है। इसका बाहरी आवरण अत्यंत कठोर होता है, जबकि अंदर की गिरी का आकार मानव मस्तिष्क से मिलता-जुलता दिखाई देता है। अखरोट के वृक्ष का वानस्पतिक नाम जग्लान्स निग्रा (Juglans nigra) है।

आधी मुट्ठी अखरोट में लगभग 392 कैलोरी ऊर्जा, 9 ग्राम प्रोटीन, 39 ग्राम वसा तथा 8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। इसके अतिरिक्त इसमें विटामिन ई, विटामिन बी-6, कैल्शियम तथा अन्य महत्वपूर्ण खनिज पर्याप्त मात्रा में उपस्थित होते हैं।

प्रतिदिन एक मुट्ठी अथवा 4 से 5 अखरोट का सेवन हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक माना जाता है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। माना जाता है कि अखरोट का प्रभाव सेवन के कुछ घंटों के भीतर ही शरीर पर दिखाई देने लगता है।

अखरोट में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ और आकर्षक बनाए रखने में सहायता करते हैं। इसके साथ ही यह आँखों और बालों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने तथा शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक होते हैं।

मानव मस्तिष्क के समान दिखाई देने वाला यह फल वास्तव में मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है। इसमें उपस्थित ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने, स्मरण शक्ति को बढ़ाने तथा तनाव को कम करने में सहायक होता है। नियमित रूप से अखरोट को अपने आहार में शामिल करके मस्तिष्क को स्वस्थ एवं सक्रिय बनाए रखा जा सकता है।

इस प्रकार अखरोट केवल एक स्वादिष्ट मेवा ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी प्राकृतिक आहार है।

अखरोट को अंग्रेजी में वॉलनट (Walnut), तेलुगू में अकरूट काया, मलयालम में अक्रोथंडी, कन्नड़ में अक्रोटा, तमिल में अकरोट्टू, मराठी में अकरोड़ तथा गुजराती में अक्रोट कहा जाता है। विभिन्न भाषाओं में अखरोट के जितने नाम हैं, उसके गुण और स्वास्थ्य लाभ भी उतने ही विविध एवं अद्भुत हैं। अपने उत्कृष्ट पोषण मूल्य और औषधीय गुणों के कारण अखरोट को दुनिया के सबसे लाभकारी सूखे मेवों में गिना जाता है।


रंग : अखरोट का रंग भूरा होता है।

स्वाद : इसका स्वाद फीका, मधुर, स्निग्ध (चिकना) एवं स्वादिष्ट होता है।

स्वरूप : पर्वतीय प्रदेशों में होने वाले पीलू को ही अखरोट कहते हैं। इसका एक नाम कर्पपाल भी है। इसके वृक्ष अफ़गानिस्तान में बहुतायत से पाए जाते हैं। इसके फूल सफेद रंग के, छोटे-छोटे एवं गुच्छेदार होते हैं। पत्ते गोल, लम्बे और कुछ मोटे होते हैं तथा फल गोल-गोल मैनफल के समान, परन्तु अत्यन्त कठोर छिलके वाले होते हैं। इसकी गिरी मीठी, बादाम के समान पुष्टिकारक एवं स्वादिष्ट होती है।

स्वभाव : अखरोट की प्रकृति गर्म एवं शुष्क होती है।

गुण : अखरोट अत्यन्त बलवर्धक है। यह हृदय को बल प्रदान करता है तथा हृदय और मस्तिष्क को पुष्ट कर उत्साहवर्धक प्रभाव उत्पन्न करता है। इसकी भुनी हुई गिरी सर्दी से उत्पन्न खाँसी में लाभदायक होती है। यह वात, पित्त, क्षय (टी.बी.), हृदय रोग, रक्तदोष तथा जलन को दूर करने में सहायक माना गया है।

अखरोट के फायदे

अखरोट न केवल स्वास्थ्य के लिए, बल्कि त्वचा और बालों के लिए भी अत्यन्त लाभकारी माना जाता है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

अपस्मार

अखरोट की गिरी को निर्गुण्डी के रस में पीसकर अंजन एवं नस्य देने से लाभ होता है।

अर्श (बवासीर)

वादी बवासीर में अखरोट के तेल की पिचकारी गुदा में लगाने से सूजन कम होकर पीड़ा में राहत मिलती है।

आंतरिक सफाई

अखरोट पाचन तंत्र की सफाई में सहायक माना जाता है तथा अनेक हानिकारक जीवाणुओं को दूर करने में मदद करता है।

इंफ्लेमेटरी बीमारियाँ

अखरोट में फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। अतः अस्थमा, आर्थराइटिस एवं एक्जिमा जैसी सूजन संबंधी समस्याओं में इसका सेवन लाभकारी माना जाता है।

