पश्चिमोत्तानासन योग विधि, लाभ और सावधानी



पश्चिमोत्नासन प्राणायाम
पश्चिमोत्तनासन  करने में पीठ खिचाव उत्पन्न होता है, इसीलिए इसे पश्चिमोत्तनासन कहते हैं। पश्चिमोत्तनासन से शरीर के सभी माँसपेशियों में खिंचाव होता है, इसलिए इसे बैठकर किये जाने वाले आसनों में एक महत्वपूर्ण आसन माना गया है। पश्चिम का अर्थ होता है पीछे का भाग- पीठ। शीर्षासन की भांति इस आसन का महत्वपूर्ण स्थान है। पश्चिमोत्तनासन नियमित करने से मेरूदंड में मजबूती एवं लचीलापन आता है, जिसके कारण कुण्डलिनी जागरण में लाभ मिलता है और बुढ़ापे में भी व्यक्ति  की रीढ़ की हड्डी झुकती नहीं है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर की चर्बी और मोटापा दूर किया जा सकता है तथा मधुमेह का रोग भी ठीक किया जा सकता है। पश्चिमोत्तनासन के माध्यम से स्त्रियों के योनिविकार, मासिक धर्म सम्बन्धी समस्या तथा प्रदर आदि रोग दूर किया जा सकता हैं। पश्चिमोत्तनासन गर्भाशय से सम्बन्धी समस्या को ठीक करता है। पश्चिमोत्तनासन आध्यात्मिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण आसन होने के साथ-साथ मेरूदंड के सभी समस्या जैसे- पीठदर्द, पेट के रोग, यकृत रोग, तिल्ली, आंतों के रोग तथा गुर्दे के रोगों को ख़त्म करता है। पश्चिमोत्नासन (Paschimottanashana) बैठकर किया जाने वाला योग है।यह योग जानू शीर्षासन से मिलता जुलता है। इस योग में मेरूदंड, पैर, घुटनों के नीचे के नस और कमर मूल रूप से भाग लेते हैं।यह आसन उस स्थिति में बहुत ही लाभप्रद होता है जब शरीर थका होता है।
पश्चिमोत्नासन के लाभ (Benefits of Paschimottanashana)
इस आसन से शरीर के पीछले हिस्से में मौजूद तनाव दूर होता है।यह योग मुद्रा मेरूदंड एवं पैरों के मांसल हिस्सों के लिए बहुत ही लाभप्रद होता है।जब आप बहुत थके होते हैं अथवा अस्वस्थ होते हैं उस समय इस योग मुद्रा का अभ्यास शरीर में मौजूद तनाव और थकान को कम करता है एवं ताजगी का एहसास दिलाता है। इस आसन के अनेको लाभ है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण लाभ नीचे दिए गए है।
  1. इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर की चर्बी और मोटापा दूर किया जा सकता है तथा मधुमेह का रोग भी ठीक किया जा सकता है।
  2. पश्चिमोत्नासन से आध्यात्मिक शक्ति मिलती  है।
  3. इस आसन से क्रोध, सिरदर्द, साइनस के साथ-साथ अनिद्रा के उपचार में भी लाभ मिलता है
  4. बौनापन दूर होता है।
  5. पुरे शरीर में खून संचार सही रूप से काम करता है, जिससे शारीरक दुर्बलता दूर होकर शरीर सुदृढ़, फुर्तीला और स्वस्थ बना रहता है।
  6. नितम्बों और माहिलाओ को सुडौल बनाता है।
  7. सफेद बालों को काले व घने बनाता है।
  8. बहुमूत्र, गुर्दे की पथरी और बवासीर आदि रोगों में भी लाभकारी आसन है।
  9. पश्चिमोत्नासन से वीर्य दोष, नपुंसकता और अनेक प्रकार के योंन रोगों को भी दूर किया जाता है।
योग अवस्था – Paschimottanashana Posture and Technique
जब आप पहली बार इस योग को करते हैं उस समय हो सकता है कि घुटनों के नसों में तनाव के कारण अपने पैरों को सीधा जमीन से टिकाना आपको कठिन लगे।इस स्थिति में घुटनों पर अधिक बल नहीं लगाना चाहिए।आप चाहें तो इस स्थिति में सहायता के लिए कम्बल को मोड़कर उस पर बैठ सकते हैं।योग अभ्यास के दौरान जब आप आगे की ओर झुकते हैं उस समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पेट और छाती आगे की ओर झुके। मेरूदंड की हड्डियों में खिंचाव हो इस बात का ख्याल रखते हुए जितना संभव हो आगे की ओर झुकने की कोशिश करनी चाहिए।

