राष्ट्रवादी ओजस्वी वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ



 Pushpendra Kulshrestha
Pushpendra Kulshrestha

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ : राष्ट्रवादी चिंतन की ओजस्वी आवाज

आज इंटरनेट की वायरल दुनिया में पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। देशभर के अनेक राष्ट्रवादी विचारों से जुड़े लोगों के मोबाइल फोन में व्हाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब के माध्यम से उनकी ओजस्वी वाणी की गूंज सुनाई पड़ती है। वर्तमान समय में वे अनेक युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित हैं। उनके प्रभावशाली भाषण नई पीढ़ी में भारतीयता, राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना के प्रति आस्था जागृत करने का कार्य कर रहे हैं।

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ का जन्म 2 दिसंबर, 1960 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अलीगढ़ स्थित मिंटो सर्किल हाई स्कूल (वर्तमान में सैयदना ताहिर सैफुद्दीन स्कूल) से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की शिक्षा पूर्ण की।

उनका पालन-पोषण अलीगढ़ के उस शैक्षणिक और सामाजिक वातावरण में हुआ, जहाँ विभिन्न वैचारिक धाराओं का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। इसी परिवेश ने उनके व्यक्तित्व और चिंतन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय के साथ उनके राष्ट्र, संस्कृति और सभ्यता संबंधी विचार और अधिक मुखर एवं प्रखर होते गए। आज वे अपने भाषणों, लेखन और सार्वजनिक वक्तव्यों के माध्यम से राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते हैं तथा लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं।

Pushpendra Kulshrestha Biography in Hindi


पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ पेशे से एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन में पाकिस्तान के कराची स्थित एएजे न्यूज़ (AAJ News) सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों के साथ कार्य किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने सहारा न्यूज़, बीबीसी वर्ल्ड, ज़ी न्यूज़ तथा अन्य प्रमुख मीडिया संस्थानों में भी अपनी सेवाएँ दी हैं। वे तीन बार प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के महासचिव पद पर भी निर्वाचित हुए, जो उनकी पत्रकारिता जगत में स्वीकार्यता और सक्रियता का परिचायक है।

जैसा कि सामान्यतः माना जाता है कि भारतीय मीडिया जगत में विभिन्न वैचारिक धाराओं का प्रभाव रहा है, ऐसे वातावरण में पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ अपनी पत्रकारिता जारी रखी। उन्होंने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में लगभग चार वर्षों तक अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। बाद में उन पर कुछ आरोप लगाए गए और उन्हें प्रेस क्लब ऑफ इंडिया से निष्कासित कर दिया गया।

उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406 एवं 120-बी के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया। इस मामले की जाँच प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की ओर से गठित समिति, पुलिस तथा अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा की गई। उनके समर्थकों का मत है कि जाँच के दौरान उनके विरुद्ध आरोप सिद्ध नहीं हो सके और यह पूरा प्रकरण उनकी सार्वजनिक छवि को धूमिल करने का प्रयास था। वहीं, इस विषय पर विभिन्न पक्षों के अपने-अपने मत और दृष्टिकोण रहे हैं।

आज भी पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ अपने भाषणों, लेखन और सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्र, समाज और समसामयिक विषयों पर अपने विचार प्रकट करते रहते हैं तथा बड़ी संख्या में लोग उन्हें सुनते और अनुसरण करते हैं।

Pushpendra Kulshrestha

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ : एक प्रखर वक्ता और राष्ट्रवादी चिंतक

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ निश्चित रूप से एक प्रखर वक्ता हैं। वक्तृत्व कला का यह गुण उन्होंने अपने जीवन के आरंभिक शैक्षिक काल से ही विकसित करना प्रारम्भ कर दिया था। जब वे महाविद्यालयीन शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, तब तक उन्हें अनेक मंचों पर अपने विचार रखने के अवसर मिलने लगे थे। इन अवसरों ने उनके भीतर एक प्रभावशाली और ओजस्वी वक्ता के गुणों को और अधिक निखारा।

पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने कदम जमाने के बाद वे एक गुणशील, निर्भीक और प्रखर वक्ता के रूप में व्यापक रूप से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा अपने कार्यों के माध्यम से विशिष्ट पहचान बनाई। इसी कारण उन्हें देश-विदेश के अनेक मंचों पर अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया जाने लगा। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में वे मुख्य अतिथि तथा वक्ता के रूप में सम्मानित हुए। उनके विचारों और शब्दों को सुनने के लिए पत्रकारिता जगत के लोग तथा युवा वर्ग विशेष रूप से उत्सुक रहता था।

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने पाकिस्तान के कराची स्थित एएजे न्यूज़ में कार्यकारी संपादक एवं भारत प्रमुख (India Head) के रूप में कार्य किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने सहारा न्यूज़, बीबीसी वर्ल्ड तथा ज़ी न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। वर्ष 2017 में उन्होंने सक्रिय पत्रकारिता से अलग होकर स्वतंत्र रूप से समाज के साथ प्रत्यक्ष संवाद का मार्ग अपनाया।

