जानिये पैन कार्ड के बारे में



परमानेंट अकाउंट नम्बर कार्ड (PAN) आयकर विभाग द्वारा निर्गत 10 अंकों के अल्फा न्युमेरिक नम्बर युक्त एक फोटो पहचान पत्र है, जिसमें प्रत्येक कार्डधारी के लिए आवंटित की जाती है। आयकर के समुचित प्रबंधन के साथ साथ पैन टैक्स की चोरी और ब्लैकमनी पर नियंत्रण लगाने के लिए सबसे असरदार हथियार साबित हुआ है। इसका इसका विधयिक नियन्त्र भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा किया जाता है और आयकर रिटर्न फ़ाइल करते समय पैन नंबर का उल्लेख करना आवश्यक होता है। इसके अलावे, पैन का उपयोग बैंक में खाता खुलवाने, पासपोर्ट बनवाने, ट्रेन में ई-टिकट के साथ यात्रा करते समय पहचान पत्र के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
नया पैन कार्ड (PAN card) बनवाने जा रहे लोगों के लिए अच्‍छी और बड़ी खबर है कि अब पैनकार्ड के लिए 15 से 20 दिनों का इंतजार करने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। अब मात्र 3 से 4 दिनों के भीतर आवेदनकर्ता को पैनकार्ड मिल जाएगा। इसके लिए पैन नंबर को आधार कार्ड से जोड़ा जा रहा है। जिसके चलते अब पैन कार्ड के लिए एप्‍लाई करने वाले व्‍यक्ति की जानकारी आधार कार्ड के जरिए तुरंत वैरिफाई कर ली जाएगी। अभी पैन कार्ड बनवाने में 15 से 20 दिन का समय लगता है। अब एनएसडीएल और यूटीआईएसएल की वेबसाइट पर पैन नंबर के लिए आवेदन देने पर उसे आधार नंबर के जरिए वेरिफाई किया जा सकेगा। ऐसा करने से समय की बचत होगी और आवेदकों को उनका पैन नंबर जल्द से जल्द मिल सकेगा।
Permanent Account Number
(Know About <abbr title="Permanent Account Number">PAN</abbr> Card)

पैन का उपयोग इन कार्यों के लिए अनिवार्य रूप से किया जाता है:
  1. आयकर (आईटी) रिटर्न दाखिल करने के लिए,
  2. शेयरों की खरीद-बिक्री हेतु डीमैट खाता खुलवाने के लिए,
  3. एक बैंक खाता से दूसरे बैंक खाता में 50,000 रुपये या उससे अधिक की राशि निकालने अथवा जमा करने अथवा हस्तांतरित करने पर,
  4. टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) जमा करने व वापस पाने के लिए।
  5. अगर किसी की सालाना आमदनी टैक्सेबल है तो उसे पैन लेना अनिवार्य है। ऐसे लोग अगर एम्प्लॉयर को पैन उपलब्ध नहीं कराते हैं तो एम्प्लॉयर उनका स्लैब रेट या 20 फीसदी में से जो ज्यादा है, उस दर से टीडीएस काट सकता है।
  6. आय यदि कर योग्य (टैक्सेबल) नहीं है, तो पैन लेना अनिवार्य नहीं है। फिर भी बैंकिंग और दूसरी तरह के फाइनैंशल ट्रांजैक्शन के मामलों (जैसे : बैंक अकाउंट खोलना, प्रॉपर्टी बेचना-खरीदना, इनवेस्टमेंट करना आदि) में पैन की जरूरत होती है, इसलिए पैन सभी को ले लेना चाहिए।
  7. अब म्यूचुअल फंड के सभी निवेशकों को अपने पैन (परमानेंट एकाउंट नंबर) का ब्योरा अनिवार्य तौर पर देना होगा, भले ही निवेश का आकार कितना ही बड़ा या छोटा हो।
  8. पैन कार्ड के लिए कौन आवेदन कर सकता है
  9. पत्येक भारतीय नागरिक पैन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है। कोई भी व्यक्ति, फर्म या संयुक्त उपक्रम पैन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है।
  10. आवेदक का किसी नौकरी, व्यवसाय या कारोबार से संलग्न रहना आवश्यक नही है
  11. इसके लिए कोई न्यूनतम अथवा अधिकतम उम्र सीमा नहीं है। आयु, लिंग, शिक्षा, निवास स्थान पैन कार्ड आवेदन के लिए बाधक नहीं है।
  12. बालको और नवजात बच्चों के लिए भी पैन कार्ड बनवाया जा सकता है।
  13. पैन कार्ड आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताये
  14. अच्छी गुणवत्ता वाली पासपोर्ट आकार की दो रंगीन फोटो
  15. शुल्क के रूप में 94 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट या चेक
  16. व्यक्तिगत पहचान के प्रमाण की छायाप्रति
  17. आवासीय पता के प्रमाण की छायाप्रति
पैन कार्ड के लिए व्यक्तिगत पहचान व आवासीय पता पहचान दोनों सूची में से अलग-अलग दो दस्तावेज जमा करना होता है दोनों की सूची अलग से संलग्न है
  1. व्यक्तिगत पहचान के लिए प्रमाण
  2. विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र
  3. मैट्रिक का प्रमाणपत्र
  4. मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान की डिग्री
  5. डिपोजिटरी खाता विवरण
  6. क्रेडिट कार्ड का विवरण
  7. बैंक खाते का विवरण/ बैंक पासबुक
  8. पानी का बिल
  9. राशन कार्ड
  10. संपत्ति कर मूल्यांकन आदेश
  11. पासपोर्ट
  12. मतदाता पहचान पत्र
  13. ड्राइविंग लाइसेंस
  14. सांसद अथवा विधायक अथवा नगरपालिका पार्षद अथवा राजपत्रित अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित पहचान प्रमाण पत्र।
आवासीय पता के प्रमाण के लिए
  1. बिजली बिल
  2. टेलीफोन बिल
  3. डिपोजिटरी खाता विवरण
  4. क्रेडिट कार्ड का विवरण
  5. बैंक खाता विवरण/ बैंक पास बुक
  6. घर किराये की रसीद
  7. नियोक्ता का प्रमाणपत्र
  8. पासपोर्ट
  9. मतदाता पहचान पत्र
  10. संपत्ति कर मूल्यांकन आदेश
  11. ड्राइविंग लाइसेंस
  12. राशन कार्ड
  13. सांसद अथवा विधायक अथवा नगरपालिका पार्षद अथवा राजपत्रित अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित पहचान प्रमाण पत्र।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि यदि आवासीय पता के प्रमाण के लिए क्रम संख्या 1 से 7 तक में उल्लिखित दस्तावेज का उपयोग जा रहा हो, तो वह जमा करने की तिथि से छः माह से अधिक पुराना नहीं होनी चाहिए।


