समजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव



मुलायम सिंह यादव भारत के एक वरिष्ठ नेता है। वे समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य है। उनका जन्म 22 नवंबर 1939 को हुआ था। मुलायम सिंह यादव जब वर्ष 1996 में पहली बार ग्यारहवीं लोकसभा के लिए निर्वाचित किया गए थे तब मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 1998 से वर्ष 1996 के बीच संयुक्त मोर्चा सरकार के अधीन भारत के रक्षा मंत्री के रूप में सेवा की है।
पारिवारिक विवरण
मुलायम सिंह यादव एक गरीब किसान परिवार से सम्बंधित थे। वे इटावा, उत्तर प्रदेश में स्थित सैफई गांव में पैदा हुए थे। उनके पिता का नाम श्री सुघर सिंह था और माता का नाम श्रीमती. मूर्ति देवी था। मुलायम सिंह यादव ने मालती देवी से विवाह किया था जिनसे एक पुत्र अखिलेश यादव, उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री है।मालती देवी का वर्ष 2003 में निधन हो गया। उनकी दूसरी पत्नी साधना यादव है जिनसे जन्मे पुत्र का नाम प्रतीक यादव है।
शिक्षा
वह विभिन्न विश्वविद्यालयों अर्थात् से के.के. कॉलेज, इटावा, ए.के. कॉलेज, शिकोहाबाद और बी.आर. कॉलेज, आगरा विश्वविद्यालय.से बी.ए.बी.टी स्नातक राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री, प्राप्त की है। 1960 में वह राजनीति में शामिल हो गए।
व्यवसाय
1960: मुलायम सिंह यादव राजनीति में शामिल हो गए।
1967: मुलायम सिंह यादव ने पहली बार के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीता और साथ ही संसद के सदस्य बन गए। मुलायम सिंह यादव ने 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993, 1996, 2004 और 2007 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जीता।
1974: मुलायम सिंह यादव प्रतिनिहित विधायन समिति के सदस्य बने।
1977: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में सहकारी एवं पशुपालन मंत्री बने।
1980: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में लोकदल अध्यक्ष बने।
1982 - 1985: मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में लोकदल (बी) के अध्यक्ष बने।
1985 - 1987: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में जनता दल अध्यक्ष बने।
1989 - 1991: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के सदस्य थे।
1989: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
1989: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश की विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता बने।
1992: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश की विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता बने।
1993 - 1995: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।
1996: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में मैनपुरी सीट से पहली बार ग्यारहवीं लोकसभा के लिए चुने गए।
1996: मुलायम सिंह यादव संयुक्त मोर्चा सरकार के अधीन रक्षा मंत्रालय में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बने।
1996: मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में जनता दल के विधायक दल के नेता थे।
1996 - 1998: मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बने।
1998: मुलायम सिंह यादव दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
1998 - 1999: मुलायम सिंह यादव दूसरी बार के लिए बारहवीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।
1999: मुलायम सिंह यादव तीसरी बार के लिए तेरहवीं लोकसभा के निर्वाचित सदस्य बने।
1999 - 2000: मुलायम सिंह यादव पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस समिति के अध्यक्ष बने।
2003: मुलायम सिंह यादव फिर से तीसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और मई 2007 तक इस पद पर बने रहे।
2004: मुलायम सिंह यादव चौथी अवधि के लिए चौदहवें लोकसभा के निर्वाचित सदस्य बने।
2009: मुलायम सिंह यादव पांचवी बार पंद्रहवीं लोकसभा में एक निर्वाचित सदस्य बने।
2009: मुलायम सिंह यादव ऊर्जा संबंधी समिति के अध्यक्ष बने।
उपलब्धियाँ
मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी शहरों और गांवों में समाज के कुछ वर्गों के लोगों के उत्थान का सहयोगी बन गया है। मुलायम सिंह ने समाज के दबे-कुचले वर्गों के उत्थान के लिए समाजवादी पार्टी को एक वाहक बनाने के लिए संघर्ष किया है और उनके उत्थान में योगदान दिया है।


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गैर मुस्लिमों के विरूद्ध मुसलमानों को आतंक और हिंसा की राह दिखाती कुरान



आज के समय में मुझे कहने में गुरेज नहीं कि इस्लाम नीव वास्तव में आतंक पर ही रखी गयी थी. जिस आज भी इस्लाम के अनुयायी अनुसरण कर रहे है। वैश्विक इस्लामिक राष्ट्र का उद्देश्य लेकर चली आइएसआइएस का उद्देश्य  इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया मकसद इराक और सीरिया के साथ-साथ उत्तरी अफ्रीका से लेकर भारत तक सुन्नी इस्लामिक राज कायम करने की है। 

आइएसआइएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया

आइएसआइएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया


आइएसआइएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया

आइएसआइएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया ) दुनिया भर में कोहराम मचा रखा है। ऐसा माना जाता है कि इस संगठन को महिलाओं से खास नफरत है। ये संगठन हर कीमत पर अपना साम्राज्य फैलाना चाहता है! आइएसआइएस के मानवता को तार-तारकरने वाले कृत्य है इसे बिन्दुवार समझा जा सकता है। 
  • दहशत और आतंक का पर्याय बन चुके आतंकी संगठन आइएसआइएस ने एक नया फरमान जारी करते हुए कहा है कि गैर मुस्लिम महिलाओं संग सेक्स करना जायज है। 
  • यह कट्टरवादी संगठन अपने इस इरादे को पूरा करने के लिए छोटी नाबालिग बच्चियों को भी नहीं बख्शता है। खुले आम महिलाओं की बोली लगाना, उनकी खरीद-फरोख्त करना और उनके साथ बलात्कार करना इस संगठन के लिए बहुत आम बात हो गई है। 
  • आइएसआइएस इराक के शहर मोसुल में महिला बंदियों और उनकी स्वतंत्रता पर सवाल-जवाब वाले शीर्षक संबंधी पर्चों को वितरित करवा रहा है। इस पर्चे में उनके सभी नियम कायदों का ब्योरा है जिसके लिए वो दबाव बनवा रहे हैं। इन पर्चों में यह भी कहा गया है कि गैर मुस्लिम महिलाओं और बच्चों को किसी को भी बेचा जा सकता है और उन्हें किसी को गिफ्ट के तौर पर भेंट भी किया जा सकता है।
  • आइएसआइएस ने इराक में अपने कब्जे वाले इलाके में 11 से लेकर 46 साल तक की सभी महिलाओं को खतना करने का फरमान सुनाया है। 
  • ये संगठन 12 से 13 साल के बच्चों को बहला फुसला कर अपने संगठन में शामिल करता है और उन्हें वीडियो दिखाकर प्रशिक्षत करता है।  
  • अभी हाल ही में इन्होंने दो जापानी व्यक्तियों को बंधक बनाया था और उनको छोडऩे के बदले इस संगठन ने जापानी सरकार के 200 मिलियन अमेरीकी डालर की मांग की थी। 
  • ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि आइएसआइएस में 200,000 सैनिक होंगे ।  
  • जनवरी से सितंबर के बीच में इस संगठन से लगभग 9 हजार लोगों को मारा होगा और इसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल होंगे। दिनदहाड़े लोगों कि हत्याएं करना इस संगठन के लिए बहुत आम बात है। 
सीआइए के एक नवीनतम आकलन में कहा गया है कि इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुके आतंकवादी समूह इसलामिक स्टेट के लड़ाकों की संख्या 31,500 से ज्यादा है और यह आंकड़ा पूर्व के अनुमान से करीब तीन गुना अधिक है।  आइएसआइएस अलकायदा से टूट कर बना एक समूह है और इसने इराक तथा सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है. इससे क्षेत्र में खतरा पैदा हो गया है. अलकायदा ने ग्रुप से अपने आपको दूर रखा है। 

आज भारत में मुस्लिमो के विरूद्ध छोटी सी छोटी घटना को इतना तूल दिया जाता है और उसे नाक का प्रश्न बना दिया जाता है. किन्तु वैश्विक स्तर पर हो रही इस्लामिक हिंसा जिसमे करीब 5 लाख लोगो को जान से मार दिया गया उसे प्रति न तो भारत का मुस्लमान मुंह खोलने की स्थिति में है और न ही भारत के मुस्लिम परस्त नेता ही.

