पुंडीर क्षत्रिय की वंशावली व गोत्र




  1. वंश - सूर्य
  2. कुल - पुण्डरीक/पुण्डीर/पुण्ढीर
  3. कुलदेवता - महादेव
  4. कुलदेवी - दधिमाता ( जिला - नागौर ,तहसील - जायल , गाँव - गौठ मंगलोद :- राजस्थान )
  5. गौत्र - पौलिस्त / पुलत्सय
  6. नदी - सर्यू
  7. निकास - अयोध्या से तिलांगाना व तिलंगाना से हरियाणा ( करणाल, कुरूक्षेत्र, कैथल) व पुण्डरी से मायापुर (7 हरिद्वार व पश्चिम उत्तर प्रदेश)
  8. पक्षि - सफेद चील
  9. पेड - कदंब
  10. प्रवर - महार्षि पौलिस्त, महार्षि दंभौली, महार्षि विश्वाश्रवस
  11. शाखा - तीसरी शताबदी के महाराज पुण्डरीक द्वितीय से
भगवान श्री राम के पुत्र की 158वीं पिढी मे महाराज पुण्डरीक द्वितीय हुए, महाराज पुण्डरीक द्वितीय (तीसरी शताबदी के अंत मे) -- असम -- धनवंत -- बाहुनिक - राजा लक्षण कुमार (तिलंगदेव :- तिलंगाना शहर बसाया) - जढेश्नर (जढासुर :- कुरूक्षेत्र स्नान हेतू सपरिवार व सेना सहित कुरूक्षेत्र पधारे) -- मंढेश्वर (मँढासुर :- सिंधुराज की पुत्री अल्पदे से विवाह कर कैथल क्षेत्र दहेज मे प्राप्त किया व " पुण्डरी " नगर की स्थापना हुइ)  - राजा सुफेदेव - राजा इशम सिंह (सतमासा :- इस कथा का वर्णन पिछले ब्लोग मे कर चुका हूँ) - सीरबेमस - बिडौजी - राजा कदम सिंह (निमराणा के चौहान शस्क हरिराय से दूसरे युद्ध मे पराजय मिली व इनके पुत्र हंस ने मायापुरी मे राज्य कायम कर 1440 गाँवो पर अधिकार किया) -- हंस (वासुदेव) -- राजा कुंथल ( मायापुर के स्वामी बने व इनके 12 पुत्र हुए)  
1- अजट सिंह (इनके पुण्डीर वंशज गोगमा, हिनवाडा आदि गाँव मे है जो जिला शामली मे है)
2- अणत सिंह (इनके पुण्डीर वंशज दूधली, कसौली, कछ्छौली आदि गाँव मे है)
3- लाल सिंह (अविवाहित) 
4- नौसर सिंह (पता नही) 
5- सलाखनदेव (मायापुर राज्य मे रहा) 

राजा सुलखन (सलाखन देव)  के 2 पुत्र हुए

  1. राजा चाँद सिंह पुण्डीर (मायापुरी के राजा बने व दिल्ली पति संम्राट पृथ्वीराज चौहान के सामंत बने व इनका पुत्र पंजाब का सुबेदार बना, इस वीर चाँद सिंह की वीरता पृथ्वीराज रासौ मे स्वर्ण अक्षरों मे अमर है)
  2. राजा गजै सिंह पुण्डीर (यहां गंगा पार कर एटा, अलिगढ क्षेत्र गए व इनके वंशज 82 गाँव मे विराजमान है)

राजा चाँद सिंह पुण्डीर के 7 पुत्र हुए

  1. वीर योद्धा धीर सिंह पुण्डीर
  2. कुँवर अजय देव
  3. कुँवर उदय देव
  4. कुँवर बिसलदेव
  5. कुवर सौविर सिंह
  6. कुँवर साहब सिंह
  7. कुंवर वीर सिंह

इनमे धीर सिंह पुण्डीर मीरो से लडते हुए वीर गति को प्राप्त हुए व इनके पुत्र पावस पुण्डीर तराई के अंतिम युद्ध मे पृथ्वीराज चौहान के सहयोगी बन कर लौहाना आजानबाहू का सर काटकर वीरगती को प्राप्त हुए, चांद सिंह के इन पुत्रो के वंशज आज सहारनपुर  जिले मे विराजमान है जिनके ठिकानो कि संख्या कम से कम 120-130 है 



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