पैन कार्ड के लिए शुल्क व भुगतान की प्रक्रिया

  1. पैन आवेदन के लिए शुल्क 94 रुपये है (85.00 रुपये + 10.3% सेवा शुल्क)
  2. शुल्क का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट, चेक अथवा क्रेडिट कार्ड द्वारा किया जा सकता है,
  3. डिमांड ड्राफ्ट या चेक NSDL- PAN के नाम से बना हों,
  4. डिमांड ड्राफ्ट मुम्बई में भुगतेय होनी चाहिए और डिमांड ड्राफ्ट के पीछे आवेदक का नाम तथा पावती संख्या लिखा होना चाहिए,
  5. चेक द्वारा शुल्क का भुगतान करनेवाले आवेदक देशभर में एचडीएफसी बैंक के किसी भी शाखा (दहेज को छोड़कर) पर भुगतान कर सकते हैं। आवेदक को जमा पर्ची पर NSDLPAN का उल्लेख करनी चाहिए।


Share:

मनुस्मृति वर्णित विवाह




वि’ उपसर्ग पूर्वक ‘वह्’ प्रापणे धातु से घ प्रत्यय के योग से विवाह शब्द निष्पन्न होता है। विवाह अर्थात् विशिष्ट ढंग से कन्या को ले जाना। विवाह-संबंधी शब्द परिणय या परिणयन (अग्नि की प्रदक्षिणा करना) एवं पाणिग्रहण कन्या का हाथ पकड़ना) विवाह सम्बन्धी शब्द है यद्यपि ये शब्द विवाह संस्कार का केवल एक-एक तत्व बताते हैं। संस्कार शब्द पहले स्पष्ट किया जा चुका है विवाह संस्कार अर्थात् वर व वधू के शरीर व आत्मा को सुविचारों से अलंकृत कर इस योग्य बनाना कि वो गृहस्थाश्रम का निर्वहण कर सकें। आज विवाह संस्कार एक संस्कार न होकर परम्परा का निर्वहण मात्र रह गया है। इस संस्कार की मर्यादा आज छिन्न-भिन्न हो गयी है परिणामतः गृहस्थ जीवन में स्वर्ग जैसा सुख अब दिखाई नहीं पड़ता। गृह्यसूत्रों, धर्मसूत्रों एवं स्मृतियों के काल से ही विवाह आठ प्रकार के कहे गये हैं-
ब्राह्मो दैवस्तथैवार्षः प्राजापत्यस्तथाऽसुरः।
गान्धर्वोराक्षश्चैव पैशाचश्चाष्टमोऽधमः।। मनुस्मृति 3/21
अर्थात् ब्राह्म, दैव, आर्ष, प्राजापत्य, आसुर, गन्धर्व, राक्षस, पैशाच ये विवाह आठ प्रकार के होते हैं।
महर्षि मनु द्वारा वर्णित विवाह पद्धतियां इस प्रकार हैं-
चतुर्णामपि वर्णानां प्रेत्य चेह हिताहितान |
अश्ताविमान्स मासेन सत्रीविवाहान्निबोधत ||
चारों वर्णों के लिए हित तथा अहित करने वाले इन आठ प्रकार के स्त्रियों से होने वाले विवाहों को संक्षेप से जानो, सुनो


ब्राह्म अथवा स्वयंवर विवाह
आच्छाद्य चार्चयित्वा च श्रुतिशीलवते स्वयं
आहूय दानं कन्याया ब्राह्मो धर्म: प्रकीर्तित:
कन्या के योग्य सुशील, विद्वान पुरुष का सत्कार करके कन्या को वस्त्रादि से अलंकृत करके उत्तम पुरुष को बुला अर्थात जिसको कन्या ने प्रसन्न भी किया हो उसको कन्या देना - वह 'ब्राह्म' विवाह कहलाता है

