आईपीसी (इंडियन पैनल कोड) की धारा 354 में बदलाव



1860 से चले आ रहे कानून आईपीसी (इंडियन पैनल कोड) की धारा 354 में स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग करना जैसी वारदातें आती थीं. इसके तहत आरोपी को एक वर्ष के लिए कारावास, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने की सजा का प्रावधान था. साथ ही यह जमानतीय धारा भी थी. जिसमें आरोपी जमानत पर बाहर आ सकता था. दिल्ली में हुए दामिनी रेप केस के बाद कानून में खासे बदलाव हुए. धारा 354 में कई उपधाराएं तैयार की गईं.
  • 354(क) इसके तहत अवांछनीय शारीरिक संपर्क और अग्रक्रियाएं या लैंगिक संबंधों की स्वीकृति बनाने की मांग या अनुरोध, अश्लील साहित्य दिखाना जैसी वारदातें आती हैं. वैसे तो यह बेलेबल है लेकिन इसमें कम से कम कारावास तीन वर्ष तक, जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान किया गया. इसी के तहत लैंगिक आभासी टिप्पणियों की प्रकृति का लैंगिक उत्पीडऩ भी जोड़ा गया. जिसमें आरोपी को एक वर्ष तक का कारावास हो सकेगा या जुर्माना या फिर दोनों.
  • 354(ख) इसके तहत किसी महिला को विवस्त्र करने के आशय से स्त्री पर हमला या आपराधिक बल कर प्रयोग किया जाना. जिसमें आरोपी को कम से कम पांच वर्ष का कारावास, किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना भी नियत किया गया. साथ ही यह धारा नॉनबेलेबल है.
  • 354(ग) दृश्यरतिकता यानि किसी को घूरकर देखना. इसके तहत अगर किसी लड़की को कोई पंद्रह सेकंड घूरकर देख ले तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है. जिसमें कानून के तहत प्रथम दोष सिद्ध के लिए कम से कम एक वर्ष का कारावास, किन्तु जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना. इसमें जमानत हो सकती है. अगर यही व्यक्ति दुबारा ऐसी ही घटना के लिए दोषी पाया जाता है तो इसके लिए कम से कम तीन वर्ष का कारावास जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना भी. इसमें आरोपी की जमानत भी नहीं हो सकती.
  • 354(घ) इसके तहत किसी लड़की या महिला का पीछा करना जैसी वारदातें शामिल हैं. जिसमें पहली बार अगर आरोपी पर दोष सिद्ध होता है तो उसको तीन वर्ष का कारावास और जुर्माना हो सकता है. वहीं अगर यही आरोपी दुबारा ऐसा करता है और उस पर दोष सिद्ध होता है तो इसके लिए पांच वर्ष तक का कारावास और जुर्माना हो सकता है. वहीं आरोपी की जमानत भी नहीं हो सकती.


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9 comments:

Vinay Singh said...

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Anonymous said...

Es section ka galat istemal kiya jata h ldkiyo ke dawara.

Gaurav Verma said...

Kuch nhi bnta 354 se.. 1 month ho gya 354 lge hue.. Judge k samne 164a k under byan b ho chukepressure ki wjh se file ko dbane ki puri koshish ki ja rhi h.. Kand krne wale masti me ghum rhe h haste hue.. India me ya to paisa chalta h ya fir politics power.

Gaurav Verma said...

Kuch nhi bnta 354 se.. 1 month ho gya 354 lge hue.. Judge k samne 164a k under byan b ho chukepressure ki wjh se file ko dbane ki puri koshish ki ja rhi h.. Kand krne wale masti me ghum rhe h haste hue.. India me ya to paisa chalta h ya fir politics power.

Anshu Akela said...

Kya kya ho rha bhai...agar aisi bat hai to case hi kyu karega log...es mamle me aur kara kanun bnane ki jarurat hai....agar aaropi ko aasani se bell mil jayega to wo aur paresan karne lagega....

Anshu Akela said...

Aur kare kanun banane ki jarurat hai...agar aaropi ko aasani se bell mil jata hai to wo.aur paresan kar dega....fir case karne ka natlab hi kya hai...

Seema sharma said...

Lekin is kanoon ka galat istemal zyada ho raha he kisi se badla lena ho to bas 1 baar orat oos aadmi pr ungli utha de, kisi ki life khrab krne ka sabse aasaan trika. 1 orat hote hue mujhe ye likhne me bahot bura lag raha he, lekin yhi sach he.

SHARAD PANDEY said...

घरेलू संपत्ति विवाद में एक पक्ष घर छोड़ किराये के मकान में रहने चला जाता है और दूसरा पक्ष पहले पक्ष की संपत्ति पँर अवैध निर्माण करने की कोशिश करने लगता है।
प्रथम पक्ष उसे रोकता है।
और समय समय पर अपनी साम्पत्ति की देखरेख करने जाता रहता है।
दूसरे पक्ष की महिला प्रथम पक्ष की संपत्ति को कब्ज़ा करने के उद्देश्य से धमकी देती है कि यदि देखरेख करने आओगे तो ठीक नहीं होगा।
कुछ दिन बाद सम्बंधित थाने से दो सिपाही प्रथम पक्ष के एक व्यक्ति को खोजते आते हैं और कहते हैं कि आपके खिलाफ उस महिला(उम्र 60 वर्ष) ने परेशां करने और जबरन शारीरिक संबंध स्थापित करने के लिए दबाव बनाने की तहरीर दी है।
अगले दिन FIR दर्ज हो जाती है।
इस स्थिति में प्रथम पक्ष अब क्या करे?

Pramendra Pratap Singh said...

@SHARAD PANDEY जी
1. सबसे पहले तो अगर विवादित अविभाजित संपत्ति है तो आपको पार्टीशन सूट डालना चाहिए..
2. मकान में किसी प्रकार का निर्माण कार्य हो रहा है तो उसके लिए Injunction (निषेधाज्ञा) सूट डालना चाहिए ताकि निर्माण कार्य करने से रोका जा सके.
3. अगर झूठा मामला दर्ज किया जा रहा है तो आप भी थाने/SP/SSP/DIG/IG या अदालत के माध्यम से शिकायत दर्ज कर करा सकते है.