इस्लाम की वास्तविकता यह है कि इस्लाम एक लूटेरों का गिरोह था और कुरान इन लूटेरों की नियमावली जिसमे आतंक और हिंसा के नियम कायदे पंजीकृत किये गए थे. इस्लाम सिर्फ इस्लाम को मानने वालो का साथ रहने और खाने की अनुमति देता है और गैर मुस्लिमों के साथ कुछ भी आइएसआइएस अफ्रीका के देशों में कर रहा है वह किसी से छिपा नही है. आतंक की नियमावली कुरान गैर मुस्लिमों अनभिज्ञ है और इनका अनभिज्ञ होना भी आवश्यक है।

मानव एकता और भाईचारे के विपरीत कुरान का मूल तत्व और लक्ष्य इस्लामी एकता व इस्लामी भाईचारा है जैसा कि आईएसआईएस कर रहा है. मुसलमानों का गैर मुसलमानों के साथ मित्रता रखना कुरान में मना है और कुरान मुसलमानों को दूसरे धर्मो के विरूद्ध शत्रुता रखने का निर्देश देती है। कुरान के अनुसार जब कभी जिहाद हो ,तब गैर मुस्लिमों को देखते ही मार डालना चाहिए। कुरान में मुसलमानों को केवल मुसलमानों से मित्रता करने का आदेश है। सूरा 3 की आयत 118 में लिखा है कि, "अपने (मजहब) के लोगो के अतिरिक्त किन्ही भी लोगो से मित्रता मत करो।" लगभग यही बात सूरा 3 कि आयत 27 में भी कही गई है, "ईमानवाले मुसलमानों को छोड़कर किसी भी काफिर से मित्रता न करे।"

सन 1984 में हिंदू महासभा के दो कार्यकर्ताओं ने कुरान की 24 आयातों का एक पत्रक छपवाया । उस पत्रक को छपवाने पर उनको गिरफ्तार कर लिया गया परन्तु न्यायालय ने कुरान और इस्लाम के विभिन्न साहित्यों के अध्यन से पाया कि ये आयते मुसलमानों को गैर मुसलमानों के प्रति द्वेषभावना भड़काती है. इस विश्लेषण के बाद  तुंरत ही कोर्ट ने दोनों कार्यकताओं रिहा कर दिया और कोर्ट ने "कुरान मजीद का आदर करते  उल्लेखित किया कि  इन आयतों के सूक्ष्म अध्यन से पता चलता है कि निम्न आयते मुसलमानों को गैर मुसलमानों के प्रति द्वेषभावना भड़काती. "उन्ही आयतों में से कुछ आयतें निम्न है :-
  • "जब पवित्र महीने बीत जाए, तब काफ़िर जहा कही भी मिल जाए ,उन्हें घेर लो ,उन्हें पकड़ लो, हर जगह उनकी ताक में में छिपकर बैठो और उनपर अचानक हमला कर दो, उन्हें मार डालो |यदि वो प्रायश्चित करे, इस्लाम कबुल कर ले और नमाज पढ़े तो उन्हें छोड़ दो | वास्तब में अल्ला बहुत छ्मादानी और दयावान हैं "  _कुरान :-सूरा 9  आयात 5 || 
  • "हे इमां वालो अपने पिता व भाइयों को अपना मित्र न बनाओ ,यदि वे इमां कि अपेक्षा कुफ्र को पसंद करें ,और तुमसे जो मित्रता का नाता जोडेगा तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे। " सुरा 9 की आयत 23  इस आयत में नव प्रवेशी मुसलमानों को साफ आदेश है कि,जब कोई व्यक्ति मुस्लमान बने तो वह अपने माता , पिता, भाई सभी से सम्बन्ध समाप्त कर ले। 
  • सुरा 4 की आयत 56 तो मानवता की क्रूरतम मिशाल पेश करती है कि ”जिन लोगो ने हमारी आयतों से इंकार किया उन्हें हम अग्नि में झोंक देगे। जब उनकी खाले पक जाएँगी ,तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसा-स्वादन कर लें। निसंदेह अल्लाह ने प्रभुत्वशाली तत्व दर्शाया है।” 
  • सुरा 32 की आयत 22 में लिखा है “और उनसे बढकर जालिम कोन होगा जिसे उसके रब की आयतों के द्वारा चेताया जाए और फ़िर भी वह उनसे मुँह फेर ले।निश्चय ही ऐसे अप्राधिओं से हमे बदला लेना है।”
  • सुरा 9 ,आयत 123 में लिखा है की,” हे ईमानवालों, उन काफिरों से लड़ो जो तुम्हारे आस पास है, और चाहिए कि वो तुममे शक्ति पायें।”
  • सुरा 2 कि आयत 193उनके विरूद्ध जब तक लड़ते रहो, जब तक मूर्ती पूजा समाप्त न हो जाए और अल्लाह का मजहब(इस्लाम) सब पर हावी न हो जाए. ”
  • सूरा 26आयत 94 तो वे गुमराह (बुत व बुतपरस्त) औन्धे मुँह दोजख (नरक) की आग में डाल दिए जायंगे.”
  • सूरा 9, आयत 2 ”हे ईमानवालों (मुसलमानों) मुशरिक (मूर्ती पूजक) नापाक है। ”
  • गैर मुसलमानों को समाप्त करने के बाद उनकी संपत्ति ,उनकी औरतों ,उनके बच्चों का क्या किया जाए ? उसके बारे में कुरान ,मुसलमानों को उसे अल्लाह का उपहार समझ कर उसका भोग करना चाहिए।
  • सूरा 48,आयत 20 में कहा गया है ,…..”यह लूट अल्लाह ने दी है। ”
  • सूरा 8, आयत 69”उन अच्छी चीजो का जिन्हें तुमने युद्ध करके प्राप्त किया है,पूरा भोग करो।
  • सूरा 14, आयत 13 ”हम मूर्ती पूजकों को नष्ट कर देंगे और तुम्हे उनके मकानों और जमीनों पर रहने देंगे।”
  • मुसलमानों के लिए गैर मुस्लिमो के मकान व संपत्ति ही हलाल नही है, अपितु उनकी स्त्रिओं का भोग करने की भी पूरी इजाजत दी गई है।
  • सूरा 4,आयत 24”विवाहित औरतों के साथ विवाह हराम है , परन्तु युद्ध में माले-गनीमत के रूप में प्राप्त की गई औरतें तो तुम्हारी गुलाम है ,उनके साथ विवाह करना जायज है। ”
  • अल्बुखारी की हदीस जिल्द 4 सफा 88 में मोहम्मद ने स्‍वयं कहा है, “मेरा गुजर लूट पर होता है । ”
  • अल्बुखारी की हदीस जिल्द 1 सफा 199 में मोहम्मद कहता है ,.”लूट मेरे लिए हलाल कर दी गई है ,मुझसे पहले पेगम्बरों के लिए यह हलाल नही थी। ” 
इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्‍य बोको हरम और आईएसआईएस द्वारा कुरान, हदीस, हिदाया, सीरतुन्नबी में उल्‍लेखित की गई बातों को लागू कर पूरे विश्व को इस्लाम बनाना है।  इस्लाम के बुनयादी ग्रन्थ है। मुस्लिम धर्म ग्रन्‍थों मे मुसलमानों को दूसरे धर्म वालो के साथ क्रूरतम बर्ताव करके उनके सामने सिर्फ़ इस्लाम स्वीकार करना अथवा मृत्‍यु दो ही विचार रखने होते है।