दैव विवाह
यज्ञे तु वितते सम्यगृत्विजे कर्म कुर्वते
अलं कृत्य सुतादानं दैवं धर्मं प्रचक्षते
विस्तृत यज्ञ में बड़े बड़े विद्वानों का वरण कर उसमे कर्म करने वाले विद्वान् को वस्त्र आभूषण आदि से कन्या को सुशोभित करके देना 'दैव विवाह' कहा जाता है
विशेष टिप्पणी - ऋत्विक शब्द का अर्थ प्रसंग के अनुकूल किया जाता है और यहाँ प्रसंग के अनुसार विवाह के लिए आए सभी विद्वानों से है न कि केवल ब्राह्मणों के लिए

आर्ष विवाह
एकं गोमिथुनं द्वे वा वरादादाय धर्मत:
कन्या प्रदानं विधिवदार्षो धर्म: स उच्यते
जो वर से धर्म अनुसार एक गाय बैल का जोड़ा अथवा दो जोड़े लेकर विधि अनुसार कन्या का दान करना है वह आर्ष विवाह कहा जाता है

प्राजापत्य विवाह
सहोभौ चरतां धर्ममिति वाचानुभाष्य च
कन्याप्रदानमभ्यचर्य प्राजापत्यो विधि: स्मृत:
कन्या और वर को, यज्ञशाला में विधि करके सब के सामने 'तुम दोनों मिलके गृहाश्रम के कर्मों को यथावत करो', ऐसा कहकर दोनों की प्रसन्नता पूर्वक पाणिग्रहण होना - वह प्राजापत्य विवाह होता है

आसुर विवाह
ज्ञातिभ्यो द्रविणं दत्त्वा कन्यायै चैव शक्तितः।
कन्याप्रदानं स्वाच्छन्द्यासुरो धर्म उच्यते ।।
वर की जाति वालों और कन्या को यथाशक्ति धन दे कर अपनी इच्छा से अर्थात वर अथवा कन्या की प्रसन्नता और इच्छा की उपेक्षा कर ,के होम आदि विधि कर कन्या देना 'आसुर विवाह' कहलाता है ।

गान्धर्व विवाह
इच्छयाअन्योन्यसन्योग: कन्यायाश्च यरस्य च।
गान्धर्व: स तू विज्ञेयी मैथुन्य: कामसंभव: ।।
वर और कन्या की इच्छा से दोनों का संयोग होना और अपने मन में यह मान लेना कि हम दोनों स्त्री पुरुष हैं, ऐसा काम से उत्पन्न विवाह 'गान्धर्व विवाह कहलाता है।

राक्षस विवाह
हत्वा छित्त्वा च भित्त्वा च क्रोशन्तीं रुदतीं गृहात।
प्रसह्य कन्याहरणं राक्षसो विधिरुच्यते।।
हनन छेदन अर्थात कन्या के रोकने वालों का विदारण कर के, रोती, कांपती और भयभीत कन्या का घर से बलात अपहरण करके विवाह करना राक्षस विवाह कहा जाता है।

पिशाच विवाह
सुप्तां मत्तां प्रमत्तां वा रहो यत्रोपगच्छति ।
स पापिष्ठो विवाहानां पैशाचश्चाष्टमोअधम: ।।
जो सोती, पागल हुई अथवा नशे में उन्मत्त हुई कन्या को एकांत पाकर दूषित कर देना है, यह सब विवाहों में नीच से नीच विवाह 'पिशाच विवाह' कहा जाता है।

प्रथम चार विवाह उत्तम हैं
ब्राह्मादिषु विवाहेषु च्तुष् र्वेवानुपूर्वशः।
ब्रह्मवर्चस्विनः पुत्रा जायन्ते शिष्टसंमता ॥
ब्रह्म, दैव, आर्ष तथा प्राजापत्य ; इन चार विवाहों में पाणिग्रहण किए हुए स्त्री पुरुषों से जो सन्तान उत्पन्न होती है वह वेदादि विद्या से तेजस्वी, आप्त पुरुषों के संगति से अत्युत्त्म होती है।

रूपसत्तवोवुणोपेता धनवन्तो यशस्विनः।
पर्याप्तभोगा धर्मिष्ठा जीवन्ति च शतं समाः॥
वे सन्तानें सुन्दर रूप, बल - पराक्रम, शुद्ध बुद्धि आदि उत्तम गुणों से युक्त, बहुधन युक्त, कीर्तिमान और पूर्ण भोग के भोक्ता धर्मात्मा हो कर सौ वर्ष तक जीते हैं।

अन्य चार विवाह अधम अथवा निंदनीय हैं
इतरेषु तु शिष्टेषु नृशंसानृतवादिनः।
जायन्ते दुर्विवाहेषु ब्रह्मधर्मद्विषः सुताः॥
उपरोक्त चार विवाहों से इतर जो अन्य चार - असुर, गंधर्व, राक्षस और पैशाच विवाह हैं, इन चार दुष्ट विवाहों से उत्पन्न हुए संतान निन्दित कर्मकर्ता, मिथ्यावादी, वेद धर्म के द्वेषी अत्यंत नीच स्वभाव वाले होते हैं ।



Share:

॥ श्री राम चालीसा ॥ (in Hindi Script)



श्री रघुवीर भक्त हितकारी ।  सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई ।  ता सम भक्त और नहिं होई ।।