एंटी-एजिंग

अखरोट विटामिन-बी से भरपूर होता है, जो तनाव कम करने में सहायता करता है। तनाव कम होने से त्वचा पर झुर्रियाँ एवं बढ़ती आयु के लक्षण कम दिखाई देते हैं।

फेस पैक :
एक चम्मच अखरोट पाउडर, एक चम्मच ऑलिव ऑयल, दो चम्मच गुलाबजल एवं आधा चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे 15 मिनट चेहरे पर लगाकर रखें और फिर धो लें। सप्ताह में 2–3 बार प्रयोग किया जा सकता है।

कंठमाला

अखरोट के पत्तों का काढ़ा 40–60 मिलीलीटर मात्रा में पीने तथा उसी काढ़े से गांठों को धोने से लाभ मिलता है।

कब्ज एवं पाचन

अखरोट में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है तथा कब्ज से बचाने में सहायता करता है।

कमजोरी

अखरोट की गिरी अत्यन्त पौष्टिक होती है। इसके नियमित सेवन से कमजोरी दूर होती है।

कैंसर

कुछ अध्ययनों के अनुसार, सीमित मात्रा में अखरोट का नियमित सेवन कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।

खूनी बवासीर

अखरोट के छिलके की भस्म में गुरुच मिलाकर सेवन करने से रक्तस्रावी बवासीर में लाभ बताया गया है।

गंजापन

अखरोट का तेल बालों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है और नियमित उपयोग से गंजेपन की समस्या में सहायता मिल सकती है।

गर्भावस्था

अखरोट में उपस्थित ओमेगा-3 फैटी एसिड गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क विकास में सहायक माना जाता है। गर्भावस्था में सेवन से पूर्व चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।

गुल्मवायु (हिस्टीरिया)

अखरोट और किशमिश खाकर ऊपर से गर्म गाय का दूध पीने से लाभ बताया गया है।

घाव

अखरोट की छाल के काढ़े से घाव धोने पर लाभ मिलता है।

चमकदार त्वचा

अखरोट में उपस्थित ओमेगा-3 एवं एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को पोषण देकर उसे चमकदार बनाने में सहायता करते हैं।


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गंजापन

अखरोट का तेल बालों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसमें उपस्थित पोषक तत्व बालों की जड़ों को पोषण प्रदान करते हैं तथा बालों को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं।

गर्भावस्था में लाभ

अखरोट में पर्याप्त मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क के विकास में सहायक माना जाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए इसका सीमित मात्रा में सेवन लाभदायक हो सकता है।

गुल्मवायु (हिस्टीरिया)

अखरोट तथा किशमिश को मिलाकर खाने के बाद ऊपर से गर्म गाय का दूध पीने से लाभ बताया गया है।

घाव

अखरोट की छाल का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से लाभ मिलता है। यह घाव को साफ रखने में सहायक माना जाता है।

चमकदार त्वचा

अखरोट में पाए जाने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं। इसके नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक चमक बनी रहती है।

चेहरे की झुर्रियाँ

अखरोट में मौजूद विटामिन-बी और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ रखते हैं तथा समय से पहले आने वाली झुर्रियों को कम करने में सहायक होते हैं।

दाद

अखरोट के छिलकों को जलाकर उसकी राख को तेल में मिलाकर लगाने से दाद में लाभ बताया गया है।

दाँतों के लिए

अखरोट की छाल का मंजन करने से दाँत और मसूड़े मजबूत होते हैं तथा मुख की दुर्गंध दूर होती है।

दिल के लिए लाभकारी

अखरोट में उपस्थित ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने तथा हृदय रोगों के जोखिम को घटाने में सहायता करता है।

दिमाग के लिए लाभकारी

मानव मस्तिष्क के समान आकार वाला अखरोट मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। इसके नियमित सेवन से स्मरण शक्ति तथा एकाग्रता में सुधार हो सकता है।

दृष्टि शक्ति

अखरोट में उपस्थित विटामिन और खनिज तत्व आँखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं।

दुर्बलता

शारीरिक कमजोरी होने पर अखरोट की गिरी का नियमित सेवन लाभदायक माना जाता है। यह शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है।

नपुंसकता

अखरोट को बलवर्धक एवं वीर्यवर्धक माना गया है। इसका नियमित सेवन पुरुषों की शारीरिक क्षमता बढ़ाने में सहायक बताया गया है।

पथरी

कुछ आयुर्वेदिक मतों के अनुसार अखरोट का सेवन मूत्रमार्ग संबंधी समस्याओं में लाभदायक माना जाता है।

पक्षाघात

अखरोट का तेल शरीर की मालिश के लिए उपयोगी माना गया है। इससे स्नायु तंत्र को बल मिलता है।

पेट के कीड़े

अखरोट की छाल तथा पत्तों का उपयोग कृमिनाशक के रूप में भी किया जाता है।

बालों के लिए लाभकारी

अखरोट में बायोटिन, विटामिन-ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो बालों को मजबूत, घना और चमकदार बनाने में सहायक होते हैं।

