भारतीय राज व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न



Important questions related to Indian polity

भारतीय राजव्यवस्था के महत्वपूर्ण प्रश्न (क्रमांक सहित, व्याकरण एवं वर्तनी शुद्ध)

  1. ‘पंथनिरपेक्ष’, ‘समाजवादी’ तथा ‘अखंडता’ शब्द संविधान की उद्देशिका में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए।

  2. ‘वन्दे मातरम्’ के रचयिता बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय हैं। यह गीत सर्वप्रथम 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया था।

  3. 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक भारत ब्रिटिश राष्ट्रमंडल का एक अधिराज्य (Dominion) था।

  4. 26 जनवरी 2002 से भारतीय ध्वज संहिता, 2002 लागू हुई, जिसके अनुसार आम नागरिकों, निजी संस्थाओं तथा शैक्षणिक संस्थाओं को राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार प्राप्त है।

  5. 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में प्रारूप समिति का गठन किया।

  6. 15 नवम्बर 1948 को संविधान के प्रारूप पर प्रथम वाचन प्रारम्भ हुआ।

  7. 3 जून 1947 की योजना के बाद संविधान सभा का पुनर्गठन हुआ तथा इसकी सदस्य संख्या 299 रह गई।

  8. 4 अप्रैल 2007 को आंध्र प्रदेश में पुनः विधान परिषद का गठन किया गया।

  9. 42वाँ संविधान संशोधन स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया था।

  10. 42वें संविधान संशोधन को ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) कहा जाता है।

  11. 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में मौलिक कर्तव्य जोड़े गए तथा उन्हें संविधान के भाग-4(क) में स्थान दिया गया।

  12. 52वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 दल-बदल विरोधी कानून से संबंधित है।

  13. 86वें संविधान संशोधन द्वारा एक अतिरिक्त मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया, जिससे उनकी संख्या 11 हो गई।

  14. अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 तथा 30 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं।

  15. आकस्मिक निधि राष्ट्रपति के व्ययाधीन होती है।

  16. आपातकाल में मौलिक अधिकारों के निलंबन की व्यवस्था जर्मनी के संविधान से प्रेरित मानी जाती है।

  17. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में उच्चतम न्यायालय ने उद्देशिका को संविधान का अभिन्न अंग माना।

  18. उपाधियों का अंत अनुच्छेद 18 में वर्णित है।

  19. संवैधानिक उपचारों के अधिकार को संविधान की आत्मा और हृदय कहा गया है।

  20. कार्यपालिका को न्यायपालिका से पृथक करने का निर्देश अनुच्छेद 50 में दिया गया है।

  21. सिखों को कृपाण धारण करने का अधिकार अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्राप्त है।

  22. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(क) में निहित है।

  23. बाल श्रम का निषेध अनुच्छेद 24 में किया गया है।

  24. समान नागरिक संहिता का उल्लेख अनुच्छेद 44 में किया गया है।

  25. संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना की सिफारिशों के आधार पर हुआ था।

  26. केंद्रीय मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।

  27. जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है।

  28. गोवा को वर्ष 1961 में भारतीय संघ में सम्मिलित किया गया।

  29. छुआछूत का उन्मूलन अनुच्छेद 17 में वर्णित है।

  30. स्वतंत्रता प्राप्ति के समय कांग्रेस के अध्यक्ष जे. बी. कृपलानी थे।

  31. स्वतंत्रता प्राप्ति के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली थे।

  32. झंडा समिति के अध्यक्ष जे. बी. कृपलानी थे।

  33. डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने संवैधानिक उपचारों के अधिकार को संविधान का हृदय और आत्मा कहा था।

  34. प्रथम वित्त आयोग का गठन वर्ष 1951 में किया गया था।

  35. प्रथम लोकसभा अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर थे।

  1. जम्मू-कश्मीर राज्य का अपना संविधान था, जिसे एक पृथक संविधान सभा द्वारा निर्मित किया गया था और यह 26 जनवरी 1957 को लागू हुआ था।

  2. वी. वी. गिरि ऐसे कार्यवाहक राष्ट्रपति थे जिन्होंने त्यागपत्र देकर राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा और विजयी हुए।

  3. देश में प्रथम राष्ट्रीय आपातकाल वर्ष 1962 में लगाया गया था।

  4. दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद संभालने वाले व्यक्ति गुलजारीलाल नंदा थे।

  5. धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा को केवल सिफारिश करने का अधिकार प्राप्त है।

  6. धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

  7. धार्मिक व्यय हेतु कर लगाने का निषेध संविधान के अनुच्छेद 27 में वर्णित है।

  8. नए राज्यों के निर्माण का अधिकार संसद को प्राप्त है।

  9. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है।

  10. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं।

  11. नीलम संजीव रेड्डी राष्ट्रपति बनने से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष रह चुके थे।

  12. प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम वर्ष 1951 में पारित किया गया था।

  13. प्रथम लोकसभा की पहली बैठक 13 मई 1952 को हुई थी।

  14. प्रथम लोकसभा को 4 अप्रैल 1957 को भंग किया गया था।

  15. प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन एवं मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को देता रहे।

  16. प्रधानमंत्री पद पर सबसे कम अवधि (13 दिन) तक रहने वाले व्यक्ति अटल बिहारी वाजपेयी थे।

  17. प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने वाले प्रथम प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई थे।

  18. प्रधानमंत्री बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है, जबकि अधिकतम आयु की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।

  19. प्रधानमंत्री सामान्यतः लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन का नेता होता है।

  20. प्रारूप समिति का गठन 29 अगस्त 1947 को किया गया था।

  21. प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे।

  22. स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल थे।

  23. भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।

  24. भारत का राष्ट्रपति राष्ट्र का संवैधानिक प्रमुख होता है।

  25. भारत का राष्ट्रीय पंचांग शक संवत पर आधारित है, जिसे 22 मार्च 1957 से अपनाया गया।

  26. भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल, राष्ट्रीय पशु बाघ, राष्ट्रीय वृक्ष बरगद, राष्ट्रीय फल आम, राष्ट्रीय पक्षी मोर तथा राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन है।

  27. भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ है, जो ‘आनन्दमठ’ उपन्यास से लिया गया है।

  28. भारत की उद्देशिका में प्रयुक्त ‘गणराज्य’ शब्द का तात्पर्य है कि राष्ट्राध्यक्ष वंशानुगत नहीं होगा।

  29. डॉ. जाकिर हुसैन तथा फखरुद्दीन अली अहमद ऐसे राष्ट्रपति थे जिनका निधन कार्यकाल के दौरान हुआ।

  30. भारत के उपराष्ट्रपति की तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति से की जाती है।

  31. मोहम्मद हिदायतुल्ला ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में दायित्व निभाया था।

  32. भारत के राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के रचयिता रवीन्द्रनाथ ठाकुर (टैगोर) हैं।

  33. भारत के राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति ब्रिटेन के सम्राट के समान मानी जाती है।

  34. भारत में गणतांत्रिक शासन व्यवस्था फ्रांस के संविधान से प्रेरित मानी जाती है।

  35. संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से प्रेरित है।

  36. भारतीय संविधान में एकल नागरिकता (Single Citizenship) की व्यवस्था ब्रिटिश संविधान से ग्रहण की गई है।

  37. भारतीय संविधान में नागरिकता संबंधी प्रावधान अनुच्छेद 5 से 11 तक वर्णित हैं।

  38. भारतीय संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर किया गया था।

  39. भारतीय संसद, राष्ट्रपति भवन तथा सर्वोच्च न्यायालय पर वर्ष भर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है।

  40. भाषायी आधार पर गठित होने वाला पहला राज्य आंध्र प्रदेश था।

  41. भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन वर्ष 1956 में किया गया।

  42. मंत्रिपरिषद का कोई सदस्य बिना संसद का सदस्य बने अधिकतम छह माह तक मंत्री पद पर रह सकता है।

  43. मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।

  44. मंत्रिपरिषद के तीन स्तर होते हैं— कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री एवं उपमंत्री।

  45. मौलिक अधिकार तथा राष्ट्रपति पर महाभियोग की व्यवस्था अमेरिका के संविधान से ग्रहण की गई है।

  46. मौलिक अधिकारों की रक्षा उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय करते हैं।

  47. मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा पूर्व सोवियत संघ के संविधान से ली गई है।

  48. मौलिक कर्तव्य 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए थे।

  49. मूल संविधान में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 525 निर्धारित की गई थी।

  50. राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव राज्यसभा के सदस्य करते हैं।

  1. राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसे कभी भंग नहीं किया जाता।

  2. राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त होते हैं।

  3. राज्यसभा का पदेन सभापति भारत का उपराष्ट्रपति होता है।

  4. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व संविधान के भाग-4 में वर्णित हैं।

  5. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।

  6. राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  7. राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है।

  8. राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः पाँच वर्ष का होता है।

  9. राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक कहलाता है।

  10. राष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।

  11. राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति एवं एकल संक्रमणीय मत प्रणाली पर आधारित है।

  12. राष्ट्रपति को पद की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं।

  13. राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संसद द्वारा संचालित की जाती है।

  14. राष्ट्रपति लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के सदस्यों को नामित कर सकता था। (यह प्रावधान 104वें संविधान संशोधन, 2020 द्वारा समाप्त कर दिया गया है।)

  15. राष्ट्रपति राज्यसभा में साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र के 12 सदस्यों को नामित करता है।

  16. राष्ट्रपति शासन संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत लगाया जाता है।

  17. राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राज्य की कार्यपालिका राष्ट्रपति के अधीन कार्य करती है।

  18. लोकसभा का कार्यकाल सामान्यतः पाँच वर्ष का होता है।

  19. लोकसभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा किया जाता है।

  20. लोकसभा का विघटन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।

  21. लोकसभा अध्यक्ष का निर्वाचन लोकसभा के सदस्य करते हैं।

  22. लोकसभा अध्यक्ष अपने पद से त्यागपत्र उपाध्यक्ष को देता है।

  23. लोकसभा में धन विधेयक केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा पर प्रस्तुत किया जा सकता है।

  24. लोकसभा वित्तीय मामलों में राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली है।

  25. सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है।

  26. सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई थी।

  27. सर्वोच्च न्यायालय का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

  28. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  29. सर्वोच्च न्यायालय संविधान का संरक्षक एवं व्याख्याता है।

  30. न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त है।

  31. भारत में एकीकृत न्यायपालिका की व्यवस्था है।

  32. उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायिक निकाय होता है।

  33. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  34. उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।

  35. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय रिट जारी कर सकता है।

  36. भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है।

  37. निर्वाचन आयोग का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 324 में किया गया है।

  38. भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) लोक वित्त का संरक्षक कहलाता है।

  39. वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत किया जाता है।

  40. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 315 में किया गया है।

  41. भारत का महान्यायवादी (Attorney General) देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है।

  42. महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  43. संविधान का अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित है।

  44. संविधान का भाग-3 मौलिक अधिकारों से संबंधित है।

  45. संविधान का भाग-4 राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों से संबंधित है।

  46. संविधान का भाग-4(क) मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है।

  47. संविधान का भाग-5 संघ सरकार से संबंधित है।

  48. संविधान का भाग-6 राज्य सरकारों से संबंधित है।

  49. संविधान का भाग-9 पंचायती राज व्यवस्था से संबंधित है।

  50. 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित है।

  51. 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम नगरपालिकाओं से संबंधित है।

  52. पंचायतों में महिलाओं के लिए कम-से-कम एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

  53. नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा 74वें संविधान संशोधन द्वारा प्रदान किया गया।

  54. भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत लिखित संविधान माना जाता है।

  55. भारतीय संविधान 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत, अधिनियमित एवं आत्मार्पित किया गया था।

  56. भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

  57. संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा थे।

  58. संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे।

  59. संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार बी. एन. राव थे।

  60. संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

  61. उद्देश्य प्रस्ताव 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया था।

  62. भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान की प्रस्तावना से प्रेरित है।

  63. संविधान सभा को संविधान निर्माण में 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन का समय लगा।

  64. संविधान सभा की कुल 11 बैठकें तथा 165 दिनों तक कार्यवाही चली।

  65. संविधान निर्माण पर लगभग 64 लाख रुपये का व्यय हुआ था।

  1. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसम्बर 1946 को आयोजित हुई थी।

  2. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को आयोजित हुई थी।

  3. संविधान सभा के प्रथम अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा थे।