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वज्रासन योग : विधि और लाभ



वज्रासन योग की सम्पूर्ण जानकारी – Vajrasana Yoga : Steps and Benefits 
वज्रासन के आश्चर्यजनक फायदे (Benefits of Vajrasana)
वज्रासन का अर्थ है बलवान स्थिति। पाचनशक्ति, वीर्यशक्ति तथा स्नायुशक्ति देने वाला होने से यह आसन वज्रासन कहलाता है। समस्त योगआसनों (Yogasana) में वज्रासन ही एक ऐसा आसन है, जिसे भोजन या नाश्ता करने के उपरांत तुरंत भी किया जा सकता है। स्वास्थ्य के लिए वज्रासन अभ्यास अति लाभदायक होता है। वज्रासन हर उम्र का व्यक्ति सरलता से कर सकता है। इस कल्याणकारी आसन को अंग्रेज़ी में Diamond Pose कहा जाता है। यह आसन दिन में किसी भी समय किया जा सकता है। वज्र का अर्थ कठोर/ मजबूत / प्रबल ऐसा होता है। शरीर में रक्त प्रवाह दुरुस्त करने और पाचनशक्ति (Digestive System) बढ़ाने के लिए वज्रासन एक उत्तम आसन बताया गया है। प्रतिदिन वज्रासन करने से जांघें और घुटनें मज़बूत बनते हैं। वज्रासन करने से कमर के निचले हिस्से से पैर तक के सारे स्नायुओं को कसरत मिलती है। तथा अधिक मात्रा में भोजन कर लेने के बाद होने वाली बेचैनी वज्रासन करने से दूर हो जाती है।
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क्रियाः ध्यान मूलाधार चक्र में श्वास दीर्घ
विधिः बिछे हुए आसन पर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर एडि़यों पर बैठ जायें। पैर के दोनों अंगूठे परस्पर लगे रहें। पैर के तलवों के ऊपर नितम्ब रहें। कमर बिल्कुल सीधी रहे, दोनों हाथ को कुहनियों से मोड़े बिना घुटनों पर रख दें। हथेलियाँ नीचे की ओर रहें। दृष्टि सामने स्थिर कर दें। पाँच मिनट से लेकर आधे घण्टे तक वज्रासन का अभ्यास कर सकते हैं। वज्रासन लगाकर भूमि पर लेट जाने से सुप्त वज्रासन होता है।

वज्रासन के आश्चर्यजनक फायदे
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Vajrasana Ke Fayde - वज्रासन के लाभ - Benefits of Vajrasana
वज्रासन के अभ्यास से शरीर का मध्यभाग सीधा रहता है। श्वास की गति मन्द पड़ने से वायु बढती है। आँखों की ज्योति तेज होती है। वज्रनाड़ी अर्थात वीर्यधारा नाड़ी मजबूत बनती है। वीर्य की ऊध्र्वगति होने से शरीर वज्र जैसा बनता है। लम्बे समय तक सरलता से यह आसन कर सकते हैं। इससे मन की चंचलता दूर होकर व्यक्ति स्थिर बुद्धिवाला बनता है। शरीर में रक्ताभिसरण ठीक से होकर शरीर निरोगी एवं सुन्दर बनता है। भोजन के बाद इस आसन में बैठने से पाचन शक्ति तेज होती है। कब्ज दूर होता है। भोजन जल्दी हज्म होता है। पेट की वायु का नाश होता है। कब्ज दूर होकर पेट के तमाम रोग नष्ट होते हैं। पाण्डुरोग से मुक्ति मिलती है। रीढ , कमर, जाँघ, घुटने और पैरों में शक्ति बढती है। कमर और पैर का वायु रोग दूर होता है। स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है। स्त्रियों के मासिक धर्म की अनियमित्ता जैसे रोग दूर होते हैं। शुक्रदोष, वीर्यदोष, घुटनों का दर्द आदि का नाश होता है। स्नायु पुष्ट होते हैं। स्फूर्ति बढने के लिए मानसिक निराशा दूर करने के लिए यह आसन उपयोगी है। ध्यान के लिये भी यह आसन उत्तम है। इसके अभ्यास से शारीरिक स्फूर्ति एवं मानसिक प्रसन्नता प्रकट होती है। दिन-प्रतिदिन शक्ति का संचार होता है इसलिए शारीरिक बल में खूब वृद्धि होती है। काग का गिरना अर्थात गले के टान्सिल्स, हड्डियों के पोल आदि स्थानों में उत्पन्न होने वाले श्वेतकण की संख्या में वृद्धि होने से आरोग्य का साम्राज्य स्थापित होता है। फिर व्यक्ति बुखार से सिरदर्द से, कब्ज से, मंदाग्नि से या अजीर्ण जैसे छोट-मोटे किसी भी रोग से पीडि़त नहीं रहता, क्योंकि रोग आरोग्य के साम्राज्य में प्रविष्ट होने का सााहस ही नहीं कर पाते।
  • शरीर को सुडौल बनाए रखता है और वजन कम करने में मददगार हैं।
  • महिलाओ में मासिक धर्म की अनियमितता दूर होती हैं।
  • रीढ़ की हड्डी मजबूत होती हैं और मन की चंचलता को दूर कर एकाग्रता बढ़ाता हैं।
  • अपचन, गैस, कब्ज इत्यादि विकारो को दूर करता हैं और पाचन शक्ति बढ़ाता हैं।
  • यह प्रजनन प्रणाली को सशक्त बनाता हैं।
  • सायटिका से पीड़ित व्यक्तिओ में लाभकर हैं।
  • इस आसन को नियमित करने से घुटनो में दर्द, गठिया होने से बचा जा सकता हैं।
  • पैरो के मांसपेशियों से जुडी समस्याओ में यह आसन मददगार हैं।
  • इस आसान में धीरे-धीरे लम्बी गहरी साँसे लेने से फेफड़े मजबूत होते हैं।
  • वज्रासन से नितम्ब (Hips), कमर (Waist) और जांघ (Thigh) पर जमी हुई अनचाही चर्बी (Fats) कम हो जाती हैं और उच्च रक्तचाप कम होता हैं।
 
वज्रासन कैसे करें – How to do Vajrasana Yoga
Vajrasana kaise kare - वज्रासन योग करने की विधि - How to do Vajrasan
  • भोजन करने के 5 मिनिट बाद एक समान, सपाट और स्वच्छ जगह पर कम्बल या अन्य कोई आसन बिछाए। दोनों पैर सामने की तरफ फैलाकर बैठ जाए।
  • इसके बाद बाए (Left) पैर का घुटने को मोड़कर इस तरह बैठे के पैरो के पंजे पीछे और ऊपर की और हो जाए।
  • अब दाए (Right) पैर का घुटना भी मोड़कर  इस तरह बैठे के पैरो के पंजे पीछे और ऊपर की और हो जाए और नितम्ब (Hips) दोनों एड़ियों (Ankle) के बीच आ जाए।
  • दोनों पैर के अंगूठे (Great Toe) एक दूसरे से मिलाकर रखे।दोनों एड़ियो में अंतर बनाकर रखे और    शरीर को सीधा रखे।
  • अपने दोनों हाथो को घुटने पर रखे और धीरे-धीरे शरीर को ढीला छोड़े।
  • आँखे बंद कर रखे और धीरे-धीरे लम्बी गहरी साँसे ले और छोड़े।
इस आसन को आप जब तक आरामदायक महसूस करे तब तक कर सकते हैं। शुरुआत में केवल 2 से 5 मिनिट तक ही करे। 