वर्तमान में वे ‘पब्लिक 24×7’ नामक यूट्यूब चैनल का संचालन कर रहे हैं, जिसके माध्यम से वे राष्ट्रीय, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करते हैं। विशेष रूप से कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन, कश्मीर संघर्ष, कश्मीर घाटी में उनके पुनर्वास, इस्लामी कट्टरवाद तथा आतंकवाद जैसे विषयों पर वे खुलकर अपनी बात रखते हैं। इन विषयों पर उनके व्याख्यान और विश्लेषण बड़ी संख्या में लोगों द्वारा सुने और साझा किए जाते हैं।

अपने ओजस्वी वक्तृत्व, स्पष्ट विचारों और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित दृष्टिकोण के कारण पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ आज देश के चर्चित वक्ताओं और विचारकों में गिने जाते हैं। उनके भाषण अनेक युवाओं को राष्ट्र, संस्कृति और सभ्यता के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

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अनुच्छेद 35ए और 370 के विषय में जन-जागरण

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर “वी द सिटिजन्स” (We The Citizens) नामक एक नागरिक संगठन के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई। इस संगठन के माध्यम से उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय विषयों पर जन-जागरूकता उत्पन्न करने का प्रयास किया। संगठन के अध्यक्ष संदीप कुलकर्णी के साथ मिलकर उन्होंने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की, जिसमें जम्मू-कश्मीर से संबंधित भारतीय संविधान के अनुच्छेद 35ए और अनुच्छेद 370 की वैधता को चुनौती दी गई थी।

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ का मत रहा कि अनुच्छेद 35ए और 370 के कारण जम्मू-कश्मीर का पूर्ण एकीकरण, विकास तथा वहाँ के नागरिकों के समान अधिकारों की स्थापना प्रभावित हुई। उनके अनुसार देश के अधिकांश लोग इन संवैधानिक प्रावधानों और उनके प्रभावों से पर्याप्त रूप से परिचित नहीं थे। इसी कारण उन्होंने अपने व्याख्यानों, लेखों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से इन विषयों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाने का प्रयास किया।

उनके प्रयासों तथा अन्य अनेक सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक संगठनों द्वारा चलाए गए जन-जागरण अभियानों के परिणामस्वरूप देश में अनुच्छेद 35ए और 370 को लेकर व्यापक चर्चा प्रारम्भ हुई। इस विषय पर लोगों की जागरूकता बढ़ी और इसे लेकर सार्वजनिक बहस तेज हुई।

5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी करते हुए तथा अनुच्छेद 35ए को समाप्त करते हुए जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन किया। पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के समर्थकों का मानना है कि इस विषय पर जनमत निर्माण और जागरूकता बढ़ाने में उनके तथा उनकी टीम के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यद्यपि इस निर्णय का औपचारिक श्रेय भारत सरकार, संसद तथा उस समय के राजनीतिक नेतृत्व को दिया जाता है, फिर भी इस विषय को जनचर्चा का हिस्सा बनाने वाले व्यक्तियों और संगठनों के योगदान को भी अनेक लोग महत्त्वपूर्ण मानते हैं।

इस प्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने केवल पत्रकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक जन-जागरूकता अभियानकर्ता के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की।

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ सम्पूर्ण जीवनी
Pushpendra Kulshrestha Biography in Hindi



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गंगा दशहरा का महत्व और पूजन की विधि



