भारतीय दंड संहिता (I.P.C.) की महत्वपूर्ण धाराएं



सामान्य व्यवहारिक समझ के लिए भारतीय दंड संहिता का व्यावहारिक समझ आवश्यक है, हर भारतीय का जिम्मेदारी है कि उसे भारतीय संविधान और दंड कानूनों की सामान्य जानकारी हो। कोई भी व्‍यक्ति इस बात की छूट अपराध के बचाव मे नही ले सकता कि उसे विधि (कानून) की जानकारी नही थी। इस लिये आईपीसी की कुछ महत्‍वपूर्ण धाराओं के सम्‍बन्‍ध मे जानकारी दी जा रही है। अगर आपको किसी अन्‍य धाराओं के बारे मे जानकारी चाहिये तो कमेन्‍ट करे शीघ्र की आपकी वांछित धाराओं की जानकारी अपडेट की जायेगी। 


  • भारतीय दंड संहिता धारा -3
    भारतीय दण्ड संहिता की धारा 3 ऐसे अपराधों की सजा के बारे में है जो कि भारत से बाहर किये गए हैपर कानून के अनुसार उन्हें भारत में ही पेश किया जायेगा व यही उनकी सुनवाई होगी। इसके तहत कोई भी व्यक्ति जिस पर यह दंड संहिता लागू होती है के द्वारा किये गए किसी भी अपराध के बारे में, भले ही वह भारत से बाहर किये गए हो की सुनवाई व सजा भारत में होगी।
  • भारतीय दंड संहिता, 1860 में धारा 34
    आम इरादे को आगे बढ़ाने में कई व्यक्तियों द्वारा किया कृत्यों [अधिनियम - एक आपराधिक कृत्य सभी की आम इरादे को आगे बढ़ाने में कई व्यक्तियों द्वारा किया जाता है जब यह लडक़ा उसके द्वारा किया गया है, जैसे कि ऐसे व्यक्तियों में से प्रत्येक में एक ही तरीके है की अधिनियम के लिए उत्तरदायी है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-120 ए और 120 बी
    किसी भी अपराध को अंजाम देने के लिए साझा साजिश यानी कॉमन कॉन्सपिरेसी का मामला गुनाह की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 120ए और 120बी का प्रावधान है। जिस भी मामले में आरोपियों की संख्या एक से ज्यादा होती है, तो पुलिस की एफआईआर में आमतौर पर धारा 120ए का जिक्र जरूर होता है। यह जरूरी नहीं है कि आरोपी खुद अपराध को अंजाम दे। किसी साजिश में शामिल होना भी कानून की निगाह में गुनाह है। ऐसे में साजिश में शामिल शख्स यदि फांसी, उम्रकैद या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय अपराध करने की आपराधिक साजिश में शामिल होगा तो धारा 120 बी के तहत उसको भी अपराध करने वाले के बराबर सजा मिलेगी। अन्य मामलों में यह सजा छह महीने की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 141, विधि विरुद्ध जमाव
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-153 ए
    आईपीसी की धारा 153 (ए) उन लोगों पर लगाई जाती है, जो धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। धारा 153 (ए) के तहत 3 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अगर ये अपराध किसी धार्मिक स्थल पर किया जाए तो 5 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-186
    अगर कोई शख्स सरकारी काम में बाधा पहुंचाता है तो उस पर आईपीसी की धारा 186 के तहत मुकदमा चलाया जाता है। उसे तीन महीने तक की कैद और 500 रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 191, मिथ्यासाक्ष्य देना
    जो कोई शपथ द्वारा या विधि के किसी अभिव्यक्त उपबंध द्वारा सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, या किसी विषय पर घोषणा करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध होते हुए, ऐसा कोई कथन करेगा, जो मिथ्या है, और या तो जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, वह मिथ्या साक्ष्य देता है, यह कहा जाता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा - 201
    भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के अन्‍तर्गत साक्ष्‍य या सूबूत मिटाने चाहे वह साक्ष्‍य मिटाना मृत्यु से दंडनीय के लिये हो अथवा किसी भी प्रकार के साक्ष्‍य को मिटाने के सम्‍बन्‍ध में हो।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-292
    समाज में अश्लीलता फैलाना भी संगीन गुनाह की श्रेणी में आता है। अश्लील साहित्य, अश्लील चित्र या फिल्मों को दिखाना,वितरित करना और इससे किसी प्रकार का लाभ कमाना या लाभ में किसी प्रकार की कोई भागीदारी कानून की नजर में अपराध है और ऐसे अपराध पर आईपीसी की धारा 292 लगाई जाती है। इसके दायरे में वो लोग भी आते हैं जो अश्लील सामग्री को बेचते हैं या जिन लोगों के पास से अश्लील सामग्री बरामद होती है। अगर कोई पहली बार आईपीसी की धारा 292 के तहत दोषी पाया जाता है तो उसे 2 साल की कैद और 2 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार या फिर बार-बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की कैद और 5 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-294
    सार्वजनिक जगहों पर अश्लील हरकतें करने या अश्लील गाना गाने पर आईपीसी की धारा 294 लगाई जाती है। इस मामले में गुनाह अगर साबित हो जाए तो तीन महीने तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 300, हत्या करना
    भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के अन्‍तर्गत हत्‍या को परिभाषित किया गया है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-302