ध्यान धरे शिवजी मन माहीं ।  ब्रहृ इन्द्र पार नहिं पाहीं ।।
दूत तुम्हार वीर हनुमाना ।  जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना ।।

तब भुज दण्ड प्रचण्ड कृपाला ।  रावण मारि सुरन प्रतिपाला ।।
तुम अनाथ के नाथ गुंसाई ।  दीनन के हो सदा सहाई ।।

ब्रहादिक तव पारन पावैं ।  सदा ईश तुम्हरो यश गावैं ।।
चारिउ वेद भरत हैं साखी ।  तुम भक्तन की लज्जा राखीं ।।

गुण गावत शारद मन माहीं ।  सुरपति ताको पार न पाहीं ।।
नाम तुम्हार लेत जो कोई ।  ता सम धन्य और नहिं होई ।।

राम नाम है अपरम्पारा ।  चारिहु वेदन जाहि पुकारा ।।
गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो ।  तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो ।।

शेष रटत नित नाम तुम्हारा ।  महि को भार शीश पर धारा ।।
फूल समान रहत सो भारा ।  पाव न कोऊ तुम्हरो पारा ।।

भरत नाम तुम्हरो उर धारो ।  तासों कबहुं न रण में हारो ।।
नाम शक्षुहन हृदय प्रकाशा ।  सुमिरत होत शत्रु कर नाशा ।।

लखन तुम्हारे आज्ञाकारी ।  सदा करत सन्तन रखवारी ।।
ताते रण जीते नहिं कोई ।  युद्घ जुरे यमहूं किन होई ।।

महालक्ष्मी धर अवतारा ।  सब विधि करत पाप को छारा ।।
सीता राम पुनीता गायो ।  भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो ।।

घट सों प्रकट भई सो आई ।  जाको देखत चन्द्र लजाई ।।
सो तुमरे नित पांव पलोटत ।  नवो निद्घि चरणन में लोटत ।।

सिद्घि अठारह मंगलकारी ।  सो तुम पर जावै बलिहारी ।।
औरहु जो अनेक प्रभुताई ।  सो सीतापति तुमहिं बनाई ।।

इच्छा ते कोटिन संसारा ।  रचत न लागत पल की बारा ।।
जो तुम्हे चरणन चित लावै ।  ताकी मुक्ति अवसि हो जावै ।।

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा ।  नर्गुण ब्रहृ अखण्ड अनूपा ।।
सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी ।  सत्य सनातन अन्तर्यामी ।।

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै ।  सो निश्चय चारों फल पावै ।।
सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं ।  तुमने भक्तिहिं सब विधि दीन्हीं ।।

सुनहु राम तुम तात हमारे ।  तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे ।।
तुमहिं देव कुल देव हमारे ।  तुम गुरु देव प्राण के प्यारे ।।

जो कुछ हो सो तुम ही राजा ।  जय जय जय प्रभु राखो लाजा ।।
राम आत्मा पोषण हारे ।  जय जय दशरथ राज दुलारे ।।

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरुपा ।  नमो नमो जय जगपति भूपा ।।
धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा ।  नाम तुम्हार हरत संतापा ।।

सत्य शुद्घ देवन मुख गाया ।  बजी दुन्दुभी शंख बजाया ।।
सत्य सत्य तुम सत्य सनातन ।  तुम ही हो हमरे तन मन धन ।।

याको पाठ करे जो कोई ।  ज्ञान प्रकट ताके उर होई ।।
आवागमन मिटै तिहि केरा ।  सत्य वचन माने शिर मेरा ।।

और आस मन में जो होई ।  मनवांछित फल पावे सोई ।।
तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै ।  तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै ।।

साग पत्र सो भोग लगावै ।  सो नर सकल सिद्घता पावै ।।
अन्त समय रघुबरपुर जाई ।  जहां जन्म हरि भक्त कहाई ।।

श्री हरिदास कहै अरु गावै ।  सो बैकुण्ठ धाम को पावै ।।


।। दोहा ।।

सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय ।  हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय ।।
राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय ।  जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्घ हो जाय ।।

इन्हें भी पढ़े:

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं ।


Share:

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं ।



Shri Raam -Balak Raam with his mother



श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं ।
नवकंज-लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि नवनील-नीरद सुन्दर ।
पटपीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ॥

भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंश-निकन्दनं ।
रघुनन्दन आनन्द कंद कौशलचन्द दशरथ्-नन्दनं ॥
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं ।
आजानु-भुज-शर-चाप-धर- संग्राम जित-खरदूषणं ॥

इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजन ।
मम हृदय-कंज निवास कुरु कामादि खलदल-गंजन ॥
मनु हाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो ।
करुणा निधाअन सुजान सील सनेह जानत रावरो ॥

एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषी अली ।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली ॥


Share:

उच्च न्यायालय न्यायाधीश का स्थानान्तरण अवधि तक बहिष्कार



उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओ के उत्पीड़न व हत्या के विरोध में उ० प्र० बार कौंसिल के द्वारा आहूत कि गयी हड़ताल के दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश सुनील अम्बानी द्वारा विरुद्ध कोर्ट रूम में अधिवक्ताओं के विरुद्ध अपशब्दों का उपयोग किया गया.. जिसके खिलाफ़ हाई कोर्ट बार एसोशिएशन द्वारा निम्न प्रस्ताव पारित किया गया.
  • न्यायाधीश सुनील अम्बानी की अदालत का उनके स्थानान्तरण अवधि तक बहिष्कार किया जायेगा.
  • न्यायाधीश सुनील अम्बानी के खिलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही किया जायेगा.
  • उनकी सम्पत्ति की सीबीआई जाँच हो.
  • उनके परिवार के सदस्यों की सम्पत्ति की सीबीआई जाँच हो.
किसी न्यायाधीश द्वारा अधिवक्ताओं अपमान करना अनुचित व विधि विरूद्ध है, यह प्रस्ताव खुले मंच पर सर्व सम्मति से अधिवक्ताओं द्वारा पारित किया..