गंगा भारत की सबसे पवित्र नदी है, यह उत्तराखंड राज्य के गंगोत्री नामक स्थान से निकलते हुए गढ़मुकेश्वर, हरिद्वार, ऋषिकेश, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना सहित विभिन्न नगरों से निकलते हुए गंगासागर नामक तीर्थ स्थान पर समुद्र से मिल जाती है कई महत्वपूर्ण स्थानों से होकर गुजरती है। हिन्दू धर्म में इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है और मां का स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि राजा भगीरथ के पूर्वजों को श्राप मिला था, जिसकी वजह से उन्होंने गंगा को धरती पर लाने के लिए घोर तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता गंगा ने उन्हें दर्शन दिए। राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न ने कहा मां गंगा ने कहा कि जिस समय मैं पृथ्वीतल पर गिरूं, उस समय मेरे वेग को कोई संभालने वाला होना चाहिए। ऐसा न होने पर पृथ्वी को फोड़कर मैं रसातल में चली जाऊंगी। इसके बाद भगीरथ ने भगवान शिव की तपस्या की। भगवान शिव प्रसन्न होकर गंगाजी को अपनी जटाओं में रोकने के लिए तैयार हो जाते हैं। गंगा को अपनी जटाओं में रोककर एक जटा को पृथ्वी की ओर छोड़ देते हैं। इस प्रकार गंगा के जल से भगीरथ अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने में सफल हो जाते हैं। पृथ्वी पर आने से पहले, मां गंगा भगवान ब्रह्मा के कमंडल में रहती थीं। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगा का जल पुण्य देता है और पापों का नाश करता है।
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प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है, इस लिए इसे जेठ का दशहरा भी कहा जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार, गंगा दशहरे के दिन व्यक्ति को निकट की किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। इस दिन ध्यान व दान करना चाहिए। इससे सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यह मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में भागीरथी की तपस्या के फलस्वरूप स्वर्ग से गंगा का धरती पर आगमन हुआ था। इसे हम गंगावतरण के नाम से भी जानते हैं। यह तिथि उनके नाम पर गंगा दशहरा के नाम से प्रसिद्ध हुई। इस दिन गंगा में स्नान, अन्न-वस्त्रादि का दान, जप-तप-उपासना और उपवास किया जाय तो समस्त पाप दूर होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान विष्णु के चरणों से निकली और शिव की जटाओं में लिपटी गंगा के जल में डुबकी लगाने से मनुष्य को विष्णु और शिव का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है। इस दिन सत्तू, मटका और हाथ का पंखा दान करने से दोगुना फल प्राप्त होता है। गंगा दशहरा के दिन सभी गंगा मंदिरों में भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। मोक्षदायिनी मां गंगा की पूजा-अर्चना की जाती है। गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालु जिस भी वस्तु का दान करें उनकी संख्या दस होनी चाहिए। दस वस्तुओं से ही पूजन भी करना चाहिए। गंगा ध्यान एवं स्नान से प्राणी दस प्रकार के दोषों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर, ईर्ष्या, ब्रह्महत्या, छल, कपट, परनिंदा जैसे पापों से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं अवैध संबंध, अकारण जीवों को कष्ट पहुंचाने, असत्य बोलने व धोखा देने से जो पाप लगता है, वह पाप भी गंगा 'दसहरा' के दिन गंगा स्नान से धुल जाता है।


गंगा पूजन की विधि
गंगा दशहरा के दिन गंगा तटवर्ती प्रदेश में अथवा सामर्थ्य न हो तो समीप के किसी भी जलाशय या घर के शुद्ध जल से स्नान करके सुवर्णादि के पात्र में त्रिनेत्र, चतुर्भुज, सर्वावयवभूषित, रत्नकुम्भधारिणी, श्वेत वस्त्रादि से सुशोभित तथा वर और अभयमुद्रा से युक्त श्रीगंगा जी की प्रशान्त मूर्ति अंकित करें। अथवा किसी साक्षात् मूर्ति के समीप बैठ जाएं। फिर 'ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः' से आवाहनादि षोडषोपचार पूजन करें। इसके उपरान्त 'ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै स्वाहा' से हवन करें। तत्पश्चात 'ऊँ नमो भगवति ऐं ह्रीं श्रीं (वाक्-काम-मायामयि) हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा।' इस मंत्र से पांच पुष्पाञ्जलि अर्पण करके गंगा को भूतल पर लाने वाले भगीरथ का और जहाँ से वे आयी हैं, उस हिमालय का नाम- मंत्र से पूजन करें। फिर 10 फल, 10 दीपक और 10 सेर तिल- इनका 'गंगायै नमः' कहकर दान करें। साथ ही घी मिले हुए सत्तू और गुड़ के पिण्ड जल में डालें। सामर्थ्य हो तो कच्छप, मत्स्य और मण्डूकादि भी पूजन करके जल में डाल दें। इसके अतिरिक्त 10 सेर तिल, 10 सेर जौ, 10 सेर गेहूँ 10 ब्राह्मण को दें। इतना करने से सब प्रकार के पाप समूल नष्ट हो जाते हैं और दुर्लभ-सम्पत्ति प्राप्त होती है।

जेठ/गंगा दशहरा स्नान कब है - 1 जून 2020
गंगा दशहरा कब मनाया जाता है - प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है।


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नारियल का दूध



आज विश्व में दूध का प्रचलन इतना अधिक बढ़ गया है कि लोग गाय, भैंस, बकरी, भेड़ यहां तक कि पैकेट बंद सिंथेटिक दूध का प्रयोग अधिक से अधिक करने लगे हैं जहां आज शरीर में बीमारियां पैदा करने के लिए यह दूध काफी हद तक जिम्मेदार है, वहीं नारियल का दूध ना केवल सेहत के लिए अच्छा है बल्कि स्वाद में भी दूध से कहीं बेहतर है। नारियल की अपनी कहानी है। जब यह पहले-पहल अमेरिका पहुंचा, तो उसके रेशेदार और फिर कठोर आवरण को देखकर लोगों ने मान लिया कि यह बेकार फल है। अमेरिका में जिन दिनों यह उपेक्षा की दृष्टि से देखा जा रहा था, उन्हीं दिनों हवाई द्वीप में माताएं नारियल का दूध अपने स्वस्थ बच्चों को पिला रहीं थी।