  4. संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद निर्वाचित हुए थे।

  5. भारत का संविधान मूल रूप से 22 भागों, 395 अनुच्छेदों और 8 अनुसूचियों का था।

  6. वर्तमान में भारतीय संविधान विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है।

  7. संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों का उल्लेख किया गया है।

  8. संविधान का भाग-III मौलिक अधिकारों का वर्णन करता है।

  9. संविधान का भाग-IV राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों से संबंधित है।

  10. संविधान का भाग-IV(क) मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है।

  11. संविधान का अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों के अधिकार से संबंधित है।

  12. डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा था।

  13. भारत में एकल नागरिकता की व्यवस्था है।

  14. भारतीय संविधान संसदीय शासन प्रणाली को स्वीकार करता है।

  15. भारतीय शासन प्रणाली ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली से प्रेरित है।

  16. संघीय व्यवस्था के साथ सशक्त केंद्र भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषता है।

  17. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भारत को "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य" कहा गया है।

  18. संविधान द्वारा नागरिकों को छह मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं।

  19. शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21(क) के अंतर्गत मौलिक अधिकार है।

  20. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा शिक्षा का अधिकार जोड़ा गया था।

  21. संविधान के अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के संगठन का प्रावधान किया गया है।

  22. संविधान के अनुच्छेद 51(क) में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है।

  23. राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा अनुच्छेद 352 के अंतर्गत की जाती है।

  24. राज्य आपातकाल (राष्ट्रपति शासन) अनुच्छेद 356 के अंतर्गत लागू किया जाता है।

  25. वित्तीय आपातकाल का प्रावधान अनुच्छेद 360 में किया गया है।

  26. भारत में अब तक वित्तीय आपातकाल कभी लागू नहीं किया गया है।

  27. राष्ट्रीय आपातकाल अब तक 1962, 1971 और 1975 में लगाया गया था।

  28. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 ने आपातकाल संबंधी प्रावधानों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए।

  29. भारत का सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली में स्थित है।

  30. सर्वोच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश हरिलाल जेकिसुंदास कानिया थे।

  31. उच्चतम न्यायालय अभिलेख न्यायालय (Court of Record) है।

  32. संविधान की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त है।

  33. न्यायिक पुनरावलोकन भारतीय न्यायपालिका की एक महत्वपूर्ण शक्ति है।

  34. भारत निर्वाचन आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए उत्तरदायी है।

  35. मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  36. निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है।

  37. भारत में मतदान की आयु 18 वर्ष है।

  38. 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई।

  39. लोकसभा के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है।

  40. राज्यसभा के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित है।

  41. राष्ट्रपति पद हेतु न्यूनतम आयु 35 वर्ष निर्धारित है।

  42. उपराष्ट्रपति पद हेतु न्यूनतम आयु 35 वर्ष निर्धारित है।

  43. राज्यपाल बनने के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।

  44. भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।

  45. उपराष्ट्रपति का कार्यकाल भी पाँच वर्ष का होता है।

  46. राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः पाँच वर्ष का होता है।

  47. लोकसभा का सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।

  48. राज्यसभा एक स्थायी सदन है।

  49. राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है।

  50. प्रत्येक दो वर्ष बाद राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

  1. संविधान का अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समानता तथा विधियों के समान संरक्षण की गारंटी देता है।

  2. अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग अथवा जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध करता है।

  3. अनुच्छेद 16 लोक नियोजन में अवसर की समानता प्रदान करता है।

  4. अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है।

  5. अनुच्छेद 18 उपाधियों के अंत से संबंधित है।

  6. अनुच्छेद 19 नागरिकों को छह प्रकार की स्वतंत्रताएँ प्रदान करता है।

  7. अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण प्रदान करता है।

  8. अनुच्छेद 21 जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण से संबंधित है।

  9. अनुच्छेद 21(क) 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।

  10. अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी एवं निरोध के संबंध में संरक्षण प्रदान करता है।

  11. अनुच्छेद 23 मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी का निषेध करता है।

  12. अनुच्छेद 24 चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों एवं खानों में नियोजित करने का निषेध करता है।

  13. अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है।

  14. अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है।

  15. अनुच्छेद 27 किसी विशेष धर्म के प्रचार हेतु कर लगाने का निषेध करता है।

  16. अनुच्छेद 28 धार्मिक शिक्षा से संबंधित प्रावधानों का वर्णन करता है।

  17. अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण से संबंधित है।

  18. अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थाएँ स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्रदान करता है।

  19. अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों के अधिकार से संबंधित है।

  20. अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का वर्णन किया गया है।

  21. अनुच्छेद 38 सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय पर आधारित व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश देता है।

  22. अनुच्छेद 39 समान वेतन एवं समान अवसर के सिद्धांत को प्रोत्साहित करता है।

  23. अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के संगठन का निर्देश देता है।

  24. अनुच्छेद 41 कार्य, शिक्षा एवं लोक सहायता के अधिकार से संबंधित है।

  25. अनुच्छेद 42 मानवीय कार्य-दशाओं तथा प्रसूति सहायता का प्रावधान करता है।

  26. अनुच्छेद 43 श्रमिकों के लिए निर्वाह योग्य वेतन की व्यवस्था का निर्देश देता है।

  27. अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता से संबंधित है।

  28. अनुच्छेद 45 बालकों की प्रारंभिक शिक्षा एवं देखभाल से संबंधित है।

  29. अनुच्छेद 46 अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य दुर्बल वर्गों के हितों की उन्नति से संबंधित है।

  30. अनुच्छेद 47 पोषण स्तर एवं जनस्वास्थ्य में सुधार का निर्देश देता है।

  31. अनुच्छेद 48 कृषि एवं पशुपालन के संगठन से संबंधित है।

  32. अनुच्छेद 48(क) पर्यावरण एवं वन संरक्षण से संबंधित है।

  33. अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की सुरक्षा का प्रावधान करता है।

  34. अनुच्छेद 50 कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के पृथक्करण से संबंधित है।

  35. अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को प्रोत्साहित करने का निर्देश देता है।

  36. मौलिक कर्तव्यों का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 51(क) में किया गया है।

  37. वर्तमान में भारतीय नागरिकों के 11 मौलिक कर्तव्य हैं।

  38. मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था।

  39. 86वें संविधान संशोधन द्वारा एक अतिरिक्त मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया।

  40. राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान एवं संविधान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।

  41. भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा कहलाता है।

  42. भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया है।

  43. राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे "सत्यमेव जयते" अंकित है।

  44. "सत्यमेव जयते" वाक्य मुण्डक उपनिषद से लिया गया है।

  45. भारत का राष्ट्रगान "जन-गण-मन" है।

  46. राष्ट्रगान के गायन की निर्धारित अवधि लगभग 52 सेकंड है।

  47. भारत का राष्ट्रीय गीत "वन्दे मातरम्" है।

  48. "वन्दे मातरम्" के रचयिता बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय हैं।

  49. भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है।

  50. भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर है।

  51. भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल है।

  52. भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद है।

  53. भारत का राष्ट्रीय फल आम है।

  54. भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन है।

  55. भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर शक संवत् पर आधारित है।

  56. भारत का राष्ट्रीय खेल आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है।

  57. भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न है।

  58. पद्म पुरस्कारों में पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री शामिल हैं।

  59. भारत रत्न की स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी।

  60. पद्म पुरस्कारों की स्थापना भी वर्ष 1954 में की गई थी।

  61. संविधान दिवस प्रतिवर्ष 26 नवम्बर को मनाया जाता है।

  62. राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रतिवर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है।

  63. राष्ट्रीय विधि दिवस 26 नवम्बर को मनाया जाता है।

  64. राष्ट्रीय एकता दिवस 31 अक्टूबर को मनाया जाता है।

  65. राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को मनाया जाता है।

  66. राष्ट्रीय महिला दिवस 13 फरवरी को मनाया जाता है।

  67. राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 24 दिसम्बर को मनाया जाता है।

  68. राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रैल को मनाया जाता है।

  69. संविधान सभा की प्रथम बैठक संविधान हॉल (वर्तमान संसद भवन के केंद्रीय कक्ष) में हुई थी।

  70. संविधान सभा में विभिन्न समितियों का गठन संविधान निर्माण कार्य को सुचारु रूप से संपन्न करने हेतु किया गया था।

  71. प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे।

  72. संघ शक्ति समिति के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे।

  73. संघ संविधान समिति के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे।

  74. प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।

  75. मौलिक अधिकार समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।

  76. अल्पसंख्यक उपसमिति भी सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में कार्यरत थी।

  77. संविधान सभा में महिलाओं की संख्या 15 थी।

  78. संविधान सभा में कुल 11 अधिवेशन आयोजित किए गए।

  79. संविधान की मूल प्रति हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हस्तलिखित है।

  80. संविधान की मूल प्रति पर 24 जनवरी 1950 को हस्ताक्षर किए गए।

  1. भारत का राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति का संवैधानिक प्रमुख होता है।

  2. संविधान का अनुच्छेद 52 राष्ट्रपति के पद का प्रावधान करता है।

  3. संविधान का अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होने का प्रावधान करता है।

  4. राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति द्वारा किया जाता है।

  5. राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।

  6. राष्ट्रपति बनने के लिए लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता आवश्यक है।

  7. राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।

  8. राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को देता है।

  9. राष्ट्रपति को पद की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं।

  10. राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संविधान में निर्धारित है।

  11. भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे।

  12. भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल थीं।

  13. भारत के वर्तमान संवैधानिक ढाँचे में राष्ट्रपति नाममात्र का कार्यपालिका प्रमुख माना जाता है।

  14. वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मंत्रिपरिषद में निहित होती है।

  15. राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है।

  16. प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है।

  17. संविधान का अनुच्छेद 74 मंत्रिपरिषद से संबंधित है।

  18. संविधान का अनुच्छेद 75 मंत्रियों की नियुक्ति एवं कार्यकाल से संबंधित है।

  19. प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  20. लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता सामान्यतः प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है।

  21. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे।

  22. सबसे अधिक समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले व्यक्ति जवाहरलाल नेहरू थे।

  23. प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का गठन करता है।

  24. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।

  25. प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच संपर्क सूत्र का कार्य करता है।

  26. प्रधानमंत्री नीति-निर्धारण में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

  27. उपराष्ट्रपति का पद संविधान के अनुच्छेद 63 में वर्णित है।

  28. भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।

  29. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।

  30. उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।

  31. भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे।

  32. राज्यसभा संसद का उच्च सदन कहलाती है।

  33. लोकसभा संसद का निम्न सदन कहलाती है।

  34. भारतीय संसद राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनती है।

  35. संसद की विधायी शक्ति संघ सूची और समवर्ती सूची के विषयों तक विस्तृत है।

  36. संसद को अवशिष्ट विषयों पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।

  37. लोकसभा के सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने जाते हैं।

  38. राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने जाते हैं।

  39. राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 निर्धारित की गई है।

  40. लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 निर्धारित की गई थी।

  41. धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  42. धन विधेयक पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष का होता है।

  43. राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है।

  44. संसद का संयुक्त अधिवेशन राष्ट्रपति द्वारा बुलाया जाता है।

  45. संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।

  46. संविधान का अनुच्छेद 79 संसद से संबंधित है।

  47. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान अनुच्छेद 108 में है।

  48. भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की व्यवस्था है।

  49. मतदान का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है।

  50. अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा में आरक्षण का प्रावधान है।

  51. संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग से संबंधित है।

  52. मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  53. निर्वाचन आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों का संचालन करता है।

  54. भारत में प्रथम आम चुनाव 1951-52 में संपन्न हुए थे।

  55. निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है।

  56. सर्वोच्च न्यायालय संविधान का अंतिम व्याख्याकार है।

  57. सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई थी।

  58. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

  59. सर्वोच्च न्यायालय को मूल, अपीलीय और परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार प्राप्त है।

  60. संविधान का अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेने की अनुमति देता है।

  61. न्यायिक पुनरावलोकन सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण शक्ति है।

  62. जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा न्यायपालिका द्वारा विकसित की गई है।

  63. उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायिक निकाय होता है।

  64. संविधान का अनुच्छेद 214 प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय के प्रावधान से संबंधित है।

  65. उच्च न्यायालय को अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।

  66. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहते हैं।

  67. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहते हैं।

  68. भारत में न्यायपालिका स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मानी जाती है।