Share:

करवा चौथ (Karwa Chauth)



करवा चौथ की पौराणिक कथा केअनुसार एक समय की बात है, जब नीलगिरी पर्वत पर पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने गए। तब किसी कारणवश उन्हें वहीं रूकना पड़ा। उन्हीं दिनों पांडवों पर गहरा संकट आ पड़ा। तब चिंतित व शोकाकुल द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया तथा कृष्‍ण के दर्शन होने पर पांडवों के कष्टों के निवारण हेतु उपाय पूछा।

तब कृष्ण बोले- हे द्रौपदी!मैं तुम्हारी चिंता एवं संकट का कारण जानता हूं। उसके लिए तुम्हें एक उपाय करना होगा। जल्दी ही कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्थी आने वाली है, उस दिन तुम पूरे मन से करवा चौथ का व्रत रखना। भगवान शिव, गणेश एवं पार्वती की उपासना करना, तुम्हारे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे तथा सबकुछ ठीक हो जाएगा।

कृष्ण की आज्ञा का पालन कर द्रोपदी ने वैसा ही करवा चौथ का व्रत किया। तब उसे शीघ्र ही अपने पति के दर्शनहुए और उसकी सारी चिंताएं दूर हो गईं।

जब मां पार्वती द्वारा भगवान शिव से पति की दीर्घायु एवं सुख-संपत्ति की कामना की विधि पूछी तब शिव ने 'करवा चौथ व्रत’ रखनेकी कथा सुनाई थी। करवा चौथ का व्रत करने के लिए श्रीकृष्ण ने दौपदी को निम्न कथा का उल्लेख किया था।

पुराणों के अनुसार करवा नाम की एक पतिव्रता धोबिन अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित गांव में रहती थी। उसका पति बूढ़ा और निर्बल था। एक दिनजब वह नदी के किनारे कपड़े धो रहा था तभी अचानक एक मगरमच्छ वहां आया, और धोबी के पैर अपने दांतों में दबाकर यमलोक की ओर ले जाने लगा। वृद्ध पति यह देख घबराया और जब उससे कुछ कहतेनहीं बना तो वह करवा..! करवा..! कहकर अपनी पत्नी को पुकारने लगा।

ND पति की पुकार सुनकर धोबिन करवा वहां पहुंची, तो मगरमच्छ उसके पति को यमलोक पहुंचाने ही वाला था। तब करवा ने मगर को कच्चे धागे से बांध दिया और मगरमच्छ कोलेकर यमराज के द्वार पहुंची। उसने यमराज से अपने पति की रक्षा करने की गुहार लगाई और साथ ही यह भीकहा की मगरमच्छ को उसके इस कार्य के लिए कठिन से कठिन दंड देने का आग्रह किया और बोली- हे भगवन्! मगरमच्छ नेमेरे पति के पैर पकड़ लिए है। आप मगरमच्छ को इस अपराधके दंड-स्वरूप नरक भेज दें।

करवा की पुकार सुन यमराज नेकहा- अभी मगर की आयु शेष है, मैं उसे अभी यमलोक नहींभेज सकता। इस पर करवा ने कहा- अगर आपने मेरे पति को बचाने में मेरी सहायता नहीं कि तो मैं आपको श्राप दूंगी और नष्ट कर दूँगी।

करवा का साहस देख यमराज भी डर गए और मगर को यमपुरी भेजदिया। साथ ही करवा के पति को दीर्घायु होने का वरदान दिया। तब से कार्तिक कृष्ण की चतुर्थी को करवा चौथ व्रत का प्रचलन में आया। जिसे इस आधुनिक युग में भी महिलाएं अपने पूरी भक्ति भाव के साथ करती है और भगवान से अपनी पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।


Share:

अध्धयन के लिए दिशा विचार



पढ़ाई की दिशा उत्तर-पूर्व
वर्तमान युग प्रतियोगिता का है यहाँ छोटी से छोटी कक्षा से लेकर बड़े से बड़े व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। पढ़ाई और मेहनत तो सभी करते हैं लेकिन पढ़ाई में यदि हम उचित दिशा का ज्ञान भी शामिल कर लें तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। पर बच्चों को पढ़ाई के लिए बैठाते समय हम इस महत्वपूर्ण बात को भूल ही जाते हैं कि उसे किस दिशा की ओर मुँह कर के पढ़ने बैठाना है। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पढ़ाई का स्थान कहाँ होना चाहिए जिससे पढ़ाई सुचारु रुप से व निर्विघ्न संपन्न हो और परीक्षा में उत्तम से उत्तम परिणाम आएँ।
 