    आईपीसी की धारा 302 कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण है। कत्ल के आरोपियों पर धारा 302 लगाई जाती है। अगर किसी पर कत्ल का दोष साबित हो जाता है, तो उसे उम्रकैद या फांसी की सजा और जुर्माना हो सकता है। कत्ल के मामलों में खासतौर पर कत्ल के इरादे और उसके मकसद पर ध्यान दिया जाता है। इसमें, पुलिस को सबूतों के साथ ये साबित करना होता है कि कत्ल आरोपी ने किया है, उसके पास कत्ल का मकसद भी था और वो कत्ल करने का इरादा रखता था।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-304ए
    आईपीसी की धारा 304 (ए) उन लोगों पर लगाई जाती है,जिनकी लापरवाही की वजह से किसी की जान जाती है। इसके तहत दो साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों होते हैं। सडक़ दुर्घटना के मामलों में किसी की मौत हो जाने पर अक्सर इस धारा का इस्तेमाल होता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 306 और 305
    आईपीसी की धारा 306 और 305 खुदकुशी या आत्महत्या के मामले से जुड़ी है। अगर कोई शख्स खुदकुशी कर लेता है और ये साबित होता है कि उसे ऐसा करने के लिए किसी ने उकसाया था या फिर किसी ने उसे इतना परेशान किया था कि उसने अपनी जान दे दी तो उकसाने या परेशान करने वाले शख्स पर आईपीसी की धारा 306 लगाई जाती है। इसके तहत 10 साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। अगर आत्महत्या के लिए किसी नाबालिग, मानसिक तौर पर कमजोर या फिर किसी भी ऐसे शख्स को उकसाया जाता है जो अपने आप सही और गलत का फैसला करने की स्थिति में न हो तो उकसाने वाले शख्स पर धारा 305 लगाई जाती है। इसके तहत दस साल की कैद और जुर्माना या उम्रकैद या फिर फांसी की भी सजा हो सकती है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-307
    किसी की हत्या की कोशिश का मामला अगर सामने आता है तो हत्या की कोशिश करने वाले पर आईपीसी की धारा 307 लगाई जाती है। यानि अगर कोई किसी की हत्या की कोशिश करता है,लेकिन जिस शख्स पर हमला हुआ, उसकी जान नहीं जाती तो धारा 307 के तहत हमला करने वाले शख्स पर मुकदमा चलता है। आम तौर पर ऐसे मामलों में दोषी को 10 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकते हैं। अगर जिसकी हत्या की कोशिश की गई है उसे गंभीर चोट लगती है तो दोषी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 309, आत्महत्या की कोशिश
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 310, ठगी करना
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 312, गर्भपात करना
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 323 भारतीय दंड संहिता
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 334, स्वेच्छा उपहति कारित करने के लिए दंड
    उस दशा के सिवाय जिस के लिए धारा 334 में उपबंध है, जो कोई स्वेच्छया उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिस की अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 351, हमला करना
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 354, स्त्री लज्जाभंग
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-353
    भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 353 उन लोगों पर लगाई जाती है जो सरकारी कर्मचारी पर हमला कर या उस पर ताकत का इस्तेमाल कर उसे उसकी ड्यूटी निभाने से रोकते हैं। ऐसे मामलों में दोषी को दो साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 362, अपहरण
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 365, किसी व्यक्ति का गुप्त रीति से और सदोष परिरोध करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 377, अप्राकृतिक कृत्यजो कोई किसी पुरुष, स्त्री या जीवजन्तु के साथ प्रकॄति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेच्छया इन्द्रिय भोग करेगा वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
  •  भारतीय दंड संहिता की धारा- 378, चोरी
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 395, डकैती
  •  भारतीय दंड संहिता की धारा- 396, डकैती के दौरान हत्या
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 412, छीनाझपटी
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 415, छल करना
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 438
    आग या विस्फोटक पदार्थ से प्रतिबद्ध अनुभाग 437 में वर्णित शरारत के लिए सजा -करता है, या आग या किसी विस्फोटक पदार्थ, अंतिम पूर्ववर्ती खंड में वर्णित के रूप में ऐसी शरारत से, करने का प्रयास करता है जो कोई भी [आजीवन कारावास] से दंडित किया जाएगा या दस साल तक का हो सकता है, और भी ठीक करने के लिए उत्तरदायी होगा जो एक अवधि के लिए या तो विवरण के कारावास के साथ।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 445, गृहभेदंन
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 494, पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 499, मानहानि
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 511, आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।