पश्चिमोत्तनासन करने की विधि
  •  सबसे पहले स्वच्छ वातावरण में चटाई, योगा मैट या दरी बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैरों को फैलाकर आपस में परस्पर मिलाकर रखें तथा पूरे शरीर को पूरा सीधा तना हुआ रखें।
  • अपने दोनों हाथों को धीरे धीरे उठाते हुए सिर की ओर ऊपर जमीन पर टिकाएं।
  • उसके बाद दोनों हाथों को ऊपर की ओर तेजी से उठाते हुए एक झटके में कमर के ऊपर के भाग को उठाकर  बैठने की स्थिति में आते हुए धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों से अपने पैरों के अंगूठों को पकड़ने की कोशिश करें।
  • इस क्रिया को करते समय पैरों तथा हाथों को बिल्कुल सीधा रखें और अपने नाक को पैर के घुटने से छूने की कोशिश करें।
  • अब आप पश्चिमोत्नासन की स्थति में है।
  • यह क्रिया को 10-10  सैकेंड का आराम लेते हुए 3 से 5  बार करें। इस आसन को करते समय सांसों की गति सामान्य रखें।
  • जिस व्यक्ति को लेटकर अचानक उठने में परेशानी हो, वह व्यक्ति इस आसान को बैठे बैठे ही करने का प्रयास करें।
पश्चिमोत्नासन करने के लिए सावधानियां
जब कमर में तकलीफ हो एवं रीढ़ की हड्डियो में परेशानी मालूम हो उस समय इस योग का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • यह आसन करते समय कोई भी समस्या हो तो योग विशेषज्ञ से सलाह लें।
  • घुटने, कन्धे, पीठ, गर्दन, नितम्ब, हाथ और पैर आदि में ज्यादा समस्या हो तो यह आसन न करें।
  • रीढ़ की हड्डी में कोई गंभीर समस्या हो तो इस योग को बिल्कुल भी न करें।
  • शुरुआत में पैरों के अंगूठों को पकड़ने और नाक को पैर के घुटने से छूने में परेशानी हो तो जोर जबरदस्ती न करें।धीरे धीरे अभ्यास से होने लगेगा।


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सालम मिश्री के आयुर्वेदिक गुण और कर्म




सालमपंजा गुणकारी बलवीर्य वर्धक, पौष्टिक और नपुंसकता नष्ट करने वाली जड़ी -बूटी है । इसका कंद उपयोग में लिया जाता है । यह बल बढ़ाने वाली, भारी, शीतवीर्य, वात पित्त का शमन करने वाली, वात नाड़ियो को शक्ति देने वाली, शुक्रवर्धक व पाचक है। अधिक दिनों तक समुद्री यात्रा करने वालों को होने वाले रक्त विकार, कफजन्य रोग, रक्तपित्त आदि रोगों को दूर करती है । इसकी पैदावार पश्चिमी हिमालय और तिब्बत में 8 से 12 हजार फीट ऊंचाइयों पर होती है।

सालममिश्री को संस्कृत में बीजागंध, सुरदेय, द्रुतफल, मुंजातक पंजाबी में सलीबमिश्रि, इंग्लिश में सालब, सालप, फ़ारसी में सालबमिश्री, बंगाली सालम मिछरी, गुजराती में सालम और इंग्लिश में सैलेप कहते हैं। यह पौधों के भेद के अनुसार देसी (देश में उगने वाला) और विदेशी माना गया है। देशी सैलेप का वानस्पतिक नाम यूलोफिया कैमपेसट्रिस तथा यूलोफिया उंडा है। विदेशी या फ़ारसी सैलेप का लैटिन नाम आर्किस लेटीफ़ोलिया तथा आर्किस लेक्सीफ्लोरा है। इसे भारत में फारस आदि देशों से आयात किया जाता है।

सैलेप मुंजातक-कुल यानिकी आर्कीडेसिऐइ परिवार का पौधा है और समशितोष्ण हिमालय प्रदेश में कश्मीर से भूटान तक तथा पश्चिमी तिब्बत, अफ्गानिस्तान, फारस आदि देशों में पाया जाता है। हिमालय में पाए जाने वाले सैलेप के पौधे 6-12 इंच की ऊँची झाडी होते हैं जिनमें पत्तियां तने के शीर्ष के पास होती हैं। यह पत्तियां लम्बी और रेखाकार होती हैं। इसके पुष्प की डंडियाँ मूल से निकलती हैं और इन पर नीले-बैंगनी रंग के पुष्प आते हैं।

पौधे की जड़ें कन्द होती है और देखने में पंजे या हथेली की तरह होती हैं। यह मीठी, पौष्टिक और स्वादिष्ट होती हैं। दवाई या टॉनिक के रूप में पौधे के कन्द जिन्हें सालममिश्री या सालमपंजा कहते हैं, का ही प्रयोग किया जाता है। बाजारों में मुख्य रूप से दो प्रकार के सालममिश्री उपलब्ध है, सालम पंजा और लहसुनी सालम/ सालम लहसुनिया। सालम पंजा के कन्द गोल-चपटे और हथेली के आकार के होती हैं जबकि लहसुनि सालम के कन्द शतावरी जैसे लंबे-गोल, और देखने में लहसुन के छिले हुए जवों की तरह होते हैं। इसके अतिरिक्त सालम बादशाही (चपटे टुकड़े), सालम लाहौरी और सालम मद्रासी (निलगिरी से) भी कुछ मात्रा में बिकते हैं। बाज़ार में पंजासालम का मूल्य सबसे अधिक होता है और गुणों में भी यह सर्वश्रेष्ठ है।

