हाईकू प्रयास




मैने पहली बार हाईकू करने का प्रयास किया है पता नही कितना सफ़ल हूँ, यह तो आपकी प्रतिक्रियाओ से ही पता चलेगा। :)
गंगा की धार
करती है प्रहार
कि मै गंगा हूं ।

गंगा का पानी,
है कहनी कहानी
मै पावन हू।

शब्‍दो की भाषा
लाती है नई आशा
कि उठ जाओ।

माता का प्यार
दिलाता है दुलार
कि मै पुत्र हूँ

पिता का डांट
देता है एहसास
कि वे पिता है।

दीदी की राखी
एहसास दिलाती
कि मै भाई हूँ।

भाई का साथ
दिलाता है विश्वास
कि मै साथ हूँ

मेरा अनुज
दिलाता एह्सास
कि मै बड़ा हूँ।

पत्नी का प्यार
कहता है कि अब
तुम मेरे हो।


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9 टिप्‍पणियां:

Neeraj Rohilla ने कहा…

प्रमेन्द्रजी,

काफी अच्छी हाईकू लिखीं हैं,

निश्चय ही सराहनीय प्रयास है, आगे भी जारी रखें,

शुभेच्छु,
नीरज

Shrish ने कहा…

सुन्दर प्रयास। पहले तीन हायकू में लाइन ब्रेक दीजिए, हायकू की बजाय कविता लग रहे हैं।

शादी कर ली, बताया नहीं। :)

mahashakti ने कहा…

Neeraj Rohilla & Shrish

dhanyavaad

maine sudhar diya hai

सागर चन्द नाहर ने कहा…

वाह प्रमेन्द्र जी
बहुत सुन्दर हायकू लिखे हैं आपने।

श्रीश जी पूछ रहे हैं कुछ?

mahashakti ने कहा…

bitiya ki shadi 18 aur bete ki 21 saal ke baad isse pahale ki shadi to kanunan apraadh. :)

अनुराग श्रीवास्तव ने कहा…

सुंदर हायकू.

Neelima ने कहा…

आपके ब्लॉगिंग अनुभवों को पढा हाइकु प्रयस पर भी नजर गई परिवारिक संबंधों की सरलतम
अभिव्यक्ति की है आपने....

naren ने कहा…

vry nice i appericiate it....plzzz keep it on.....best of luck.......vande mataram......

tara ने कहा…

aapne kaise high kyou kiya