IPC में हैं ऐसी कुछ धाराएं, जिनका नहीं होता इस्तेमाल



Indian Penal Code
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) काफी समय से भारतीय दंड व्यवस्था में चली आ रही है। हालांकि इसमें समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं। लेकिन अभी भी इसमें कई ऐसी धाराएं हैं जिनका इस्तेमाल न के बराबर होता है। ऐसी 6 धाराएँ निम्न है-
  •  धारा 124-ए- होता रहता है विरोध
    इस धारा को 1860 में लॉर्ड मैकाले ने फ्रेम किया था, लेकिन इन्फोर्समेंट में यह धारा अस्तित्व में नहीं आई।
    जब देश में क्रांतिकारी एक्टिविटीज शुरू हुईं तो ब्रिटिश शासन ने 1871 में इसे लागू कर क्रांतिकारियों की आवाज दबाने का काम शुरू कर दिया। महात्मा गांधी ने भी इस धारा को जनता की आवाज दबाने के लिए राजकुमारों का कानून बताया। इसके तहत उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।
  • धारा 182- इस्तेमाल ही होना बंद है
    धारा 182 के तहत झूठी एफआईआर दर्ज कराने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। बावजूद इसके इस धारा का इस्तेमाल नहीं होता। जबकि प्रायः झूठी एफआईआर खूब दर्ज की जाती है। जिन लोगों ने झूठी शिकायत देकर केस दर्ज कराते है, उनके खिलाफ आइपीसी की धारा 182 के तहत कार्रवाई हो सकती है। बावजूद इसके इन दो सालों में गुड़गांव पुलिस ने इस धारा के तहत कोई केस नहीं चलाया। इसका कारण यह है कि इस धारा में पुलिस को खुद शिकायतकर्ता बनकर कोर्ट में केस की पैरवी करनी पड़ती है और  कोर्ट के चक्कर काटने से बचने के लिए पुलिस इस धारा में कोई केस नहीं चलाना चाहती है। जबकि ऐसे मामलों पर अधिकतम 7 साल तक की कैद का प्रावधान है। 
  • आईपीसी 263 ए- क्राइम बड़ा, जुर्माना कम इस धारा में फर्जी तरीके से पोस्टल स्टांप बनाने पर सजा का प्रावधान है। इसमें केवल दो सौ रूपए का जुर्माना है। यानी की जो भी फर्जी पोस्टल स्टांप बनाएगा उस पर मजिस्ट्रेट अधिकतम दो सौ रुपए का जुर्माना लगा सकता है।
  • धारा 309- अपराध साबित करना मुश्किल
    अगर कोई व्यक्ति सुसाइड की कोशिश करे और वह किसी कारणवश बच जाए तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 309 के तहत कार्रवाई होती है। आईपीसी की धारा 309 दर्ज होने के बाद अदालत में कभी प्रूव नहीं हो पाती। इसका कारण यह है कि 309 में अपराधी भी वो ही होता है, जो खुदकुशी की कोशिश करता है। वह कभी कोर्ट में यह बात मानता ही नहीं कि वह आत्महत्या का प्रयास कर रहा था।
  • धारा 371-373- दूसरे नए कानून के सामने पुरानी हो गई है यह धारा
    देवदासी प्रथा के खिलाफ बनाई गई इस धारा की अब कोई जरूरत नहीं रह गई है। दरअसल मानव तस्करी रोधी एक्ट लागू होने के बाद धारा-371 से 373 की अब कोई जरूरत नहीं रह गई है। देवदासी प्रथा के खिलाफ धारा- 371 के तहत उम्रकैद की सजा का प्रावधान था। वहीं 372 व 373 में दस साल की सजा होती थी।
  • धारा 467- आरोपी नहीं चाहता जमानत
    कीमती सिक्युरिटीज के फर्जी दस्तावेज तैयार करने के केस में यह धारा लगाई जाती है। इसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। इस धारा में सामान्य रूप से गिरफ्तार आरोपी की जमानत एडीजे से नीचे नहीं ली जाती है। मगर एडीजे इस मामले में सुनवाई तब ही कर सकता है जब मजिस्ट्रेट के यहां पर जमानत अर्जी खारिज हो चुकी हो। मजेदार बात तो यह है कि मजिस्ट्रेट इस तरह के मामलों में जमानत नहीं लेते हैं मगर जमानत अर्जी खारिज होगी तभी एडीजे के यहां सुनवाई होगी।
भारतीय विधि से संबधित महत्वपूर्ण लेख



