पेट में गैस बनने के कारण, लक्षण और उपाचार



पेट में गैस बनना आम बात है लेकिन कई बार इसकी वजह से सीने में भी दर्द होने लगता है। गैस भयंकर तरीके से सिर में चढ़ जाती है और उल्टियां तक आने लगती है। दरअसल, गैस बनने से पेट फूलने लगता है और पाचन संबंधी दिक्कत पैदा हो जाती है। अगर आपको ज्यादा गैस बनती है तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें क्योंकि इसकी वजह से आपको घातक पेट के रोग हो सकते हैं। पेट फूलने और गैस बनने पर आप घर में ही मौजूद चीजों से इसका इलाज कर सकते हैं और इस बीमारी से जड़ से छुटकारा पा सकते हैं।


पेट में गैस की समस्या होने पर आमतौर पर यह लक्षण दिखते हैं- उलटी, बदहज़मी, दस्त होना, पेट फूलना
  1. बदबूदार सांसें आना और पेट में सूजन रहना तथा भूख न लगना और पेट में गैस होने पर जब ऊपर बताए गए लक्षण दिखते तो आपको शर्मिंदा होना पड़ता है। ऐसे में आप जरूर चाहेंगे कि जल्द से जल्द आप इस समस्या से निजात पा लें। तो आइए, जानते हैं पेट में गैस की समस्या से छूटकारा पाने के आसान से घरेलू उपाय-अजवायन और काला नमक को समान मात्रा में मिलाकर गर्म पानी से पीने से पेट का अफारा ठीक होता है।
  2. आप दूध में काली मिर्च मिलाकर भी पी सकते हैं।
  3. इस सभी उपचार के अलावा सप्ताह में एक दिन उपवास रखने से भी पेट साफ रहता है और गैस की समस्या पैदा नहीं होती।
  4. इसके अलावा सेब का सिरका भी गर्म पानी में मिलाकर पीने से लाभ होगा।
  5. ऐसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए भोजन के बाद 3-4 मोटी इलायची के दाने चबाकर ऊपर से नींबू पानी पीने से पेट हल्का होता है।
  6. काली मिर्च का सेवन करने पर पेट में हाजमे की समस्या दूर हो जाती है।
  7. छाछ में काला नमक और अजवाइन मिलाकर पीने से भी गैस की समस्या में काफी लाभ मिलता है।
  8. दालचीनी को पानी मे उबालकर, ठंडा कर लें और सुबह खाली पेट पिएं। इसमें शहद मिलाकर पिया जा सकता है।
  9. दिनभर में दो से तीन बार इलायची का सेवन पाचन क्रिया में सहायक होता है और गैस की समस्या नहीं होने देता।
  10. नींबू के रस में 1 चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर सुबह के वक्त खाली पेट पिएं।
  11. पुदीने की पत्तियों को उबालकर पीने से गैस से निजात मिलती है।
  12. रोज अदरक का टुकड़ा चबाने से भी पेट की गैस में लाभ होता है।
  13. रोजाना नारियल पानी सेवन करना गैस का फायदेमंद उपचार है।
  14. लहसुन भी गैस की समस्या से निजात दिलाता है। लहसुन को जीरा, खड़ा धनिया के साथ उबालकर इसका काढ़ा पीने से काफी फायदा मिलता है। इसे दिन में 2 बार पी सकते हैं।
  15. सुबह-शाम सवा चम्मच त्रिफला का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट नरम होता है।


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रक्ताल्पता (एनीमिया) लक्षण, कारण, उपचार और रोकथाम