भारतीय विधि से संबधित महत्वपूर्ण लेख


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आदित्यनाथ को पप्पू बनाते उनके अधिकारीगण



उत्तर प्रदेश सरकार ने एक जन शिकायतों के निवारण के लिए जनसुनवाई तंत्र स्थापित किया है, जिसे आईजीआरएस के नाम से भी जाना जाता है.. 

कहने के लिए पर्याप्त है कि यह इसकी मोनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जाती है, हकीकत यह है कि यह व्यवस्था सिर्फ अधिकारियों के खेल की वस्तु से अधिक नहीं है.. 

जनता के हाथ में शिकायत संख्या के नाम पर ऐसा झुनझुना पकड़ा दिया जाता है जो सिर्फ आत्मसंतुष्टि ही दे पाती अपितु कोई परिणाम देने के बजाय... 

अब तो यह प्रतीत होता है कि अधिकारियों में सरकार का कोई खौफ नहीं है क्योकि जबावदेही ही नहीं है बिना दंड और जवादेही के कोई सरकारी व्यवस्था सुचारू रूप से काम कर ही नहीं सकती है..

बहुतायत जनशिकायतों पर अधिकारीयों द्वारा नज़र इनायत कि तक न अहि जाती और बिना पढ़े ही मामले को अधिनस्त अधिकारी को भेज दी जाति है और अंत में जिसके विरुद्ध शिकायत की जाती है उसके पास शिकायत पहुच जाती है और वह अधिकारी अपने आपको दोष मुक्त कर जन शिकायत का निस्तारण कर देता है.. अर्थात अधिकारीगण आपस में मिल कर मुख्यमत्री सहित पुरे मंत्रिमंडल और जानता को पप्पू बनाने सफल प्रयास में लगे है..

क्या यह प्रणाली वास्तव में जनउपयोगी है या सिर्फ जानता को ठगने भर का प्रभावशाली कोशिश !

नोट- आईजीआरएस के सम्बन्ध में आपके अनुभव हो तो जरूर शेयर करें..


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उत्‍तर प्रदेश के वर्तमान मंत्रियों की सूची (कैबिनेट, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार एवं राज्य मंत्री)