रक्त की शुद्धि

अखरोट का नियमित सेवन रक्त को शुद्ध करने तथा शरीर को पोषण देने में सहायक माना जाता है।

मोटापा नियंत्रित करने में

अखरोट में स्वस्थ वसा और फाइबर पर्याप्त मात्रा में होता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और वजन नियंत्रण में सहायता मिलती है।

मधुमेह

अखरोट का सेवन मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है।

याददाश्त बढ़ाने में

नियमित रूप से अखरोट खाने से स्मरण शक्ति और मानसिक कार्यक्षमता में सुधार होने की बात कही जाती है।

यौन शक्ति

अखरोट को पारंपरिक रूप से बल, वीर्य और यौन शक्ति बढ़ाने वाला आहार माना गया है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

अखरोट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और खनिज तत्व शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं।

त्वचा रोग

अखरोट के पत्तों और छाल का उपयोग कुछ त्वचा रोगों में बाह्य रूप से किया जाता है।

हड्डियों के लिए लाभकारी

अखरोट में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं।

मस्तिष्क की कमजोरी

अखरोट मस्तिष्क के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसमें उपस्थित ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन-ई तथा एंटीऑक्सीडेंट मस्तिष्क की कोशिकाओं को पोषण प्रदान करते हैं। इसके नियमित सेवन से मानसिक शक्ति, एकाग्रता तथा स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।

मांसपेशियों की मजबूती

अखरोट में प्रोटीन और आवश्यक खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। व्यायाम करने वाले लोगों के लिए इसका सेवन विशेष लाभदायक माना जाता है।

मूत्र संबंधी विकार

अखरोट के कुछ पारंपरिक प्रयोग मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभकारी बताए गए हैं। यह शरीर को पोषण देकर सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करता है।

रक्तचाप

अखरोट में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड तथा अन्य पोषक तत्व रक्तचाप को संतुलित रखने में सहायक हो सकते हैं। इसके नियमित सेवन से हृदय स्वास्थ्य को लाभ मिलता है।

वात रोग

आयुर्वेद में अखरोट को वातनाशक गुणों से युक्त माना गया है। इसके सेवन से वातजन्य विकारों में लाभ बताया गया है।

शारीरिक शक्ति

अखरोट बलवर्धक एवं पुष्टिकारक मेवा है। इसका नियमित सेवन शरीर को शक्ति प्रदान करता है तथा कमजोरी को दूर करने में सहायक होता है।

स्नायु दुर्बलता

स्नायु तंत्र को मजबूत बनाने में अखरोट उपयोगी माना जाता है। इसमें उपस्थित पोषक तत्व नसों को पोषण देकर उनकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं।

स्मरण शक्ति

विद्यार्थियों एवं मानसिक कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए अखरोट विशेष लाभकारी माना जाता है। इसके नियमित सेवन से याददाश्त और मानसिक सक्रियता में वृद्धि हो सकती है।

हृदय रोग

अखरोट में उपस्थित असंतृप्त वसा (Unsaturated Fat) हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक होती है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण

प्रतिदिन सीमित मात्रा में अखरोट खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने तथा अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

त्वचा की सुरक्षा

अखरोट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को पर्यावरणीय क्षति से बचाने में सहायता करते हैं। यह त्वचा को स्वस्थ और कोमल बनाए रखने में सहायक है।

बालों की मजबूती

अखरोट में पाया जाने वाला बायोटिन बालों को झड़ने से रोकने तथा उन्हें मजबूत बनाने में सहायक माना जाता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

अखरोट में मौजूद विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायता करते हैं, जिससे विभिन्न रोगों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है।

अखरोट के सेवन में सावधानियाँ

  • अखरोट का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

  • अत्यधिक सेवन से कुछ लोगों को पाचन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।

  • जिन व्यक्तियों को मेवों से एलर्जी हो, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए।

  • अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी प्रवेश कर सकती है।

निष्कर्ष

अखरोट एक अत्यंत पौष्टिक, बलवर्धक और स्वास्थ्यवर्धक मेवा है। इसमें उपस्थित ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन, खनिज तथा एंटीऑक्सीडेंट शरीर, मस्तिष्क, हृदय, त्वचा और बालों के लिए लाभकारी होते हैं। नियमित एवं संतुलित मात्रा में इसका सेवन करके अनेक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।


     

    अखरोट के नुकसान

    जिस वस्तु के अनेक लाभ होते हैं, उसके कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। अखरोट के साथ भी यही बात लागू होती है। यद्यपि इसका संतुलित मात्रा में सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है, फिर भी कुछ परिस्थितियों में इसके सेवन से सावधानी बरतनी चाहिए।

    अखरोट खाने के नुकसान

    • अखरोट से कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है। यदि आपको अखरोट से एलर्जी है, तो इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इसके सेवन से छाती में जकड़न, खुजली या सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।