सालम मिश्री को अकेले ही या अन्य घटकों के साथ दवा रूप में प्रयोग करते हैं। सालम मिश्री के चूर्ण को दूध में उबाल कर दवा की तरह से दिया जाता है। इसे अन्य घटकों के साथ पौष्टिक पाक में डालते हैं। यूनानी दवाओं में इसे माजूनों में प्रयोग करते हैं। इसका हरीरा भी बनाकर पिलाया जाता है।


संग्रह और भण्डारण इन्हें दवा की तरह प्रयोग करने के लिए छाया में सुखा लिया जाता है। इनका भंडारण एयर टाइट कंटेनर में ठन्डे-सूखे-नमी रहित स्थानों पर किया जाता है।

उत्तम प्रकार की सालम यह मलाई की तरह कुछ क्रीम कलर लिए हुए होती है। यह देखने में गूदेदार-पारभाषी और टूटने पर चमकीली सी लगती हैं। सालम में कोई विशेष प्रकार की गंध होती और यह लुआबी होता है।

सालम कन्द का संघटन
सालम मिश्री के कंडों में मुसिलेज की काफी अच्छी मात्रा होती है। इसमें प्रोटीन, पोटैशियम, फोस्फेट, क्लोराइड भी पाए जाते है। 

सालममिश्री के आयुर्वेदिक गुण और कर्म
  • सालममिश्री स्वाद में मधुर, गुण में भारी और चिकनाई देने वाली है। स्वभाव से यह शीतल है और मधुर विपाक है।
  • यह मधुर रस औषधि है। मधुर रस, मुख में रखते ही प्रसन्न करता है। यह रस धातुओं में वृद्धि करता है। यह बलदायक है तथा रंग, केश, इन्द्रियों, ओजस आदि को बढ़ाता है। यह शरीर को पुष्ट करता है, दूध बढ़ाता है, जीवनीय व आयुष्य है। मधुर रस, गुरु (देर से पचने वाला) है। यह वात-पित्त-विष शामक है। लेकिन मधुर रस का अधिक सेवन मेदो रोग और कफज रोगों का कारण है। यह मोटापा/स्थूलता, मन्दाग्नि, प्रमेह, गलगंड आदि रोगों को पैदा करता है।
  • वीर्य का अर्थ होता है, वह शक्ति जिससे द्रव्य काम करता है। आचार्यों ने इसे मुख्य रूप से दो ही प्रकार का माना है, उष्ण या शीत। शीत वीर्य औषधि के सेवन से मन प्रसन्न होता है। यह जीवनीय होती हैं। यह स्तम्भनकारक और रक्त तथा पित्त को साफ़ / निर्मल करने वाली होती हैं।
  • विपाक का अर्थ है जठराग्नि के संयोग से पाचन के समय उत्पन्न रस। इस प्रकार पदार्थ के पाचन के बाद जो रस बना वह पदार्थ का विपाक है। शरीर के पाचक रस जब पदार्थ से मिलते हैं तो उसमें कई परिवर्तन आते है और पूरी पची अवस्था में जब द्रव्य का सार और मल अलग हो जाते है, और जो रस बनता है, वही रस उसका विपाक है। मधुर विपाक, भारी, मल-मूत्र को साफ़ करने वाला होता है। यह कफ या चिकनाई का पोषक है। शरीर में शुक्र धातु, जिसमें पुरुष का वीर्य और स्त्री का आर्तव आता को बढ़ाता है। इसके सेवन से शरीर में निर्माण होते हैं।
सालम मिश्री के लाभ
  • सालममिश्री को मुख्य रूप से धातुवर्धक और पुष्टिकारक औषधि की तरह प्रयोग किया जाता है।
  • यह टी बी / क्षय रोगों में लाभप्रद है।
  • इसके सेवन से बहुमूत्र, खूनीपेचिश, धातुओं की कमी में लाभ होता है।
  • इसके सेवन से वज़न बढ़ता है।
  • यह बलकारक, शुक्रजनक, रक्तशोधक, कामोद्दीपक, वीर्यवर्धक, और अत्यंत पौष्टिक है।
  • यह मस्तिष्क और मज्जा तंतुओं के लिए उत्तेजक है।
  • पाचन नलिका में जलन होने पर इसे लेते हैं।
  • इसे तंत्रिका दुर्बलता, मानसिक और शारीरिक थकावट, पक्षाघात और लकवाग्रस्त होने पर, दस्त और एसिडिटी के कारण पाचन तंत्र की कमजोरी, क्षय रोगों में प्रयोग करने से अच्छे परिणाम मिलते हैं।
  • यह शरीर के पित्त और वात दोष को दूर करता है। 