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Bharat Mein Pratham Mahat‍vapoorn Vyakti



  1. प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल (or अंतिम भी ) - डॉ0 सी राजगोपालाचारी
  2. प्रथम वायसराय (or अंतिम गवर्नर ) - लार्ड कैनिंग
  3. भारत आने वाला प्रथम अंग्रेज - कैप्‍टन हॉकिन्‍स
  4. भारत का प्रथम गवर्नर जनरल ( स्‍वतन्‍त्रता पश्‍चात ) - लार्ड माउंटबेटन
  5. भारत की प्रथम महिला मुख्‍यमंत्री - सुचेता कृपलानी (उत्‍तर प्रदेश)
  6. भारत की प्रथम महिला एडवोकेट - केमिला सोराबजी
  7. भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री - इंदिरा गांधी
  8. भारत की प्रथम महिला मंत्री - राजकुमारी अमृत कौर (स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री)
  9. भारत की प्रथम महिला मुख्‍य न्‍यायाधीश (उच्‍च न्‍यायालय) - लीला सेठ (हिमांचल प्रदेश)
  10. भारत की प्रथम महिला मुख्‍य न्‍यायाधीश (सर्वोच्‍च न्‍यायालय) - फातिमा बीबी
  11. भारत की प्रथम महिला राजदूत - विजयलक्ष्‍मी पंडित
  12. भारत की प्रथम महिला राज्‍यपाल - सरोजनी नायडू (उत्‍तर प्रदेश)
  13. भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री,गृहमंत्री - बल्‍लभ भाई पटेल
  14. भारत के प्रथम उपराष्‍ट्रपति - एस0 राधाकृष्‍णन
  15. भारत के प्रथम कमांडर-इन-चीफ - जनरल करिअप्‍पा
  16. भारत के प्रथम थल सेना अध्‍यक्ष - महाराजा राजेन्‍द्र जी
  17. भारत के प्रथम नौसेनाध्‍यक्ष - रामदास कटारी
  18. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री - जवाहर लाल नेहरू
  19. भारत के प्रथम फील्‍ड मार्शल - जनरल मानिक शॉ
  20. भारत के प्रथम मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त - सुकुमार सेन
  21. भारत के प्रथम मुख्‍य न्‍यायाधीश - हीरालाल जे0 कानिया
  22. भारत के प्रथम मुस्लिम राष्‍ट्रपति - डॉ0 जाकिर हुसैन
  23. भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति - डॉ0 राजेन्‍द्र प्रसाद
  24. भारत के प्रथम लोकसभा अध्‍यक्ष - जी0वी0 मावलंकर
  25. भारत के प्रथम वायु सेनाध्‍यक्ष - एस0 मुखर्जी
  26. भारत में प्रथम महिला आई0ए0एस0 (IAS) - अन्‍ना जार्ज
  27. भारत में प्रथम महिला आई0पी0एस0 (IPS) - किरण वेदी
  28. भारत में प्रथम महिला राष्‍ट्रपति - प्रतिभा देवी पाटिल
  29. भारत में प्रथम वित्‍त आयोग के अध्‍यक्ष - के0सी0 नियोगी


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भारतीय दंड संहिता (I.P.C.) की महत्वपूर्ण धाराएं



सामान्य व्यवहारिक समझ के लिए भारतीय दंड संहिता का व्यावहारिक समझ आवश्यक है, हर भारतीय का जिम्मेदारी है कि उसे भारतीय संविधान और दंड कानूनों की सामान्य जानकारी हो। कोई भी व्‍यक्ति इस बात की छूट अपराध के बचाव मे नही ले सकता कि उसे विधि (कानून) की जानकारी नही थी। इस लिये आईपीसी की कुछ महत्‍वपूर्ण धाराओं के सम्‍बन्‍ध मे जानकारी दी जा रही है। अगर आपको किसी अन्‍य धाराओं के बारे मे जानकारी चाहिये तो कमेन्‍ट करे शीघ्र की आपकी वांछित धाराओं की जानकारी अपडेट की जायेगी। 