वज्रासन की समयसीमा – Time Duration Of Vajrasana
वज्रासन सुबह मेँ खाली पेट भी किया जा सकता है और भोजन के बाद भी किया जा सकता है। शुरुआत मेँ वज्रासन तीन से पाँच मिनट तक करना चाहिए। अभ्यास बढ़ जाने पर इसे अधिक समय तक (दस मिनट तक) भी किया जा सकता है।पैर दुखने लगें या कमर दर्द होने लगे उतनी देर तक वज्रासन मेँ नहीं बैठना है
 

वज्रासन से जुडी सावधानिया एवं नुकसान - /Precaution/Side-Effects Of Vajrasana
  • वज्रासन करने पर चक्कर आनें लगे, पीठ दर्द होने लगे, टखनें दुखने लगें, घुटनें या शरीर के कोई भी अन्य जौड़ अधिक दर्द करें लगे तो फौरन इस आसन का अभ्यास रोक कर डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
  • एड़ी के रोग से पीड़ित व्यक्ति वज्रासन न करे।
  • अगर वज्रासन करने पर आपको कमर दर्द, कमजोरी या चक्कर आने जैसे कोई समस्या हो तो आसन बंद कर अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले।
  • गर्भवती महिलाओं को वज्रासन बिलकुल “नहीं” करना चाहिए।
  • वज्रासन करने वाले व्यक्ति को यह आसन हड़बड़ी में नहीं करना चाहिए। टखनें, घुटनें, या एड़ियों पर किसी भी तरह का ऑपरेशन कराया हों, उन्हे यह आसन बिलकुल नहीं करना चाहिए। हड्डियों मेँ कम्पन की बीमारी वाले व्यक्ति को यह आसन नहीं करना चाहिए।
Baba Ramdev - Vajrasana - Meditative Asanas - Yoga Health Fitness  
 वज्रासन (डायमंड मुद्रा)


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स्वस्थ सेहत के लिए क्या, कब कैसे और क्यों खाएं



इंसान जीवन में रोटी कपड़ा और मकान के लिए मेहनत करता हैं। लेकिन अक्सर वह मेहनत के दौरान कपड़े और मकान पर तो ध्यान देता हैं जबकि रोटी यानी खाने पर उतना ध्यान नहीं देता। यही वजह है कि आजकल हर दिन कोई नई बीमारी युवाओं को अपना शिकार बना रही है। हमारी परंपरा में भोजन के कुछ सामान्य नियम हैं,  हर इंसान को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए, उसे कब और क्या खाना है जिससे वह अपने आपको स्वस्थ रख सके। सेहतमंद और तरोताजा बने रहने के लिए जरूरी है घर के हर सदस्य को पता हो खान-पान से संबंधी उपयोगी एवं आवश्यक जानकारियां आइए उन्हें जानते हैं।

कब और कैसे खाएं
  • बिना प्रातः स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए।
  • भोजन को धीरे-धीरे चबाकर खाना चाहिए।
  • भोजन को कभी भी ठूस-ठूंसकर नहीं खाना चाहिए। इससे कई रोग हो सकते हैं।
  • भोजन तीन-चैथाई पेट ही करना चाहिए। 
  • भूख लगने पर पानी और प्यास लगने पर भोजन नहीं करना चाहिए, अन्यथा स्वास्थ्य को हानि पहुचती है। जैसे खाने की आवश्यकता महसूस होने पर उसे पानी पीकर समाप्त करने की कोशिश या प्यास लगने पर कुछ भी खाकर प्यास को टाल देना गलत है।
  • भोजन के बीच में प्यास लगने पर थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीना चाहिए। भोजन के तुरंत पहले या अंत में तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए।
  • हजार काम छोड़कर नियमित समय पर भोजन करें।
  • बासी, ठंडा, कच्चा अथवा जला हुआ और दोबारा गर्म किया हुआ भोजन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी नहीं होता।
  • खाने के साथ सलाद और अंत में फल जरूर खाएं।
  • भोजन पच जाने पर ही दूसरी बार भोजन करना चाहिए।
  • प्रातः भोजन के बाद शाम को यदि अजीर्ण मालूम हो तो कुछ नर्म भोजन लिया जा सकता है। परन्तु रात्रि को भोजन के बाद प्रातः अजीर्ण हो तो बिल्कुल भोजन नहीं करना चाहिए।
  • भोजन के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिए।

 क्या और क्यों खाएं
  • आप अपनी डाइट में विटामिन को शामिल करना चाहतें हैं, तो खाने में मेथी, पालक, सहजन और दूसरी पत्तेदार सब्जियों का होना जरूरी है।
  • एक मध्यम आकार के शकरकंद में लगभग 100 कैलोरी होती है। शकरकंद में बीटा-कैरोटीन होते हैं। इसके अलावा पोटैशियम व मैग्नीशियम जैसे खनिज मौजूद होते हैं। सप्ताह में 2 या 3 बार शकरकंद खाएं।
  • संतरे में विटामिन सी होता है। यह विटामिन टूटी-फूटी कोशिकाओं की मरम्मत करता है। यह आयरन के अवशोषण में भी मददगार होता है। यह खनिज थकावट और लो एनर्जी को दूर करता है। एक दिन में एक संतरा खाएं और 200 मिली संतरे का जूस पिएं।
  • सूप को भी डाइट में शामिल करना जरूरी है। कोशिश करें कि एक कप लो कैलोरी और लो सोडियम वेजिटेबल सूप एक दिन में पिएं। एक स्टडी में पाया गया है कि दिन में दो बार सूप पीने वाला व्यक्ति उसी कैलोरी में स्नैक्स खाने वाले व्यक्ति की तुलना में तेजी से वेट लाॅस करता है।
  • एक कप पालक में 40 कैलोरी होती है। इतनी मात्रा आपके दिनभर की कुल फाइबर जरूरत का 20 प्रतिशत है। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम की अच्छी स्रोत हैं। यह मांसपेशियों के संकुचन में मददगार होती है।
  • जिन लोगों को हाई ब्लडप्रेशर की परेशानी हो, उन्हें डाइट लेने में सावधानी बरतनी चाहिए। कैल्शियम के लिए वे स्किम्ड मिल्क, बींस व दाल जैसे चना, मूंग  लें, जबकि मैग्नीशियम के लिए साबुत अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी और साबुत गेहूं का आटा डाइट में शामिल करें। पोटैशियम के लिए गहरे रंग के फल और सब्जियां खूब खाएं।
  • ये सभी ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखते हैं। भोजन में रोजाना 5 ग्राम या इससे अधिक फाइबर लेने से भी हाई कोलेस्ट्राॅल, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे की समस्या 30 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
  • सामान्य मसालों में लौंग प्राकृतिक रूप से एंटी आॅक्सीडेंट का सबसे बढि या स्रोत है। इसलिए मसालों में इसको जरूर शामिल करें।


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भारतीय शिक्षा व्यवस्था का पतन मैकाले दोषी या हमारी अकर्मण्यता



मैकाले नाम हम अक्सर सुनते है मगर ये कौन था? इसके उद्देश्य और विचार क्या थे ?