नारियल के दूध को मां के दूध जितना फायदेमंद होता है। मां के दूध को सर्वाधि‍क पोषक माना गया है लेकिन इसके बाद नारियल के दूध को दुनिया के सर्वाधिक फायदेमंद पेय के रूप में स्वीकार किया गया है। नारियल के दूध का इस्तेमाल खाना पकाने में भी किया जाता है। मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों में शिशु को मां का दूध न मिल पाने की स्थिति में गाय के दूध की जगह नारियल का दूध दिया जाता है। सीडीबी अब नारियल के दूध को प्राकृतिक स्वास्थ्य पेय के रूप में पेश करने की तैयारी कर रहा है। पके हुए नारियल के गूदे से नारियल का दूध बनाया जाता है। कई देशो में इसे नारियल का दूध कहते हैं, जबकि कई अन्य देशों में इसे नारियल रस भी कहा जाता है।

अब विश्व भर के पोषण विज्ञानी यह स्वीकार करने लगे हैं कि नारियल का दूध पोषण की दृष्टि से पूर्ण आहार है। उसकी समानता में बहुत कम चीजें ठहर पाती हैं। इसके साथ ही, लोग यह भी मानने लगे हैं कि पेट के अल्सर, कब्ज, कोलाइटिस और कमजोर पाचन-शक्ति वालों के लिए यह बड़ा ही हितकारी है। प्राœतिक आहारों में ऐसे बहुत कम आहार मिलेंगे जिनमें इतना विटामिन बी-1 होता, जितना नारियल के दूध में होता है। यह सभी जानते हैं कि पाचन-क्रिया की स्वस्थ यांत्रिकता में इस विटामिन का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। जहां-जहां भी नारियल होता है, वहां के मूलवासियों के लिए यह एक अनिवार्य आहार माना जाता है। लोग इसे सर्वरोगहारी फल मानते हैं।

यौवन बनाये रखने की आकांक्षा रखने वालों के लिए यह एक बड़े महत्व की बात है कि नारियल का दूध विटामिन-ए का बहुत अच्छा स्रोत है। रसायन विज्ञान वेत्ताओं की मान्यता है कि नारियल और नारियल के दूध के आहार से आदमी पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है परन्तु, सभ्यता ने हमारे जीवन में जो गुत्थियां उत्पन्न कर दी हैं, उनके कारण सभ्य कहे जाने वाले लोगों के लिए यह शक्य नहीं हैं कि वे मात्र नारियल अथवा उसके उत्पादों पर रह जायें, पर उष्ण कटि बंधीय प्रदेशों के निवासियों के लिए नारियल का आहार एक स्वाभाविक आहार है।

प्रायः सभी आवश्यक खनिज लवण, कैल्शियम, फोस्फोरस, सोडियम, क्लोरीन, आयोडीन, सल्फर इसमें उपलब्ध हैं। खनिज लवणों के साथ ही विटामिनों की दृष्टि से भी यह फल किसी से कम नहीं है। पेड़ का पका नारियल धूप के सम्पर्क के कारण भी एक स्वास्थ्यदायक आहार हो जाता है। उष्ण कटिबंध की कड़ी धूप इतने कठोर आवरण के बावजूद, इसके ॉदय तक प्रविष्ट हो जाती है और गूदे को स्वास्थ्य के लिए हितकारी बनाती है। नारियल के दूध ने अनेक शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आœष्ट किया है। उनके विश्लेषण से यह बात ज्ञात हुई है कि नारियल के दूध में 5 प्रतिशत पानी होता है और 25 प्रतिशत चिकनाई। इसके अतिरिक्त इसमें 19 प्रतिशत कार्बोहाइडेट तथा 4 प्रतिशत प्रोटीन होता है। यहां ध्यान देने लायक यह बात है कि नारियल के दूध में प्रोटीन और कोर्बोहाइड्रेट भले ही कम हो, पर खनिज लवणों की मात्रा बहुत अधिक होती है।

नारियल के दूध में अपेक्षाकृत कम प्रोटीन होने और स्वास्थ्यदायक खनिज लवणों के आधिक्य के कारण अधिक प्रोटीन से होने वाले नुकसानों का डर नहीं होता। इस दूध में महत्वपूर्ण एमिनो-एसिड भी होते हैं। अन्य खनिज लवणों के अतिरिक्त नारियल में कैल्शियम और फोस्फोरस की अधिक मात्रा होती है। कैल्शियम का दांतों, हड्डियों और मांसपेशियों को सशक्त करने में बड़ा महत्व पूर्ण योगदान होता है। यह रक्त के गाढ़ेपन के लिए भी उत्तरदायी होता है। पर, शरीर इसे तभी आत्मसात् कर पाता है, जब इसे पर्याप्त फोस्फोरस का सहयोग मिले। जो स्वास्थ्याकांक्षी स्वास्थ्य की दृष्टि से कैल्शियम बहुल आहार लेते हैं, उनको जान लेना चाहिये कि पर्याप्त मात्रा में फोस्फोरस के अभाव में उनका प्रयास निष्फल ही होने वाला है। यह एक महत्वपूर्ण बात है, जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिये। पर्याप्त मात्रा में नारियल का दूध पीने वाला बबुद्धिमान आदमी इस बात पर परम आश्वस्त होता है कि उसे कैल्शियम और फोस्फोरस का संयोग परम सुस्वादु रूप में मिल रहा है। पशुजन्य दूध से होने वाले नुकसान जैसे कफ विकार, यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल तथा दूध से होने वाली एलर्जी आदि का खतरा नारियल के दूध में नहीं है। इसके दूध के खट्टा होने की कोई आशंका नहीं रहती। अतः यह अपेक्षाकृत अधिक समय तक ताजा बना रहता है। 