    • अत्यधिक मात्रा में अखरोट खाने से कुछ लोगों के मुंह में छाले हो सकते हैं।

    • जिन लोगों को पहले से कफ की समस्या रहती है, उन्हें अखरोट का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि इससे कफ बढ़ने की आशंका हो सकती है।

    • अखरोट में वसा (फैट) पर्याप्त मात्रा में होती है। इसलिए इसका अत्यधिक सेवन वजन बढ़ाने का कारण बन सकता है।

    • काले अखरोट (Black Walnut) में कुछ ऐसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं, जिनके अधिक संपर्क से त्वचा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    • काले अखरोट में फाइटेट्स नामक यौगिक पाए जाते हैं। कुछ अध्ययनों के अनुसार, ये भोजन में उपस्थित लौह (Iron) के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।

    • काले अखरोट के छिलके के संपर्क से संवेदनशील व्यक्तियों में त्वचा पर लाल चकत्ते (Skin Rash) या जलन की समस्या हो सकती है।

    अखरोट का उपयोग

    अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि अखरोट का सेवन कैसे और कब किया जाए। अखरोट को निम्न प्रकार से अपने आहार में शामिल किया जा सकता है—

    • दही में अखरोट की 2–3 गिरियाँ मिलाकर खाई जा सकती हैं।

    • एक गिलास दूध में एक चम्मच अखरोट का पाउडर तथा एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन किया जा सकता है।

    • रात को सोने से पहले एक गिलास दूध के साथ 2–3 अखरोट की गिरियों का सेवन लाभकारी माना जाता है।

    • शाम के समय हल्के नाश्ते (स्नैक्स) के रूप में अखरोट को हल्का भूनकर भी खाया जा सकता है।

    • अखरोट को सलाद, दलिया, ओट्स, मिठाइयों तथा विभिन्न व्यंजनों में मिलाकर भी उपयोग किया जा सकता है।

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    व्यंग्यकार श्रीलाल शुक्ल संक्षिप्त जीवन परिचय



    श्रीलाल शुक्ल हिन्दी व्यंग्य तथा कथा साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर है। "उनका जन्म लखनऊ के मोहनलाल कस्ब के निकटवर्ती ग्राम अतरौली में 31 दिसम्बर, 1925 को एक सुसंस्कृत और विपन्न कृषक परिवार में हुआ। पितामह पं. गदाधर प्रसाद शुकुल, हिन्दी, उर्दू एवं संस्कृत का व्यवहारिक ज्ञान रखते थे तथा कसरत और संगीत का उन्हें शौक था। "उन्होंने अपने पुत्र को श्लोंकों तथा हिन्दी कविताओं का बचपन में ही मुक्तदान दिया। इसी के फलस्वरूप हाई स्कूल तक आते-आते जब श्रीलाल शुक्ल ने संस्कृत बोलने का अभ्यास प्रारम्भ किया तो व्याकरण में भले ही कमजोरी अनुभव हुई हो अभिव्यक्ति की कमजोरी अनुभव न हुई।" शुक्ल जी का बचपन गरीबों की गलियों में बीता। वहाँ के बच्चों के साथ खेलकर, गाँव के आस-पास की खेतों और जंगलों में घूमकर उन्होंने अपना बचपन व्यतीत किया था। गाँव में अलग-अलग जाति के लोग रहते थे। उन सब के अपने-अपने आचार-विचार भी थे। शुक्ल जी के पिता एक किसान थे। गरीब परिवार के बावजूद उनके परिवार में पठन-पाठन की परम्परा बनी रही। जीवन के उत्तरार्द्ध में अपने बड़े पुत्र पर निर्भर रहते हुए सन् 1945 में इनके पिता की मृत्यु हो गई। माँ साधनहीन होते हुए भी उदारमना तथा उत्साही प्रवृत्ति की थी। सन् 1960 में अपने कनिष्ठ पुत्र भवानी शंकर शुक्ल के पास अल्मोड़ा में उनका निधन हुआ।