जो युवक-युवतियाँ पश्चिम की ओर मुंँह कर के पढ़ते हैं, देखा गया है कि उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता। यदि वे पढ़ते भी हैं तो उत्तम परिणाम नहीं मिल पाते। पश्चिम दिशा ढलती हुई शाम की तरह चेतना में सुस्तपन को विकसित करती है। दक्षिण दिशा भी पढ़ाई हेतु उपयुक्त नहीं रहती, क्योंकि यह दिशा हमेशा निराशा का संचार कराती है। मन बेचैन रहता है, पढ़ने में भी मन नहीं लगता। परिणाम तो वे लोग भलीभाँति जानते होंगे जो दक्षिण ओर मुँह करके पढ़ते हैं।
 
उचित प्रकाश में ठंडे पानी से हाथ-मुँह धो कर जहाँ तक हो सके खुशबूदार अगरबत्ती लगाकर उत्तर की ओर मुँह करके पढ़ने से एक तो पढ़ाई के क्षेत्र में उन्नति होती है वहीं पढ़ा हुआ भी याद रहता है। और फिर परिणाम तो उत्तम ही रहेंगे। यदि सदा ही पूर्व दिशा की ओर मुँह करके पढ़ाई की जाए तो सदैव उत्तम परिणाम के साथ-साथ आगे बढ़ने के अवसर भी आते हैं।
 
पूर्व दिशा से ही नई चेतना व स्फूर्ति का संचार होता है और सूर्योदय इसी दिशा में होने के कारण सूर्य की तरह उन्नति पाने के योग बनते हैं। साथ ही उत्तर दिशा शीतलता भी प्रदान करती है और हम जानते ही हैं कि पढ़ाई के लिए दिमाग ठंडा होना आवश्यक है। जब मन स्थिर होगा तो पढ़ाई में अच्छी तरह से ध्यान केंद्रित होगा। इस प्रकार हम अध्ययन के लिए बैठक व्यवस्था उत्तर-पूर्व की ओर रखें तो निश्चित ही उत्तम परिणाम पाएँगे और हमारी मेहनत भी रंग लाएगी।


Share:

श्री जगन्नाथ जी की आरती




आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
परसत चरणारविन्द आपदा हरी।
निरखत मुखारविंद आपदा हरी,
कंचन धूप ध्यान ज्योति जगमगी।
अग्नि कुण्डल घृत पाव सथरी। आरती..
देवन द्वारे ठाड़े रोहिणी खड़ी,
मारकण्डे श्वेत गंगा आन करी।
गरुड़ खम्भ सिंह पौर यात्री जुड़ी,
यात्री की भीड़ बहुत बेंत की छड़ी। आरती ..
धन्य-धन्य सूरश्याम आज की घड़ी। आरती ..


Share:

श्री कृष्ण की आरती



KRISHNASTU BHAGWAN SAWAM

आरती कुंजविहारी की। श्रीगिरधर कृष्णमुरारी की।
गले में बैजंतीमाला, बजावै मुरली मधुर वाला।
श्रवन में कुण्डल झलकाला, नंदके आनंद नंदलाला। श्री गिरधर ..
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली,
लतनमें ठाढ़े बनमाली।
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सो झलक,
ललित छवि स्यामा प्यारी की। श्री गिरधर ..
कनकमय मोर-मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसे,
गगन सो सुमन राशि बरसै,
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालनी संग,
अतुल रति गोपकुमारी की। श्री गिरधर ..
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा,
स्मरन ते होत मोह-भंगा,
बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अध कीच,
वरन छवि श्रीबनवारीकी। श्री गिरधर ..
चमकती उ"वल तट रेनू, बज रही वृन्दावन बेनू,
चहूं दिसि गोपी ग्वाल धेनू,
हँसत मृदु नँद, चाँदनी चंद, कटत भव-फंद,
टेर सुनु दीन भिखारी की। श्री गिरधर ..
आरती कुंजबिहारी की। श्री गिरधर कृष्णमुरारी की।


Sri Krishna Wallpapers
Sri Krishna Wallpapers

Sri Krishna Wallpapers
Sri Krishna Wallpapers

Sri Krishna and Yasoda Photo
Sri Krishna and Yasoda Photo

Lord Sri Krisha Playing Flute Photo
Lord Sri Krisha Playing Flute Photo

Lord Shree Krishna and Radha Picture
Lord Shree Krishna and Radha Picture

God Sri Krishna Wallpapers
God Sri Krishna Wallpapers

Lord Sri Krishna Photo
Sri Krishnaji Playing Flute Images
Lord Sri Krishna Photo
Radha and Krishna Photo in Om Symbol

Lord Sri Krishna Photo
Sri Krishna and Balram steeling Creame

Lord Sri Krishna Photo
Sri Krishna with Cow Photo

Lord Sri Krishna Photo
God Sri Krishna Wallpapers

Lord Sri Krishna Photo
Hindu God Krishna with Cow and Flute

Lord Sri Krishna Photo
Shri Krishna Phicture

Lord Sri Krishna Photo
Sri Krishna and Arjun in Kurukshetra

Lord Sri Krishna Photo
Radha and Krishna Loving Scene

Lord Sri Krishna Photo
Krishna and Cow playing flute

Lord Sri Krishna Photo
Hindu God Krishna Ji

Lord Sri Krishna Photo
Giving food to cow Sri Shyam (Krishna)


Share:

श्री गणेश चालिसा (Shri Ganesh Chalisa)