नारियल दूध कैसे बनाएं?
 पानी वाला कच्चा नारियल तोड़कर इसकी गिरी निकाल लें। इसके छोटे-छोटे टुकड़े करके पानी के साथ मिक्सी में चला ले। चलनी में छान लें। नारियल दूध तैयार है। चिकनाई एवं गाढ़े पतले के हिसाब से पानी की मात्रा डालें। इस दूध को मीठा करने के लिए भीगे हुए खजूर का प्रयोग करें। इस दूध की खीर बनाने के लिए पानी की मात्रा कम रखकर नारियल का दूध बनाएं इसमें फल एवं मेवा डालकर खीर तैयार करें। बच्चों के लिए इसी दूध में केला, आम, पपीता, चीकू आदि फल डालकर बेहतरीन शेक तैयार किया जा सकता है। नारियल का जल भी शीतल, स्वादिष्ट, ह्रदय के लिए हितकर, अग्निदीपक, शुक्रजनक, लघु अत्यंत वस्तिशोधक एवं प्यास तथा पित्त को शांत करने वाला होता है।

नारियल के दूध के त्वचा संबंधी फ़ायदे
  1. जब बात सनबर्न को ठंडक पहुंचाने की हो तो नारियल का दूध एक अच्छा नैसर्गिक विकल्प हो सकता है। यह त्वचा को ठंडक का एहसास कराता है और साथ ही यह त्वचा पर काफ़ी सौम्य होता है। ताज़ा तैयार किए गए नारियल के दूध में कॉटन पैड डुबोएं और इसे प्रभावित हिस्से पर लगाएं।
  2. नारियल का दूध त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज़ करता है और शुष्क त्वचा से छुटकारा दिलाता है। नारियल का ताज़ा दूध निकालें और कॉटन पैड्स की मदद से इसे अपने पूरे चेहरे पर लगाएं। चेहरा धोने से पहले इसे कई बार लगाने की कोशिश करें, क्योंकि यह बहुत जल्दी सूख जाता है। एक कप नारियल दूध में, आधा कप गुलाब जल मिलाएं और इसे अपने नहाने के पानी में मिलाएं। यह निश्चित तौर पर आपकी त्वचा के खोए हुए मॉइस्चर को वापस लौटाएगा।
  3. नारियल का दूध हर तरह की त्वचा के लिए नॉन-ड्राइंग मेकअप रिमूवर बन सकता है। कॉटन बॉल को ताज़ा नारियल दूध में डुबोकर हल्के हाथों से मेकअप निकालें। दूध में मौजूद फ़ैटी एसिड्स ज़िद्दी से ज़िद्दी मेकअप के निशानों को हटाएंगे और त्वचा को पोषित करेंगे।
  4. नारियल के दूध में बड़े पैमाने पर विटामिन सी और ई होता है, जो त्वचा के लचीलेपन को बनाए रख सकता है। नारियल के दूध से चेहरे पर मसाज करने से त्वचा मुलायम बनती है और झुर्रियों से छुटकारा मिलता है।
  5. संवेदनशील से लेकर ऑयली त्वचा तक नारियल का दूध हर तरह की त्वचा के लिए उपयुक्त है। अपने मॉइस्चराइज़िंग और ठंडक देनेवाले गुणों की वजह से यह शुष्क त्वचा और एक्ज़िमा, सोराइसिस जैसी समस्याओं से भी छुटकारा पाने में मदद करता है।
  6. नारियल के दूध में मौजूद ऐसे कई सारे पोष्टिक आहार होते हैं जो बालों को पोषण देते हैं। बालों को धोने से पहले 20- 30 मिनट तक अच्छे से मालिश करें।
  7. समय-समय पर नारियल के दूध को बालों में लगाने से पोषण वापस आ सकता है। इसके साथ ही एंटी- इंफ्लामेट्री खूबी होने के कारण रूसी से भी राहत मिलती है। नारियल का दूध त्वचा को पोषण देता है।
  8. यह एंटीऑक्सीडेंट जैसे कि विटामिन सी और मिनरल्स जैसे कि कॉपर से भरपूर है, नारियल के दूध से मालिश करने से त्वचा में खिंचाव बना रहता है और फ्री रेडिकल से भी त्वचा का बचाव रहता है। चेहरे पर नारियल के दूध की कुछ बूंदों को फेस मास्क 15 मिनट तक लगाएं। ऐसा हफ्ते में 2 से 3 बार करें और आपको अपनी त्वचा में फर्क अपने आप नज़र आ जाएगा।
  9. रोजाना लेकिन नियमित रूप से नारियल के दूध का सेवन करने से कोलेस्टॉल कंट्रोल में रहता है। इसका सेवन करने से खराब कोलेस्टॉल की मात्रा कम रहती है और अच्छे कोलेस्टॉल का लेवल बढ़ जाता है। सही मात्रा में नारियल के दूध का सेवन करने से आपके लिपिड लेवल पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।