रक्ताल्पता (एनीमिया) का साधारण मतलब रक्त (खून) की कमी है। यह लाल रक्त कोशिका में पाए जाने वाले एक पदार्थ (कण) रुधिर वर्णिका यानी हीमोग्लोबिन की संख्या में कमी आने से होती है। हीमोग्लोबिन के अणु में अनचाहे परिवर्तन आने से भी रक्ताल्पता के लक्षण प्रकट होते हैं। हीमोग्लोबिन पूरे शरीर में ऑक्सीजन को प्रवाहित करता है और इसकी संख्या में कमी आने से शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति में भी कमी आती है जिसके कारण व्यक्ति थकान और कमजोरी महसूस कर सकता है। एनीमिया एक गंभीर बीमारी है। इसके कारण महिलाओं को अन्य बीमारियां होने की संभावना और बढ़ जाती है।
  1. एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की प्रसव के दौरान मरने की संभावना सबसे अधिक होती है।
  2. किशोरावस्था और रजोनिवृत्ति के बीच की आयु में एनीमिया सबसे अधिक होता है।
  3. गर्भवती महिलाओं को बढ़ते शिशु के लिए भी रक्त निर्माण करना पड़ता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को एनीमिया होने की संभावना होती है।
  4. भारत में 80 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं।
  5. यह तब होता है, जब शरीर के रक्त में लाल कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर, उनके निर्माण की दर से अधिक होती है।

लक्षण
  1. कमजोरी एवं बहुत अधिक थकावट।
  2. चक्कर आना- विशेषकर लेटकर एवं बैठकर उठने में।
  3. चेहरे एवं पैरों पर सूजन दिखाई देना।
  4. जीभ,नाखूनों एवं पलकों के अंदर सफेदी।
  5. त्वचा का सफेद दिखना।
  6. बेहोश होना।
  7. सांस फूलना।
  8. हृदय गति का तेज होना।
कारण - किसी भी कारण रक्त में कमी, जैसे-
  1. पेट के अल्सर से खून जाना।
  2. पेट के कीड़ों व परजीवियों के कारण खूनी दस्त लगना।
  3. बार-बार गर्भ धारण करना।
  4. मलेरिया के बाद जिससे लाल रक्त कारण नष्ट हो जाते हैं।
  5. माहवारी में अधिक मात्रा में खून जाना।
  6. शरीर से खून निकलना (दुर्घटना, चोट, घाव आदि में अधिक खून बहना)
  7. शौच, उल्टी, खांसी के साथ खून का बहना।
  8. सबसे प्रमुख कारण लौह तत्व वाली चीजों का उचित मात्रा में सेवन न करना।
उपचार तथा रोकथाम
  1.  अगर एनीमिया मलेरिया या परजीवी कीड़ों के कारण है, तो पहले उनका इलाज करें।
  2. एनीमिया के रोगियों के लिए शहद बहुत लाभदायक होता है। इसके नियमित सेवन से खून की कमी दूर हो जाती है।
  3. एनीमिया में मेवे खाने से शरीर में आयरन का स्तर तेजी से बढ़ता है।
  4. काली चाय एवं कॉफी पीने से बचें।
  5. गर्भवती महिलाओं एवं किशोरी लड़कियों को नियमित रूप से 100 दिन तक लौह तत्व व फॉलिक एसिड की 1 गोली रोज रात को खाने खाने के बाद लेनी चाहिए।
  6. गुड़ भी आयरन का अच्छा स्रोत है। एनीमिया से ग्रस्त लोगों को रोज गुड़ जरूर खाना चाहिए। खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ खाने से भी एनीमिया दूर होता है।
  7. चुकंदर लौह तत्त्व से भरपूर होता है इसीलिए एनीमिया के मरीजों को अपनी रोज की खुराक में थोड़ा चुकंदर जरूर शामिलकरना चाहिए। चुकंदर को सब्जी के अलावा सलाद के रूप में या जूस बनाकर भी लिया जा सकता है।
  8. जल्दी-जल्दी गर्भधारण से बचना चाहिए।
  9. टमाटर को सलाद के रूप में खाया जा सकता है। इसके अलावा जूस या सूप बनाकर पीना भी अच्छा होता है।
  10. पालक की सब्जी एनीमिया में दवा की तरह काम करती है। हरी सब्जियों में पालक डालें। साथ ही, सलाद के रूप में भी इसका सेवन किया जा सकता है। पालक को उबालकर उसका सूप भी बनाया जा सकता है। इसका सूप पीने से बहुत जल्दी खून बढ़ता है।
  11. भोजन के बाद चाय के सेवन से बचें, क्योंकि चाय भोजन से मिलने वाले जरूरी पोषक तत्वों को नष्ट करती है।
  12. लौह तत्वयुक्त चीजों का सेवन करें।
  13. विटामिन 'ए' एवं 'सी' युक्त खाद्य पदार्थ खाएं।
  14. संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छ पेयजल ही इस्तेमाल करें।
  15. खजूर दोनों में ही पर्याप्त मात्रा में आयरन पाया जाता है। रोज सेब और खजूर खाने से कुछ दिनों में एनीमिया दूर हो जाता है।
  16. सोयाबीन से भरपूर मात्रा में आयरन मिलता है इसलिए एनीमिया में यह बहुत लाभदायक है।
  17. स्वच्छ शौचालय का प्रयोग करें।


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दिल को स्वस्थ बनाएं



व्यस्त जीवन शैली में संतुलित खानपान के साथ व्यायाम भी जरूरी है। इससे दिल तंदुरुस्त रहता है और स्वस्थ व लंबी उम्र हो सकती है। जीवन की जिम्मेदारियों व करियर में तरक्की की होड़ में हंसना-मुस्कुराना न भूलें। जानें कैसे रख सकते हैं हृदय को स्वस्थ।
    हृदय के स्वास्थ्य के लिए आहार (Diet for healthy heart)
    1.  अंडे का सफेद भाग खाया जा सकता है उसके पीला भाग का सेवन एक दिल के रोगी के लिए अच्छा नहीं होता।
    2. अनाज और दालों का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।
    3. एक ह्रदय रोगी को अपने आहार में कम प्रोटीन और कम कोलेस्ट्रॉल का सेवन करना चाहिए। उन्हें क्या, कब और कितनी मात्रा में खाना चाहिए आज हम इसी के बारे में आपको बताएंगे। क्योंकि उनकी जरा सी बदपरहेजी उनकी जान तक ले सकती है।
    4. गाजर (carrot), मटर (peas) और चुकंदर (beetroot) जैसी सब्जियां।
    5. चपाती बनाते समय चने के आटे / जौ के आटे को मिलाकर रोटी बनाएं।
    6. चिकन या मछली लगभग 50-60 ग्राम, सप्ताह में 2-3 बार ग्रील्ड, उबला हुआ, भुना हुआ रूप में लिया जा सकता है ये आपको बहुत ज्यादा फायदा करेगा।
    7. दिन भर में एक चम्मच घी से ज्यादा न खाएं।
    8. दूध (Milk) और दूध से बने उत्पादों का सेवन भी एक सीमित मात्रा में करें।
    9. नारियल पानी और टमाटर के रस का सेवन करें लेकिन सीमित मात्रा में।
    10. पकी हुई दालें और साबुत दालों को खाएं। दिन में एक बार स्प्राउट्स को जरूर खाना चाहिए। सीमित मात्रा में ली जाने वाली चीजें
    11. पपीता (papaya,), संतरा (orange), अमरूद (guava), सेब (apple), अनानास (pineapple), तरबूज (watermelon), नाशपाती (pear) आदि फल प्रतिदिन 100 ग्राम तक इनमें से किसी भी फल को खा सकते हैं।
    12. सलाद और उबली हुई सब्जियां जैसे टमाटर, खीरा, मूली, हरी पत्तेदार सब्जियां, गोभी, शिमला मिर्च, लौकी आदि।
    13. सूखे मेवों में बादाम और मूंगफली ली जा सकती है।
    14. सूप, रसम, नींबू पानी, छाछ, सब्जियों का रस, सोडा आदि।
    15. अनार के रस को मिश्री में मिलाकर हर रोज सुबह-शाम पीने से दिल मजबूत होता है।
    16. अलसी के पत्ते और सूखे धनिए का क्वाथ बनाकर पीने से हृदय की दुर्बलता मिट जाती है।
    17. उच्च रक्तचाप की समस्या से निजात पाने के लिए सिर्फ गाजर का रस पीना चाहिए। इससे रक्तचाप संतुलित हो जाता है।
    18. खाने में अलसी का प्रयोग करने से दिल मजबूत होता है।
    19. गाजर के रस को शहद में मिलाकर पीने से निम्न रक्तचाप की समस्या नहीं होती है और दिल मजबूत होता है।
    20. छोटी इलायची और पीपरामूल का चूर्ण घी के साथ सेवन करने से दिल मजबूत और स्वस्थ रहता है।
    21. दिल को मजबूत बनाने के लिए गुड को देसी घी में मिलाकर खाने से भी फायदा होता है।
    22. प्रतिदिन लहसुन की कच्ची कली छीलकर खाने से कुछ दिनों में ही रक्तचाप सामान्य हो जाता है और दिल मजबूत होता है।
    23. बादाम खाने से दिल स्वस्थ रहता है।
    24. लौकी उबालकर उसमें धनिया, जीरा व हल्दी का चूर्ण तथा हरा धनिया डालकर कुछ देर पकाकर खाइए। इससे दिल को शक्ति मिलती है।
    25. शहद दिल को मजबूत बनाता है। कमजोर दिलवाले एक चम्मच शहद का सेवन रोज करें तो उन्हें फायदा होगा। लोग भी शहद का एक चम्मच रोज ले सकते हैं, इससे वे दिल की बीमारियों से बचे रहेंगे।
    26. सर्पगंधा को कूटकर रख लीजिए। इस पाउडर को सुबह-शाम 2-2 ग्राम खाने से बढ़ा हुआ रक्तचाप सामान्य हो जाता है।
    27. सेब का जूस और आंवले का मुरब्बा खाने से दिल मजबूत होता है और दिल अच्छे से काम करता है।
    इन खाद्य पदार्थ का सेवन ना करें
    1.  उच्च कैलोरी वाले फल जैसे केला (banana), आम (mango), सपोटा (sapota) , अंगूर (grapes), कस्टर्ड सेब (custard apple) आदि इनका सेवन कम मात्रा में ही करें।
    2. कार्बोनेटेड वाले पेय पदार्थ, दूध के शेक, फलों के जूस आदि इनका सेवन बहुत कम करें।
    3. चीनी, गुड़, जैम, जेली, मिठाई जैसे लड्डू, बर्फी, खीर, रसगुल्ला, जलेबी, आइसक्रीम इन सभी का सेवन कभी-कभी ही करें।
    4. डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ जैसे सॉस, पिज़्ज़ा टॉपिंग आदि का सेवन कम करें।
    5. तली हुई चीजें जैसे समोसा, पोड़ी, परांठे, पकोड़ा आदि।
    6. तेल में बने किसी भी तरह के अचार का सेवन ना करें।
    7. दूध से बने उत्पाद जैसे खोआ, क्रीम, प्रोसेस्ड चीज़ इत्यादि भी बहुत कम ही खाएं।
    8. मक्खन और देसी घी से बनी चीजें,  बेकरी आइटम जैसे केक, पेस्ट्री आदि का सेवन बिल्कुल भी ना करें।
    9. मक्खन, देसी घी, वनस्पति, नारियल तेल।
    10. रेड मीट, हैम, बेकन, मछली आदि का सेवन भी एक कम मात्रा में करें, क्योंकि इससे आपकी किडनी पर भी बुरा असर पड़ता है।
    11. सूखे मेवे जैसे काजू, किशमिश, अखरोट आदि इनका सेवन बहुत ज्यादा बिल्कुल ना करें ।
    12. स्टार्च वाले खाद्य पदार्थ जैसे मकई का आटा, अरारोट, रिफाइंड आटा, कस्टर्ड पाउडर इनके सेवन से बचें।


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