Cabinet Ministers Of U.P. Government
1. Shri Yogi Adityanath Hon'ble Chief Minister Home, Housing and Urban Planning, Revenue, Food and logistics, Civil Supplies, Food Safety and Drug Administration, Economics and Statistics, Mining and Minarals, Flood Control, Tax Registration, Jail, General Administration, Secretariat Administration, Confidential, Vigilance, Appointment, Personnel, Information, Electoral, Institutional Finance, Planning, State Property, Town Land, Uttar Pradesh Restructuring Coordination, Administrative Reform, Program Implementation, National Integration, Infrastructure,  Language, External Aided Project, Scarcity, Relief and Rehabilitation, Public service Management , Rent Control, Consumer Protection, Weights and Measures
2. Shri Keshav Prasad Maurya Deputy Chief Minister Public Works Department, Food Processing,Entertainment Tax, Public Enterprises
3. Dr. Dinesh Sharma Deputy Chief Minister Secondary Education and Higher Education, Science and Technology, Electronics, Information Technology
4. Shri Surya Pratap Shahi Cabinet Minister Agriculture, Agricultural Education, Agricultural research
5. Shri Suresh Khanna Cabinet Minister Parliamentary Affairs, Urban Development, Overall Urban Development, Urban Employment and Poverty Alleviation 
6. Shri Swami Prasad Maurya Cabinet Minister Labour, Employment, Coordination
7. Shri Satish Mahana Cabinet Minister Industrial development
8. Shri Rajesh Agarwal Cabinet Minister Finance
9. Smt. Reeta Bahuguna Joshi Cabinet Minister Women's Welfare, Family Welfare, Mother and Child Welfare, Tourism
10. Shri Dara Singh Chauhan Cabinet Minister Forest, Environment, Zoological Garden, Horticulture
11. Shri Dharam Pal Singh Cabinet Minister Irrigation, Irrigation (Mechanical)
12. Shri S P Singh Baghel Cabinet Minister Animal Husbandry, Minor Irrigation, Fisheries
13. Shri Satya Dev Pachauri Cabinet Minister Khadi Village Industries, Sericulture, Textile, Micro, Small and Medium Enterprises, Export Promotion
14. Shri Ramapati Shastri Cabinet Minister Social Welfare, Scheduled Castes and Tribal Welfare
15. Shri Jai Pratap Singh Cabinet Minister Excise, Prohibition
16. Shri Om Prakash Rajbhar Cabinet Minister Backward class welfare, Divyangjan Empowerment
17. Shri Brijesh Pathak Cabinet Minister Legislative, Justice, Conventional Energy Sources, Political Pension
18. Shri Laxmi Narayan Chaudhary Cabinet Minister Dairy Development, Religious Affairs, Culture, Minority Welfare, Muslim Waqf and Haj
19. Shri Chetan Chauhan Cabinet Minister Sports, Youth Welfare, Vocational Education, Skilled Development
20. Shri Shrikant Sharma Cabinet Minister Energy
21. Shri RajendraPratap Singh (Moti Singh) Cabinet Minister Rural engineering service
22. Shri SidharthNath Singh Cabinet Minister Medical and health
23. Shri Mukut Bihari Verma Cabinet Minister Cooperative
24. Shri AshutoshTandon Cabinet Minister Technical Education, Medical Education
25. Shri Nand Gopal Gupta "Nandi" Cabinet Minister Stamp and court fees, Registration, Civil aviation
केबिनेट मंत्री उ.प्र. सरकार
1. श्री योगी आदित्यनाथ मा. मुख्यमंत्री गृह, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व, खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, अर्थ एवं संख्या, भूतत्व एवं खनिजकर्म, बाढ़ नियंत्रण, कर निबंधन, कारागार, सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गोपन, सर्तकता, नियुक्ति, कार्मिक, सूचना, निर्वाचन, संस्थागत वित्त, नियोजन, राज्य सम्पत्ति, नगर भूमि, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय, प्रशासनिक सुधार, कार्यक्रम कार्यान्वयन, राष्ट्रीय एकीकरण, अवस्थापना, भाषा, वाह्य सहायतित परियोजना, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास, लोक सेवा प्रबंधन, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बांट माप विभाग
2. श्री केशव प्रसाद मौर्य उप मुख्यमंत्री लोक निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, मनोरंजन कर, सार्वजनिक उद्यम
3. डा0 दिनेश शर्मा उप मुख्यमंत्री माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी
4. श्री सूर्य प्रताप शाही केबिनेट मंत्री कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान
5. श्री सुरेश खन्ना केबिनेट मंत्री संसदीय कार्य, नगर विकास, शहरी समग्र विकास,नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन
6. श्री स्वामी प्रसाद मौर्य केबिनेट मंत्री श्रम, सेवायोजन, समन्वय
7. श्री सतीश महाना केबिनेट मंत्री औद्योगिक विकास
8. श्री राजेश अग्रवाल केबिनेट मंत्री वित्त
9. श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी केबिनेट मंत्री महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण, पर्यटन
10. श्री दारा सिंह चौहान केबिनेट मंत्री वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान, उद्यान
11. श्री धर्मपाल सिंह केबिनेट मंत्री सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक)
12. श्री एस. पी. सिंह बघेल केबिनेट मंत्री पशुधन, लघु सिंचाई, मत्स्य
13. श्री सत्यदेव पचौरी केबिनेट मंत्री खादी ग्रामोद्योग, रेशम, वस्त्रोद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निर्यात प्रोत्साहन
14. श्री रमापति शास्त्री केबिनेट मंत्री समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
15. श्री जय प्रताप सिंह केबिनेट मंत्री आबकारी, मद्यनिषेध
16. श्री ओम प्रकाश राजभर केबिनेट मंत्री पिछड़ा वर्ग कल्याण, दिव्यांगजन सशक्तीकरण
17. श्री बृजेश पाठक केबिनेट मंत्री विधायी, न्याय, अतिरिक्त उर्जा स्रोत, राजनैतिक पेंशन
18. श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी केबिनेट मंत्री दुग्ध विकास, धमार्थ कार्य, संस्कृति, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ़ एवं हज
19. श्री चेतन चौहान केबिनेट मंत्री खेल, युवा कल्याण, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास
20. श्री श्रीकांत शर्मा केबिनेट मंत्री ऊर्जा
21. श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह (मोती सिंह) केबिनेट मंत्री ग्रामीण अभियंत्रण सेवा
22. श्री सिद्धार्थनाथ सिंह केबिनेट मंत्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
23. श्री मुकुट बिहारी वर्मा केबिनेट मंत्री सहकारिता
24. श्री आशुतोष टंडन केबिनेट मंत्री प्राविधिक शिक्षा,  चिकित्सा शिक्षा
25. श्री नन्द गोपाल गुप्ता ''नंदी'' केबिनेट मंत्री स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क, पंजीयन, नागरिक उड्डयन