जय गणपति सदगुण सदन,
कविवर बदन कृपाल,
विघ्न हरण मंगल करन,
जय जय गिरिजालाल

जय जय जय गणपति गणराजू,
मंगल भरण करण शुभः काजू,
जय गजबदन सदन सुखदाता,
विश्व विनायका बुद्धि विधाता

वक्रतुंडा शुची शुन्दा सुहावना,
तिलका त्रिपुन्दा भाल मन भावन,
राजता मणि मुक्ताना उर माला,
स्वर्ण मुकुता शिरा नयन विशाला

पुस्तक पानी कुथार त्रिशूलं,
मोदक भोग सुगन्धित फूलं,
सुन्दर पीताम्बर तन साजित,
चरण पादुका मुनि मन राजित

धनि शिव सुवन शादानना भ्राता,
गौरी लालन विश्व-विख्याता,
रिद्धि सिद्धि तव चंवर सुधारे,
मूषका वाहन सोहत द्वारे

कहूं जन्मा शुभ कथा तुम्हारी,
अति शुची पावन मंगलकारी,
एक समय गिरिराज कुमारी,
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा,
तब पहुँच्यो तुम धरी द्विजा रूपा,
अतिथि जानी के गौरी सुखारी,
बहु विधि सेवा करी तुम्हारी

अति प्रसन्ना हवाई तुम वरा दीन्हा,
मातु पुत्र हित जो टाप कीन्हा,
मिलही पुत्र तुही, बुद्धि विशाला,
बिना गर्भा धारण यही काला

गणनायक गुण ज्ञान निधाना,
पूजित प्रथम रूप भगवाना,
असा कही अंतर्ध्याना रूप हवाई,
पालना पर बालक स्वरूप हवाई

बनिशिशुरुदंजबहितुम थाना,
लखी मुख सुख नहीं गौरी समाना,
सकल मगन सुखा मंगल गावहीं,
नाभा ते सुरन सुमन वर्शावाहीं

शम्भू उमा बहुदान लुतावाहीं,
सुरा मुनिजन सुत देखन आवहिं,
लखी अति आनंद मंगल साजा,
देखन भी आए शनि राजा

निज अवगुण गाणी शनि मन माहीं,
बालक देखन चाहत नाहीं,
गिरिजा कछु मन भेद बढायो,
उत्सव मोरा न शनि तुही भायो

कहना लगे शनि मन सकुचाई,
का करिहौ शिशु मोहि दिखायी,
नहीं विश्वास उमा उर भयू,
शनि सों बालक देखन कह्यौ

पदताहीं शनि द्रिगाकोना प्रकाशा,
बालक सिरा उडी गयो आकाशा,
गिरजा गिरी विकला हवाई धरणी,
सो दुख दशा गयो नहीं वरनी


हाहाकार मच्यो कैलाशा,
शनि कीन्हों लखी सुत को नाशा,
तुरत गरुडा चढी विष्णु सिधाए,
काटी चक्र सो गजशिरा लाये

बालक के धड़ ऊपर धारयो,
प्राण मंत्र पढ़ी शंकर दारयो,
नाम’गणेशा’शम्भुताबकीन्हे,
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा,
पृथ्वी कर प्रदक्षिना लीन्हा,
चले शदानना भरमि भुलाई,
रचे बैठी तुम बुद्धि उपाई

चरण मातु-पितु के धारा लीन्हें,
तिनके सात प्रदक्षिना कीन्हें
धनि गणेशा कही शिव हिये हरष्यो,
नाभा ते सुरन सुमन बहु बरसे

तुम्हारी महिमा बुद्धि बढाई,
शेष सहसा मुख सके न गई,
मैं मति हीन मलीना दुखारी,
करहूँ कौन विधि विनय तुम्हारी

भजता ‘रामसुन्दर’ प्रभुदासा,
जगा प्रयागा ककरा दुर्वासा,
अब प्रभु दया दीना पर कीजै,
अपनी भक्ति शक्ति कुछा दीजै

ll दोहा ll

श्री गणेशा यह चालीसा, पाठा कर्रे धरा ध्यान l
नीता नव मंगल ग्रह बसे, लहे जगत सनमाना ll
सम्बन्ध अपना सहस्र दश, ऋषि पंचमी दिनेशा l
पूर्ण चालीसा भयो, मंगला मूर्ती गणेशा ll



Share:

श्री गणेश जी की आरती




Shri Ganesh
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
लडुअन के भोग लागे, सन्त करें सेवा। जय ..
एकदन्त, दयावन्त, चार भुजाधारी।
मस्तक सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय ..
अन्धन को आंख देत, कोढि़न को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥ जय ..
हार चढ़े, पुष्प चढ़े और चढ़े मेवा।
सब काम सिद्ध करें, श्री गणेश देवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
विघ्न विनाशक स्वामी, सुख सम्पत्ति देवा॥ जय ..
पार्वती के पुत्र कहावो, शंकर सुत स्वामी।
गजानन्द गणनायक, भक्तन के स्वामी॥ जय ..
ऋद्धि सिद्धि के मालिक मूषक सवारी।
कर जोड़े विनती करते आनन्द उर भारी॥ जय ..
प्रथम आपको पूजत शुभ मंगल दाता।
सिद्धि होय सब कारज, दारिद्र हट जाता॥ जय ..
सुंड सुंडला, इन्द इन्दाला, मस्तक पर चंदा।
कारज सिद्ध करावो, काटो सब फन्दा॥ जय ..
गणपत जी की आरती जो कोई नर गावै।
तब बैकुण्ठ परम पद निश्चय ही पावै॥ जय .॥