सालममिश्री के औषधीय उपयोग 
सालममिश्री को मुख्य रूप से शक्तिवर्धक, बलवर्धक, वीर्यवर्धक, शुक्रवर्धक, और कामोद्दीपक दवा के रूप में लिया जाता है। इसके चूर्ण को दूध में उबाल कर पीने से इसके स्वास्थ्य लाभ लिए जा सकते हैं। इसे अन्य द्रव्यों के साथ मिला कर लेने से इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। यौन कमजोरी / दुर्बलता, कम कामेच्छा, वीर्य की मात्रा-संख्या-गुणवत्ता बढ़ाने के लिए, वीर्य के अनैच्छिक स्राव को रोकने के लिए सालममिश्री के चूर्ण को इससे दुगनी मात्रा के बादाम के चूर्ण के साथ मिलाकर रख लें। रोजाना 10 ग्राम की मात्रा में, दिन में दो बार, सेवन करें।

  • मांसपेशियों में हमेशा रहने वाला पुराना दर्द : बराबर मात्रा में सालममिश्री और पिप्पली के चूर्ण को मिला लें। रोजाना आधा से एक टीस्पून की मात्रा में, दिन में दो बार बकरी के दूध के साथ सेवन करें।
  • प्रमेह, बहुमूत्रता : बराबर मात्रा में सालममिश्री, सफ़ेद मुस्ली और काली मुस्ली के चूर्ण को मिला लें। रोजाना आधा से एक टीस्पून की मात्रा में, दिन में दो बार सेवन करें। 
  • यौन दुर्बलता : 100 ग्राम सालमपंजा, 200 ग्राम बादाम की गिरी को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। 10 ग्राम चूर्ण मीठे दूध के साथ सुबह खाली पेट तथा रात को सोते समय सेवन करने से दुबलापन दूर होता है वह यौन शक्ति में वृद्धि होती है।
  • शुक्रमेह : सालमपंजा सफेद मूसली व काली मूसली 100-100 ग्राम बारीक पीस ले। प्रतिदिन आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम मीठे दूध के साथ लेने से शुक्रमेह ,शीघ्रपतन ,स्वप्नदोष आदि रोगों में लाभ होता है।
  • जीर्ण अतिसार : सालम पंजा का चूर्ण एक चम्मच दिन में 3 बार छाछ के सेवन करने से पुराना अतिसार की खो जाता है। तथा आमवात व पेचिस में भी लाभ होता है।
  • प्रदर रोग : सालमपंजा ,शतावरी, सफेद मुसली को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पुराना श्वेत रोग और इससे होने वाला कमर दर्द दूर हो जाता है।
  • वात प्रकोप : सालमपंजा व पिप्पली को बारीक पीसकर आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम बकरी के मीठे दूध के साथ सेवन करने से व श्वास का प्रकोप शांत होता है।
  • धातुपुष्टता : सालम पंजा, विदारीकंद, अश्वगंधा , सफेद मूसली, बड़ा गोखरू, अकरकरा 50 50 ग्राम लेकर बारीक पीस ले। सुबह -शाम एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ लेने से धातु पुष्टि होती है तथा स्वप्नदोष होना बंदों होता है।
  • प्रसव के बाद दुर्बलता : सालम पंजा व पीपल को पीसकर आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम मीठे दूध के साथ सेवन करने से प्रसव के बाद प्रस्तुत आपकी शारीरिक दुर्बलता दूर होती है।
  • सफ़ेद पानी की समस्या : बराबर मात्रा में सालममिश्री, सफ़ेद मुस्ली, काली मुस्ली, शतावरी और अश्वगंधा के चूर्ण को मिला लें। रोजाना आधा से एक टीस्पून की मात्रा में, दिन में एक बार सेवन करें।
सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें
  • इसका अधिक प्रयोग आँतों के लिए हानिप्रद माना गया है।
  • हानिनिवारण के लिए सोंठ का प्रयोग किया जा सकता है।
  • इसके अभाव में सफ़ेद मुस्ली का प्रयोग करते हैं।
  • पाचन के अनुसार ही इसका सेवन करें।
  • इसके सेवन से वज़न में वृद्धि होती है।
  • यह कब्ज़ कर सकता है।
सालममिश्री के चूर्ण की औषधीय मात्रा
सालममिश्री के चूर्ण को 6 ग्राम से लेकर 12 ग्राम की मात्रा में ले सकते हैं। दवा की तरह प्रयोग करने के लिए करीब एक या दो टीस्पून पाउडर को एक कप दूध में उबाल कर लेना चाहिए।


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सत्‍ता के दौर में भाजपा कार्यकर्ता का दर्द भरा अंत




स्‍व. रमेश शर्मा इलाहाबाद के बाहर भले हम जैसे सामान्‍य कार्यकर्ताओं के लिये सामान्‍य नाम हो किन्‍तु इलाहाबाद जिले शर्मा जी की ऐसे धाक रही है कि शायद ही कोई ऐसा राष्‍ट्रीय नेता रहा हो जो इलाहाबाद से संबंध रखता हो शर्मा जी को नही जानता था। इलाहाबाद जिलें मे भाजपा की कोई बैठक या रैली रही हो जहां उनकी उपस्थिति न होती हो। ऐसे ही भाजपा के वरिष्‍ठ नेता श्री शर्मा जी का हृदय गति रूक जाने के कारण पिछले दिनों मे स्‍वर्गवास हो गया।