    दो भाईयों तथा दो बहनों के बीच श्रीलाल शुक्ल का बाल्यकाल बीता। परिवार का बोझ सिर पर आ जाने के कारण उनके अग्रज पं. शीतलासहाय शुकुल को हाई स्कूल उत्तीर्ण होते हुए कानपुर जाकर नौकरी करनी पड़ी। श्रीलाल शुक्ल की प्रारम्भिक शिक्षा पास के मोहनलालगंज में हुई। परिश्रमी, कुशाग्र बुद्धि तथा साहित्यिक रूचि सम्पन्न उनके एक चचेरे चाचा पं. चन्द्रमौलि शुकुल संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, फारसी तथा अंग्रेजी के प्रकाण्ड विद्वान थे। उन्होंने हिन्दी में विविध विषयक अनेक पुस्तकें लिखी। जब वह ग्रीष्मावकाश में गाँव आते, तो उनके पास उच्च कोटि की पुस्तकों को भण्डार होता था। साहित्य-जगत् से श्रीलाल शुक्ल का परिचय इन्हीं पुस्तकों के माध्यम से हुआ। उन्हीं के शब्दों में "पर उनकी (चाचा की) सम्पन्नता में मेरे मतलब की चीज़ सिर्फ उनकी किताबें और पत्रिकाएँ थीं। वह हमारे लिए 'चाँद', 'माधुरी', 'सुधा', 'सरस्वती', 'गंगा', 'हंस', 'सुकवि', 'काव्य', 'कलाधर' आदि पढ़ने का मौका था। मैंने प्रेमचन्द और प्रसाद की कई पुस्तकं,े जो उन्हें सादर भेंट की गई थीं, आठवीं पास करने के पहले ही पढ़ी थीं, उन साहित्यिकों के हस्ताक्षरों को बार-बार गौर से देखा था। नागरी-प्रचारिणी सभा और गंगा-पुस्तक माला आदि के नवीनतम प्रकाशन मैंने 1939-40 तक पढ़ लिये। उनमें वृन्दावन लाल वर्मा और निराला की कृतियाँ भी थी।"

    श्रीलाल शुक्ल में सृजनात्मकता के बीज बचपन से ही थे, जिन्हें गाँव के साहित्यिक माहौल में पनपने का अवसर मिला। शिक्षा और साहित्य के प्रति उनमें अदम्य आग्रह रहा है। 12-13 वर्ष की अवस्था में उन्होंने धनाक्षरी-सवैये लिखना प्रारम्भ कर दिए। वह कवि-सम्मेलनों में भी जाने लगे। कुछ कहानियाँ, अलोचनात्मक निबन्ध, उपन्यास भी लिखे। उन्होंने मिडिल मोहनलालगंज से, हाई स्कूल कान्यकुब्ज वोकेशनल काॅलिज, लखनऊ से इन्टरमीडिएट कान्यकुब्ज काॅलिज कानपुर से किया।

    1945 में इन्टरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण कर उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बी.एड. में प्रवेश लिया। अब तक पद्य के प्रति उनका आकर्षण समाप्त हो गया था। उन्होंने कहानियाँ लिखना प्रारम्भ किया। इलाहाबाद में वह केशवचन्द्र वर्मा, धर्मवीर भारती, विजयदेव नारायण साही, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना, गिरीधर गोपाल, जगदीश गुप्त जैसे उभरते साहित्यकारों के सम्पर्क में आये। विपन्नता के कारण एम.ए. और कानून की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। कुछ समय तक उन्होंने कान्यकुब्ज वोकेशनल इंटर काॅलिल, लखनऊ में अध्यापन कार्य किया।


    इसी बीच उनका विवाह कानपुर के एक सुसंस्कृत परिवार में हो गया। उनका पारिवारिक जीवन सुखी रहा। उनकी तीन पुत्रियाँ (रेखा, मधुलिका, विनीता) तथा एक पुत्र आशुतोष है। सभी सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अपनी पत्नी की देखभाल में उन्होंने कोई कमी नहीं की। रवीन्द्र कालिया के शब्दों में "श्रीलाल जी एक शिशु की तरह गिरिजा की देखभाल करते।" अपने परिवार के प्रति अपनी आस्था उन्होंने कभी छिपायी नहीं। रचना के तीव्र क्षणों में अपने मकान को वह परिवारवालों के लिए छोड़कर अकेले रह लिया करते थे। पत्नी के बीमार हो जाने के बाद वे उदास हो गये। रवीन्द्र कालिया ने इसके बारे में लिखा है "श्रीलाल जी के साथ बितायी एक दोपहर तो भुलाए नहीं भूलती। गिरिजा जी एकदम असहाय, असमर्थ और चेतनाशून्य हो चुकी थी। श्रीलाल जी पूर्ण समर्पण के साथ उनकी तीमारदारी में मशगुल थे।" वे एक ऐसे जिम्मेदार गृहस्थ भी हैं जो जीवनभर सैर-सपाटे और पत्नी के साथ बाहर निकलने में रूचि रखते हैं। वे एक ऐसे जिम्मेदार गृहस्थ भी हैं जो जीवन भर सैर-सपाटे और पत्नी के साथ बाहर निकलने में रूचि रखते थे। पत्नी के बीमार होने के बाद उन्होंने जीवन की मस्ती, उत्साह, आराम सब कुछ छोड़ दिये। "इस समय श्रीलाल जी न लेखक थे, न आराम पसन्द अवकाश प्राप्त अधिकारी, वह मात्र पति थे, प्रेमी थे, दोस्त थे। पास ही मेज़ पर कई दिनों के समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ पड़ी थी। लगता था, समाचार पत्रों की तह भी नहीं खुली। एक कोने में लावारिस सी डाक पड़ी थी।" इस तरह एक उन्मुक्त, उत्साहप्रिय, आराम तलब व्यक्ति अपनी पत्नी के लिए पूर्णरूप से समर्पित हो जाते हैं। रवीन्द्र वर्मा के अनुसार-"एक ठेठ भारतीय की तरह उनकी पत्नी उनके लिए एक जीवन मूल्य थी।" उनकी पत्नी उनके साथ ही साहित्य का अध्ययन भी करती थी और उसे संगीत में भी रूचि थी।