  • भारतीय दंड संहिता धारा -3
    भारतीय दण्ड संहिता की धारा 3 ऐसे अपराधों की सजा के बारे में है जो कि भारत से बाहर किये गए हैपर कानून के अनुसार उन्हें भारत में ही पेश किया जायेगा व यही उनकी सुनवाई होगी। इसके तहत कोई भी व्यक्ति जिस पर यह दंड संहिता लागू होती है के द्वारा किये गए किसी भी अपराध के बारे में, भले ही वह भारत से बाहर किये गए हो की सुनवाई व सजा भारत में होगी।
  • भारतीय दंड संहिता, 1860 में धारा 34
    आम इरादे को आगे बढ़ाने में कई व्यक्तियों द्वारा किया कृत्यों [अधिनियम - एक आपराधिक कृत्य सभी की आम इरादे को आगे बढ़ाने में कई व्यक्तियों द्वारा किया जाता है जब यह लडक़ा उसके द्वारा किया गया है, जैसे कि ऐसे व्यक्तियों में से प्रत्येक में एक ही तरीके है की अधिनियम के लिए उत्तरदायी है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-120 ए और 120 बी
    किसी भी अपराध को अंजाम देने के लिए साझा साजिश यानी कॉमन कॉन्सपिरेसी का मामला गुनाह की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 120ए और 120बी का प्रावधान है। जिस भी मामले में आरोपियों की संख्या एक से ज्यादा होती है, तो पुलिस की एफआईआर में आमतौर पर धारा 120ए का जिक्र जरूर होता है। यह जरूरी नहीं है कि आरोपी खुद अपराध को अंजाम दे। किसी साजिश में शामिल होना भी कानून की निगाह में गुनाह है। ऐसे में साजिश में शामिल शख्स यदि फांसी, उम्रकैद या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय अपराध करने की आपराधिक साजिश में शामिल होगा तो धारा 120 बी के तहत उसको भी अपराध करने वाले के बराबर सजा मिलेगी। अन्य मामलों में यह सजा छह महीने की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 141, विधि विरुद्ध जमाव
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-153 ए
    आईपीसी की धारा 153 (ए) उन लोगों पर लगाई जाती है, जो धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। धारा 153 (ए) के तहत 3 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अगर ये अपराध किसी धार्मिक स्थल पर किया जाए तो 5 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-186
    अगर कोई शख्स सरकारी काम में बाधा पहुंचाता है तो उस पर आईपीसी की धारा 186 के तहत मुकदमा चलाया जाता है। उसे तीन महीने तक की कैद और 500 रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 191, मिथ्यासाक्ष्य देना
    जो कोई शपथ द्वारा या विधि के किसी अभिव्यक्त उपबंध द्वारा सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, या किसी विषय पर घोषणा करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध होते हुए, ऐसा कोई कथन करेगा, जो मिथ्या है, और या तो जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, वह मिथ्या साक्ष्य देता है, यह कहा जाता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा - 201
    भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के अन्‍तर्गत साक्ष्‍य या सूबूत मिटाने चाहे वह साक्ष्‍य मिटाना मृत्यु से दंडनीय के लिये हो अथवा किसी भी प्रकार के साक्ष्‍य को मिटाने के सम्‍बन्‍ध में हो।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-292
    समाज में अश्लीलता फैलाना भी संगीन गुनाह की श्रेणी में आता है। अश्लील साहित्य, अश्लील चित्र या फिल्मों को दिखाना,वितरित करना और इससे किसी प्रकार का लाभ कमाना या लाभ में किसी प्रकार की कोई भागीदारी कानून की नजर में अपराध है और ऐसे अपराध पर आईपीसी की धारा 292 लगाई जाती है। इसके दायरे में वो लोग भी आते हैं जो अश्लील सामग्री को बेचते हैं या जिन लोगों के पास से अश्लील सामग्री बरामद होती है। अगर कोई पहली बार आईपीसी की धारा 292 के तहत दोषी पाया जाता है तो उसे 2 साल की कैद और 2 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार या फिर बार-बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की कैद और 5 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-294
    सार्वजनिक जगहों पर अश्लील हरकतें करने या अश्लील गाना गाने पर आईपीसी की धारा 294 लगाई जाती है। इस मामले में गुनाह अगर साबित हो जाए तो तीन महीने तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 300, हत्या करना
    भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के अन्‍तर्गत हत्‍या को परिभाषित किया गया है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-302
    आईपीसी की धारा 302 कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण है। कत्ल के आरोपियों पर धारा 302 लगाई जाती है। अगर किसी पर कत्ल का दोष साबित हो जाता है, तो उसे उम्रकैद या फांसी की सजा और जुर्माना हो सकता है। कत्ल के मामलों में खासतौर पर कत्ल के इरादे और उसके मकसद पर ध्यान दिया जाता है। इसमें, पुलिस को सबूतों के साथ ये साबित करना होता है कि कत्ल आरोपी ने किया है, उसके पास कत्ल का मकसद भी था और वो कत्ल करने का इरादा रखता था।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-304ए