स्‍व. शर्मा जी की इस असमयिक मृत्‍यु को भाजपा के शीर्ष नेताओं द्वारा की गई राजनैतिक हत्‍या कहा जाये तो अतिशयोक्ति नही होगा। सत्‍ता सिर्फ नेताओं और उनके चाटुकारों की होती है कार्यकार्ताओं की नही यह शिद्ध हो गया है। उत्तर प्रदेश के सरकार बने लगभग 14 माह होने को रहे थे। आश्‍वासनों के दौर मे श्‍ार्मा जी की सरकारी वकील आस जब टूट गई जब उत्‍तर प्रदेश के सरकारी वकीलों की अन्तिम सूची मे भी उनका नाम नही आया। स्‍व. शर्मा जी उस शीशे की भातिं टूट गई जिसका जीवन भर खूब उपयोग किया और जब नया दौर आया तो उस शीशे को अपनों द्वारा ही पत्‍थर मार कर तोड़ दिया जाता है।

मै स्‍व. शर्मा जी का हंसता हुआ चेहरा भुला नही पा रहा हूं। संगठन से जुडाव और अधिवक्‍ता होने के नाते स्‍व. शर्मा जी से घर पर, हाईकोर्ट परिसर और कार्यक्रमों मे अक्‍सर बात होती थी और संगठन की ओर से हाईकोर्ट मे सरकारी वकील न बनाये जाने की उपेक्षा की चर्चा करते थे कि आखिर अपना संगठन हम जैसे पुराने लोगों को इग्‍नोर कर के कैसे ऐसे लोगो को मौज करने दे रहा है जिनका न कभी संघ से तालुकात रहा है और न ही भाजपा संगठन से, कौन सी योग्‍यता लेकर वो पैदा हुये जो हम लोगों के पास नही है। शर्मा जी की यह बातें झकझोर कर रख देती है उनका इशारा कही न कही सरकारी वकीलों की नियुक्तियों मे धन के प्रभाव की ओर रहा था।

कोई भी व्‍यक्ति ऐसा बतायें कि शर्मा जी के अंदर सरकारी वकील बनने की कौन सी योग्‍यता नही थी कि सरकार की 3 लिस्‍ट आई और तीनों लिस्‍ट मे उनका नही नही था। यह तो कार्यकर्ता के मुंह पर तमाचा है कि संगठन मे दर्री और कुर्सी लगाने वालों की औकात नही होती है, सरकारी वकील की।

हाईकोर्ट के अवकाश के बाद मेरा एक चैम्‍बर मे जाना हुआ जो मे विश्‍वविद्यालय के समय के मित्र रहे है और वो और उनका परिवार सपा मे काफी प्रभावी राजनीति करते है। उनका कहना कि इस बार जीए की लिस्‍ट मेरे चैम्‍बर के 4 लोग आपकी सरकार मे पैसे के दम शासकीय अधिवक्ता नियुक्त हुये है और आप अपनी सरकार की छवि और सुसाशन की बात करते हो, फिर बोला कि तुम सबकी छोड़ो सबसे बड़े संघी बनते हो खुद कहा हो आपनी भगवा सरकार मे।

कुछ भी ऐसे तानों से शर्मा जी भी अछूते नही रहे होगे, वों तो बड़े नेता थे और विरोधियों से उनके कई गुना ज्‍यादा अच्‍छे सम्‍बन्‍ध रहे होगें और मुझे तो एक ताने से रूबरू होना पड़ा उन्‍हे तो उनके कद के हिसाब से बहुत कुछ सुनना पड़ा होगा। कही न कही उनका हर ताने का एक जवाब रहा होगा कि अभी जीए ही लिस्‍ट आने दो देखना एजीए-1 से कम नही मिलेगा किन्‍तु जी की लिस्‍ट पर‍िस्थितियां हृदयाघाती थी ही और वह इस सदमे से निराशा थे ही और अंतोगत्‍वा अपनी पार्टी को सैंकडों लाईयां जितवाने वाले शर्माजी अपनी पार्टी से अपनी ही लड़ाई हार बर्दास्‍त न कर सकें और अचानक हृदयाघात के कारण प्राण त्‍याग दिये।

समाचार पत्रो मे पढ़ने को मिला कि क्‍या राज्‍यपाल तो क्‍या मंत्री-उपमुख्‍यमंत्री सभी ने शर्मा को जी मृत्‍योंपरांत श्रद्धांजंली देते हुये क्‍या क्‍या उपधियां नही दी किन्‍तु शर्मा जी के जीवित रहते सरकारी वकील नही बनवा सके। कारण स्‍पष्‍ट है कि अपनी सरकार मे उनसे पैसा मांगने की औकात किसी मे थी नही और जैसा सुनने मे आ रहा है और हकीकत भी प्रतीत हो रही है कि अपनी सरकार मे बिना पैसा सरकारी वकील बनना सम्‍भव था भी नही।
स्‍व. शर्मा जी आज अपने मध्‍य नही है किन्‍तु हम सब के समक्ष बहुत से अनुत्‍तरित प्रश्‍न छोड गये है !


