स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985



स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985

( Narcotic Drugs And Psychotropic Substances Act, 1985 (NDPS Act) )

 

स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985









































  • नारकोटिक ड्रग एवं सायकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम 1985
  • मादक द्रव्य तथा मनोत्तेजक पदार्थ अधिनियम 1985 (एनडीपीएस एक्ट-1985)
  • स्वापक औषधि और मादक पदार्थ अधिनियम, 1985



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बैंकिंग भ्रष्‍टाचार से रूबरू : सन 2005 से पूर्व की नोट के सम्‍बन्‍ध में



आखिरकार मुझे बैंकिंग अव्यवस्था से दो चार होना पड़ा, जिसके दोषी पूर्ण रूपेण बैंक के अधिकारी/कर्मचारी गण है। कैश डिपॉजिट मशीन मे 2005 से पहले की वो जो जमा नहीं हो सकी उसे जमा करने के लिये भाभी जी आज 11 बजे स्टेट बैंक की लूकरगंज की शाखा पर गई। करीब 1 बजे नम्बर आया तो कैशियर ने मशीन में नोट डाला और नोट मशीन ने स्वीकार नहीं किया तब कैशियर बोला कि यह नोट 2005 से पहले की है और यह शाखा में जमा नही होगी इसे जमा करने के लिये आरबीआई कानपुर में जाना होगा। भाभी जी भी वापस आ गई।  


करीब 4 बजे कोर्ट से घर आया तो मुझे घटना का पता चला और मैंने आबीआई की गाईडलाइस खोजी और आरबीआई की मुम्‍बई शाखा मे फोन करने लूकरगंज ब्रांच की शिकायत की, आरबीआई की ओर से मुझे कहा गया कि हमने 1 दिसम्बर को इस सम्बन्ध में दिशानिर्देश जारी कर दिये है।

तत्पश्चात आरबीआई के दिशानिर्देश की कॉपी लेकर मैं भाभी जी के साथ बैंक 4 बजकर 30 मिनट पर पहुँचा। बैंक का गेट बंद था, मैंने गार्ड को बुलाया और कहा कि मैनेजर से कहो कि एक वकील साहब जरूरी काम से आये है। गार्ड गया और लौट कर आया तो बोला कि मैनेजर साहब ने कहा है कि व्यस्त हूँ कल मिलेंगे, मैंने भी गार्ड से कहा कि मैनेजर से बोल दो कि कल एफआईआर होने के बाद ही मुलाकात होगी और यह सुनकर फिर से गार्ड मैनेजर के पास गया और वापस आकर गेट खोल दिया।

मेरे अंदर गया और मैनेजर से कहा कि आरबीआई की गाइडलांइस 1 दिसम्बर को आ चुकी है उसके बाद भी आप लोग घंटों लाइन में लगे ग्राहकों को गलत जानकारी देकर वापस कर दे रहे हो, इसका क्या औचित्य है क्या आपके ऊपर आबीआई की गाईडलांइस लागू नहीं होती है। मैनेजर तपाक से बोले कि बहुत कानून जानते हो कितने बड़े वकील हो जाओ करवा दो एफआईआर, मैं किसी से डरता नहीं हूँ, वकील गुंडे होते ही है, कही भी गुंडाई करने चले आते है।

उसके बाद मैंने कहा जितना बड़ा वकील हूँ आपके लिये पर्याप्त हूँ, और आप लोगों की अकर्मण्यता मुझे जैसे वकीलों को आप जैसे पढ़े लिखे अधिकारियों को नियम कायदे समझाने के लिये आना पड़ता है। अगर आपके द्वारा तत् समय गलत जानकारी देकर पैसा जमा करने से इंकार न किया गया हो तो मुझे पैसे जमा कर लिये गये होते तो मुझे यहाँ आने की जरूरत न पड़ती। वास्तव में आप जैसों के कारण ही जनता ज्यादा परेशान है।

मेरे और मैनेजर की मध्य वाद-विवाद के बीच में, बैंक कैशियर द्वारा बिना गाईडलांइस पढ़े सन 2005 की नोटों को सायंकाल 4 बज कर 45 मिनट पर जमा कर लिया, अर्थात आरबीआई के गाईडलांइस की जानकारी होने के बाद भी ग्राहकों को जानबूझकर गुमराह किया जा रहा है।

इस घटना से मुझे यही प्रतीत हो रहा है कि बैंक कमियों द्वारा ग्राहकों को जागरूकता के अभाव में जानबूझकर परेशान किया जा रहा है और ग्राहकों की भीड़ को कम करके अपने परिचितों के काले धन को सफेद किया जा रहा है।

नोट - आपके पास भी वर्ष 2005 से पूर्व की नोट हो तो उसे आपने बैंक के अपने खाते में जमा करें। इसे बैंक में जमा करने के लिये दिसम्बर 2016 तक कोई रोक नहीं है। किसी को भी कम दाम पर इसे बदलने के लिये न दे।



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विद्यार्थी परिषद् इलाहाबाद की राजनीति



इलाहाबाद छात्र संघ में रोहित शुक्ला जीत अद्भुत है किंतु जिस प्रकार यह बताया जा रहा है कि यह अध्यक्ष पद पर विद्यार्थी परिषद् की इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पहली जीत है..

अगर हम अपने आपको संघ, बीजेपी, विहिप या अनुसांगिक सगठनों के जुड़े कहते है तो हमें अपने सगठनों से संबधित इतिहास भी सही से जान लेना चाहिए..

जहाँ तक मुझे पता है कि इससे पहले विद्यार्थी परिषद् की ओर से छात्र संघ अध्यक्ष विजय कुमार जी, रामदीन सिंह जी और लक्ष्मी शंकर ओझा हुए थे या हम कहना चाहते है वो संघ या विद्यार्थी परिषद् से नहीं के नहीं थे ??

यह हम कहना चाहते है कि पीछे 70 वर्षों में संघ की विचारधारा का नाम लेना वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नहीं था, इतनी कमजोर थी संघ की पकड़ और विचारधारा?

अतिउत्साह में कही न कही हम अपने पुराने अस्तित्व और अपने पुराने स्तंभों पर पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दे रहे है..


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श्री हनुमान जी की आरती और चित्र



आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्टदलन रघुनाथ कला की।
जाके बल से गिरिवर कांपै। रोग दोष जाके निकट न झांपै।
अंजनिपुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारि सीय सुधि लाये।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारि असुर संहारे। सीतारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्राण उबारे।
पैठि पताल तोरि जम कारे। अहिरावण की भुजा उखारे।
बायें भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर नर मुनि आरती उतारे। जय जय जय हनुमान उचारे।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
जो हनुमान जी की आरती गावै। बसि बैकुण्ठ परम पद पावै।



















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