  69. संविधान का संरक्षक एवं रक्षक सर्वोच्च न्यायालय है।

  70. भारतीय लोकतंत्र का आधार संविधान, विधि का शासन तथा स्वतंत्र न्यायपालिका है।

  1. संविधान का अनुच्छेद 1 भारत को "राज्यों का संघ" घोषित करता है।

  2. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को नए राज्यों को संघ में सम्मिलित करने का अधिकार प्राप्त है।

  3. संविधान का अनुच्छेद 3 राज्यों की सीमाओं, क्षेत्रफल एवं नाम में परिवर्तन से संबंधित है।

  4. संसद को राज्यों के पुनर्गठन का अधिकार प्राप्त है।

  5. भारत वर्तमान में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित है।

  6. संघ सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची का उल्लेख संविधान की सातवीं अनुसूची में किया गया है।

  7. संघ सूची के विषयों पर केवल संसद कानून बना सकती है।

  8. राज्य सूची के विषयों पर सामान्यतः राज्य विधानमंडल कानून बनाता है।

  9. समवर्ती सूची के विषयों पर संसद एवं राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।

  10. समवर्ती सूची में संघर्ष की स्थिति में संघ का कानून प्रभावी होता है।

  11. अवशिष्ट शक्तियाँ संसद को प्राप्त हैं।

  12. संविधान की सातवीं अनुसूची भारत की संघीय व्यवस्था का आधार है।

  13. वित्त आयोग का गठन प्रत्येक पाँच वर्ष बाद किया जाता है।

  14. वित्त आयोग राष्ट्रपति को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करता है।

  15. भारत का प्रथम वित्त आयोग वर्ष 1951 में गठित किया गया था।

  16. वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित किया जाता है।

  17. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  18. CAG को भारत की लोक वित्त प्रणाली का संरक्षक कहा जाता है।

  19. CAG की रिपोर्ट राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल को प्रस्तुत की जाती है।

  20. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) एक संवैधानिक निकाय है।

  21. UPSC का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 315 में किया गया है।

  22. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  23. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।

  24. भारत के महान्यायवादी का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 76 में किया गया है।

  25. महान्यायवादी भारत सरकार का सर्वोच्च विधिक सलाहकार होता है।

  26. महान्यायवादी संसद की कार्यवाही में भाग ले सकता है, किंतु मतदान नहीं कर सकता।

  27. राज्य के महाधिवक्ता का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 165 में किया गया है।

  28. राज्य का महाधिवक्ता राज्य सरकार का प्रमुख विधिक सलाहकार होता है।

  29. पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा 73वें संविधान संशोधन द्वारा दिया गया।

  30. 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1992 में पारित किया गया था।

  31. पंचायतों से संबंधित प्रावधान संविधान के भाग-9 में वर्णित हैं।

  32. ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की मूल इकाई है।

  33. त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की संस्तुति बलवंत राय मेहता समिति ने की थी।

  34. भारत में पंचायती राज व्यवस्था का प्रथम शुभारंभ 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान में हुआ था।

  35. नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा 74वें संविधान संशोधन द्वारा दिया गया।

  36. नगरपालिकाओं से संबंधित प्रावधान संविधान के भाग-9(क) में वर्णित हैं।

  37. जिला योजना समिति का प्रावधान संविधान में किया गया है।

  38. महानगर योजना समिति का प्रावधान भी संविधान में निहित है।

  39. संविधान की दसवीं अनुसूची दल-बदल विरोधी कानून से संबंधित है।

  40. दसवीं अनुसूची को 52वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था।

  41. संविधान की नौवीं अनुसूची भूमि सुधार कानूनों के संरक्षण से संबंधित है।

  42. नौवीं अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ी गई थी।

  43. संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची पंचायतों के कार्यों से संबंधित है।

  44. संविधान की बारहवीं अनुसूची नगरपालिकाओं के कार्यों से संबंधित है।

  45. भारतीय संविधान में वर्तमान में 12 अनुसूचियाँ हैं।

  46. संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त भाषाओं का उल्लेख है।

  47. वर्तमान में आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ सम्मिलित हैं।

  48. संविधान की पहली अनुसूची राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों का विवरण देती है।

  49. संविधान की दूसरी अनुसूची राष्ट्रपति, राज्यपाल, न्यायाधीशों आदि के वेतन-भत्तों से संबंधित है।

  50. संविधान की तीसरी अनुसूची विभिन्न पदाधिकारियों की शपथ एवं प्रतिज्ञान से संबंधित है।

  51. संविधान की चौथी अनुसूची राज्यसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व से संबंधित है।

  52. संविधान की पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों एवं अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन से संबंधित है।

  53. संविधान की छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है।

  54. भारत में विधि का शासन (Rule of Law) की अवधारणा ब्रिटेन से ग्रहण की गई है।

  55. संसदीय शासन प्रणाली ब्रिटिश संविधान से प्रेरित है।

  56. मौलिक अधिकारों की अवधारणा अमेरिकी संविधान से प्रेरित है।

  57. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं।

  58. मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा पूर्व सोवियत संघ के संविधान से ली गई है।

  59. न्यायिक पुनरावलोकन की अवधारणा अमेरिका से ग्रहण की गई है।

  60. संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से प्रेरित है।

  61. समवर्ती सूची की अवधारणा ऑस्ट्रेलिया से ग्रहण की गई है।

  62. स्वतंत्र न्यायपालिका का सिद्धांत अमेरिका से प्रेरित है।

  63. राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया अमेरिका से ग्रहण की गई है।

  64. गणराज्य की अवधारणा फ्रांस से प्रेरित मानी जाती है।

  65. स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरित हैं।

  66. भारतीय संविधान विश्व के विभिन्न संविधानों का समन्वित एवं विशिष्ट दस्तावेज है।

  67. संविधान भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है।

  68. संविधान नागरिकों के अधिकारों एवं कर्तव्यों का संरक्षक है।

  69. संविधान शासन की शक्तियों को सीमित एवं नियंत्रित करता है।

  70. भारतीय संविधान का मूल उद्देश्य न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व पर आधारित समाज की स्थापना करना है।

  1. संविधान की प्रस्तावना को संविधान की आत्मा एवं दर्शन का संक्षिप्त सार माना जाता है।

  2. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के आदर्शों का उल्लेख किया गया है।

  3. प्रस्तावना में भारत को संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित किया गया है।

  4. संविधान की प्रस्तावना में "हम भारत के लोग" शब्द जनता की सर्वोच्चता को व्यक्त करते हैं।

  5. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना था।

  6. संविधान की मूल प्रस्तावना में "समाजवादी", "पंथनिरपेक्ष" और "अखंडता" शब्द नहीं थे।

  7. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा इन शब्दों को प्रस्तावना में जोड़ा गया।

  8. भारतीय लोकतंत्र सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित है।

  9. भारत में प्रत्येक नागरिक को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर मतदान का अधिकार प्राप्त है।

  10. निर्वाचन प्रक्रिया लोकतांत्रिक शासन की आधारशिला मानी जाती है।

  11. भारतीय लोकतंत्र में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों का विशेष महत्व है।

  12. संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग की स्थापना का प्रावधान करता है।

  13. भारत निर्वाचन आयोग चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण करता है।

  14. चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है।

  15. संसद भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च विधायिका है।

  16. संसद कानून निर्माण का प्रमुख संस्थान है।

  17. संसद जनता की आकांक्षाओं एवं हितों का प्रतिनिधित्व करती है।

  18. संसद की स्वीकृति के बिना कोई कर नहीं लगाया जा सकता।

  19. संसद संघीय वित्त पर नियंत्रण रखती है।

  20. संसद कार्यपालिका को उत्तरदायी बनाती है।

  21. संसदीय प्रश्नकाल कार्यपालिका पर नियंत्रण का महत्वपूर्ण साधन है।

  22. शून्यकाल भारतीय संसदीय प्रणाली की एक विशिष्ट देन है।

  23. अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  24. मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।

  25. लोकसभा को लोकप्रिय सदन कहा जाता है।

  26. राज्यसभा को स्थायी सदन कहा जाता है।

  27. राज्यसभा संघीय ढाँचे में राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है।

  28. संसद की संप्रभुता संविधान की सीमाओं के अधीन है।

  29. भारत में संविधान सर्वोच्च है, संसद नहीं।

  30. न्यायपालिका संविधान की सर्वोच्चता की रक्षा करती है।

  31. न्यायपालिका नागरिकों के मौलिक अधिकारों की संरक्षक है।

  32. सर्वोच्च न्यायालय संविधान का अंतिम व्याख्याकार है।

  33. सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक कहा जाता है।

  34. उच्च न्यायालय राज्यों की न्यायिक व्यवस्था का सर्वोच्च निकाय है।

  35. न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की मूल विशेषता है।

  36. न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की मूल संरचना का भाग है।

  37. मूल संरचना सिद्धांत का प्रतिपादन केशवानंद भारती वाद में किया गया था।

  38. संसद संविधान की मूल संरचना को परिवर्तित नहीं कर सकती।

  39. संघवाद भारतीय संविधान की मूल संरचना का अंग है।

  40. धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान की मूल संरचना का भाग है।

  41. लोकतंत्र भारतीय संविधान की मूल संरचना का एक आवश्यक तत्व है।

  42. विधि का शासन (Rule of Law) भारतीय संविधान की आधारभूत विशेषता है।

  43. न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना में सम्मिलित है।

  44. मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं।

  45. सामाजिक न्याय भारतीय संविधान का प्रमुख उद्देश्य है।

  46. आर्थिक न्याय का उद्देश्य संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करना है।

  47. राजनीतिक न्याय सभी नागरिकों को समान राजनीतिक अवसर प्रदान करता है।

  48. समानता का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है।

  49. स्वतंत्रता का अधिकार व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक है।

  50. बंधुत्व की भावना राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करती है।

  51. राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता संविधान के प्रमुख उद्देश्यों में से है।

  52. संविधान विविधता में एकता की भावना को प्रोत्साहित करता है।

  53. भारतीय संविधान सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावी साधन है।

  54. संविधान सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना का लक्ष्य रखता है।

  55. भारतीय संविधान कल्याणकारी राज्य की स्थापना का समर्थन करता है।

  56. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को मूर्त रूप देते हैं।

  57. नीति-निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।

  58. मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा संरक्षित एवं प्रवर्तनीय हैं।

  59. संविधान नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है।

  60. मौलिक कर्तव्यों का उद्देश्य राष्ट्र के प्रति नागरिकों में उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है।

  61. पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।

  62. वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद एवं सुधार की भावना का विकास नागरिकों का कर्तव्य है।

  63. सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

  64. राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रगान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

  65. संविधान का पालन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।

  66. राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

  67. भारतीय संविधान विश्व के सर्वश्रेष्ठ लोकतांत्रिक दस्तावेजों में से एक माना जाता है।

  68. भारतीय संविधान सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।

  69. भारतीय संविधान शासन, प्रशासन एवं न्याय व्यवस्था का आधार है।

  70. संविधान भारत की लोकतांत्रिक परंपरा का मूल स्रोत है।

  71. संविधान नागरिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

  72. संविधान शासन की शक्तियों को संतुलित एवं नियंत्रित करता है।

  73. संविधान नागरिकों और राज्य के मध्य संबंधों को परिभाषित करता है।

  74. भारतीय संविधान परिवर्तनशील एवं गतिशील दस्तावेज है।

  75. संविधान समय-समय पर संशोधनों के माध्यम से विकसित होता रहा है।

  76. भारतीय संविधान लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक है।

  77. संविधान राष्ट्रीय विकास एवं सामाजिक प्रगति का मार्गदर्शक है।

  78. भारतीय संविधान का अंतिम उद्देश्य एक न्यायपूर्ण, समतामूलक एवं समावेशी समाज की स्थापना करना है।

  79. संविधान भारतीय गणराज्य की आधारशिला है।

  80. भारतीय संविधान राष्ट्र की एकता, अखंडता, लोकतंत्र तथा विधि के शासन का सर्वोच्च आधार है।

  1. भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहाँ शासन की अंतिम शक्ति जनता में निहित है।

  2. भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया था।

  3. संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के आधार पर हुआ था।

  4. संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित एवं आत्मार्पित किया।

  5. संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जिसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

  6. संविधान भारत को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है।

  7. भारतीय संघ की एकता एवं अखंडता संविधान द्वारा संरक्षित है।

  8. भारत में संसदीय शासन प्रणाली लागू है।

  9. भारत में द्विसदनीय संसदीय व्यवस्था है।

  10. राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है।

  11. लोकसभा को जनता का सदन कहा जाता है।

  12. राज्यसभा को राज्यों की परिषद कहा जाता है।

  13. संविधान के अनुसार मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए उत्तरदायी है।