Ministers Of State (Independent Charge) Of U.P. Government
1 Smt. Anupma Jaiswal State Minister (Independent Charge) Basic Education, Child Development and Neutrition, Revenue (MOS), Finance (MOS)
2 Shri Suresh Rana State Minister (Independent Charge) Sugarcane Development, Sugar Mills, Industrial Development (MOS)
3 Shri UpendraTiwari State Minister (Independent Charge) Water Supply, Land Development and Water Resources, Waste Land Development, Forest, Environment, Zoological Garden, Horticulture, Cooprative (MOS)
4 Dr. Mahendra Singh State Minister (Independent Charge) Rural Development, Overall Village Development, Medical and Health (MOS)
5 Shri Swatantradev Singh State Minister (Independent Charge) Transport, Protocol, Energy (MOS)
6 Shri Bhupendra Singh Choudhary State Minister (Independent Charge) Panchayati Raj, Public Works Department (MOS)
7 Shri Dharam Singh Saini State Minister (Independent Charge) Ayush, Scarcity, Relief and Rehabilitation (MOS)
8 Shri Anil Rajbhar State Minister (Independent Charge) Sainik Welfare, Food Processing (MOS), Home Guards, PRD, Civil Protection
9 Smt. Swati Singh State Minister (Independent Charge) N.R.I., Flood Control, Agricultural Exports, Agricultural Marketing, Agricultural Foreign Trade, Women's Welfare, Family Welfare, Mother and Child Welfare (MOS)

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उ.प्र. सरकार
1 श्रीमती अनुपमा जैसवाल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, राजस्व (MOS), वित्त (MOS)
2 श्री सुरेश राणा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गन्ना विकास, चीनी मिलें, औद्योगिक विकास (MOS)
3 श्री उपेन्द्र तिवारी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जल सम्पूर्ति, भूमि विकास एवं जल संसाधन, परती भूमि विकास, वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान, उद्यान, सहकारिता (MOS)
4 डा. महेन्द्र सिंह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ग्राम्य विकास, समग्र ग्राम विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (MOS)
5 श्री स्वतंत्रदेव सिंह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) परिवहन, प्रोटोकॉल, ऊर्जा (MOS)
6 श्री भूपेन्द्र सिंह चौधरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पंचायती राज, लोक निर्माण (MOS)
7 श्री धरम सिंह सैनी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास (MOS)
8 श्री अनिल राजभर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सैनिक कल्याण, खाद्य प्रसंस्करण (MOS), होमगार्ड्स, प्रांतीय रक्षक दल, नागरिक सुरक्षा
9 श्रीमती स्वाती सिंह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एन0आर0आई0, बाढ़ नियंत्रण, कृषि निर्यात, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण (MOS)