मैकाले: मैकाले का पूरा नाम था ‘थॉमस बैबिंगटन मैकाले’....अगर ब्रिटेन के नजरियें से देखें...तो अंग्रेजों का ये एक अमूल्य रत्न था। एक उम्दा इतिहासकार, लेखक प्रबंधक, विचारक और देशभक्त.....इसलिए इसे लार्ड की उपाधि मिली थी और इसे लार्ड मैकाले कहा जाने लगा। अब इसके महिमामंडन को छोड़ मैं इसके एक ब्रिटिश संसद को दिए गए प्रारूप का वर्णन करना उचित समझूंगा जो इसने भारत पर कब्ज़ा बनाये रखने के लिए दिया था ...२ फ़रवरी १८३५ को ब्रिटेन की संसद में मैकाले की भारत के प्रति विचार और योजना मैकाले के शब्दों में: 
"मैं भारत में काफी घुमा हूँ। दाएँ- बाएँ, इधर उधर मैंने यह देश छान मारा और मुझे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं दिखाई दिया, जो भिखारी हो, जो चोर हो। इस देश में मैंने इतनी धन दौलत देखी है, इतने ऊँचे चारित्रिक आदर्श और इतने गुणवान मनुष्य देखे हैं की मैं नहीं समझता की हम कभी भी इस देश को जीत पाएँगे। जब तक इसकी रीढ़ की हड्डी को नहीं तोड़ देते जो इसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत है और इसलिए मैं ये प्रस्ताव रखता हूँ की हम इसकी पुराणी और पुरातन शिक्षा व्यवस्था, उसकी संस्कृति को बदल डालें, क्यूंकी अगर भारतीय सोचने लग गए की जो भी विदेशी और अंग्रेजी है वह अच्छा है और उनकी अपनी चीजों से बेहतर हैं, तो वे अपने आत्मगौरव, आत्म सम्मान और अपनी ही संस्कृति को भुलाने लगेंगे और वैसे बन जाएंगे जैसा हम चाहते हैं। एक पूर्णरूप से गुलाम भारत।"

कई बंधू इस भाषण की पंक्तियों को कपोल कल्पित कल्पना मानते हैं.....अगर ये कपोल कल्पित पंक्तिया है, तो इन काल्पनिक पंक्तियों का कार्यान्वयन कैसे हुआ ? मैकाले की गद्दार औलादें इस प्रश्न पर बगलें झाकती दिखती हैं और कार्यान्वयन कुछ इस तरह हुआ की आज भी मैकाले व्यवस्था की औलादें सेकुलर भेष में यत्र तत्र बिखरी पड़ी हैं। अरे भाई मैकाले ने क्या नया कह दिया भारत के लिए ?

भारत इतना संपन्न था की पहले सोने चांदी के सिक्के चलते थे कागज की नोट नहीं। धन दौलत की कमी होती तो इस्लामिक आतातायी श्वान और अंग्रेजी दलाल यहाँ क्यों आते... लाखों करोड़ रूपये के हीरे जवाहरात ब्रिटेन भेजे गए जिसके प्रमाण आज भी हैं मगर ये मैकाले का प्रबंधन ही है की आज भी हम लोग दुम हिलाते हैं 'अंग्रेजी और अंग्रेजी संस्कृति' के सामने। हिन्दुस्थान के बारे में बोलने वाला संस्कृति का ठेकेदार कहा जाता है और घृणा का पात्र होता है। 

1. शिक्षा व्यवस्था में मैकाले प्रभाव : ये तो हम सभी मानते है की हमारी शिक्षा व्यवस्था हमारे समाज की दिशा एवं दशा तय करती है। बात १८२५ के लगभग की है जब ईस्ट इंडिया कंपनी वितीय रूप से संक्रमण काल से गुजर रही थी और ये संकट उसे दिवालियेपन की कगार पर पहुंचा सकता था। कम्पनी का काम करने के लिए ब्रिटेन के स्नातक और कर्मचारी अब उसे महंगे पड़ने लगे थे। १८२८ में गवर्नर जनरल विलियम बेंटिक भारत आया जिसने लागत घटने के उद्देश्य से अब प्रसाशन में भारतीय लोगों के प्रवेश के लिए चार्टर एक्ट में एक प्रावधान जुड़वाया की सरकारी नौकरी में धर्म जाती या मूल का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। यहाँ से मैकाले का भारत में आने का रास्ता खुला। अब अंग्रेजों के सामने चुनौती थी की कैसे भारतियों को उस भाषा में पारंगत करें जिससे की ये अंग्रेजों के पढ़े लिखे हिंदुस्थानी गुलाम की तरह कार्य कर सकें। इस कार्य को आगे बढाया जनरल कमेटी ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन के अध्यक्ष 'थोमस बैबिंगटन मैकाले' ने.... 1858 में लोर्ड मैकोले द्वारा Indian Education Act बनाया गया। मैकाले की सोच स्पष्ट थी, जो की उसने ब्रिटेन की संसद में बताया जैसा ऊपर वर्णन है। उसने पूरी तरह से भारतीय शिक्षा व्यवस्था को ख़त्म करने और अंग्रेजी (जिसे हम मैकाले शिक्षा व्यवस्था भी कहते है) शिक्षा व्यवस्था को लागू करने का प्रारूप तैयार किया। मैकाले के शब्दों में:
 "हमें एक हिन्दुस्थानियों का एक ऐसा वर्ग तैयार करना है जो हम अंग्रेज शासकों एवं उन करोड़ों भारतीयों के बीच दुभाषिये का काम कर सके, जिन पर हम शासन करते हैं। हमें हिन्दुस्थानियों का एक ऐसा वर्ग तैयार करना है, जिनका रंग और रक्त भले ही भारतीय हों लेकिन वह अपनी अभिरूचि, विचार, नैतिकता और बौद्धिकता में अंग्रेज हों।" 
आज कितने ऐसे मैकाले व्यवस्था की नाजायज श्वान रुपी संताने हमें मिल जाएंगी... जिनकी मात्रभाषा अंग्रेजी है और धर्मपिता मैकाले। इस पद्दति को मैकाले ने सुन्दर प्रबंधन के साथ लागू किया। अब अंग्रेजी के गुलामों की संख्या बढने लगी और जो लोग अंग्रेजी नहीं जानते थे वो अपने आप को हीन भावना से देखने लगे क्योंकि सरकारी नौकरियों के ठाठ उन्हें दिखते थे, अपने भाइयों के जिन्होंने अंग्रेजी की गुलामी स्वीकार कर ली और ऐसे गुलामों को ही सरकारी नौकरी की रेवड़ी बँटती थी। कालांतर में वे ही गुलाम अंग्रेजों की चापलूसी करते करते उन्नत होते गए और अंग्रेजी की गुलामी न स्वीकारने वालों को अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया। विडम्बना ये हुई की आजादी मिलते मिलते एक बड़ा वर्ग इन गुलामों का बन गया जो की अब स्वतंत्रता संघर्ष भी कर रहा था। यहाँ भी मैकाले शिक्षा व्यवस्था चाल कामयाब हुई अंग्रेजों ने जब ये देखा की भारत में रहना असंभव है तो कुछ मैकाले और अंग्रेजी के गुलामों को सत्ता हस्तांतरण कर के ब्रिटेन चले गए ..मकसद पूरा हो चुका था.... अंग्रेज गए मगर उनकी नीतियों की गुलामी अब आने वाली पीढ़ियों को करनी थी और उसका कार्यान्वयन करने के लिए थे कुछ हिन्दुस्तानी भेष में बौद्धिक और वैचारिक रूप से अंग्रेज नेता और देश के रखवाले (नाम नहीं लूँगा क्यूंकी एडविना की आत्मा को कष्ट होगा) कालांतर में ये ही पद्धति विकसित करते रहे हमारे सत्ता के महानुभाव ..इस प्रक्रिया में हमारी भारतीय भाषाएँ गौड़ होती गयी और हिन्दुस्थान में हिंदी विरोध का स्वर उठने लगा। ब्रिटेन की बौद्धिक गुलामी के लिए  आज का भारतीय समाज आन्दोलन करने लगा। फिर आया उपभोगतावाद का दौर और मिशिनरी स्कूलों का दौर चूँकि २०० साल हमने अंग्रेजी को विशेष और भारतीयता को गौण मानना शुरू कर दिया था तो अंग्रेजी का मतलब सभ्य होना, उन्नत होना माना जाने लगा। हमारी पीढियां मैकाले के प्रबंधन के अनुसार तैयार हो रही थी और हम भारत के शिशु मंदिरों को सांप्रदायिक कहने लगे क्यूंकी भारतीयता और वन्दे मातरम वहां सिखाया जाता था। जब से बहुराष्ट्रीय कंपनिया आयीं उन्होंने अंग्रेजो का इतिहास दोहराना शुरू किया और हम सभी सभ्य बनने में, उन्नत बनने में लगे रहे मैकाले की पद्धति के अनुसार ..अब आज वर्तमान में हमें नौकरी देने वाली हैं अंग्रेजी कंपनिया जैसे इस्ट इंडिया थी। अब ये ही कंपनिया शिक्षा व्यवस्था भी निर्धारित करने लगी और फिर बात वही आयी कम लागत वाली, तो उसी तरह का अवैज्ञानिक व्यवस्था बनाओं जिससे कम लागत में हिन्दुस्थानियों के श्रम एवं बुद्धि का दोहन हो सके।