  14. प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रधान होता है।

  15. मंत्रिपरिषद की वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री में निहित होती है।

  16. राष्ट्रपति की सभी कार्यपालिका शक्तियाँ मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयोग की जाती हैं।

  17. लोकसभा अध्यक्ष सदन की कार्यवाही का संचालन करता है।

  18. लोकसभा अध्यक्ष सदन की गरिमा एवं अनुशासन बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होता है।

  19. राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति कार्य करता है।

  20. संसद का मुख्य कार्य कानून बनाना है।

  21. संसद वित्तीय मामलों पर सर्वोच्च नियंत्रण रखती है।

  22. वार्षिक बजट संसद में प्रस्तुत किया जाता है।

  23. बजट को संविधान में वार्षिक वित्तीय विवरण कहा गया है।

  24. भारत की संचित निधि का उल्लेख संविधान में किया गया है।

  25. आकस्मिक निधि अप्रत्याशित व्यय के लिए उपयोग में लाई जाती है।

  26. लोक लेखा समिति संसद की एक महत्वपूर्ण वित्तीय समिति है।

  27. प्राक्कलन समिति सरकारी व्यय में मितव्ययिता के सुझाव देती है।

  28. लोक उपक्रम समिति सार्वजनिक उपक्रमों के कार्यों की समीक्षा करती है।

  29. वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के मध्य वित्तीय संबंधों का निर्धारण करता है।

  30. संघवाद भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता है।

  31. भारत में संघीय व्यवस्था के साथ एकात्मक झुकाव पाया जाता है।

  32. संविधान संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करता है।

  33. संघ सूची राष्ट्रीय महत्व के विषयों से संबंधित है।

  34. राज्य सूची स्थानीय एवं प्रादेशिक महत्व के विषयों से संबंधित है।

  35. समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।

  36. भारतीय संघ अविनाशी है, जबकि राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन किया जा सकता है।

  37. संसद राज्यों की सीमाओं, नाम और क्षेत्रफल में परिवर्तन कर सकती है।

  38. भारतीय नागरिकता एकल नागरिकता पर आधारित है।

  39. नागरिकता संबंधी मूल प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 तक वर्णित हैं।

  40. संसद को नागरिकता संबंधी कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।

  41. नागरिकता अधिनियम, 1955 भारतीय नागरिकता का प्रमुख कानून है।

  42. मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।

  43. समानता का अधिकार लोकतंत्र का आधार है।

  44. स्वतंत्रता का अधिकार व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास में सहायक है।

  45. शोषण के विरुद्ध अधिकार मानव गरिमा की रक्षा करता है।

  46. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार भारत की धर्मनिरपेक्षता को सुदृढ़ करता है।

  47. सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करते हैं।

  48. संवैधानिक उपचारों का अधिकार मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

  49. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय रिट जारी कर सकता है।

  50. अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय रिट जारी कर सकता है।

  51. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा हेतु जारी की जाने वाली रिट है।

  52. परमादेश (Mandamus) किसी सार्वजनिक अधिकारी को कर्तव्य पालन हेतु निर्देशित करती है।

  53. प्रतिषेध (Prohibition) रिट अधीनस्थ न्यायालय को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकती है।

  54. उत्प्रेषण (Certiorari) रिट अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को निरस्त करने हेतु जारी की जाती है।

  55. अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) किसी पदाधिकारी के अधिकार की वैधता की जाँच करती है।

  56. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व शासन के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।

  57. नीति-निर्देशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना का लक्ष्य रखते हैं।

  58. कल्याणकारी राज्य की अवधारणा नीति-निर्देशक तत्वों में निहित है।

  59. ग्राम स्वराज की अवधारणा महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित है।

  60. समान नागरिक संहिता का प्रावधान नीति-निर्देशक तत्वों में किया गया है।

  61. मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्व संविधान की आत्मा के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं।

  62. मौलिक कर्तव्य नागरिकों में राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करते हैं।

  63. संविधान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

  64. राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

  65. देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

  66. सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का उत्तरदायित्व है।

  67. प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है।

  68. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना नागरिकों का कर्तव्य है।

  69. उत्कृष्टता की ओर निरंतर प्रयास करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य माना गया है।

  70. माता-पिता या अभिभावकों का 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा दिलाना मौलिक कर्तव्य है।

  71. न्यायपालिका संविधान की संरक्षक संस्था है।

  72. सर्वोच्च न्यायालय देश का सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण है।

  73. न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है।

  74. न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता को सुनिश्चित करता है।

  75. न्यायिक सक्रियता जनहित की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  76. जनहित याचिका ने न्याय को आम नागरिकों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

  77. विधि का शासन लोकतांत्रिक प्रशासन की आधारशिला है।

  78. संविधान के समक्ष सभी नागरिक समान हैं।

  79. लोकतंत्र का वास्तविक आधार जागरूक नागरिक होते हैं।

  80. भारतीय संविधान नागरिकों को अधिकार, स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय प्रदान करने वाला सर्वोच्च विधिक दस्तावेज है।

  1. भारतीय संविधान विश्व के सबसे व्यापक एवं विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है।

  2. भारतीय संविधान लोकतंत्र, गणराज्य, धर्मनिरपेक्षता एवं समाजवाद के सिद्धांतों पर आधारित है।

  3. संविधान नागरिकों और राज्य के बीच संबंधों को विनियमित करता है।

  4. संविधान शासन की शक्तियों को सीमित एवं नियंत्रित करता है।

  5. संविधान विधि के शासन (Rule of Law) को स्थापित करता है।

  6. भारत में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

  7. संविधान सामाजिक न्याय की स्थापना का आधार प्रदान करता है।

  8. संविधान आर्थिक न्याय को प्रोत्साहित करता है।

  9. संविधान राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।

  10. लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता सर्वोच्च शक्ति का स्रोत होती है।

  11. चुनाव लोकतंत्र का आधारभूत तत्व हैं।

  12. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक शासन की पहचान हैं।

  13. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता है।

  14. संविधान नागरिकों को समान अवसर प्रदान करने का प्रयास करता है।

  15. सामाजिक समानता लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है।

  16. भारतीय संविधान सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास करता है।

  17. अस्पृश्यता का उन्मूलन भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

  18. अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं।

  19. संविधान कमजोर वर्गों के उत्थान को प्रोत्साहित करता है।

  20. आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय की अवधारणा से संबंधित है।

  21. भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र की रक्षा करती है।

  22. न्यायपालिका संविधान की संरक्षक संस्था है।

  23. सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों का संरक्षक है।

  24. न्यायपालिका शासन के अन्य अंगों पर संवैधानिक नियंत्रण रखती है।

  25. न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखता है।

  26. संविधान संशोधन की व्यवस्था संविधान को लचीला एवं गतिशील बनाती है।

  27. भारतीय संविधान कठोरता एवं लचीलेपन का समन्वय है।

  28. संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परंतु उसकी मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती।

  29. मूल संरचना सिद्धांत भारतीय न्यायपालिका का महत्वपूर्ण योगदान है।

  30. संविधान की सर्वोच्चता भारतीय शासन व्यवस्था की मूल विशेषता है।

  31. भारतीय संघ राज्यों का संघ है, न कि राज्यों के बीच किया गया कोई समझौता।

  32. भारतीय संघ की एकता एवं अखंडता संविधान द्वारा सुरक्षित है।

  33. संसद राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर कानून बनाती है।

  34. राज्य विधानमंडल राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाता है।

  35. समवर्ती सूची संघ और राज्य दोनों को विधायी अधिकार प्रदान करती है।

  36. आपातकालीन परिस्थितियों में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ जाती हैं।

  37. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संघीय व्यवस्था पर एकात्मक प्रभाव बढ़ जाता है।

  38. राष्ट्रपति शासन राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता की स्थिति में लगाया जाता है।

  39. वित्तीय आपातकाल संविधान का एक विशेष प्रावधान है।

  40. अब तक भारत में वित्तीय आपातकाल कभी लागू नहीं किया गया है।

  41. संविधान नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करता है।

  42. मौलिक अधिकार लोकतंत्र की आत्मा माने जाते हैं।

  43. संवैधानिक उपचारों का अधिकार अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी है।

  44. मौलिक अधिकार व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करते हैं।

  45. शिक्षा का अधिकार सामाजिक विकास का आधार है।

  46. शिक्षा लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने का प्रभावी माध्यम है।

  47. भारतीय संविधान महिला एवं पुरुष दोनों को समान अधिकार प्रदान करता है।

  48. संविधान लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करता है।

  49. संविधान बालकों के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष प्रावधान करता है।

  50. बाल श्रम का निषेध सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण अंग है।

  51. संविधान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है।

  52. सांस्कृतिक विविधता भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण विशेषता है।

  53. भारतीय संविधान राष्ट्रीय एकता के साथ सांस्कृतिक बहुलता को भी महत्व देता है।

  54. संविधान विभिन्न धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करता है।

  55. धर्मनिरपेक्षता भारतीय राज्य की आधारभूत विशेषताओं में से एक है।

  56. भारतीय राज्य किसी विशेष धर्म को राजधर्म के रूप में स्वीकार नहीं करता।

  57. सभी नागरिकों को अपनी पसंद का धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्राप्त है।

  58. संविधान सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।

  59. बंधुत्व की भावना राष्ट्रीय एकीकरण का आधार है।

  60. राष्ट्रीय एकता और अखंडता संविधान के प्रमुख उद्देश्यों में सम्मिलित हैं।

  61. संविधान राष्ट्रीय विकास का मार्गदर्शक दस्तावेज है।

  62. संविधान शासन की वैधता का आधार है।

  63. भारत का लोकतंत्र संविधान द्वारा संरक्षित एवं संचालित होता है।

  64. संविधान नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति आस्था विकसित करता है।

  65. संविधान का पालन प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है।

  66. लोकतंत्र में अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी समान महत्व है।

  67. संविधान नागरिकों को उत्तरदायी एवं जागरूक बनने की प्रेरणा देता है।

  68. भारतीय संविधान विश्व के अनेक संविधानों के श्रेष्ठ तत्वों का समन्वित स्वरूप है।

  69. संविधान भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है।

  70. भारतीय संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित राष्ट्र निर्माण का आधार है।

  71. संविधान भारत की राजनीतिक व्यवस्था की आधारशिला है।

  72. संविधान प्रशासनिक संस्थाओं के संगठन एवं कार्यप्रणाली का निर्धारण करता है।

  73. संविधान शासन के विभिन्न अंगों के बीच शक्तियों का संतुलन स्थापित करता है।

  74. संविधान नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ राज्य के दायित्व भी निर्धारित करता है।

  75. भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो समयानुसार विकसित होता रहता है।

  76. संविधान लोकतांत्रिक शासन को स्थायित्व प्रदान करता है।

  77. भारतीय संविधान राष्ट्रीय हित एवं जनकल्याण के बीच संतुलन स्थापित करता है।

  78. संविधान का अंतिम लक्ष्य एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और समावेशी समाज की स्थापना है।

  79. संविधान नागरिकों को राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।

  80. भारतीय संविधान राष्ट्र की एकता, अखंडता, लोकतंत्र और विधि के शासन का सर्वोच्च संरक्षक है।

  1. भारतीय संविधान विश्व के सबसे व्यापक एवं विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है।

  2. भारतीय संविधान लोकतंत्र, गणराज्य, धर्मनिरपेक्षता एवं समाजवाद के सिद्धांतों पर आधारित है।

  3. संविधान नागरिकों और राज्य के बीच संबंधों को विनियमित करता है।

  4. संविधान शासन की शक्तियों को सीमित एवं नियंत्रित करता है।

  5. संविधान विधि के शासन (Rule of Law) को स्थापित करता है।

  6. भारत में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

  7. संविधान सामाजिक न्याय की स्थापना का आधार प्रदान करता है।

  8. संविधान आर्थिक न्याय को प्रोत्साहित करता है।

  9. संविधान राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।

  10. लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता सर्वोच्च शक्ति का स्रोत होती है।

  11. चुनाव लोकतंत्र का आधारभूत तत्व हैं।

  12. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक शासन की पहचान हैं।

  13. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता है।

  14. संविधान नागरिकों को समान अवसर प्रदान करने का प्रयास करता है।

  15. सामाजिक समानता लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है।

  16. भारतीय संविधान सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास करता है।