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विलोम या विपरीतार्थक Antonyms in Hindi



किसी शब्द का विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्द को 'विलोम शब्द' कहते हैं। दूसरे शब्दो में कहा जाए तो एक - दूसरे के विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्द विलोम कहलाते हैं। अत: विलोम का अर्थ है - उल्टा या विरोधी अर्थ देने वाला। 

क्र.सं. शब्द विलोम
1. अमृत विष
2. अथ इति
3. अन्धकार प्रकाश
4. अल्पायु दीर्घायु
5. अनुराग विराग
6. अनुज अग्रज
7. अधिक न्यून
8. अर्थ अनर्थ
9. अतिवृष्टि अनावृष्टि
10. अनुपस्थिति उपस्थिति
11. अज्ञान ज्ञान
12. अनुकूल प्रतिकूल
13. अभिज्ञ अनभिज्ञ
14. अल्प अधिक
15. अनिवार्य वैकल्पिक
16. अगम सुगम
17. अभिमान नम्रता
18. अनुग्रह विग्रह
19. अपमान सम्मान
20. अरुचि रुचि
21. अर्वाचीन प्राचीन
22. अवनति उन्नति
23. अवनी अंबर
24. अच्छा बुरा
25. अच्छाई बुराई
26. अमीर ग़रीब
27. अंधेरा उजाला
28. अर्जित अनर्जित
29. अंत प्रारंभ
30. अंतिम प्रारंभिक
31. अनजान जाना-पहचाना
 
क्र.सं. शब्द विलोम
1. आदि अंत
2. आगामी गत
3. आग्रह दुराग्रह
4. आकर्षण विकर्षण
5. आदान प्रदान
6. आलस्य स्फूर्ति
7. आदर्श यथार्थ
8. आय व्यय
9. आहार निराहार
10. आविर्भाव तिरोभाव
11. आमिष निरामिष
12. आर्द्र शुष्क
13. आज़ादी ग़ुलामी
14. आकाश पाताल
15. आशा निराशा
16. आश्रित निराश्रित
17. आरंभ अंत
18. आदर अनादर
19. आयात निर्यात
20. आर्य अनार्य
21. आदि अनादि
22. आस्तिक नास्तिक
23. आवश्यक अनावश्यक
24. आनंद शोक
25. आधुनिक प्राचीन
26. आना जाना
27. आलस्य फुर्ती
28. आध्यात्मिक भौतिक
 
क्र.सं. शब्द विलोम
1. इच्छा अनिच्छा
2. इष्ट अनिष्ट
3. इच्छित अनिच्छित
4. इहलोक परलोक
 
क्र.सं. शब्द विलोम
1. ईमान बेईमानी
2. ईमानदार बेईमान
3. ईर्ष्या प्रेम
4. ईश्वर अनीश्वर
5. ईश्वरवाद अनीश्वरवाद
 
क्र.सं. शब्द विलोम
1. उत्कर्ष अपकर्ष
2. उत्थान पतन
3. उद्यमी आलसी
4. उर्वर ऊसर
5. उधार नक़द
6. उपस्थित अनुपस्थित
7. उत्कृष्ट निकृष्ट
8. उपजाऊ बंजर
9. उदय अस्त
10. उपकार अपकार
11. उदार अनुदार
12. उत्तीर्ण अनुत्तीर्ण
13. उत्तर दक्षिण
14. ऊँचा नीचा
15. उन्नति अवनति
16. उचित अनुचित
17. उत्तरार्ध पूर्वार्द्ध
 