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योगाभ्यास के लिए सामान्य दिशा निर्देश




yogabhyas ke liye samanya dishanirdesh

योगाभ्यास करते समय योग के अभ्यासी को नीचे दिए गए दिशा निर्देशों एवं सिद्धांतों का पालन अवश्य करना चाहिए:
अभ्यास से पूर्व

  1. शौच - शौच का अर्थ है शोधन, यह योग अभ्यास के लिए एक महत्वपूर्ण एवं पूर्व अपेक्षित क्रिया है। इसके अन्तर्गत आसपास का वातावरण, शरीर एवं मन की शुद्धि की जाती है।
  2. योग अभ्यास शांत वातावरण में आराम के साथ शरीर एवं मन को शिथिल करके किया जाना चाहिए।
  3. योग अभ्यास खाली पेट अथवा अल्पाहार लेकर करना चाहिए। यदि अभ्यास के समय कमजोरी महसूस हो तो गुनगुने पानी में थोड़ी सी शहद मिलाकर लेना चाहिए।
  4. योग अभ्यास मल एवं मूत्र का विसर्जन करने के उपरान्त प्रारम्भ करना चाहिए।
  5. अभ्यास करने के लिए चटाई, दरी, कंबल अथवा योग मैट का प्रयोग करना चाहिए।
  6. अभ्यास करते समय शरीर की गतिविधि आसानी से हो, इसके लिए सूती के हल्के और आरामदायक वस्त्र पहनना चाहिए।
  7. थकावट, बीमारी, जल्दबाजी एवं तनाव की स्थिति में योग नहीं करना चाहिए।
  8. यदि पुराने रोग, पीड़ा एवं हृदय संबंधी समस्याएं हों तो ऐसी स्थिति में योग अभ्यास शुरू करने के पूर्व चिकित्सक अथवा योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
  9. गर्भावस्था एवं मासिक धर्म के समय योग करने से पहले योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
अभ्यास के समय

  1. अभ्यास सत्र प्रार्थना अथवा स्तुति से प्रारम्भ करना चाहिए क्योंकि प्रार्थना अथवा स्तुति मन एवं मस्तिष्क को विश्रांति प्रदान करने के लिए शान्त वातावरण निर्मित करते हैं।
  2. योग अभ्यास आरामदायक स्थिति में शरीर एवं श्वास-प्रश्वास की सजगकता के साथ धीरे-धीरे प्रारम्भ करना चाहिए।
  3. अभ्यास के समय श्वास-प्रश्वास की गति नहीं रोकनी चाहिए, जब तक कि आपको ऐसा करने के लिए विशेष रूप से कहा न जाए।
  4. श्वास-प्रश्वास सदैव नासारन्ध्रों से ही लेना चाहिए, जब तक कि आपको अन्य विधि से श्वास प्रश्वास लेने के लिए न कहा जाए।
  5. शरीर को सख्त नहीं करें अथवा शरीर को किसी भी प्रकार के झटके से बचाएं।
  6. अभ्यास के समय शरीर को शिथिल रखें, शरीर को किसी भी प्रकार के झटके से बचाएं।
  7. अपनी शारीरिक एवं मानसिक क्षमता के अनुसार ही योग अभ्यास करना चाहिए। अभ्यास के अच्छे परिणाम आने में कुछ समय लगता है, इसलिए लगातार और नियमित अभ्यास बहुत आवश्यक है।
  8. प्रत्येक योग अभ्यास के लिए ध्यातव्य निर्देश एवं सावधानियां तथा सीमाएं होती हैं। ऐसे ध्यातव्य निर्देशों को सदैव अपने मन में रखना चाहिए।
  9. योग सत्र का समापन सदैव ध्यान एवं गहन मौन तथा शांति पाठ से करना चाहिए।
अभ्यास के बाद
 अभ्यास के 20-30 मिनट के बाद स्नान करना चाहिए।
अभ्यास के 20-30 मिनट बाद ही आहार ग्रहण करना चाहिए, उससे पहले नहीं।