एक उदहारण देता हूँ:  कुकुरमुत्ते की तरह हैं इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थान ..मगर शिक्षा पद्धति ऐसी है की १०००  इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग स्नातकों में से शायद १० या १५ स्नातक ही रेडियो या किसी उपकरण की मरम्मत कर पायें, नयी शोध तो दूर की कौड़ी है.. अब ये स्नातक इन्ही अंग्रेजी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के पास जातें है और जीवन भर की प्रतिभा ५ हजार रूपए प्रति महीने पर गिरवी रख गुलामों सा कार्य करते है ...फिर भी अंग्रेजी की ही गाथा सुनाते है.. अब जापान की बात करें १०वीं में पढने वाला छात्र भी प्रयोगात्मक ज्ञान रखता है ...किसी मैकाले का अनुसरण नहीं करता.. अगर कोई संस्थान अच्छा है जहाँ भारतीय प्रतिभाओं का समुचित विकास करने का परिवेश है तो उसके छात्रों को ये कंपनिया किसी भी कीमत पर नासा और इंग्लैंड में बुला लेती है और हम मैकाले के गुलाम खुशिया मनाते हैं की हमारा फला अमेरिका में नौकरी करता है। इस प्रकार मैकाले की एक सोच ने हमारी आने वाली शिक्षा व्यवस्था को इस तरह पंगु बना दिया की न चाहते हुए भी हम उसकी गुलामी में फसते जा रहें है।

इस Indian Education Act की ड्राफ्टिंग लोर्ड मैकोले ने की थी। लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत के शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी। अंग्रेजों का एक अधिकारी था G.W.Litnar और दूसरा था Thomas Munro, दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था। 1823 के आसपास की बात है ये Litnar , जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा है कि यहाँ 97% साक्षरता है और Munro, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100 % साक्षरता है और उस समय जब भारत में इतनी साक्षरता है और मैकोले का स्पष्ट कहना था कि:

"भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो इसकी देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे।"
और मैकोले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है
"कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी।" 

इसलिए उसने सबसे पहले गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया, जब गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज के तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी, फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया और इस देश के गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया उनमे आग लगा दी, उसमें पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने मारा-पीटा, जेल में डाला। 1850 तक इस देश में 7 लाख 32 हजार गुरुकुल हुआ करते थे और उस समय इस देश में गाँव थे 7 लाख 50 हजार, मतलब हर गाँव में औसतन एक गुरुकुल और ये जो गुरुकुल होते थे वो सब के सब आज की भाषा में Higher Learning Institute हुआ करते थे उन सबमे 18 विषय पढाया जाता था और ये गुरुकुल समाज के लोग मिल के चलाते थे न कि राजा, महाराजा, और इन गुरुकुलों में शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी। इस तरह से सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और फिर अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया। फिर कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे फ्री स्कूल कहा जाता था, इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं और मैकोले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमें वो लिखता है कि::

"इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी" 
और उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा, अरे हम तो खुद में हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आ रही है, दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा।

लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है, दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी, समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी। संयुक्त राष्ट संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है। जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकोले की रणनीति थी।


2. समाज व्यवस्था में मैकाले प्रभाव :  अब समाज व्यवस्था की बात करें तो शिक्षा से समाज का निर्माण होता है। सन् 1836 में लार्ड मैकाले अपने पिता को लिखे एक पत्र में कहता है:
"अगर हम इसी प्रकार अंग्रेजी नीतिया चलाते रहे और भारत इसे अपनाता रहा तो आने वाले कुछ सालों में 1 दिन ऐसा आएगा की यहाँ कोई सच्चा भारतीय नहीं बचेगा।" (सच्चे भारतीय से मतलब......चरित्र में ऊँचा, नैतिकता में ऊँचा, धार्मिक विचारों वाला, धर्मं के रस्ते पर चलने वाला)।
भारत को जय करने के लिए, चरित्र गिराने के लिए, अंग्रेजो ने 1758 में कलकत्ता में पहला शराबखाना खोला, जहाँ पहले साल वहाँ सिर्फ अंग्रेज जाते थे। आज पूरा भारत जाता है। सन् 1947 में 3.5 हजार शराबखानो को सरकार का
लाइसेंस। सन् 2009-10 में लगभग 25,400 दुकानों को मौत का व्यापार करने की इजाजत। चरित्र से निर्बल बनाने के लिए सन् 1760 में भारत में पहला वेश्याघर 'कलकत्ता में सोनागाछी' में अंग्रेजों ने खोला और लगभग 200 स्त्रियों को जबरदस्ती इस काम में लगाया गया। आज अंग्रेजों के जाने के 64 सालों के बाद, आज लगभग 20,80,000 माताएँ, बहनें इस गलत काम में लिप्त हैं। अंग्रेजों के जाने के बाद जहाँ इनकी संख्या में कमी होनी चाहिए थी वहीं इनकी संख्या में दिन दुनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है ।