क्र.सं. शब्द विलोम
1. एकता अनेकता
2. एक अनेक
 
क्र.सं. शब्द विलोम
1. ऐसा वैसा

क्र.सं. शब्द विलोम
1. ओजस्वी निस्तेज


क्र.सं. शब्द विलोम
1. औपचारिक अनौपचारिक

क्र.सं. शब्द विलोम
1. ऋणात्मक धनात्मक
2. ऋजु कुटिल
3. ऋषि संसारी
4. ऋत अनृत
5. ऋण उऋण
क्र.सं. शब्द विलोम
1. कृतज्ञ कृतघ्न
2. क्रय विक्रय
3. कमाना खर्च करना
4. क्रूर दयालु
5. कच्चा पक्का
6. कटु मधुर
7. क्रिया प्रतिक्रिया
8. कड़वा मीठा
9. क्रुद्ध शान्त
10. कर्म निष्कर्म
11. कठिनाई सरलता
12. कभी-कभी अक्सर
13. कठिन सरल
14. केंद्रित विकेंद्रित
15. क़रीबी दूर के
16. कम अधिक
क्र.सं. शब्द विलोम
1. खेद प्रसन्नता
2. खिलना मुरझाना
3. खुशी दु:ख
4. ख़रीददार विक्रेता
5. ख़रीद बिक्री
6. ख़रीदना बेचना
क्र.सं. शब्द विलोम
1. गर्म ठंडा
2. गन्दा साफ़
3. गहरा उथल
4. ग़रीब अमीर
5. गुण दोष, अवगुण
6. ग़लत सही
क्र.सं. शब्द विलोम
1. घृणा प्रेम
2. घात प्रतिघात
3. घर बाहर
4. घाटा फ़ायदा
क्र.सं. शब्द विलोम
1. चर अचर
2. चौड़ी संकरी, तंग
क्र.सं. शब्द विलोम
1. छोटा बड़ा
2. छूत अछूत
क्र.सं. शब्द विलोम
1. जन्म मृत्यु
2. जल्दी देरी
3. जीवन मरण
4. जल थल
5. जड़ चेतन
6. जटिल सरस
क्र.सं. शब्द विलोम
1. झूठ सच
क्र.सं. शब्द विलोम
1. ठोस तरल
क्र.सं. शब्द विलोम
1. डरपोक निडर
क्र.सं. शब्द विलोम
1. तुच्छ महान
2. तकलीफ़ आराम
3. तपन ठंडक
क्र.सं. शब्द विलोम
1. थलचर जलचर
2. थोड़ा बहुत
3. थोक फुटकर
क्र.सं. शब्द विलोम
1. दुर्लभ सुलभ
2. दाता याचक
3. दिन रात
4. देव दानव
5. दुराचारी सदाचारी
6. दयालु निर्दयी
7. देशी परदेशी
क्र.सं. शब्द विलोम
1. धीरे तेज़
2. धनी ग़रीब, निर्धन
3. धर्म अधर्म
4. धूप छाँव
5. धीर अधीर
क्र.सं. शब्द विलोम
1. न्याय अन्याय
2. निजी सार्वजनिक
3. नक़द उधार
4. नियमित अनियमित
5. निश्चित अनिश्चित
6. निरक्षर साक्षर
7. नूतन पुरातन
8. निंदा स्तुति
9. निर्दोष र्दोष
10. नीचा ऊंचा
11. नकली असली
12. निर्माण विनाश
13. निकट दूर
क्र.सं. शब्द विलोम
1. प्यार घृणा
2. प्रत्यक्ष परोक्ष
3. पतला मोटा
4. पाप पुण्य
5. पतिव्रता कुलटा
6. प्रलय सृष्टि
7. पवित्र अपवित्र
8. प्रश्न उत्तर
9. पूर्ण अपूर्ण
10. प्रेम घृणा
11. परतंत्र स्वतंत्र
12. प्राचीन नवीन / नया
13. पक्ष निष्पक्ष
14. प्राकृतिक अप्राकृतिक
15. प्रसन्न अप्रसन्न
16. प्रभावित अप्रभावित
17. पोषण कुपोषण
18. परिचित अपरिचित
19. प्रवेश निकास
20. पदोन्नति पदावनति
21 प्रतिकूल अनुकूल
22. प्रारंभ अंत
23. पसंद नापसंद
क्र.सं. शब्द विलोम
1. फायदा नुकसान
क्र.सं. शब्द विलोम
1. बंधन मुक्ति
2. बुद्धिमता मूर्खता
3. बासी ताजा
4. बाढ़ सूखा
5. बुराई भलाई
क्र.सं. शब्द विलोम
1. भूलना याद करना
2. भाव अभाव
क्र.सं. शब्द विलोम
1. मूक वाचाल
2. मितव्यय अपव्यय
3. मोक्ष बंधन
4. मौखिक लिखित
5. मानवता दानवता
6. महात्मा दुरात्मा
7. मान अपमान
8. मधुर कटु
9. मित्र शत्रु
10. मिथ्या सत्य
11. मंगल अमंगल
12. महंगा सस्ता
13. मेहनती आलसी / कामचोर
14. मृत्यु जन्म
15. मंजूर नामंजूर
16. मुमकिन नामुमकिन
क्र.सं. शब्द विलोम
1. यश अपयश
2. युद्ध शांति
3. योग्य अयोग्य
क्र.सं. शब्द विलोम
1. रात दिन
2. रुग्ण स्वस्थ
3. रक्षक भक्षक
4. राग द्वेष
5. रात्रि दिवस
6. राजा रंक
7. रुचि अरुचि
8. रोज़गार बेरोज़गार
क्र.सं. शब्द विलोम
1. लाभ हानि
क्र.सं. शब्द विलोम
1. व्यवस्था अव्यवस्था
2. व्यावहारिक अव्यावहारिक
3. विधि निषेध
4. विधवा सधवा
5. वरदान अभिशाप
6. विनम्रता घमंड
7. विजय पराजय
8. वसंत पतझड़
9. विरोध समर्थन
10. विशुद्ध दूषित
11. विषम सम
12. विद्वान मूर्ख
13. विश्वास अविश्वास
14. विकसित अविकसित
15. विशिष्ट सामान्य / साधारण
16. विश्वनीय अविश्वनीय
17. विस्तृत संक्षिप्त
18. विकास ह्रास
शु
क्र.सं. शब्द विलोम
1. श्वेत श्याम
2. शयन जागरण
3. शीत उष्ण
4. शुभ अशुभ
5. शुष्क आर्द्र
6. शोर शांन्ति
7. शान्त अशान्त
8. शत्रु मित्र
9. शूर कायर
10. शुक्ल कृष्ण
11. शोक हर्ष
12. शाश्वत क्षणिक
13. शुभ अशुभ
श्र
क्र.सं. शब्द विलोम
1. श्रम विश्राम
2. श्रोता वक्ता
क्र.सं. शब्द विलोम
1. षंड मर्द
2. षंडत्व पुंसत्व
क्र.सं. शब्द विलोम
1. स्वतंत्र परतंत्र
2. स्वस्थ अस्वस्थ
3. स्वीकृत अस्वीकृत
4. स्वदेश विदेश
5. स्वर्ग नरक
6. स्तुति निंदा
7. स्वाधीन पराधीन
8. स्वतंत्रता दासता
9. स्वीकार अस्वीकार
10. स्थाई अस्थायी
11. सजीव निर्जीव
12. सुगंध दुर्गन्ध
13. संक्षेप विस्तार
14. सरस नीरस
15. सौभाग्य दुर्भाग्य
16. सगुण निर्गुण
17. सक्रिय निष्क्रय
18. सफल असफल
19. सज्जन दुर्जन
20. संतोष असंतोष
21. सुखान्त दुखांत
22. सच झूठ
23. सुन्दर बदसूरत, कुरूप
24. साक्षर निरक्षर
25. साधु असाधु
26. सुपुत्र कुपुत्र
27. सुर असुर
28. सुमति कुमति
29. साकार निराकार
30. सुजन दुर्जन
31. सम्मान अपमान, अनादर
32. सुबह शाम
33. सूर्योदय सूर्यास्त
34. सरकारी ग़ैरसरकारी
35. सुविधा असुविधा
36. सस्ता महंगा
37. सक्षम अक्षम
38. सुरक्षित असुरक्षित
39. संभव असंभव
40. संतुलित असंतुलित
41. संतुलन असंतुलन
42. सावधानी असावधानी
43. सघन विरल
44. सहायक बाधक
45. सहमत असहमत
46. सुख दुख
47. सहयोग असहयोग
48. सहमति असहमति
49. समापन उद्घाटन
50. सर्दी गर्मी
क्र.सं. शब्द विलोम
1. हर्ष शोक
2. हित अहित
3. हिंसा अहिंसा
4. हार जीत
5. हानि लाभ
क्ष
क्र.सं. शब्द विलोम
1. क्षणिक शाश्वत
ज्ञ
क्र.सं. शब्द विलोम
1. ज्ञान अज्ञान