  17. अस्पृश्यता का उन्मूलन भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

  18. अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं।

  19. संविधान कमजोर वर्गों के उत्थान को प्रोत्साहित करता है।

  20. आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय की अवधारणा से संबंधित है।

  21. भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र की रक्षा करती है।

  22. न्यायपालिका संविधान की संरक्षक संस्था है।

  23. सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों का संरक्षक है।

  24. न्यायपालिका शासन के अन्य अंगों पर संवैधानिक नियंत्रण रखती है।

  25. न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखता है।

  26. संविधान संशोधन की व्यवस्था संविधान को लचीला एवं गतिशील बनाती है।

  27. भारतीय संविधान कठोरता एवं लचीलेपन का समन्वय है।

  28. संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परंतु उसकी मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती।

  29. मूल संरचना सिद्धांत भारतीय न्यायपालिका का महत्वपूर्ण योगदान है।

  30. संविधान की सर्वोच्चता भारतीय शासन व्यवस्था की मूल विशेषता है।

  31. भारतीय संघ राज्यों का संघ है, न कि राज्यों के बीच किया गया कोई समझौता।

  32. भारतीय संघ की एकता एवं अखंडता संविधान द्वारा सुरक्षित है।

  33. संसद राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर कानून बनाती है।

  34. राज्य विधानमंडल राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाता है।

  35. समवर्ती सूची संघ और राज्य दोनों को विधायी अधिकार प्रदान करती है।

  36. आपातकालीन परिस्थितियों में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ जाती हैं।

  37. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संघीय व्यवस्था पर एकात्मक प्रभाव बढ़ जाता है।

  38. राष्ट्रपति शासन राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता की स्थिति में लगाया जाता है।

  39. वित्तीय आपातकाल संविधान का एक विशेष प्रावधान है।

  40. अब तक भारत में वित्तीय आपातकाल कभी लागू नहीं किया गया है।

  41. संविधान नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करता है।

  42. मौलिक अधिकार लोकतंत्र की आत्मा माने जाते हैं।

  43. संवैधानिक उपचारों का अधिकार अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी है।

  44. मौलिक अधिकार व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करते हैं।

  45. शिक्षा का अधिकार सामाजिक विकास का आधार है।

  46. शिक्षा लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने का प्रभावी माध्यम है।

  47. भारतीय संविधान महिला एवं पुरुष दोनों को समान अधिकार प्रदान करता है।

  48. संविधान लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करता है।

  49. संविधान बालकों के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष प्रावधान करता है।

  50. बाल श्रम का निषेध सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण अंग है।

  51. संविधान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है।

  52. सांस्कृतिक विविधता भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण विशेषता है।

  53. भारतीय संविधान राष्ट्रीय एकता के साथ सांस्कृतिक बहुलता को भी महत्व देता है।

  54. संविधान विभिन्न धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करता है।

  55. धर्मनिरपेक्षता भारतीय राज्य की आधारभूत विशेषताओं में से एक है।

  56. भारतीय राज्य किसी विशेष धर्म को राजधर्म के रूप में स्वीकार नहीं करता।

  57. सभी नागरिकों को अपनी पसंद का धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्राप्त है।

  58. संविधान सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।

  59. बंधुत्व की भावना राष्ट्रीय एकीकरण का आधार है।

  60. राष्ट्रीय एकता और अखंडता संविधान के प्रमुख उद्देश्यों में सम्मिलित हैं।

  61. संविधान राष्ट्रीय विकास का मार्गदर्शक दस्तावेज है।

  62. संविधान शासन की वैधता का आधार है।

  63. भारत का लोकतंत्र संविधान द्वारा संरक्षित एवं संचालित होता है।

  64. संविधान नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति आस्था विकसित करता है।

  65. संविधान का पालन प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है।

  66. लोकतंत्र में अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी समान महत्व है।

  67. संविधान नागरिकों को उत्तरदायी एवं जागरूक बनने की प्रेरणा देता है।

  68. भारतीय संविधान विश्व के अनेक संविधानों के श्रेष्ठ तत्वों का समन्वित स्वरूप है।

  69. संविधान भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है।

  70. भारतीय संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित राष्ट्र निर्माण का आधार है।

  71. संविधान भारत की राजनीतिक व्यवस्था की आधारशिला है।

  72. संविधान प्रशासनिक संस्थाओं के संगठन एवं कार्यप्रणाली का निर्धारण करता है।

  73. संविधान शासन के विभिन्न अंगों के बीच शक्तियों का संतुलन स्थापित करता है।

  74. संविधान नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ राज्य के दायित्व भी निर्धारित करता है।

  75. भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो समयानुसार विकसित होता रहता है।

  76. संविधान लोकतांत्रिक शासन को स्थायित्व प्रदान करता है।

  77. भारतीय संविधान राष्ट्रीय हित एवं जनकल्याण के बीच संतुलन स्थापित करता है।

  78. संविधान का अंतिम लक्ष्य एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और समावेशी समाज की स्थापना है।

  79. संविधान नागरिकों को राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।

  80. भारतीय संविधान राष्ट्र की एकता, अखंडता, लोकतंत्र और विधि के शासन का सर्वोच्च संरक्षक है।

  1. भारतीय संविधान विश्व के सबसे विस्तृत लोकतांत्रिक संविधानों में से एक है।

  2. भारतीय संविधान का निर्माण लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष एवं कल्याणकारी राज्य की स्थापना के उद्देश्य से किया गया था।

  3. संविधान राज्य की सभी संस्थाओं के अधिकार एवं कर्तव्यों को निर्धारित करता है।

  4. संविधान शासन की शक्तियों के दुरुपयोग पर नियंत्रण स्थापित करता है।

  5. संविधान नागरिकों की स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों का संरक्षण करता है।

  6. लोकतांत्रिक शासन में संविधान सर्वोच्च विधिक दस्तावेज होता है।

  7. संविधान की सर्वोच्चता भारतीय शासन प्रणाली की आधारभूत विशेषता है।

  8. संविधान नागरिकों को न्याय प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है।

  9. संविधान के अनुसार सभी नागरिक विधि के समक्ष समान हैं।

  10. भारतीय लोकतंत्र में जनमत का विशेष महत्व है।

  11. चुनाव जनता की संप्रभुता की अभिव्यक्ति का माध्यम हैं।

  12. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन लोकतंत्र की सफलता का आधार हैं।

  13. संविधान प्रत्येक नागरिक की गरिमा की रक्षा करता है।

  14. मौलिक अधिकार व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं।

  15. संविधान सामाजिक एवं आर्थिक विषमताओं को कम करने का प्रयास करता है।

  16. समाजवादी व्यवस्था का उद्देश्य संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण है।

  17. भारतीय संविधान अवसर की समानता पर बल देता है।

  18. संविधान कमजोर वर्गों के संरक्षण हेतु विशेष व्यवस्थाएँ प्रदान करता है।

  19. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

  20. भारतीय संविधान समावेशी विकास की अवधारणा को प्रोत्साहित करता है।

  21. संविधान महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

  22. महिलाओं को समान अवसर एवं समान अधिकार प्रदान करना संविधान का उद्देश्य है।

  23. संविधान बालकों के हितों की रक्षा हेतु विशेष प्रावधान करता है।

  24. बाल विवाह, बाल श्रम एवं शोषण के विरुद्ध संवैधानिक संरक्षण उपलब्ध है।

  25. शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी साधन मानी जाती है।

  26. संविधान शिक्षा के प्रसार को राष्ट्रीय विकास का आधार मानता है।

  27. पर्यावरण संरक्षण संविधान की महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रतिबद्धताओं में से एक है।

  28. राज्य एवं नागरिक दोनों पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्तरदायी हैं।

  29. वन, वन्यजीव एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण राष्ट्रीय दायित्व है।

  30. संविधान सतत विकास की अवधारणा को समर्थन प्रदान करता है।

  31. भारतीय संविधान राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को सर्वोच्च महत्व देता है।

  32. राष्ट्रीय एकीकरण लोकतांत्रिक स्थिरता का आधार है।

  33. संविधान भाषाई, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करता है।

  34. भारत की विविधता उसकी लोकतांत्रिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार है।

  35. धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना को व्यक्त करती है।

  36. भारतीय राज्य सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार करता है।

  37. किसी भी नागरिक के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

  38. संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी प्रदान करता है।

  39. संविधान राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक बहुलता के बीच संतुलन स्थापित करता है।

  40. संविधान भारतीय राष्ट्रवाद को लोकतांत्रिक एवं समावेशी स्वरूप प्रदान करता है।

  41. संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका भारतीय शासन व्यवस्था के तीन प्रमुख अंग हैं।

  42. विधायिका कानून बनाती है।

  43. कार्यपालिका कानूनों को लागू करती है।

  44. न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या एवं संरक्षण करती है।

  45. शक्तियों का पृथक्करण लोकतांत्रिक शासन का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

  46. नियंत्रण एवं संतुलन (Checks and Balances) की व्यवस्था शासन में उत्तरदायित्व सुनिश्चित करती है।

  47. न्यायपालिका की स्वतंत्रता नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

  48. विधि का शासन लोकतंत्र का मूल आधार है।

  49. भारत में सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान उत्तरदायी हैं।

  50. संविधान शासन को जनहित के अनुरूप संचालित करने का आधार प्रदान करता है।

  51. संविधान राष्ट्रीय विकास की दिशा निर्धारित करता है।

  52. संविधान सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी साधन है।

  53. संविधान राष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता का आधार है।

  54. भारतीय संविधान लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता के आदर्शों को साकार करने का माध्यम है।

  55. संविधान नागरिकों में कर्तव्यपरायणता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है।

  56. नागरिकों का सक्रिय सहयोग लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है।

  57. संविधान नागरिकों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है।

  58. संविधान राष्ट्रीय चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  59. लोकतंत्र केवल अधिकारों पर नहीं, बल्कि कर्तव्यों पर भी आधारित होता है।

  60. राष्ट्र की उन्नति जागरूक, शिक्षित और उत्तरदायी नागरिकों पर निर्भर करती है।

  61. भारतीय संविधान लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक है।

  62. संविधान सामाजिक न्याय, आर्थिक प्रगति और राजनीतिक स्थिरता का आधार है।

  63. संविधान शासन और नागरिकों के मध्य विश्वास का सेतु है।

  64. संविधान राष्ट्रीय हितों और व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं में संतुलन स्थापित करता है।

  65. संविधान राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा का आधारभूत दस्तावेज है।

  66. भारतीय संविधान आधुनिक भारत के निर्माण का मार्गदर्शक है।

  67. संविधान भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है।

  68. संविधान नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और स्वतंत्रताओं का संरक्षक है।

  69. संविधान राष्ट्र के समग्र विकास का आधार प्रदान करता है।

  70. भारतीय संविधान एक सशक्त, समावेशी, लोकतांत्रिक और कल्याणकारी राष्ट्र की स्थापना का मूल आधार है।

  1. भारतीय संविधान नागरिकों को लोकतांत्रिक शासन में भागीदारी का अवसर प्रदान करता है।

  2. संविधान शासन को उत्तरदायी एवं पारदर्शी बनाने का आधार है।

  3. भारतीय लोकतंत्र की सफलता संविधान के प्रति आस्था पर निर्भर करती है।

  4. संविधान नागरिक स्वतंत्रता एवं राष्ट्रीय हितों में संतुलन स्थापित करता है।

  5. भारतीय संविधान मानव गरिमा की रक्षा को विशेष महत्व देता है।

  6. संविधान सभी नागरिकों को समान सम्मान प्रदान करता है।

  7. सामाजिक न्याय भारतीय संविधान की मूल प्रेरणा है।

  8. संविधान का उद्देश्य शोषणमुक्त समाज की स्थापना करना है।

  9. भारतीय संविधान कमजोर एवं वंचित वर्गों के संरक्षण का समर्थन करता है।

  10. संविधान सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देता है।

  11. संविधान राष्ट्रीय जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना का आधार है।

  12. लोकतांत्रिक शासन में कानून का शासन सर्वोपरि होता है।

  13. भारतीय संविधान विधि की सर्वोच्चता को स्वीकार करता है।

  14. संविधान शासन को संविधानबद्ध एवं सीमित बनाता है।

  15. संविधान किसी भी प्रकार की निरंकुशता का विरोध करता है।

  16. संविधान लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्थायित्व प्रदान करता है।

  17. स्वतंत्र न्यायपालिका संविधान की रक्षा का प्रमुख साधन है।

  18. न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की अंतिम संरक्षक है।

  19. न्यायिक पुनरावलोकन संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखता है।