State Ministers Of U.P. Government
1 Smt. Gulabo Devi State Minister Social Welfare, Scheduled Castes and Tribal Welfare
2 Shri Jai Prakash Nishad State Minister Animal Husbandry and Fishery, State Property, Urban land
3 Smt. Archana Pandey State Minister Mining and Minirals, Excise, Prohibition
4 Shri Jai Kumar Singh Jaiki State Minister Jail, Public service management
5 Shri Atul Garg State Minister Food and Logistics, Civil Supplies, Rent Control, Consumer Protection, Weights and Measures, Food Safety and Drug Administration
6 Shri Ranvendra Pratap Singh (Dhunni Singh) State Minister Agriculture, Agriculture Education, Agriculture Research
7 Dr. NeelkanthTiwari State Minister Legislative and justice, Information, Sports and Youth Welfare
8 Shri Mohsin Raza State Minister Science and Technology, Electronics, Information Technology, Muslim Waqf and Haj
9 Shri Girish Chandra Yadav State Minister Urban Development, Scarcity, Relief and rehabilitation
10 Shri Baldev Aulakh State Minister Minority Welfare, Irrigation, Irrigation (Mechanical)
11 Shri Manoharlal Mannu Kori State Minister Labour and Employment
12 Shri Sandeep Singh State Minister Primary Education, Secondary Education, Higher Education, Technical Education, Medical Education
13 Shri Suresh Passi State Minister Housing and Urban Planning, Vocational Education and Skilled Development
राज्य मंत्री उ.प्र. सरकार
1
श्रीमती गुलाबो देवी
राज्य मंत्री
समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
2
श्री जय प्रताप निषाद
राज्य मंत्री
पशुधन एवं मत्स्य, राज्य सम्पत्ति, नगर भूमि
3
श्रीमती अर्चना पाण्‍डे
राज्य मंत्री
भूतत्व एवं खनिकर्म, आबकारी, मद्यनिषेध
4
श्री जय कुमार सिंह जैकी
राज्य मंत्री
कारागार, लोक सेवा प्रबंधन
5
श्री अतुल गर्ग
राज्य मंत्री
खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बांट माप, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन
6
श्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह (धुन्नी सिंह)
राज्य मंत्री
कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान
7
डा0 नीलकंठ तिवारी
राज्य मंत्री
विधायी एवं न्याय, सूचना, खेल एवं युवा कल्याण
8
श्री मोहसिन रजा
राज्य मंत्री
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, मुस्लिम वक्फ, हज
9
श्री गिरीश चन्द्र यादव
राज्य मंत्री
नगर विकास, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास
10
श्री बलदेव ओलख
राज्य मंत्री
अल्पसंख्यक कल्याण, सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक)
11
श्री मनोहरलाल मन्नु कोरी
राज्य मंत्री
श्रम, सेवायोजन
12
श्री संदीप सिंह
राज्य मंत्री
बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा
13
श्री सुरेश पासी
राज्य मंत्री
आवास एवं शहरी नियोजन, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास


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भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498 व 498 ए के अंतर्गत सजा



  • भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498
    आईपीसी की इस धारा के अंतर्गत किसी विवाहित स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना, या ले जाना या निरुद्ध रखने के अपराध को परिभाषित किया गया है अर्थात जो कोई किसी स्त्री को, जो किसी अन्य पुरुष की पत्नी है, और जिसका अन्य पुरुष की पत्नी होना वह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है, उस पुरुष के पास से, या किसी ऐसे व्यक्ति के पास से, जो उस पुरुष की ओर से उसकी देखरेख करता है, इस आशय से ले जाएगा, या फुसलाकर ले जाएगा कि वह किसी व्यक्ति के साथ अयुक्त संभोग करे या इस आशय से ऐसी किसी स्त्री को छिपाएगा या निरुद्ध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
  • भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498 ए
    भादंसं की इस धारा के अंतर्गत किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करने के अपराध को परिभाषित किया गया है अर्थात जो कोई, किसी स्त्री का पति या पति नातेदार होते हुए, ऐसी स्त्री के प्रति क्रूरता करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
    स्पष्टीकरण के लिये इस धारा के प्रयोजनों के लिए, क्रूरता निम्नलिखित परिभाषित हैः--
    • (क) जानबूझकर किया गया कोई आचरण जो ऐसी प्रकॄति का है जिससे स्त्री को आत्महत्या करने के लिए या उसके जीवन, अंग या स्वास्थ्य (जो चाहे मानसिक हो या शारीरिक) के प्रति गंभीर क्षति या खतरा कारित करने के लिए उसे प्रेरित करने की सम्भावना है ; या
    • (ख) किसी स्त्री को तंग करना, जहां उसे या उससे सम्बन्धित किसी व्यक्ति को किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के लिए किसी विधिविरुद्ध मांग को पूरी करने के लिए प्रपीडित करने को दृष्टि से या उसके अथवा उससे संबंधित किसी व्यक्ति के ऐसे मांग पूरी करने में असफल रहने के कारण इस प्रकार तंग किया जा रहा है ।
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हनुमान का पञ्चमुखी धारण करने की कथा