शिक्षा अंग्रेजी में हुए तो समाज खुद ही गुलामी करेगा, वर्तमान परिवेश में 'MY HINDI IS A LITTLE BIT WEAK' बोलना स्टेटस सिम्बल बन रहा है जैसा मैकाले चाहता था की हम अपनी संस्कृति को हीन समझे ...मैं अगर कहीं यात्रा में हिंदी बोल दूँ, मेरे साथ का सहयात्री सोचता है की ये पिछड़ा है ..लोग सोचते है त्रुटी हिंदी में हो जाए चलेगा मगर अंग्रेजी में नहीं होनी चाहिए ..और अब हिंगलिश भी आ गयी है बाज़ार में..क्या ऐसा नहीं लगता की इस व्यवस्था का हिंदुस्थानी 'धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का' होता जा रहा है। अंग्रेजी जीवन में पूर्ण रूप से नहीं सिख पाया क्यूंकी विदेशी भाषा है...और हिंदी वो सीखना नहीं चाहता क्यूंकी बेइज्जती होती है। हमें अपने बच्चे की पढाई अंग्रेजी विद्यालय में करानी है क्यूंकी दौड़ में पीछे रह जाएगा। माता पिता भी क्या करें बच्चे को क्रांति के लिए भेजेंगे क्या ?? क्यूकी आज अंग्रेजी न जानने वाला बेरोजगार है ..स्वरोजगार के संसाधन ये बहुराष्ट्रीय कंपनिया ख़त्म कर देंगी फिर गुलामी तो करनी ही होगी..तो क्या हम स्वीकार कर लें ये सब?? या हिंदी या भारतीय भाषा पढ़कर समाज में उपेक्षा के पात्र बने?? शायद इसका एक ही उत्तर है हमें वर्तमान परिवेश में हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों को स्थापित करना होगा। हमें विवेकानंद का "स्व" और क्रांतिकारियों का देश दोनों को जोड़ कर स्वदेशी की कल्पना को मूर्त रूप देने का प्रयास करना होगा, चाहे भाषा हो या खान पान या रहन सहन पोशाक। अगर मैकाले की व्यवस्था को तोड़ने के लिए मैकाले की व्यवस्था में जाना पड़े तो जाएँ ....जैसे मैं 'अंग्रेजी गूगल' का इस्तेमाल करके हिंदी लिख रहा हूँ और इसे 'अँग्रेजी फ़ेसबुक' पर शेयर कर रहा हूँ .....क्यूंकी कीचड़ साफ करने के लिए हाथ गंदे करने होंगे। हर कोई छद्म सेकुलर बनकर सफ़ेद पोशाक पहन कर मैकाले के सुर में गायेगा तो आने वाली पीढियां हिन्दुस्थान को ही मैकाले का भारत बना देंगी। उन्हें किसी ईस्ट इंडिया की जरुरत ही नहीं पड़ेगी गुलाम बनने के लिए और शायद हमारे आदर्शो 'राम और कृष्ण' को एक कार्टून मनोरंजन का पात्र। आज हमारे सामने पैसा चुनौती नहीं बल्कि भारत का चारित्रिक पतन चुनौती है। इसकी रक्षा और इसको वापस लाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

3.  कानून व्यवस्था में मैकाले प्रभाव :   मैकाले ने एक कानून हमारे देश में लागू किया था जिसका नाम है Indian Penal Code (IPC). ये Indian Penal Code अंग्रेजों के एक और गुलाम देश Ireland के Irish Penal Code की फोटोकॉपी है, वहां भी ये IPC ही है लेकिन Ireland में जहाँ "I" का मतलब Irish है वहीं भारत में इस "I" का मतलब Indian है, इन दोनों IPC में बस इतना ही अंतर है बाकि कौमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है।
मैकोले का कहना था कि भारत को हमेशा के लिए गुलाम बनाना है तो इसके शिक्षा तंत्र और न्याय व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करना होगा और आपने अभी ऊपर Indian Education Act पढ़ा होगा, वो भी मैकोले ने ही बनाया था और उसी मैकोले ने इस IPC की भी ड्राफ्टिंग की थी। ये बनी 1840 में और भारत में लागू हुई 1860 में। ड्राफ्टिंग करते समय मैकोले ने एक पत्र भेजा था ब्रिटिश संसद को जिसमे उसने लिखा था कि:
"मैंने भारत की न्याय व्यवस्था को आधार देने के लिए एक ऐसा कानून बना दिया है जिसके लागू होने पर भारत के किसी आदमी को न्याय नहीं मिल पायेगा। इस कानून की जटिलताएं इतनी है कि भारत का साधारण आदमी तो इसे समझ ही नहीं सकेगा और जिन भारतीयों के लिए ये कानून बनाया गया है उन्हें ही ये सबसे ज्यादा तकलीफ देगी और भारत की जो प्राचीन और परंपरागत न्याय व्यवस्था है उसे जड़मूल से समाप्त कर देगा।“  
वो आगे लिखता है कि
"जब भारत के लोगों को न्याय नहीं मिलेगा तभी हमारा राज मजबूती से भारत पर स्थापित होगा।"  
ये हमारी न्याय व्यवस्था अंग्रेजों के इसी IPC के आधार पर चल रही है और आजादी के 64 साल बाद हमारी न्याय व्यवस्था का हाल देखिये कि लगभग 4 करोड़ मुक़दमे अलग-अलग अदालतों में पेंडिंग हैं, उनके फैसले नहीं हो पा रहे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा लोग न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं लेकिन न्याय मिलने की दूर-दूर तक सम्भावना नजर नहीं आ रही है, कारण क्या है? कारण यही IPC है। IPC का आधार ही ऐसा है।
(संकलित )


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भारतीय राजव्यवस्था के कुछ तथ्य



  • राजनीति विज्ञान की दृष्टि से भारत है- एक राज्य
  • उत्तर प्रदेश है- एक प्रांत या इकाई
  • भारत है- एक गणराज्य
  • गणराज्य का अर्थ है- राज्य का सर्वोच्च पदाधिकारी जनता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से निर्वाचित हो।
  • भारत में राज्य का प्रधान है- राष्ट्रपति
  • भारत में शासन का प्रधान है- प्रधानमंत्री
  • राष्ट्रपति नाम मात्र का शासक है जबकि प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद वास्तविक ।
  • भारत में संसदात्मक शासन व्यवस्था को अपनाया गया है जबकि अमेरिका में  अध्क्षात्मक को।
  • संसदात्मक शासन व्यवस्था में वास्तविक कार्यपालिका संसद में से ली जाती है तथा उसी के प्रति उत्तरदायी होती है।
  • राष्ट्रपति निर्वाचित होता है जबकि प्रधानमंत्री नियुक्त।
  • राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रुप से होता है।
  • राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के दोनो सदनों व प्रांतीय विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।
  • मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग नहीं लेते हैं।
  • प्रांतीय विधान परिषदों  के सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग नहीं लेते हैं।
  • राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है।
  • राष्ट्रपति बनने के लिए लोकसभा सदस्य बनने के लिए आवश्यक योग्यता तथा 35 वर्ष की आयु चाहिए।
  • राष्ट्रपति के पुनर्निवाचन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
  • राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अथवा उनकी अनुपस्थिति में वरिष्ठतम न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं।
  • राष्ट्रपति का कार्यकाल शपथ ग्रहण की दिनांक से प्रारंभ होता है न कि निर्वाचित होने की दिनांक से।
  • राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है।
  • राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति तथा उनकी भी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति के रुप में कार्य करते हैं।
  • राष्ट्रपति के वेतन तथा भत्ते भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं।
  • भारत में दो निधियां हैं- संचित तथा आकस्मिक निधि।
  • महाभियोग केवल राष्ट्रपति पर लगाया जाता है अन्य पदाधिकारियों पर केवल पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया जाता है।
  • महाभियोग से पूर्व राष्ट्रपति को 14 दिन का नोटिस देना आवश्यक है।
  • राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को सौंपते हैं।
  • मंत्रिपरिषद संवैधानिक संस्था है जबकि मंत्रिमण्डल गैरसंवैधानिक।
  • मंत्रिपरिषद में 3 स्तर के मंत्री होते हैं- केबीनेट,राज्य तथा उप मंत्री।
  • मंत्रिमण्डल में केवल केबीनेट स्तर के।
  • प्रधानमंत्री एवं अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • संसद के सदस्य बने बिना कोई व्यक्ति 6 माह तक प्रधानमंत्री या मंत्री रह सकता है।
  • किसी भी दल को बहुमत प्राप्त न होने अथवा बहुमत दल में कोई सर्वमान्य नेता उपलब्ध न होने की स्थिति में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति में स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं।
  • मंत्रियों की नियुक्ति में राष्ट्रपति स्वविवेक का प्रयोग नहीं कर सकते हैं।
  • आपात काल के 3 प्रकार हैं- राष्ट्रीय, राज्य तथा वित्तीय।
  • आपात काल मंत्रिपरिषद के लिखित परामर्श पर राष्ट्रपति द्वारा लागू किया जाता है।
  • उपराष्ट्रपति के चुनाव में मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं।
  • उपराष्ट्रपति के चुनाव में केवल संसद के सदस्य भाग लेते हैं, राज्य विधानसभा सदस्य नहीं।
  • उपराष्ट्रपति को अपने पद का कोई वेतन नहीं मिलता, उन्हे राज्यसभा के सभापति होने के नाते वेतन मिलता है।
  • राज्यसभा का सदस्य ना होते हुए भी उपराष्ट्रपति इसके पदेन सभापति होते हैं।