  20. संविधान शासन के प्रत्येक अंग को उसके अधिकार एवं सीमाएँ निर्धारित करता है।

  21. भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है।

  22. विचारों की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक समाज की महत्वपूर्ण विशेषता है।

  23. संविधान शांतिपूर्ण एवं वैधानिक विरोध के अधिकार को मान्यता देता है।

  24. लोकतंत्र में जनमत का सम्मान आवश्यक है।

  25. संविधान विविध मतों एवं विचारों के सह-अस्तित्व को स्वीकार करता है।

  26. भारतीय संविधान सहिष्णुता एवं बहुलवाद की भावना को प्रोत्साहित करता है।

  27. धर्मनिरपेक्षता भारतीय लोकतंत्र का आधारभूत सिद्धांत है।

  28. सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान भारतीय राज्य की नीति है।

  29. संविधान धार्मिक स्वतंत्रता एवं सामाजिक सद्भाव दोनों को महत्व देता है।

  30. राष्ट्रीय एकता संविधान का सर्वोच्च लक्ष्य है।

  31. संविधान राष्ट्र की अखंडता की रक्षा हेतु विशेष प्रावधान करता है।

  32. भारत की संप्रभुता संविधान द्वारा संरक्षित है।

  33. संविधान राष्ट्रीय सुरक्षा एवं लोकतांत्रिक अधिकारों में संतुलन स्थापित करता है।

  34. आपातकालीन प्रावधान राष्ट्रहित की रक्षा के लिए बनाए गए हैं।

  35. संविधान संकट की परिस्थितियों में शासन की निरंतरता सुनिश्चित करता है।

  36. संविधान संघ और राज्यों के मध्य सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है।

  37. सहकारी संघवाद भारतीय शासन व्यवस्था की महत्वपूर्ण अवधारणा है।

  38. केंद्र और राज्य मिलकर राष्ट्रीय विकास में योगदान देते हैं।

  39. संविधान राष्ट्रीय संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग का मार्गदर्शन करता है।

  40. संविधान आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।

  41. भारतीय संविधान कल्याणकारी राज्य की स्थापना का समर्थन करता है।

  42. राज्य का दायित्व जनकल्याण को बढ़ावा देना है।

  43. नीति-निर्देशक तत्व राज्य को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की दिशा प्रदान करते हैं।

  44. संविधान गरीबी, अशिक्षा एवं असमानता को दूर करने की प्रेरणा देता है।

  45. शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार कल्याणकारी राज्य के प्रमुख उद्देश्य हैं।

  46. संविधान वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आधुनिक विचारधारा को प्रोत्साहित करता है।

  47. संविधान राष्ट्रीय विकास में शिक्षा की भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है।

  48. ज्ञान एवं शिक्षा लोकतांत्रिक सशक्तिकरण के आधार हैं।

  49. संविधान अनुसंधान, नवाचार एवं प्रगति को अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करता है।

  50. शिक्षा का अधिकार सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है।

  51. संविधान पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्रीय दायित्व मानता है।

  52. स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है।

  53. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भावी पीढ़ियों के हित में आवश्यक है।

  54. पर्यावरणीय संतुलन सतत विकास का आधार है।

  55. संविधान प्रकृति एवं मानव के मध्य संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

  56. नागरिकों का कर्तव्य है कि वे पर्यावरण की रक्षा करें।

  57. संविधान सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को महत्वपूर्ण मानता है।

  58. राष्ट्रीय धरोहरों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

  59. संविधान सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को महत्व देता है।

  60. भारत की सांस्कृतिक विविधता संविधान द्वारा संरक्षित है।

  61. संविधान राष्ट्रीय एकता के साथ सांस्कृतिक बहुलता को भी स्वीकार करता है।

  62. संविधान भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण को प्रोत्साहित करता है।

  63. राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

  64. राष्ट्रध्वज राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।

  65. राष्ट्रगान राष्ट्रीय एकता और सम्मान का प्रतीक है।

  66. संविधान राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ बनाने का माध्यम है।

  67. संविधान नागरिकों में राष्ट्रभक्ति और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है।

  68. जागरूक नागरिक लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं।

  69. संविधान नागरिकों को अधिकारों के साथ कर्तव्यों के पालन की भी प्रेरणा देता है।

  70. भारतीय संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता तथा राष्ट्रीय एकता पर आधारित आधुनिक भारतीय राष्ट्र का मूल आधार है।



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भारतीय दंड विधान, 1860 से परीक्षोपयोगी प्रश्न



 
मूल विधि। Mool Vidhi। भारतीय दंड विधान, 1860 परीक्षोपयोगी प्रश्न
  1. एक जल्लाद जो मृत्युदंड निष्पादित करता है, भारतीय दंड संहिता की धारा 78 के अंतर्गत आपराधिक दायित्व से मुक्त है।
  2. जम्मू - कश्मीर राज्य में कौन सी दंड संहिता लागू होती है ? - रणबीर दंड संहिता
  3. जयदेव बनाम स्टेट वाद का संबंध आत्मरक्षा के अधिकार से है।
  4. भारतीय दंड संहिता किस राज्य को छोड़कर संपूर्ण भारत पर लागू होती है ? - जम्मू कश्मीर
  5. भारतीय दंड संहिता की धारा 1 संबंधित है - संहिता के नाम और उसके परिवर्तन के विस्तार से
  6. भारतीय दंड संहिता की धारा 120 -ए मेंआपराधिक षड्यंत्र की परिभाषा दी गई है।
  7. भारतीय दंड संहिता की धारा 120 -बी में आपराधिक षड्यंत्र के लिए दंड का प्रावधान दिया गया है।
  8. भारतीय दंड संहिता की धारा 124 -ए राजद्रोह को परिभाषित करती है।
  9. भारतीय दंड संहिता की धारा 141 में विधि विरुद्ध जमाव को परिभाषित किया गया है।
  10. भारतीय दंड संहिता की धारा 2 के अनुसार - जो व्यक्ति भारत के राज्य क्षेत्र के अंतर्गत अपराध करता है वह इस संहिता द्वारा दंडित किया जाएगा।
  11. भारतीय दंड संहिता की धारा 41 के अनुसार - विशेष विधि वह विधि है जो किसी विशिष्ट विषय पर लागू हो।
  12. भारतीय दंड संहिता की धारा 42 के अनुसार - स्थानीय विधि वह विधि है जो भारत के किसी विशिष्ट भाग में लागू हो।
  13. भारतीय दंड संहिता की धारा 53 में निम्न प्रकार के दंड बताए गए हैं : - मृत्युदंड, आजीवन कारावास, कारावास (कठोर श्रम के साथ कारावास तथा सादा कारावास ) , संपत्ति का समपहरण, जुर्माना।
  14. भारतीय दंड संहिता की धारा 57 के अंतर्गत आजीवन कारावास को 20 वर्ष के कारावास के तुल्य गिना जाएगा।
  15. भारतीय दंड संहिता की धारा 73 के अनुसार अभियुक्त को एकांत परिरोध में रखने की अधिकतम अवधि 3 माह की है।
  16. भारतीय दंड संहिता की धारा 76 से 95 तक की धाराएं क्षमा योग्य बचाओ से संबंधित हैं।
  17. भारतीय दंड संहिता की धारा 78 के अंतर्गत न्यायालय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में किया गया कार्य अपराध नहीं है।
  18. भारतीय दंड संहिता की धारा 80 में वर्णित है कि कोई बात अपराध नहीं है जो दुर्घटना से घटित होता है।
  19. भारतीय दंड संहिता की धारा 82 के अंतर्गत कोई बात अपराध नहीं है जो 7 वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा की जाती है।
  20. भारतीय दंड संहिता की धारा 83 के अंतर्गत 7 वर्ष के ऊपर किंतु 12 वर्ष से कम आयु की अपरिपक्व समझ के ' शिशु ' को आपराधिक दायित्व से उन्मुक्त प्राप्त है।
  21. भारतीय दंड संहिता की धारा 84 के अंतर्गत विकृत चित्त व्यक्ति के कार्य को अपराध नहीं माना जाता है।
  22. भारतीय दंड संहिता की धारा 85 में अनैच्छिक (अपनी इच्छा के विरुद्ध ) मत्तता के आधार पर आपराधिक दायित्व से प्रतिरक्षा का प्रावधान करती है।
  23. भारतीय दंड संहिता की धारा 86 संबंधित है - स्वैच्छिक मत्तता
  24. भारतीय दंड संहिता की धारा 96 से 106 तक की धाराएं न्यायोचित प्रतिरक्षा से संबंधित हैं।
  25. भारतीय दंड संहिता की धारा 96 से 106 तक में व्यक्ति के शरीर तथा संपत्ति संबंधी प्रतिरक्षा के अधिकारों का वर्णन किया गया है।
  26. भारतीय दंड संहिता की धाराएं 121, 132, 194, 302, 305, 307, 364 -क और 396 में मृत्युदंड दिए जाने का प्रावधान है।
  27. भारतीय दंड संहिता को कब लागू किया गया ? - 1 जनवरी 1862 में
  28. विधि विरुद्ध जमाव : धारा 141 के अनुसार, 5 या अधिक व्यक्तियों का जमाव विधि विरुद्ध जमाव कहा जाता है।


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जीवन को नई दिशा देने वाले बोध वाक्य