Share:

श्रीमद्भागवत आरती




आरती अतिपावन पुरान की,
धर्मभक्ति विज्ञान खान की। आरती ..
महापुराण भागवत निर्मल।
शुक मुख विगलित निगम कल्प फल।
परमानन्द सुधा रसमय कल।
लीला रति रस रसनिधान की। आरती ..
कलिमय मथनि त्रिताप निवारिणि।
जन्म मृत्युमय, भव-भयहारिणि।
सेवत सतत सकल सुखकारिणि।
सुमहौषधि हरि चरित गान की। आरती ..
विषय विलास विमोह विनासिनि।
विमल विराग विवेक विकासिनि।
भगवत् तत्व रहस्य प्रकासिनि।
परम ज्योति परमात्मज्ञान की। आरती ..
परमहंस मुनिमन उल्लासिनि।
रसिक हृदय, रसरासि विलासिनि।
मुक्ति-मुक्ति रति प्रेम सुदासिनि।
कथा अकि†चन प्रिय सुजान की। आरती ..


Share:

श्री पार्वती माता की आरती




जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥ जय..
अरिकुल पद्म विनासनि जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥ जय..
सिंह को वाहन साजे, कुण्डल है साथा।
देव वधू जह गावत, नृत्य करत ता था॥ जय..
सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी, सखियन संगराता॥ जय..
शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्याता।
सहस्त्र भुज तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥ जय..
सृष्टि रूप तुही है, जननी शिवसंग रंगराता।
नन्दी भृङ्गी बीन लही सारा मदमाता॥ जय..
देवन अरज करत हम चित को लाता।
गावत दे दे ताली, मन में रङ्गराता॥ जय..
श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता।
सदासुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥ जय..


Share:

श्री दुर्गा जी की आरती



 Maa Durga
 
जगजननी जय! जय! माँ! जगजननी जय! जय!
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय। जगजननी ..
तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।
सत्य सनातन, सुन्दर पर-शिव सुर-भूपा॥ जगजननी ..
आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी।
अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥ जगजननी ..
अविकारी, अघहारी, अकल कलाधारी।
कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥ जगजननी ..
तू विधिवधू, रमा, तू उमा महामाया।
मूल प्रकृति, विद्या तू, तू जननी जाया॥ जगजननी ..
राम, कृष्ण तू, सीता, ब्रजरानी राधा।
तू वा†छाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाघा॥ जगजननी ..
दश विद्या, नव दुर्गा नाना शस्त्रकरा।
अष्टमातृका, योगिनि, नव-नव रूप धरा॥ जगजननी ..
तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू।
तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू॥ जगजननी ..
सुर-मुनि मोहिनि सौम्या, तू शोभाधारा।
विवसन विकट सरुपा, प्रलयमयी, धारा॥ जगजननी ..
तू ही स्नेहसुधामयी, तू अति गरलमना।
रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि तना॥ जगजननी ..
मूलाधार निवासिनि, इह-पर सिद्धिप्रदे।
कालातीता काली, कमला तू वरदे॥ जगजननी ..
शक्ति शक्तिधर तू ही, नित्य अभेदमयी।
भेद प्रदर्शिनि वाणी विमले! वेदत्रयी॥ जगजननी ..
हम अति दीन दु:खी माँ! विपत जाल घेरे।
हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे॥ जगजननी ..
निज स्वभाववश जननी! दयादृष्टि कीजै।
करुणा कर करुणामयी! चरण शरण दीजै॥ जगजननी .. (द्बद्ब)
अम्बे तू है जगदम्बे, काली जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाएं भारती॥
 
 HD wallpaper of Maa Durga
maa_durga_latest_wallpaper
Maa Durga Wallpaper
Colorful wallpaper of Maa Durga
hd_wallper_of_maa_durga
 Jai Mata Di Wallpaper
 Wallpaper of Durga Mata with Shlok  
maa_durga_wallpaper
Yellow background wallpaper
HD-wallpapers-download 
 




 
 






 


Share:

आरती कुंज बिहारी भगवान श्री कृष्ण की



 Lord Krishna HD Wallpapers
 
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक
ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै।
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद
टेर सुन दीन दुखारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
 
Lord Krishna HD Wallpapers
Full HD wallpapers free Lord Krishna
Full HD wallpapers free Lord Krishna
Shree krishna ideas in 2020
Shree krishna ideas in 2020
Radha Krishna HD Photos & Wallpapers
Radha Krishna HD Photos & Wallpapers
Bhagwan Krishna HD Wallpapers Download
Bhagwan Krishna HD Wallpapers Download
राधे कृष्णा HD वॉलपेपर
राधे कृष्णा HD वॉलपेपर
Lord Radhe Krishna HD Wallpaper
Lord Radhe Krishna HD Wallpaper
Lord Radhe Krishna HD Wallpaper
Lord Radhe Krishna HD Wallpaper
Shree Krishna Black Wallpaper for Desktop
Shree Krishna Black Wallpaper for Desktop
Shree Krishna Black Wallpaper
Shree Krishna Black Wallpaper



Download God Krishna WallPaper HD for Mobile
Download God Krishna WallPaper HD for Mobile
 


Share: