बलात्कार (Rape) क्या है ?



कानून की नजर में बलात्कार एक जघन्य अपराध है। आए दिन महिलाएं इसका शिकार हो रही हैं। महिलाएं सामाजिक रूढि़वादियों से बचने के लिए इस बात को दबा देती हैं। इसकी खास वजह पुलिस एवं कोर्ट-कचहरी है। कुछ लोग तो पुलिस थानों में सूचना भी नहीं देते हैं। कानून की नजर में “किसी महिला की इच्छा के विरूद्ध यदि कोई व्यक्ति उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करता है, उसे बलात्कार या रेप कहते हैं।''
बलात्कार (Rape) क्या है ?

भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 375 के अन्तर्गत बलात्कार कब माना जाता है
  • अगर कोई पुरूष महिला की सहमति के बिना उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध करता है। सहमति किसी तरह से डरा-धमका कर ली गई हो जैसे उसको मारने, घायल करने या उसके करीबी लोगों को मारने या घायल करने की धमकी दे कर ली गई हो।
  • अगर सहमति झूठे प्रलोभन, झूठे वादे तथा धोखेबाजी (जैसे कि शादी का वादा, जमीन जायदाद देने का वादा, आदि) से ली जाती है तो ऐसी सहमति को सहमति नहीं माना जाएगा।
  • नकली पति बनकर उसकी सहमति के बाद किया गया संभोग।
  • उसकी सहमति तब ली गई हो जब वह दिमागी रूप से कमजोर या पागल हो।
  • नशीले पदार्थ के सेवन के कारण वह होश में न हो तब उसकी सहमति ली गई हो।
  • 16 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ किया गया शारीरिक सम्बन्ध बलात्कार की श्रेणी में आता है चाहेलड़की की सहमति हो तब भी।
बलात्कार के लिए सजा
  • सात साल का कारावास जो बढ़कर 10 साल का भी होसकता है। कुछ मामलों में इसे उम्र कैद में भी बदला जा सकताहै। इसके अलावा जुर्माना भी हो सकता है।
  • जिस महिला के साथ बलात्कार किया गया हो वह उसकी पत्नी हो और 12 साल से कम उम्र की न हो तब उस व्यक्ति को 2 साल का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
  • अगर न्यायालय 7 साल से कम की सजा देता है तो उसे लिखित रूप में उसका उचित कारण देना होगा।
विशेष परिस्थितियों में सजा
निम्न व्यक्तियों द्वारा किए गए बलात्कार की सजा कम से कम 10 साल का सश्रम कारावास जिसको उम्र कैद तक बढ़ाया जा सकता है अगर कोई पुलिस अधिकारी निम्न अवस्थाओं में बलात्कार करता है -
  • उस थाने के क्षेत्र के अन्दर जिसका वह क्षेत्र अधिकारी हो।
  • उन थानों के अन्दर जो उसके अधिकार में न हो।
  • वह महिला जो उसकी हिरासत में या उसके अधीनस्थ अधिकारी की हिरासत में हो।
  • लोक सेवक जो अपने अधिकारों का दुरूपयोग करके उसकी हिरासत में हो या उसके अधीनस्थ की हिरासत में होने वाली महिला के साथ बलात्कार करता है।
  • नारी निकेतनों, बाल संरक्षण गृहों, कारावास के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अपने अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए उनकी हिरासत में जो महिलाएं हों उनके साथ बलात्कार करता हो।
  • अस्पताल का प्रबन्धक और कर्मचारियों द्वारा अपने अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए उनकी हिरासत में जो महिलाएं हो उनके साथ बलात्कार करता हो।
  • गर्भवती महिला के साथ जो बलात्कार करता हो।
  • 12 साल से कम उम्र की लड़की के साथ जो बलात्कार करता हो।
  • जो सामूहिक बलात्कार करता हो।
निम्नलिखित परिस्थितियों में शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करना अपराध माना जाता है
  • जो व्यक्ति कानूनी तौर पर अलग रहता हो परन्तु पत्नी की सहमति के बिना शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करता हो, उसको 2 साल का कारावास और जुर्माना भी हो सकता है।
  • लोकसेवक द्वारा अपने अधिकारों का दुरूपयोग करके, नारी निकेतनों, बाल संरक्षण गृहों एवं कारावास, अस्पताल का प्रबन्धक और कर्मचारियों द्वारा उनके संरक्षण में जो महिलाएं हो उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करता हो, ऐसे सभी अपराधों में 5 साल तक की सजा और जुर्माना दोनों भी हो सकतेहैं।
बलात्कार से शोषित महिला कौन-कौन सी सावधानी बरतें
  • अपने सगे सम्बन्धियों या दोस्तों को खबर करें।
  • तब तक स्नान न करें जब तक डाक्टर जाँच व प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज न हो जाए।
  • कपड़े न धोये क्योंकि यह कपड़े जाँच के आधार हैं।
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराएं।
प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखते समय ध्यान देने योग्य बातें-
  • घटना की तारीख
  • घटना का समय
  • घटना का स्थान अवश्य लिखाएं।
  • रिपोर्ट लिखाने के बाद उसकी एक काॅपी अवश्य लें।
  • पुलिस का कर्तव्य है कि वह पीडि़त महिला की डाक्टरी जाँच पंजीकृत डाक्टर से या नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में करवाकर डाक्टरी जांच की काॅपी अवश्य दें।
  • बलात्कार के समय जो कपड़े पीडि़त महिला ने पहने हैं, डाक्टरी जांच के बाद पुलिस आपके सामने उन कपड़ों को सील बन्द करेगी जिसकी रसीद अवश्य ले लें।
बलात्कार और टू फिंगर टेस्ट :   
  • बलात्कार हुआ है, इसे सिद्ध करने के लिये लिए डॉक्टर टू फिंगर टेस्ट करते हैं।यह एक बेहद विवादास्पद परीक्षण है, जिसके तहत महिला की योनी में उंगलियां डालकर अंदरूनी चोटों की जांच की जाती है। यह भी जांचा जाता है कि दुष्कर्म की शिकार महिला सम्भोग की आदी है या नहीं। यह एक बेहद विवादास्पद परीक्षण है, जिसके तहत महिला की योनी में उंगलियां डालकर अंदरूनी चोटों की जांच की जाती है। 
  • टू फिंगर टेस्ट के दो मामले उदाहरण के लिए लिए जा सकते है। वर्ष 2007 में हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने एक अभियुक्‍त यतिन कुमार को टू फिंगर टेस्ट आधार पर दोषी करार दिया क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता था कि पीड़ित महिला को ‘सेक्स की आदत’ नहीं थी क्योंकि डॉक्टर अपनी दो उंगलियों को ‘मुश्किल’ से प्रवेश करा सका, जिसके कारण खून बह निकला था और कोर्ट इस टेस्‍ट के आधार पर निष्‍कर्ष पर पहुँचाी कि पीडिता का बलात्‍कार हुआ है किन्‍तु इसी टेस्‍ट के आधार पर 2006 में पटना हाइकोर्ट में हरे कृष्णदास को गैंगरेप के मामले में बरी कर दिया गया क्योंकि डॉक्टर ने जांच में पाया कि पीड़िता की हाइमन पहले से भंग थी और वह सक्रिय सेक्स लाइफ जी रही थी। जज का कहना था कि महिला का कैरेक्टर ‘लूज़’ है। 
  • निश्चित रूप से टू फिंगर टेस्ट एक सभ्‍य समाज की असभ्‍य जांच प्रकिया है। भारत में 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने टू फिंगर टेस्ट को बलात्कार पीड़िता के अधिकारों का हनन और मानसिक पीड़ा देने वाला बताते हुए खारिज कर दिया है।  सर्वोच्च न्यायालय का कहना था कि सरकार को इस तरह के टू फिंगर टेस्‍ट को खत्म कर कोई दूसरा तरीका अपनाना चाहिए।

बलात्कार के मामले की सुनवाई की प्रक्रिया 
  • बलात्कार के मामले की सुनवाई एक बन्द कमरे में होती है।
  • किसी अन्य व्यक्ति को वहाँ उपस्थित रहने की अनुमति नहीं होती।