    सन् 1949 में उनका चयन पी.सी.एस. में हो गया। वर्ष 1973 में श्रीलाल शुक्ल की आई.ए.एस. में पदोन्नति हो गई। उत्तरप्रदेश शासन के अनके उच्च पदों पर कार्य करने के उपरान्त वह विशेष सचिव, चिकित्सा, एव स्वास्थ्य के पद से 30 जून, 1983 को सेवा मुक्त हो गए। उन्हें भिन्न-भिन्न जगहों पर काम करने का अवसर मिला था। जहाँ-जहाँ उन्होंने काम किया वहाँ के जनजीवन की खासियतों को समझने की कोशिश भी की है। नौकरी के क्षेत्र में वे समाजधर्मी एवं निष्ठावान थे। सरकारी अफसर के रूप में उन्हांेने प्रशासनिक क्षेत्र की समस्याओं को सुलझाने में विशेष क्षमता दिखाई है। उत्तरप्रदेश सिविल सर्विसेज में काम करते हएु उन्हें संघीय लोकसेवा आयोग में विशेष कार्याधिकारी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला था। नौकरी के क्षेत्र में उन्हें कई अनुभव प्राप्त हुए है। बड़े-बड़े लोगों से मिलने तथा उनकी आदतों एवं चारित्रिक विशेषताओं को समझने का अवसर भी उन्हें प्राप्त हुआ था।


     राजनीतिक परिस्थिति तथा प्रशासनिक क्षेत्र के बारे में गहराई से पढ़ने की कोशिश की। नौकरी के क्षेत्र में व्यस्त रहने पर भी वे एक अच्छे पाठक थे। वे नौकरशाह नहीं थे। वैसा दम्भ उनमें नहीं था। सरकारी फाइलों के बीच सालों तक रहने पर भी वे सच्चे, मनुष्य तथा मानवीयता के वक्ता बनकर रहे हैं। ममता कालिया ने लिखा है-'वे हिन्दी के एकमात्र ऐसे कथाकार हैं जिन्होंने खाकी रगं की सरकारी फाइलों की अटपटी जानकारी व शब्दावली से अपनी मौलिक रचनात्मक भाषा का अनुसन्धान किया है। पूर्णकालिक जिम्मेदार नौकरी में इतने घंटे (बरस) बिताकर, कई आदमी यांत्रिक और बेजान हो जाते हैं, उनमें से फाइलों की बू आने लगती है पर श्रीलालजी ने इन सीमाओं को अपना सामथ्र्य बनाया।" उत्तर प्रदेश शासन के अनेक उच्च पदों पर कार्य करने के उपरान्त वह विशेष सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के पद से 30 जून, 1983 को सेवामुक्त हो गए। उसके बाद वे निरन्तर लेखन में जुड़े रहे तत्पश्चात् 28 अक्टुबर 2011 को इनकी मृत्यु हो गई।