  1. अगर किसी देश को भ्रष्टाचार–मुक्त और सुन्दर-मन वाले लोगों का देश बनाना है तो समाज के तीन प्रमुख सदस्य ये काम कर सकते हैं- पिता, माता और गुरु।
  2. अगर कोई आपके साथ बुरा करता है तो उसे दंड ज़रूर दें। कैसे? बदले में उसके साथ अच्छा व्यवहार करके उसे शर्मिंदा करें और फिर उसके द्वारा की गयी बुराई और खुद की अच्छाई दोनों को भूल जाएँ।
  3. अधिक संपन्न होने पर भी जो असंतुष्ट रहता है, वह सदा निर्धन है और धन से रहित होने पर भी जो संतुष्ट है, वह सदा धनी है।
  4. अपने अंदर से अहंकार को निकाल कर स्वयं को हल्का करें, क्योंकि ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है।
  5. आदमी जन्म के साथ महान नहीं होता, वह संस्कारों की अग्नि में तपता है, तब महान बनता है, संस्कार जीवन की संपदा हैं। संस्कारों से ही हमारा जीवन सुंदर और संपन्न बनता है।
  6. एक मिनट में जिंदगी नहीं बदलती, पर एक मिनट सोच कर लिया हुआ फ़ैसला पूरी ज़िंदगी बदल देता है।
  7. कामयाब आदमी को खुशी भले ही ना मिले पर हमेशा खुश रहने वाले आदमी के कामयाबी कदम चूमती है।
  8. किसी काम का ना आना बुरी बात नहीं है, बल्कि सीखने की कोशिश ना करना बुरी बात है।
  9. किसी के अहित की भावना करना अपने अहित को निमंत्रण देना है।
  10. कुपथ्य का त्याग और पथ्य का सेवन करना तथा संयम से रहना— ये तीनों बातें दवाइयों से भी बढ़कर रोग दूर करने वाली हैं।
  11. कुसंगति में रहने की अपेक्षा अकेले रहना अधिक उत्तम है। अत्यधिक समझदार व्यक्ति पर भी कुसंग अपना प्रभाव दिखा ही देता है।
  12. केवल अपने सुख से सुखी होना और अपने दुःख से दुःखी होना- यह पशुता है तथा दूसरे के सुख से सुखी होना और दूसरे के दुःख से दुःखी होना- यह मनुष्यता है।
  13. केवल वही आलसी नहीं है, जो कुछ नहीं करता, वह भी आलसी है जो बेहतर कर सकता था, लेकिन उसने प्रयत्न नहीं किया।
  14. कैसा आश्चर्य है कि लोग बुरा करने से नहीं डरते, किंतु बुरा कहलाने से डरते हैं। झूठ बोलते हैं, किंतु झूठा कहलाना नहीं चाहते। बेईमानी करते हैं, किंतु बेईमान कहलाना नहीं चाहते। सारांश यह है कि बुरे काम से घृणा नही, किंतु बुरे नाम से घृणा है।
  15. कोई भी व्यक्ति सच्चाई, ईमानदारी तथा लोक- हितकारिता के राजपथ पर पूरी निष्ठा के साथ चलता रहे तो उसे कोई भी बुराई क्षति नहीं पहुँचा सकती।
  16. क्षणभर का समय है ही क्या, ऐसा सोचने वाला मनुष्य मूर्ख होता है और एक कौड़ी है ही क्या, यह सोचने वाला दरिद्र हो जाता है।
  17. ग़लती करने में कोई नुकसान नहीं है, परंतु अहंकारवश गलती न मानना पतन का कारण बन जाता है।
  18. जब आप जीवन में सफल होते हैं तो आपके अपनों को पता चलता है कि आप कौन हैं। जब आप जीवन में असफल होते हैं तो आपको पता चलता है कि आपके अपने कौन हैं।
  19. जब व्यक्ति आत्म-मंथन कर स्वयं अपनी गलतियां दूर करता है, तब उसकी सफलता में कोई संदेह नहीं रह जाता।
  20. जब हम क्रोध की अग्नि में जलते हैं तो इसका धुँआ हमारी ही आँखों में जाता है।
  21. जीवन में दो ही व्यक्ति असफल होते हैं। पहले वे जो सोचते हैं, पर करते नहीं; दूसरे वे जो करते हैं, पर सोचते नहीं।
  22. जुनून आपसे वह करवाता है, जो आप कर नहीं सकते; हौसला आपसे वह करवाता है जो आप करना चाहते हैं, और अनुभव आपसे वह कराता है जो आपको करना चाहिए। इन तीन गुणों का मेल हो तो कार्य की कीर्ति दासों दिशाओं में गूँजती है।
  23. जैसे किसी कंपनी का काम अच्छा करने से उसका मालिक प्रसन्न हो जाता है, ऐसे ही संसार की सेवा करने से उसका मालिक (भगवान) प्रसन्न हो जाता है, इसलिए हमें यथासंभव परोपकार करते रहना चाहिए।किसी काम को करने के बाद पछताने से बेहतर है कि काम करने से पहले उसके अच्छे-बुरे के बारे में सोच लिया जाए।
  24. जैसे सूखी लकड़ियों के साथ मिली होने से गीली लकड़ी भी जल जाती है, उसी तरह पापियों के संपर्क में रहने से धर्मात्माओं को भी उनके समान दंड भोगना पड़ता है।
  25. जो अपनी शक्ति के अनुसार दूसरों का भला करता है, उसका भला भगवान अपनी शक्ति के अनुसार करते हैं।
  26. जो उपदेशों से कुछ नही सीखता, उसे तकलीफ़ों की आँधी से ही सीख मिलती है।
  27. जो क्रोध को क्षमा से दबा लेता है, वही श्रेष्ठ पुरुष है। जो क्रोध को रोक लेता है, निंदा सह लेता है और दूसरों के सताने पर भी दुखी नहीं होता, वही पुरुषार्थ का स्वामी होता है। एक मनुष्य सौ वर्ष तक यज्ञ करे और दूसरा क्रोध न करे तो क्रोध न करने वाला ही श्रेष्ठ कहलाता है।
  28. जो गीता अर्जुन को केवल एक बार सुनने को मिली, वही गीता हमें प्रतिदिन पढ़ने-सुनने को मिल रही है, यह भगवान की कितनी विलक्षण कृपा है, फिर भी हम उसके ज्ञान को अपने अंदर नही उतार पा रहे हैं।लोगों ने गीता को कंठ में रखा हुआ है, इसलिए इसकी दयनीय स्थिति बनी हुई है। इस स्थिति से उबरने के लिए गीता को कंठ से नीचे उतारना होगा, यानी उसे आचरण में लाना होगा, इससे हमारा जीवन आनन्द से भर जाएगा।
  29. ज्ञानी हमें सीख देता है कि हमें क्या करना चाहिए, जबकि अज्ञानी हमें सीख देता है कि हमें क्या नहीं करना चाहिए।
  30. तुम्हारे चरित्र को तुम्हारे अपने कर्मों के सिवाय और कोई कलंकित नहीं कर सकता।
  31. दूसरों का सहयोग कीजिए, परंतु इतना भी सहज मत हो जाइए कि दूसरा आपको गुलाम समझे।
  32. दूसरों के जो आचरण हमें पसंद नही, वैसा आचरण हमें दूसरों के साथ भी नही करना चाहिए।
  33. दूसरों को देखना हो तो उन्हे उन्हीं के दृष्टिकोण से और उन्हीं की परिस्थिति में पहुँच कर देखो, फिर उनकी गलतियां उतनी नही दिखाई देंगी।
  34. दो तरह से चीज़ें देखने से छोटी नजर आती हैं - एक दूर से और दूसरी गुरूर से।
  35. धन के रहते हुए तो मनुष्य संत बन सकता है, पर धन की लालसा रहते हुए मनुष्य संत नहीं बन सकता।
  36. धर्म परिवर्तन केवल धर्म का ही परिवर्तन नहीं, अपितु माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कारों और उनकी सीख का भी परिवर्तन है।
  37. धूर्त व्‍यक्ति सच्ची मानसिक शांति का आनंद कभी प्राप्त नही कर सकता। अपने छल-कपट से वह स्वयं ही उलझनों में फँसा रहता है।
  38. धैर्य एक ऐसा गुण है जो व्यक्ति की कार्यक्षमता में वृद्धि करता है, उसे आगे ले जाता है तथा उसे पूर्णता प्रदान करता है।
  39. नफरत बहुत सोच-समझकर करनी चाहिए, क्योंकि नफ़रत करते-करते एक दिन हम भी वही बन जाते हैं, जिससे नफ़रत कर रहे हैं।
  40. नेतृत्व उस व्यक्ति को मिलता है जो खड़ा होकर अपने विचार व्यक्त कर सके।
  41. पक्षपात ही सब अनर्थ का मूल है। यदि तुम किसी के प्रति दूसरे की तुलना में ज़्यादा प्रेम प्रदर्शित करोगे तो उससे कलह ही बढ़ेगा।
  42. प्रार्थना के लिए सौ बार हाथ जोड़ने के बजाय, दान देने के लिए एक बार हाथ खोलना अधिक महत्वपूर्ण है।
  43. बड़ों का अनुसरण करने की इच्छा हो तो धनवानों को नहीं, बल्कि सज्जनों और परोपकारियों को सामने रखना चाहिए।
  44. बुद्धिमान व्यक्ति को क्रोध ऐसे त्याग देना चाहिए, जैसे सांप अपनी केंचुली को त्याग देता है।
  45. बुराइयां जीवन में आए, उससे पहले उन्हें मिट्टी में मिला दो, अन्यथा वो तुम्हें मिट्टी में मिला देंगी।
  46. बोलना तो वह है जो सुनने वालों को वशीभूत कर दे और न सुनने वालों में भी सुनने की इच्छा उत्पन्न कर दे।अगर अपनी संतान से सुख चाहते हो तो अपने माता-पिता को सुख पहुँचाओ, उनकी सेवा करो।
  47. भगवान को हम जानें, ये ज्ञान है। भगवान हमें जानें, ये भक्ति है।
  48. मनुष्य दूसरे के जिस कर्म की निंदा करे, उसको स्वयं भी न करे। जो दूसरे की निंदा करता है, किंतु स्वयं उसी निन्द्य कर्म में लगा रहता है, वह उपहास का पात्र बनता है।
  49. माता-पिता और बड़ों का आशीर्वाद हमारे मानसिक व शारीरिक विकास के लिए ज़रूरी है। यदि हम अपने माता-पिता को खुश नही रख सके तो परमपिता परमेश्वर को कैसे प्रसन्न रख पाएँगे?
  50. मूर्खों की सफलताओं की अपेक्षा बुद्धिमानों की ग़लतियाँ अधिक मार्गदर्शक होती हैं।
  51. यदि आप सही हैं तो आपको गुस्सा होने की ज़रूरत नहीं और यदि आप ग़लत हैं तो आपको गुस्सा होने का कोई हक नहीं।
  52. यदि दरवाजा पश्चिम की ओर खुलता हो तो सूर्योदय दर्शन असंभव है। इसी प्रकार मनोवृत्ति नकारात्मक हो तो मन की प्रसन्नता असंभव है।
  53. यह बड़े आश्चर्य की बात है कि परमात्मा की दी हुई चीज तो अच्छी लगती है, पर परमात्मा अच्छे नही लगते।
  54. रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। कभी रास्ते पे चलते-चलते रिश्ते बन जाते हैं और कभी रिश्ते निभाते-निभाते रास्ते बदल जाते हैं।
  55. वक्त और हालात दोनों इंसान की ज़िंदगी में कभी एक जैसे नहीं होते। वक्त इंसान की ज़िंदगी बदल देता है और हालात बदलने में वक्त नहीं लगता।
  56. वास्तव में वही पुरुष धन्य है और वही मानव कहलाने योग्य है, जो जहाँ है, जिस स्थिति में है, वहाँ उसी स्थिति में रहकर यथाशक्ति, यथायोग्य समाज के हित के लिए सोचते-बोलते और करते हैं।
  57. व्यक्ति अपने गुणों से ऊपर उठता है। ऊँचे स्थान पर बैठ जाने से वो ऊँचा नहीं हो जाता है।
  58. शिष्टाचार शारीरिक सुंदरता के अभाव (कमी) को पूर्ण कर देता है। शिष्टाचार के अभाव में सौंदर्य का कोई मूल्य नही रहता।
  59. संतोष से बढ़कर अन्य कोई लाभ नहीं, जो मनुष्य इस विशेष सदगुण से संपन्न है वह त्रिलोकी में सबसे धनी व्यक्ति है।
  60. संसार की कामना से पशुता का और भगवान की कामना से मनुष्यता का आरंभ होता है।
  61. संसार की वस्तुएँ कुछ भी, कितनी भी, कैसी भी पाकर शांति का अनुभव नहीं हो सकता, क्योंकि सामान से सुविधाएं मिल सकती हैं, शांति नहीं। शांति तो सदविचारों से मिलती है।
  62. सच्चा मित्र वह है जो आप के अतीत को समझता हो, आप के भविष्य में विश्वास रखता हो, और आप जैसे है वैसे ही आप को स्वीकार करता हो।
  63. सबसे गुणी और सबसे मेहनती नही, बल्कि वह इंसान ज़्यादा प्रगति करता है, जो बदलाव को आसानी से स्वीकार कर लेता है।
  64. समय और समझ दोनों एक साथ खुशकिस्मत लोगों को ही मिलते हैं क्योंकि अक्सर समय पर समझ नही आती और समझ आने पर समय निकल जाता है।
  65. हम मन के हीन विचारों के कारण ही दीन बने रहते हैं। दरिद्रता से अधिक हमारे दरिद्रता पूर्ण विचार हैं जो एक कुत्सित वातावरण की रचना करते हैं।
  66. हम लोकप्रिय तो बनना चाहते हैं, पर लोकहित करना नही चाहते।
  67. हमारे देश में नैतिक चेतना जाग्रत करने की सख्त ज़रूरत है और इसे बचपन से बच्चों में संस्कारित करना होगा, तभी हमारा देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो सकता है।
  68. हर किसी को खुश रखने के चक्कर में इंसान को अपने कार्यों से समझौता नहीं करना चाहिए।
  69. हर व्यक्ति दुनिया को बदलने की सोचता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति स्वयं को बदलने की नहीं सोचता।
  70. हिंसा और हथियारों से किसी को हराया तो जा सकता है, पर जीता नहीं जा सकता। जीतना तो हृदय परिवर्तन से ही संभव है, जो अहिंसा नामक दिव्य अमृत का कार्य है।
  71. हिन्दी की बात मत करो, हिन्दी में बात करो। तभी हम अपनी मातृभाषा को उसका सही स्थान दिला पाएंगे।


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भारतीय विधि और संविधान पर आधारित महत्वपूर्ण लेख




 
महाशक्ति पर भारतीय विधि और संविधान पर आधारित महत्वपूर्ण लेख


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उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और उनके विभाग