अगर पुलिस प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने से मना कर दे तो आप निम्न जगहों पर शिकायत कर सकते हैं
  • वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/ पुलिस अधीक्षक
  • मजिस्ट्रेट
घटना का विवरण निम्नलिखित जगहों पर लिखकर भेज सकते हैं
  • कलेक्टर
  • स्थानीय या राष्ट्रीय समाचार पत्रों में
  • राज्य महिला आयोग
  • राष्ट्रीय महिला आयोग, 4, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग,नई दिल्ली-110001
बलात्कार के मामलों में सामान्यजन से अपेक्षाएं
यदि कोई महिला बलात्कार की शिकार हुई है तो निम्नलिखित अतिरिक्त उपाय भी किए जा सकते हैंः
  • यौन हमले के तुरंत बाद पीडि़त महिला को किसी सुरक्षित जगह पर ले जाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। यह जगह पीडि़ता का घर, उसकी दोस्त अथवा पारिवारिक सदस्य का घर हो सकता है।
  • पीडि़त महिला के प्रति सहयोगपूर्ण रवैया अपनाएं और उसे विश्वास दिलाएं कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है।
  • उसके साथ विनम्रतापूर्ण और समझदारी के साथ व्यवहार करे।
  • पीडि़त महिला से यह पता करें कि क्या वह बलात्कार करने वाले की पहचान कर सकती है और बलात्कार की परिस्थितियों एवं अपनी चोटों के बारे में बता सकती है।
  • महिला को तुरंत डाक्टरी सहायता मिलना ज़रूरी है और तत्काल चिकित्सकीय/फ़ोरेंसिक (बलात्कार के मामलों में की जाने वाली खास जांच) जांच कराए जाने पर खास जोर दिया जाना चाहिए।
  • सबूतों को सुरक्षित रखना (पीडि़त के शरीर में रह गई जैविकीय सामग्री) महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इन्हीं से यौनहमला करने वाले उत्पीड़क की पहचान होती है, खासतौर सेउन मामलों में जिनमें उत्पीड़क कोई अजनबी हो। इसलिएमहिला को जांच से पहले नहाना या अपनी साफ़-सफ़ाईनहीं करनी चाहिए।
  • महिला और उसके परिवारवालों को पुलिस की सहायता लेने में मदद करें और उन्हें समुदाय में काम करने वाले ऐसे अन्य संगठनों से मिलवाएं जोबलात्कार की शिकार हुई महिला को सहायता मुहैया कराने का काम करते हैं।
  • महिला द्वारा अपराध की रिपोर्ट अभी दर्ज़ न कराने का फैसला करने पर भी, फ़ोरेंसिक (कानूनी कार्यवाही में मदद् के लिए की जाने वाली जांच) चिकित्सा जांच कराना एवं रिपोर्ट और सबूतों को सुरक्षित रखना ज़रूरी है। आवश्यक होता है ताकि पुलिस बाद में उन्हेंमामले की कार्रवाई और जांच के लिए प्रयोग कर सके।
  • गर्भ ठहरने से बचाने के लिए महिला को आपात्कालीन गर्भनिरोधक गोलियां दें। अगर गंभीर चोटें लगी हों तो तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए।
  • महिला की मदद करें, जिससे अगर उसने अभी तक इस घटना के बारे में अपने परिवार वालों को न बताया हो तो वह उन्हें बता सके। पारिवारिक सदस्यों को भी बलात्कार की घटना के बारे में अपनी भावनाओं से उबरना होता है।
  • महिला और उसके परिवारवालों का हौसला बढ़ाए और बताएं कि बेशक यह एक दिल दहला देने वाली घटना है किंतु इससे बाहर निकलकर आगे बढ़ना ही होगा और इस घटना से जीवन रूकता नहीं और हर चीज़ का अंत नहीं हो जाता।
  • महिला को विशेष मनोवैज्ञानिक परामर्श की आवश्यकता पड़ सकती है और इस बारे में उसे जिला अस्पताल में ले जाने के लिए सहयोग दिया जाना चाहिए।


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