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    झड़ते बालों का उपचार



    1. अपने बालों को खोने का नुकसान कम करने के लिए जो पहला कदम आप उठा सकते हैं वह है तेल के साथ अपने सिर की मालिश करना। बालों और सिर की उचित मालिश करने से बालों के रोम में रक्त का प्रवाह बढ़ाता है और आपके बालों की जड़ों की शक्ति में वृद्धि होती है। यह आपको आराम पहुंचाने और तनाव की भावनाओं को कम करने में मदद भी करेगा।
    2. अपने बालों को खोने का नुकसान कम करने के लिए जो पहला कदम आप उठा सकते हैं वह है तेल के साथ अपने सिर की मालिश करना। बालों और सिर की उचित मालिश करने से बालों के रोम में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और आपके बालों की जड़ों की शक्ति में वृद्धि होती है। यह आपको आराम पहुंचाने और तनाव की भावनाओं को कम करने में मदद भी करेगा। आप बालों के लिए नारियल या बादाम का तेल, जैतून का तेल, अरंडी का तेल, आंवला तेल, या अन्य तेल का उपयोग कर सकते हैं। बेहतर और तेज़ परिणाम के लिए रोज़मैरी एसेंशियल ऑइल की कुछ बूंदें जोड़ें। अपनी उंगलियों के साथ हल्का दबाव देकर बाल और सिर पर उपरोक्त बताये तेलों में से किसी एक से अपने बालों में मालिश करें। यह सप्ताह में कम से कम एक बार करें।
    3. आंवले के चूर्ण को दही में मिलाएं और पेस्ट बना लें। इसके बाद इस पेस्ट को हल्के हाथों से बालों की जड़ों में लगाएं। कुछ देर ऐसे ही रहने दें और फिर धो लें। ऐसा नियमित रूप से करने पर बालों की समस्याएं खत्म हो जाती हैं।
    4. आधा कप दही में एक ग्राम काली मिर्च और थोड़ा नीबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं, शीघ्र ही बहुत फायदा होगा।
    5. आप क्या खाते हैं ये भी बालों के पोषण में अहम भूमिका निभाता है। विटामिन, प्रोटीन और मिनरल युक्त भोजन भोजन के सेवन करने से बालों को भी पोषित किया जा सकता है। सही खाने से बालों को झड़ने से रोका जा सकता है।
    6. आप बालों के लिए नारियल या बादाम का तेल, जैतून का तेल, अरंडी का तेल, आंवला तेल, या अन्य तेल का उपयोग कर सकते हैं। बेहतर और तेज़ परिणाम के लिए रोज़मैरी एसेंशियल ऑइल की कुछ बूंदें जोड़ें।
    7. एलोवेरा में एंज़ाइम होते हैं जो बालों के स्वस्थ विकास को सीधे बढ़ावा देने में शामिल होते हैं। इसके अलावा, अपने एल्कलाइन गुण के कारण ये बालों के पीएच को एक सही स्तर पर लाने में मदद कर सकते हैं और बाल विकास को बढ़ावा दे सकते हैं। एलोवेरा के नियमित उपयोग से आप सिर की खुजली को दूर कर सकते है, सिर की लालिमा और सूजन को कम कर सकते हैं, बालों की शक्ति और चमक बढ़ा सकते हैं और रूसी को भी कम कर सकते हैं। एलो वेरा जेल और रस दोनों ही इस काम में प्रभावी हैं।
    8. गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर उनका पेस्ट बनाकर नहाने से पहले उसे लगाने से भी बालों का गिरना कम होता है।
    9. जैतून के तेल और दही के मिश्रण से भी सिर के झड़ते बालों को रोका जा सकता है। इसके लिए एक प्याले में ताजा दही लेकर इसमें 2 चम्मच जैतून का तेल मिला लें। दोनों का मिश्रण तैयार करके इसे बालों की जड़ों में मसाज करते हुए लगाएं। ऐसा करने के करीब आधे घंटे बाद शैंपू करके सिर धो लें। बालों की झड़ने की समस्या इससे धीरे-धीरे कम हो जाएगी।
    10. जैतून के तेल को गर्म करें और उसमें एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर पेस्ट बना लें। नहाने से पहले इस पेस्ट को बालों की जड़ों में लगाएं। कुछ समय बाद बालों को धो लें।
    11. दस मिनट तक कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। इससे बाल भी नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ भी नहीं होगी।
    12. दही और नीबू के रस को मिलाकर पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट को नहाने से पहले बालों में लगाएं। 20-30 मिनट बाद बालों को धो लें।
    13. नियमित रूप से तिल के तेल से बालों की मालिश करें। तिल के तेल में गाय का घी और अमरबेल के चूर्ण को मिलाकर लगाएंगे तो बहुत जल्दी लाभ होगा। यह नुस्खा रात को सोने से पहले अपनाना चाहिए। सिर की मालिश करने से रक्त संचार व्यवस्थित हो जाता है और बालों के रोम सक्रिय हो जाते हैं। इससे बालों की सेहत में सुधार होता है।
    14. नींबू से भी बालों के झड़ने को रोका जा सकता है। नींबू के रस के इस्तेमाल से रूसी से निजात पाई जा सकता है। इसके लिए नींबू को हल्के हाथों से सिर की त्वचा पर रगड़ें। कई दिनों तक लगातार ऐसा करने से फायदा दिखने लगेगा।
    15. नींबू के रस को दही में मिलाकर पेस्ट बना लीजिए। नहाने से पहले इस पेस्ट को बालों में लगाइए। 30 मिनट बाद बालों को धो लीजिए। बालों का गिरना कम हो जाएगा।