बजरंगबली को सकंटमोचन भी कहा जाता हैं और भगवान हनुमान ने हमेशा अपने नाम को सार्थक किया हैं।
Panchamukha - Sri Panchamukhi Hanuman - पंचमुखी हनुमान की कहानी, जानिए पंचमुखी क्यो हुए हनुमान - श्री पंचमुखी हनुमान रूप पांच चेहरों से बना रूप है जिसमे हर चेहरे का दर्शन कृपा देने वाला है
संकट चाहे शारीरिक हो या मानसिक, भगवान् हनुमान हमेशा उसका निवारण करने में समर्थ रहे हैं। रामायण काल में हर कोई अपनी समस्या के निदान के लिए भगवान् हनुमान को ही याद करते थे. ऐसा ही एक संकट, श्री हनुमान के स्वामी भगवान् राम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण पर भी आया था, जिसका निवारण भी श्री हनुमान ने ही किया था। बजरंगबलि अपनी स्वामी भक्ति के लिए जाने जाते हैं और रामायण का युद्ध भी श्रीराम की वानर सेना ने अगर जीता था तो उसमे हनुमान की बहुत बड़ी भूमिका थी. इसी युद्ध के दौरान भगवान् हनुमान ने अपने कई अवतारों में से एक “पंचमुखी हनुमान अवतार” भी धारण किया था।
 
लेकिन क्या वजह थी कि श्री हनुमान को पंचमुखी अवतार धारण करना पड़ा था?
रामायण की कथा के अनुसार जब भगवान् राम अपनी पत्नी सीता को छुड़ाने रावण की लंका गए थे तब कई दिनो तक वहां युद्ध चला था. युद्ध में रावण अपना पक्ष कमज़ोर होता देख, अपने भाई अहिरावण को भी इस युद्ध में भाग लेने के लिए बुलाया था. इस युद्ध में रावण द्वारा अपने भाई को शामिल करने एक की यह वजह थी कि अहिरावण को मायावी शक्तियां प्राप्त थी और रावण इन्ही मायावी शक्तियों का इस्तेमाल कर के यह युद्ध जीतना चाहता था।
 
इस युद्ध में रावण अपने भाई अहिरावण की मायावी शक्तियों की मदद से श्रीराम की पूरी सेना को गहरी नींद में सुला कर श्री राम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया था और इसी मुर्छित अवस्था में अहिरावण, श्रीराम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले कर चला गया। जब हनुमान को यह बात ज्ञात हुई तो वह तुरंत पाताल लोक पहुचें लेकिन पाताल लोक के द्वार रक्षक मकरध्वज ने उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया था. तब हनुमान ने मकरध्वज से युद्ध कर उसे परास्त किया और पातळ लोक के भीतर पहुचे।
 
वह पहुचते ही उन्होंने देखा कि माँ भवानी के सम्मुख भगवान् राम और लक्ष्मण मुर्छित अवस्था में पड़े थे और अहिरावण श्री राम और लक्ष्मण के बलि की तैयारी कर रहा था. लेकिन उस पूजा स्थल में चारों दिशाओं में पांच दीपक जल रहे थे जिसे एक साथ भुझाने पर अहिरावण की मृत्यु हो सकती थी। भगवान् हनुमान को यह बात ज्ञात होते ही उन्होंने अपना पंचमुखी हनुमान अवतार धारण किया जिसमे वराह मुख, नरसिंह मुख, गरुड़ मुख, हयग्रीव मुख और अंतिम हनुमान मुख थे जिनकी सहायता से उन्होंने एक साथ वह पाँचों दीपक भुझा कर अहिरावण की मृत्यु की थी और श्री राम और लक्ष्मण रक्षा की थी।
 
पञ्चमुखी रूप की शक्ति
पाँच मुँह से शोभित श्री हनुमान जी के रूप को पञ्च मुखी हनुमान कहते है। यह पञ्च मुख पांच दिशाओ और रूप को बताते है |यह पांच मुख नरसिंह रूप, गरुड रूप, अश्व रूप, वानर रूप, वराह रूप है जिसमे तीन रूप भगवान् विष्णु के रूप है और अन्य वानर और अश्व का।
  • नरसिंह रूप : यह रूप दक्षिण दिशा की तरफ है पंचमुखी हनुमान का दक्षिण दिशा का मुख भगवान नृसिंह का है । इस रूप की भक्ति से सारी चिंता, परेशानी और डर दूर हो जाता है।
  • गरुड रूप : पश्चिमी मुख वाला है , जिसके दर्शन से संकट और परेशानिया दूर होती है।
  • अश्व रूप : पंचमुखी हनुमान का पांचवा मुख आकाश की ओर दृष्टि वाला होता है। यह रूप अश्व यानी घोड़े के समान होता है। श्रीहनुमान का यह करुणामय रूप होता है, जो हर मुसीबत से रक्षा करने वाला माना जाता है।
  • वानर रूप : पूर्व दिशा की तरफ है जो बहुत तेजस्वी है और इनकी पूजा और दर्शन से शत्रु पराजित होते है।
  • वराह रूप : उत्तर दिशा का मुख है, जिसकी सेवा पूजन से ऐश्वर्य, यश,दीर्घ आयु व अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
अत: सभी रूप सुखो को देने वाले है और पंचमुखी हनुमान जी की पूजा से सभी तरह के आर्थिक मानसिक सुख प्राप्त होते है। इन रूपों की पूजा अर्चना के लिए आप पञ्चमुखी हनुमान मंत्र का जप करके सर्व कार्य को सिद्ध कर सकते है।