सात्विक विचार के लिए भोजन
आहार संबंधी दिशा निर्देश - सुनिश्चित करें कि अभ्यास के लिए शरीर एवं मन ठीक प्रकार से तैयार हैं। अभ्यास के बाद आमतौर पर शाकाहारी आहार ग्रहण करना श्रेयस्कर माना जाता है। 30 वर्ष की आयु से ऊपर के व्यक्ति के लिए बीमारी या अत्यधिक शारीरिक कार्य अथवा श्रम की स्थिति को छोड़कर एक दिन में दो बार भोजन ग्रहण करना पर्याप्त होता है।
General guidelines for yoga practice
योग किस प्रकार सहायता कर सकता है?
 योग निश्चित रूप से सभी प्रकार के बंधनों से मुक्ति प्रदान करने का साधन है। वर्तमान समय में हुए चिकित्सा शोधों ने योग से होने वाले कई शारीरिक और मानसिक लाभों के रहस्य प्रकट किए हैं। यही नहीं लाखों योग अभ्यासियों के अनुभव के आधार पर इस बात की पुष्टि की जा सकती है कि योग किस प्रकार सहायता कर सकता है।
  • योग शारीरिक स्वास्थ्य, स्नायुतंत्र एवं कंकाल तन्त्र को सुचारू रूप से कार्य करने और हृदय तथा नाडियों के स्वास्थ्य के लिए हितकर अभ्यास है।
  • यह मधुमेह, श्वसन संबधी विकार, उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप और जीवन शैली संबंधी कई प्रकार के विकारों के प्रबंधन में लाभकर है।
  • योग अवसाद, थकान, चिंता संबंधी विकार और तनाव को कम करने में सहायक है।
  • योग मासिक धर्म को नियमित बनाता है।
  • संक्षेप में यदि यह कहा जाए कि योग शरीर एवं मन के निर्माण की ऐसी प्रक्रिया है, जो समृद्ध और परिपूर्ण जीवन की उन्नति का मार्ग है, न कि जीवन के अवरोध का।


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अधोमुखश्वानासन योग - परिचय, विधि एवं लाभ