    16. नीम का पेस्ट सिर में कुछ देर लगाए रखें, फिर बाल धो लें। बाल झड़ना बंद हो जाएगा।
    17. प्याज का रस निकालकर उसे गर्म करें और ठंडा होने के बाद बालों की जड़ों में लगाएं। इससे पहले गर्म पानी में भीगे हुए तौलिए से बालों को कुछ देर ढककर रखें। इसके बाद प्याज का रस लगाएं। कुछ देर बाद बालों को अच्छे शैम्पू से धो लें। ऐसा नियमित रूप से करें। प्याज का रस गर्म करने से उसकी दुर्गंध दूर हो जाती है।
    18. प्याज के रस में उच्च मात्रा में सल्फर कंटेंट होता है, जो बालों के रोम के लिए रक्त परिसंचरण में सुधार करता है, बालों के रोम का पुनर्निर्माण करने और सूजन को कम करने में मदद करता है जिसके कारण बालों का झड़ना कम हो जाता है। प्याज के रस में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो बालों के झड़ने का कारण बन सकने वाले कीटाणुओं और परजीवियों को मारने में मदद करता है, और सिर संक्रमण का उपचार करता है।
    19. प्याज के रस में उच्च मात्रा में सल्फर कंटेंट होता है, जो बालों के रोम के लिए रक्त परिसंचरण में सुधार करता है, बालों के रोम का पुनर्निर्माण करने और सूजन को कम करने में मदद करता है जिसके कारण बालों का झड़ना कम हो जाता है। प्याज के रस में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो बालों के झड़ने का कारण बन सकने वाले कीटाणुओं और परजीवियों को मारने में मदद करता है, और सिर संक्रमण का उपचार करता है।
    20. प्रतिदिन नहाने से पहले टमाटर का पेस्ट बनाकर बालों की जड़ों में लगाएं तो रूसी की समस्या दूर हो जाएगी।
    21. बाल धोने से 20-30 मिनट पहले बालों की जड़ों में दही लगाएं। जब बाल सूख जाएं तो पानी से धो लें।
    22. बालों का गिरना रोकने और बालों की वृद्धि के लिए सप्ताह में एक बार अपने बालों की रोजमेरी ऑयल से मालिश कीजिए, इससे बाल मजबूत होते हैं।
    23. बालों के प्राकृतिक और तेज़ी से विकास के लिए, आप आंवले का भी उपयोग कर सकते हैं। आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है, जिसकी शरीर में कमी बालों को गिरने का एक कारण हो सकती है।
    24. बालों को धोने से कम से कम आधा पहले बालों में दही लगाइये और जब यह पूरी तरह सूख जाएं तो उसे पानी से धो लीजिए। बालों को धोने से एक घंटा पहले बालों में अंडे लगाने से भी बाल मजबूत होते हैं।
    25. बालों को सेहतमंद और मजबूत बनाए रखने के लिए तेल मालिश करना बेहद जरूरी है। इससे सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है और बालों के झड़ने में कमी आती है। इसके अलावा बालों की मालिश करने से सिर की त्वचा को नमी मिलती है। जिसकी वजह से रूसी नहीं होती है।
    26. बालों में सप्ताह में एक बार तिल का तेल जरूर लगाएं। इस तेल के लगातार उपयोग से बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
    27. बेसन मिला दूध या दही के घोल से बालों को धोएं। इससे भी बालों में चमक आती है और झड़ना भी बंद होता है।
    28. मेंहदी का इस्तेमाल करके भी बालों के झड़ने को कम किया जा सकता है। इसके लिए रात को मेहंदी के पाउडर को पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह इसे अच्छी तरह फेंट कर बालों में जड़ों से लेकर पूरी लम्बाई में लगा लें। इसके बाद इसे सूखने दें और बाद में शैम्पू से सिर को धो लें। इससे जल्द ही बालों की झड़ने की समस्या से निजात मिलेगी।
    29. मेथी बालों के झड़ने के उपचार में बहुत प्रभावी है। मेथी के बीज में हार्मोन अंटेसीडेंट होते हैं जो बालों के विकास को बढ़ाने और बालों के रोम के पुनर्निर्माण में मदद करते हैं। इसमें प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड भी होता है जो बालों के विकास को प्रोत्साहित करता है।
    30. मेहंदी में भरपूर पोषण होता है जो बालों के लिए फायदेमंद है, इसलिए बालों में मेहंदी लगानी चाहिए। मेहंदी को अंडे के साथ मिलाकर लगाने से भी बहुत फायदा होता है।
    31. विटामिन डी बालों को बढ़ने में काफी मददगार साबित होता है। शरीर पर कम से कम 15 मिनिट के लिए भी सूर्य की किरणें पड़ने देते हैं, तो उस दिन के लिए जरूरी मात्रा में विटामिन डी की खुराक मिल जाती है।
    32. शहद को बालों में लगाने से बालों का गिरना बंद हो जाता है और असमय सफेदी से भी मुक्ति मिलती है।
    33. सप्ताह में एक बार एक चम्मच शहद और एक चम्मच नीबूं को मिलाकर नहाने से आधा घंटा पहले अपने बालों में लगाने से बालों का गिरना बहुत कम हो जाता है। दालचीनी और शहद को मिलाकर भी बालों में लगाइए।
    34. समय से पहले झड़ते बालों का एक मुख्य कारण तनाव भी हो सकता है। इसके लिए तनाव से मुक्ति पाना जरूरी है। तनाव में कमी लाकर काफी हद तक झड़ते बालों से बचा जा सकता है।


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