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मेधा सूक्तं — Medha Suktam



Meaning:
Oṁ yaśchandasāmṛṣabho viśvarūpaḥ . Chandobhyo'dhyamṛtātsambabhuva . Sa mendro medhayā spṛṇotu . Amṛtasya deva dhāraṇo bhūyāsam . Śarīraṁ me vicarṣaṇam . Jihvā me madhumattamā . Karṇābhyāṁ bhūriviśruvam . Brahmaṇaḥ kośo'si medhayā pihitaḥ . Śrutaṁ me gopāya .
Oṁ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ ..

May the universal form, exalted among the Vedas and born of the essence of the Vedas, bless me with wisdom. May I be blessed with the nectar of immortality. May my body become active. May my tongue speak sweetly. May my ears hear everything well. You are the repository of Brahman, and are hidden by the intellect. May my memory protect me. Om peace, peace, peace.

Medhā devī juṣamānā na āgād-viśvācī bhadrā sumanasyamāna .
Tvayā juṣṭā nudamānā durūktān bṛhadvadema vidathe suvīraḥ ..1..

O goddess of wisdom! You are pleased, all-pervading and have a peaceful mind. Bless us so that we may give up bad speech and speak well in an assembly like heroes.

Tvayā juṣṭa ṛṣirbhavati devi tvayā brahmāgataśrīruta tvayā .
Tvayā juṣṭaścitraṁ vindate vasu sā no juṣasva draviṇo na medhe ..2..

O goddess! Blessed by you one becomes a sage; like Brahma. Blessed by you one attains prosperity. Blessed by you one attains many treasures. Bless us with that wealth of intelligence.

Medhāṁ ma indro dadātu medhāṁ devī sarasvatī .
Medhāṁ me aśvinavavubhavadhattaṁ puṣkarasrajā ..3..

May Indra give me intelligence. May goddess Saraswati give me intelligence. May the two Ashwins, who wear garlands of lotuses, give me intelligence.

Apsarāsu ca yā medhā gandharveṣu ca yanmanaḥ .
Daivīṁ medhā sarasvatī sā māṁ medhā surabhirjuṣhatam̐̐ svāhā ..4..

May Saraswati, who is fragrant, bless me with the divine intelligence which is the wisdom of the Apsaras and the mind of the Gandharvas.

Ā māṁ medhā surabhirviśvarūpā hiraṇyavarṇā jagatī jagamyā .
Ūrjasvatī payasā pinvamānā sā māṁ medhā supratīkā juṣantām ..5..

May that Saraswati, who is intelligence personified, who is fragrant, who is all pervading, who has a golden complexion, who is the earth, who is accessible to all, who is full of vigour, who is overflowing with the nectar of knowledge, and who is beautiful; come to me and bless me with intelligence.

Mayi medhāṁ mayi prajāṁ mayyagnistejo dadātu .
Mayi medhāṁ mayi prajāṁ mayīndra indriyaṁ dadātu .
Mayi medhāṁ mayi prajāṁ mayi sūryo bhrājo dadātu ..6..

May Agni give me intelligence, people and vigour. May Indra give me intelligence, people and bodily power. May Surya give me intelligence, people and brilliance.

Oṁ haṁsa haṁsāya vidmahe paramahaṁsāya dhīmahi .
Tanno haṁsaḥ pracodayāt ..7..

We perceive the Hamsa that is the soul; we meditate on that Hamsa that is the supreme being.
May that Hamsa inspire us (to reach that goal).

Oṁ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ ..
Om peace, peace, peace.

This hymn is found in the Taittiriya Aranyakam of the Krishna Yajurveda.
The Shanti Mantram preceding the hymn is found in Prapathaka 4 of Chapter 7.
The hymn itself is composed of Prapathakas 41-44 of Chapter 10.
Notes:

The given version is found in the Taittiriya Aranyakam. Other hymns, also called Medha Suktam can be found in Rigveda and Atharvaveda. This prayer is addressed to the Goddess of learning, Saraswati. It asks her to bless us so that we may become wise. Chanting this hymn daily improves memory, intelligence, grasping power and speaking capacity.


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