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भारतीय दंड संहिता की (IPC) धारा-509



 
भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 509 उन लोगों पर लगाई जाती है जो किसी औरत के शील या सम्मान को चोट पहुंचाने वाली बात कहते हैं या हरकत करते हैं। अगर कोई किसी औरत को सुना कर ऐसी बात कहता है या आवाज निकालता है,जिससे औरत के शील या सम्मान को चोट पहुंचे या जिससे उसकी प्राइवेसी में दखल पड़े तो उसके खिलाफ धारा 509 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। इस धारा के तहत एक साल तक की सजा जो तीन साल तक बढ़ाई जा सकती है या जुर्माना या दोनों हो सकता है।

ठाणे की एक अदालत ने छम्मकछल्लो शब्द को धारा 509 के तहत अपराध घोषित कर दिया है। कोर्ट ने इस शब्द को महिलाओं के प्रति अपमानजनक माना है जो आईपीसी की धारा 509 के तहत अपराध है। कोर्ट ने पड़ौसी महिला को छम्मकछल्लो पुकाने वाले व्यक्ति पर कोर्ट उठने तक साधारण कैद की सजा सुनाई एवं 1 रुपए जुर्माना भी लगाया। फैसला केस फाइल करने के 8 साल बाद आया है।

एक मजिस्ट्रेट ने पिछले सप्ताह शहर के एक निवासी को 'अदालत के उठने तक' साधारण कैद की सजा सुनाई थी और उस पर एक रुपए का जुर्माना लगाया। आरोपी के एक पड़ोसी ने उसे अदालत में घसीटा था। पड़ोसी महिला की शिकायत के अनुसार, 9 जनवरी 2009 को जब वह अपने पति के साथ सैर से लौट रही थी, तब उसे एक कूड़ेदान से ठोकर लग गई। महिला ने कहा कि यह कूड़ेदान आरोपी ने सीढ़ियों पर रखा था। आरोपी इस दंपति पर चिल्लाने लगा और उन्हें कई चीजें कहने के बीच उसने महिला को ''छम्मकछल्लो'' कहकर पुकारा।

इस शब्द से गुस्साकर महिला ने पुलिस से संपर्क किया लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इंकार कर दिया। तब महिला ने अदालत का रुख किया। आठ साल बाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट आर टी लंगाले ने उनके मामले को उचित ठहराते हुए कि आरोपी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 509 (शब्द, इशारे या किसी गतिविधि से महिला का अपमान) के तहत अपराध किया है। मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा, 'यह एक हिंदी शब्द है। जिसकी अंग्रेजी नहीं है। भारतीय समाज में इस शब्द का अर्थ इसके इस्तेमाल से समझा जाता है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल किसी महिला का अपमान करने के लिए किया जाता है। यह किसी की तारीफ करने का शब्द नहीं है, इससे महिला को चिढ़ होती है और उसे गुस्सा आता है।'


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