    आईपीसी की धारा 304 (ए) उन लोगों पर लगाई जाती है,जिनकी लापरवाही की वजह से किसी की जान जाती है। इसके तहत दो साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों होते हैं। सडक़ दुर्घटना के मामलों में किसी की मौत हो जाने पर अक्सर इस धारा का इस्तेमाल होता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 306 और 305
    आईपीसी की धारा 306 और 305 खुदकुशी या आत्महत्या के मामले से जुड़ी है। अगर कोई शख्स खुदकुशी कर लेता है और ये साबित होता है कि उसे ऐसा करने के लिए किसी ने उकसाया था या फिर किसी ने उसे इतना परेशान किया था कि उसने अपनी जान दे दी तो उकसाने या परेशान करने वाले शख्स पर आईपीसी की धारा 306 लगाई जाती है। इसके तहत 10 साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। अगर आत्महत्या के लिए किसी नाबालिग, मानसिक तौर पर कमजोर या फिर किसी भी ऐसे शख्स को उकसाया जाता है जो अपने आप सही और गलत का फैसला करने की स्थिति में न हो तो उकसाने वाले शख्स पर धारा 305 लगाई जाती है। इसके तहत दस साल की कैद और जुर्माना या उम्रकैद या फिर फांसी की भी सजा हो सकती है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-307
    किसी की हत्या की कोशिश का मामला अगर सामने आता है तो हत्या की कोशिश करने वाले पर आईपीसी की धारा 307 लगाई जाती है। यानि अगर कोई किसी की हत्या की कोशिश करता है,लेकिन जिस शख्स पर हमला हुआ, उसकी जान नहीं जाती तो धारा 307 के तहत हमला करने वाले शख्स पर मुकदमा चलता है। आम तौर पर ऐसे मामलों में दोषी को 10 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकते हैं। अगर जिसकी हत्या की कोशिश की गई है उसे गंभीर चोट लगती है तो दोषी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 309, आत्महत्या की कोशिश
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 310, ठगी करना
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 312, गर्भपात करना
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 323 भारतीय दंड संहिता
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 334, स्वेच्छा उपहति कारित करने के लिए दंड
    उस दशा के सिवाय जिस के लिए धारा 334 में उपबंध है, जो कोई स्वेच्छया उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिस की अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 351, हमला करना
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 354, स्त्री लज्जाभंग
  • भारतीय दंड संहिता की धारा-353
    भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 353 उन लोगों पर लगाई जाती है जो सरकारी कर्मचारी पर हमला कर या उस पर ताकत का इस्तेमाल कर उसे उसकी ड्यूटी निभाने से रोकते हैं। ऐसे मामलों में दोषी को दो साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 362, अपहरण
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 365, किसी व्यक्ति का गुप्त रीति से और सदोष परिरोध करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 377, अप्राकृतिक कृत्यजो कोई किसी पुरुष, स्त्री या जीवजन्तु के साथ प्रकॄति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेच्छया इन्द्रिय भोग करेगा वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
  •  भारतीय दंड संहिता की धारा- 378, चोरी
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 395, डकैती
  •  भारतीय दंड संहिता की धारा- 396, डकैती के दौरान हत्या
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 412, छीनाझपटी
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 415, छल करना
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 438
    आग या विस्फोटक पदार्थ से प्रतिबद्ध अनुभाग 437 में वर्णित शरारत के लिए सजा -करता है, या आग या किसी विस्फोटक पदार्थ, अंतिम पूर्ववर्ती खंड में वर्णित के रूप में ऐसी शरारत से, करने का प्रयास करता है जो कोई भी [आजीवन कारावास] से दंडित किया जाएगा या दस साल तक का हो सकता है, और भी ठीक करने के लिए उत्तरदायी होगा जो एक अवधि के लिए या तो विवरण के कारावास के साथ।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 445, गृहभेदंन
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 494, पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 499, मानहानि
  • भारतीय दंड संहिता की धारा- 511, आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।

भारतीय विधि से संबधित महत्वपूर्ण लेख


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