 केबिनेट मंत्री उ.प्र. सरकार 

मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ  : गृह, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व, खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, अर्थ एवं संख्या, भूतत्व एवं खनिजकर्म, बाढ़ नियंत्रण, कर निबंधन, कारागार, सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गोपन, सतर्कता, नियुक्ति, कार्मिक, सूचना, निर्वाचन, संस्थागत वित्त, नियोजन, राज्य संपत्ति, नगर भूमि, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय, प्रशासनिक सुधार, कार्यक्रम कार्यान्वयन, राष्ट्रीय एकीकरण, अवस्थापना, भाषा, वाह्य सहायतित, परियोजना, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास, लोक सेवा प्रबंधन, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बाट माप विभाग, प्रोटोकाल।
उपमुख्यमंत्री  
  1. केशव प्रसाद मौर्य : लोक निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, मनोरंजन कर, सार्वजनिक उद्यम 
  2. डॉ. दिनेश शर्मा :  माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी।
कैबिनेट मंत्री
  1. सूर्यप्रताप शाही : कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान। 
  2. सुरेश कुमार खन्ना : वित्त, संसदीय कार्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग। 
  3. स्वामी प्रसाद मौर्य : श्रम, सेवायोजन, समन्वय। 
  4. सतीश महाना : औद्योगिक विकास। 
  5. दारा सिंह चौहान : वन, पर्यावरण व जंतु उद्यान। 
  6. रमापति शास्त्री : समाज कल्याण व अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण।
  7.  जय प्रताप सिंह : चिकित्सा व स्वास्थ्य परिवार कल्याण, मातृ एवं शिक्षा कल्याण।
  8.  ब्रजेश पाठक : विधायी, न्याय, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा।
  9.  लक्ष्मी नारायण चौधरी : पशुधन, मत्स्य व दुग्ध विकास।
  10.  चेतन चौहान : सैनिक कल्याण, होमगार्ड, प्रांतीय रक्षक दल, नागरिक सुरक्षा।
  11.  श्रीकांत शर्मा : ऊर्जा, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत।
  12.  राजेंद्र प्रताप सिंह मोती सिंह : ग्राम्य विकास, समग्र ग्राम विकास। 
  13. सिद्धार्थ नाथ सिंह : खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, वस्त्रोद्योग, एमएसएमई, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआइ, निवेश प्रोत्साहन। 
  14. मुकुट बिहारी वर्मा : सहकारिता। 
  15. आशुतोष टंडन : नगर विकास, शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन। 
  16. नंदगोपाल गुप्ता नंदी : नागरिक उड्डयन, राजनीतिक पेंशन, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ, हज। 
  17. डॉ. महेंद्र सिंह : जल शक्ति। 
  18. सुरेश राणा : गन्ना विकास, चीनी मिलें। 
  19. भूपेंद्र सिंह : पंचायती राज। 
  20. अनिल राजभर : पिछड़ा वर्ग कल्याण, दिव्यांगजन सशक्तीकरण। 
  21. राम नरेश अग्निहोत्री : आबकारी, मद्यनिषेध। 
  22. कमल रानी वरुण : प्राविधिक शिक्षा।
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
  1. उपेंद्र तिवारी : खेल, युवा कल्याण। पंचायती राज मंत्री से सम्बद्ध। 
  2. डॉ. धर्म सिंह सैनी : आयुष, मुख्यमंत्री के साथ सम्बद्ध। 
  3. स्वाती सिंह : महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार। 
  4. नीलकंठ तिवारी : पर्यटन, संस्कृति, धर्मार्थ कार्य। मुख्यमंत्री के साथ सम्बद्ध। 
  5. कपिल देव अग्रवाल : व्यवसायिक शिक्षा व कौशल विकास। 
  6. सतीश द्विवेदी : बेसिक शिक्षा। 
  7. अशोक कटारिया : परिवहन। संसदीय कार्यमंत्री के साथ सम्बद्ध। 
  8. श्रीराम चौहान : उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, कृषि निर्यात। 
  9. रविंद्र जायसवाल : स्टांप तथा न्यायालय शुल्क, पंजीयन।
राज्य मंत्री
  1. गुलाब देवी : माध्यमिक शिक्षा। 
  2. जयप्रकाश निषाद : पशुधन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास। 
  3. जयकुमार सिंह जैकी : मुख्यमंत्री से सम्बद्ध। 
  4. अतुल गर्ग : चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण। 
  5. रणवेंद्र प्रताप सिंह धुन्नी सिंह : मुख्यमंत्री के साथ सम्बद्ध। 
  6. मोहसिन रजा : अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज मंत्री। 
  7. गिरीश चंद्र यादव : मुख्यमंत्री से सम्बद्ध। 
  8. बलदेव औलख : जल शक्ति। 
  9. मनोहर लाल मन्नू कोरी : श्रम एवं सेवायोजन। 
  10. संदीप सिंह : वित्त व चिकित्सा शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा। 
  11. सुरेश पासी : गन्ना विकास एवं चीनी मिलें। 
  12. अनिल शर्मा : वन एवं पर्यावरण तथा जंतु उद्यान। 
  13. महेश गुप्ता : नगर विकास, शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन। 
  14. आनंद स्वरूप शुक्ला : संसदीय कार्य, ग्राम्य विकास एवं समग्र ग्राम्य विकास। 
  15. विजय कश्यप : मुख्यमंत्री के साथ सम्बद्ध। 
  16. डॉ. गिर्राज सिंह धर्मेश : समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण। 
  17. लाखन सिंह राजपूत : कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान। 
  18. नीलिमा कटियार : उच्च शिक्षा तथा विज्ञान व प्रौद्योगिकी। 
  19. उदयभान सिंह : एमएसएमई, खादी व ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, वस्त्रोद्योग व निर्यात प्रोत्साहन। 
  20. चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय : लोकनिर्माण। 
  21. रमाशंकर सिंह पटेल : ऊर्जा, अतिरिक्त उर्जा स्रोत। 
  22. अजित सिंह पाल : इलेक्ट्रानिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी।
अपडेट 23 Aug 2019 तक


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दहेज एवं दहेज हत्या पर कानून



 
दहेज पर कानून 
दहेज प्रतिशोध अधिनियम, 1961 के अंतर्गत इस विषय पर कानून बना है। इसके अंतर्गत जब शादी से संबंधित जो भी उपहार दबाव या जबरदस्ती के कारण दूल्हे या दुल्हन को दिये जाते हैं, उसे दहेज कहते है। उपहार जो मांग कर लिया गया हो उसे भी दहेज कहते हैं।
  • दहेज लेना या देना या लेने देने में सहायता करना अपराध है। शादी हुई हो या नहीं इससे फर्क नहीं पड़ता है। इसकी सजा है पाँच साल तक की कैद, पन्द्रह हजार रुपये जुर्माना या अगर दहेज की रकम पन्द्रह हजार रुपये से ज्यादा हो तो उस रकम के बराबर जुर्माना।
  • दहेज मांगना अपराध है और इसकी सजा है कम से कम छः महीनों की कैद या जुर्माना।
  • दहेज का विज्ञापन देना भी एक अपराध है और इसकी सजा है कम से कम छः महीनों की कैद या पन्द्रह हजार रूपये तक का जुर्माना।


 दहेज हत्या पर कानून 
भारतीय दंड संहिता की धारा 304ख व 306 दहेज हत्या पर दंड का प्रविधान है इसके अंतर्गत यदि-
  • शादी के सात साल के अन्दर अगर किसी स्त्री की मृत्यु हो जाए
  • गैर प्राकृतिक कारणों से, जलने से या शारीरिक चोट से, आत्महत्या की वजह से हो जाए-और उसकी मृत्यु से पहले उसके पति या पति के किसी रिश्तेदार ने उसके साथ दहेज के लिए क्रूर व्यवहार किया हो, तो उसे दहेज हत्या कहते हैं। दहेज हत्या के संबंध में कानून यह मानकर चलता है कि मृत्यु ससुराल वालों के कारण हुई है।
इन अपराधों की शिकायत कौन कर सकता हैः-
  1. कोई पुलिस अफसर
  2. पीडि़त महिला या उसके माता-पिता या संबंधी
  3.  यदि अदालत को ऐसे किसी केस का पता चलता है तो वह खुद भी कार्यवाई शुरू कर सकता है।
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विवाह संबंधी अपराधों के विषय में भारतीय दण्ड संहिता 1860 के अंतर्गगत दंड प्रविधान



 विवाह संबंधी अपराधों के विषय में भारतीय दण्ड संहिता 1860 के अंतर्गगत दंड प्रविधान
विवाह संबंधी अपराधों के विषय में भारतीय दण्ड संहिता 1860 के अंतर्गगत धारा 493 से 498 के प्रावधान है - 
  •  धारा 493 -धारा 493 के अंतर्गत बताया गया है कि विधिपूर्ण विवाह का प्रवंचना से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास की स्थिति में, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। 
  • धारा 494 - धारा 494 के अंतर्गत पति या पत्नी के जीवित रहते हुए विवाह करने की स्थिति अगर वह विवाह शून्य है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। बहुविवाह के लिए आवश्यक है कि दूसरी शादी होते समय शादी के रस्मो-रिवाज पर्याप्त ढंग से किए जाएं। 
  • धारा 494 क - इस धारा के अंतर्गत बताया गया है कि वही अपराध पूर्ववर्ती विवाह को उस व्यक्ति से छिपाकर जिसके साथ पश्चात्वर्ती विवाह किया जाता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी। 
  • धारा 496 - धारा 496 में बताया गया है कि विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्ण विवाह कर्म पूरा कर लेने की स्थिति में से वह दोनों में किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। 
  • धारा 497 - व्यभिचार की स्थिति में वह व्यक्ति जो यह कार्य करता है वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा। ऐसे मामलों में पत्नी दुष्प्रेरक के रूप में दण्डनीय नहीं होगी। 
  • धारा 498 - धारा 498 के अन्तर्गत यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति विवाहित स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाता है या ले आना या निरूञ्द्घ रखना है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा। 
  • धारा 498 क - सन्‌ 1983 में भारतीय दण्ड संहिता में यह संशोधन किया गया जिसके अंतर्गत अध्याय 20 क, पति या पति के नातेदारों द्वारा क्रूरता के विषय में, अंत स्थापित किया गया इस अध्याय के अन्तर्गत एक ही धारा 498-क है, जिसके अन्तर्गत बताया गया है कि किसी स्त्री के पति या पति के नातेदारों द्वारा उसके प्रति क्रूरता करने की स्थिति में दण्ड एवं कारावास का प्रावधान है इसके अंतर्गत बताया गया है कि जो कोई, किसी स्त्री का पति या पति का नातेदार होते हुए, ऐसी स्त्री के प्रति क्रूरता करेगा, उसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
    क्रूरता 
    मानसिक तथा शारीरिक क्रूरता - शारीरिक क्रूरता का अर्थ है महिला को मारने या इस हद तक शोषित करना कि उसकी जान, शरीर या स्वास्थ्य को खतरा हो।मानसिक क्रूरता जैसे- दहेज की मांग या महिला को बदसूरत कहकर बुलाना इत्यादि। 
    • किसी महिला या उसके रिश्तेदार या संबंधी को धन-संपति देने के लिये परेशान किया जाना भी क्रूरता है। 
    • अगर ऐसे व्यवहार के कारण औरत आत्महत्या कर लेती है तो वह भी क्रूरता कहलाती है। 
    • यह धारा हर तरह की क्रूरता पर लागू है चाहे कारण कोई भी हो केवल दहेज नहीं।
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भारतीय दंड संहिता की धारा 503, 504 व 506 के अधीन अपराध एवं सजा



भारतीय दंड संहिता की धारा 503, 504 व 506 के अधीन अपराध एवं सजा
 
आईपीसी की धारा 503 - आपराधिक अभित्रास 
सजा/दंड - जो कोई किसी अन्य व्यक्ति के शरीर, ख्याति या सम्‍पत्ति को या किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को, जिससे कि वह व्यक्ति हितबद्ध हो कोई क्षति करने की धमकी उस अन्य व्यक्ति को इस आशय से देता है कि उसे संत्रास कारित किया जाए, या उससे ऐसी धमकी के निष्पादन का परिवर्जन करने के साधन स्वरूप कोई ऐसा कार्य कराया जाए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध न हो, या

किसी ऐसे कार्य को करने का लोप कराया जाए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से हकदार हो, वह आपराधिक अभित्रास करता है । स्पष्टीकरण--किसी ऐसे मॄत व्यक्ति की ख्याति को क्षति करने की धमकी जिससे वह व्यक्ति, जिसे धमकी दी गई है, हितबद्ध हो, इस धारा के अन्तर्गत आता है ।
 
आईपीसी की धारा 504 - लोकशांति भंग कराने को प्रकोपित करने के आशय से साशय अपमान
सजा/दंड -  जो कोई किसी व्यक्ति को साशय अपमानित करेगा और तद्द्वारा उस व्यक्ति को इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए, प्रकोपित करेगा कि ऐसे प्रकोपन से वह लोक शान्ति भंग या कोई अन्य अपराध कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
 
आईपीसी की धारा 506 - आपराधिक अभित्रास के लिए सजा (आपराधिक धमकी )
सजा/दंड - जो कोई आपराधिक अभित्रास का अपराध करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जायेगा या
यदि धमकी मृत्यु या घोर उपहति कारित करने की या अग्नि द्वारा किसी संपत्ति का नाश कारित करने की या मृत्युदंड से या आजीवन कारावास से या सात वर्ष की अवधि तक के कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने की, या
किसी स्त्री पर असतीत्व का लांछन लगाने की हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

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