अधोमुखश्वानासन (Adhomukhswanasana) 3 शब्दों से मिलकर बना है। पहला शब्द है 'अधोमुख' जिसका अर्थ होता है नीचे की तरफ मुंह करना। जबकि दूसरा शब्द है 'श्वान' जिसका अर्थ कुत्ता होता है। तीसरा शब्द है 'आसन' जिसका अर्थ है बैठना। अधोमुख श्वानासन को डाउनवर्ड फेसिंग डॉग पोज भी कहा जाता है। अधोमुख श्वानासन को भारतीय योग में बड़ा ही अहम स्थान हासिल है। अधोमुख श्वानासन को अष्टांग योग का बेहद महत्वपूर्ण आसन माना जाता है। ये आसन सूर्य नमस्कार के 7 आसनों में से एक है। योग की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसके आसन प्रकृति में पाई जाने वाली मुद्राओं और आकृतियों से प्रभावित होते हैं। योग विज्ञान ने अधोमुख श्वानासन को कुत्ते या श्वान से सीखा है। कुत्ते अक्सर इसी मुद्रा में शरीर की थकान मिटाने के लिए स्ट्रेचिंग करते हैं। यकीन जानिए, शरीर में स्ट्रेचिंग के लिए बताए गए सर्वश्रेष्ठ आसनों में से एक है। इस योगासन को करने की प्रक्रिया बहुत आसान है और कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसने योगाभ्यास करना शुरू ही किया है, यह आसान कर सकता है। यह योगासन अत्यंत लाभदायक है और इसे प्रतिदिन के योगाभ्यास में अवश्य जोड़ना चाहिए।
Adhomukhswanasana
अधोमुख श्वानासन करने के फायदे/ अधोमुखश्वानासन के लाभ
  1. इंसोमेनिया दूर करने में - अधोमुख श्वानासन करने से पीठ दर्द और कमर का दर्द, थकान, सिर दर्द और अनिद्रा की बीमारी दूर हो जाती है। इसके अलावा यह आसन उच्च रक्तचाप, अस्थमा, साइटिका आदि रोग भी दूर करने में सहायक होता है।
  2. एंग्जाइटी को करे कंट्रोल - ये आसन आपकी रिलैक्स रहने में मदद करता है और दिमाग को शांति प्रदान करता है। अधोमुख श्वानासन एंग्जाइटी से लड़ने में भी बहुत मददगार साबित हो सकता है। इस आसन के अभ्यास के दौरान गर्दन और सर्वाइकल स्पाइन में खिंचाव पड़ता है। ये स्ट्रेस को दूर करने में काफी मदद करता है।
  3. एनर्जी प्रदान करने में - अधोमुख श्वानासन करने से शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा यह पूरे शरीर का कायाकल्प करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह आसन महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है।
  4. चिंता दूर करने में - अधोमुख श्वानासन करने से दिमाग शांत रहता है और हर तरह की चिंता से मुक्ति मिलती है। इस आसन को करने से गर्दन और गर्दन की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है जिसके कारण मस्तिष्क से चिंता दूर हो जाती है।
  5. पाचन सुधारने में - हालांकि अधोमुख श्वानासन में शरीर को आधा ही मोड़ा जाता है लेकिन इससे पेट की मांसपेशियां पाचन तंत्र के अंगों जैसे लिवर, किडनी और प्लीहा पर दबाव डालकर इसे संकुचित करती हैं जिसके कारण पाचन क्रिया बेहतर होती है।
  6. पेट की निचली मांसपेशियों को मजबूत बनाए - अधोमुख श्वानासन में बनने वाली शरीर की स्थिति को अगर ठीक उल्टा किया जाए तो नौकासन बन जाता है। हम सभी जानते हैं कि नौकासन शरीर में पेट की निचली मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ ही रीढ़ को भी सहारा देता है। ये योगाभ्यास करने वालों को भी वैसे ही लाभ मिलते हैं। ये इन मांसपेशियों को मजबूत बनाने और खिंचाव पैदा करने में मदद करता है।
  7. रक्त संचार बढ़ाए - इस बात की तरफ शायद ही आपका ध्यान जाए। लेकिन अधोमुख श्वानासन में सिर दिल से नीचे की तरफ होता है जबकि आपके हिप्स ऊपर की तरफ उठे हुए होते हैं। इस आसन के अभ्यास से गुरुत्व बल की मदद से सिर की ओर नए रक्त की आपूर्ति बढ़ती है। इसीलिए ये आसन रक्त संचार बढ़ाने में मदद कर पाता है।
  8. सुधरता है पाचन तंत्र - अधोमुख श्वानासन में भले ही शरीर पूरी तरह से न मुड़ता हो, लेकिन फिर भी इस आसन से शरीर के भीतरी अंगों को अच्छी मसाज मिलती है। टांगें मुड़ने के कारण हमारे पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ता है। इस आसन से प्रभावित होने वाले अंगों में लीवर, किडनी और स्पलीन या तिल्ली शामिल हैं।
  9. हाथों और पैरों को टोन करने में - अधोमुख श्वानासन को करने के दौरान शरीर का पूरा भार हाथों और पैरों पर आकर टिकता है। इसलिए यह हाथों, पैरों एवं अन्य अंगों को टोन करने का काम करता है और उन्हें संतुलन की अवस्था में रखता है। यह आसन हाथ, पैरों के अलावा कंधे, बांहों और सीने को भी टोन करने के साथ मजबूती प्रदान करता है।
अधोमुखश्वानासन योग - Adho Mukha Svanasana
अधोमुख श्वानासन करने का सही तरीका
  1. अधोमुख श्वानासन देखने में बिल्कुल वैसा ही दिखता है जब कोई कुत्ता आगे की तरफ झुकता है। इस आसन को करने से हमें कई जबरदस्त फायदे होते हैं, जिन्हें पाने के लिए ये जरूरी है कि आप रोज इस आसन का नियमित रूप से अभ्यास करें। इस आसन की सबसे अच्छी बात यही है कि इस आसन को बेहद आसानी से कोई भी कर सकता है।
  2. सबसे पहले जमीन पर एकदम सीधे खड़े हो जाएं और उसके बाद दोनों हाथों को आगे करते हुए नीचे जमीन की ओर झुक जाएं।
  3. झुकते समय आपके घुटने सीधे होने चाहिए और कूल्हों के ठीक नीचे होने चाहिए जबकि आपके दोनों हाथ कंधे के बराबर नहीं बल्कि इससे थोड़ा सा पहले झुका होना चाहिए।
  4. अपने हाथों की हथेलियों को झुकी हुई अवस्था में ही आगे की ओर फैलाएं और उंगलियां समानांतर रखें।
  5. श्वास छोड़ें और अपने घुटनों को अधोमुख श्वानासन मुद्रा के लिए हल्का सा धनुष के आकार में मो़ड़े और एड़ियों को जमीन से ऊपर उठाएं।
  6. इस पॉइंट पर अपने कूल्हों को पेल्विस से पर्याप्त खींचें और हल्का सा प्यूबिस की ओर दबाएं।
  7. हाथों को पूरी तरह जमीन पर कंधों के नीचे से आगे की ओर फैलाए रखें, लेकिन उंगलियां जमीन पर फैली होनी चाहिए।
  8. इसके बाद अपने घुटनों को जमीन पर थोड़ा और झुकाएं और कूल्हों को जितना संभव हो ऊपर उठाएं।
  9. सिर हल्का सा जमीन की ओर झुका होना चाहिए और पीठ के लाइन में ही होनी चाहिए। अब आप पूरी तरह अधोमुख श्वानासन मुद्रा में हैं।
अधोमुख श्वान आसन की सावधानियाँ - अगर आप उच्च रक्तचाप, आँखों की केशिकाएँ कमजोर है कंधे की चोट या दस्त से पीड़ित हैं तो यह आसन न करें रक्तचाप

अधोमुख श्वानासन करने से पहले ध्यान रखने वाली बातें -
  1.  अधोमुख श्वानासन का अभ्यास सुबह के वक्त ही किया जाना चाहिए। लेकिन अगर आप शाम के वक्त ये आसन कर रहे हों तो जरूरी है कि आपने भोजन कम से कम 4 से 6 घंटे पहले कर लिया हो।
  2. ये भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि आसन करने से पहले आपने शौच कर लिया हो और पेट एकदम खाली हो।
अधोमुख श्वान आसन से पहले किये जाने वाले आसन
धनुरासन और दण्डासन
अधोमुख श्वान आसन के बाद किये जाने वाले आसन

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