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तुलसी रचित श्री राम चरित् मानस के चुनिंदा अंश



  • "बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे।।"
    सुनने में कठोर परन्तु हितकारी वचन कहने व सुनने वाले मनुष्य बहुत थोडे हैं।
  • "नारि सुभाउ सत्य सब कहहिं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।।
    साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।।"

    नारी के हृदय में आठ अवगुण सदा रहते हैं-साहस, झूठ, चंचलता, छल, भय, अविवेक,अपवित्रता व निर्दयता।
  • "प्रीति विरोध समान सन करिअ नीति असि आहि।
    जौं मृगपति बध मेडुकन्हि भल कि कहई कोउ ताहि।।"

    प्रीति और वैर बराबरी वालों से ही करना चाहिए, नीति ऐसी ही है; सिंह यदि मेंढकों के मारे तो क्या उसे कोई भला कहेगा।
  • "काल दंड गहि काहु न मारा हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।"काल दंड(लाठी) लेकर किसी को नहीं मारता; वह तो धर्म,बल बुद्धि व विचार को हर लेता है।
  • "सुत, बित, नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।
    अस बिचारि जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।"

    पुत्र,धन,स्त्री,घर और परिवार; ये जगत में बार-बार होते हैं और जाते हैं,परन्तु जगत में सहोदर भाई बार बार नहीं मिलता।
  • "पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।’
    पर द्रोही पर दार रत पर धन पर अपवाद।ते नर पाँवर पापमय देह धरें मनुजाद।।"

    जो दूसरों से द्रोह करते हैं, परायी स्त्री, पराया धन, परायी निन्दा में आसक्त रहते हैं वे पापमय मनुष्य नर शरीर धारण किए हुए राक्षस ही हैं।
  • "श्री मद बक्र न कीन्ह केहि प्रभुता बधिर न काहि।
    मृग लोचनि के नैन सर को अस लाग न जाहि।।"

    लक्ष्मी के मद् ने किसको टेढा और प्रभुता ने किसको बहरा न कर दिया? ऐसा कौन है जिसे मृगनयनी के नेत्र बाण न लगे हों।
  • "नारि बिबस नर सकल गौसाईं। नाचहिं नट मर्कट की नाईं।।"
    सभी मनुष्य स्त्रियों के विशेष वश में हैं और (कलियुग में) बाजीगर के बंदर की तरह नाचते हैं।


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भारतीय राजव्यवस्था एवं संविधान के प्रश्न उत्तर



  • लोक सभा तथा राज्य सभा की संयुक्त बैठक कब होती है? → संसद का सत्र शुरू होने पर
  • किस व्यक्ति ने वर्ष 1922 में यह माँग की कि भारत के संविधान की संरचना हेतु गोलमेज सम्मेलन बुलाना चाहिए? → मोती लाल नेहरू
  • कांग्रेस ने किस वर्ष किसी प्रकार के बाह्य हस्तक्षेप के बिना भारतीय जनता द्वारा संविधान के निर्माण की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया था? → 1936
  • वर्ष 1942 में किस योजना के तहत यह स्वीकार किया गया कि भारत में एक निर्वाचित संविधान सभा का गठन होगा, जो युद्धोपरान्त संविधान का निर्माण करेगी? → क्रिप्स योजना
  • राज्यसभा के लिए नामित प्रथम फिल्म अभिनेत्री कौन थीं? → नरगिस दत्त
  • संविधान संशोधन कितने प्रकार से किया जा सकता है? → 5
  • संविधान सभा के लिए चुनाव कब निश्चित हुआ? → जुलाई 1946
  • संविधान सभा को किसने मूर्त रूप प्रदान किया? → जवाहरलाल नेहरू
  • भारत में कुल कितने उच्च न्यायालय हैं? → 21
  • संविधान सभा की प्रथम बैठक कब हुई थी? → 9 दिसम्बर, 1946
  • राष्ट्रपति चुनाव संबंधी मामले किसके पास भेजे जाते हैं? → उच्चतम न्यायालय
  • प्रथम लोकसभा का अध्यक्ष कौन था?→ जी. वी. मावलंकर
  • पहली बार राष्ट्रपति शासन कब लागू किया गया? → 20 जुलाई, 1951
  • संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकता के सम्बन्ध में संसद ने एक व्यापक नागरिकता अधिनियम कब बनाया? → 1955
  • प्रधानमंत्री बनने की न्यूनतम आयु है? → 25 वर्ष
  • जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन कब हुआ?→ सितम्बर 1946
  • मुस्लिम लीग कब अंतरिम सरकार में शामिल हुई? → अक्टूबर 1946
  • संविधान सभा की पहली बैठक किस दिन शुरू हुई? → दिसम्बर 1946
  • संविधान सभा का पहला अधिवेशन कितनी अवधि तक चला? → 9 दिसम्बर 1946 से 23 दिसम्बर 1946
  • देश के स्वतन्त्र होने के पश्चात संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई? → 31 अक्टूबर 1947
  • संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष किसे चुना गया? → सच्चिदानन्द सिन्हा
  • संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष कौन था? → डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  • संविधान निर्माण की दिशा में पहला कार्य ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ था 22 जनवरी 1947 को यह प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया? → जवाहर लाल नेहरू
  • भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का चुनाव किया गया था? → संविधान सभा द्वारा
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुसार, भारत के शासन की सर्वोच्च सत्ता किसमें निहित्त है?→ जनता
  • भारत के प्रथम सिख प्रधानमंत्री कौन है? → मनमोहन सिंह
  • प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने वाले प्रथम व्यक्ति कौन हैं?→ मोरारजी देसाई
  • भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति कौन करता है? → राष्ट्रपति
  • भारतीय संविधान के किस भाग को उसकी ‘आत्मा’ की आख्या प्रदान की गयी है?→ प्रस्तावना
  • केरल का उच्च न्यायालय कहाँ स्थित है? → एर्नाकुलम
  • राज्यसभा के लिए प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधियों का निर्वाचन कौन करता है? → विधानसभा के निर्वाचित सदस्य
  • 31वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या कितनी निर्धारित की गयी है? → 545
  • हरियाणा राज्य कब बना था? → 1 नवम्बर, 1966
  • दीवानी मामलों में संसद के सदस्यों को किस दौरान गिरफ्तार नहीं किया जा सकता? → संसद के सत्र के दौरान, संसद के सत्र आरम्भ होने के 40 दिन पूर्व तक, संसद के सत्र आरम्भ होने के 40 दिन बाद तक
  • संघीय मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देने वाले प्रथम मंत्री कौन थे?→ श्यामा प्रसाद मुखर्जी
  • भारत के संपरीक्षा और लेखा प्रणालियों का प्रधान कौन होता है? → भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक
  • लोकसभा के अध्यक्ष को कौन चुनता है? → लोकसभा के सदस्य
  • कौन उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनी? → सुचेता कृपलानी
  • प्रथम लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या कितनी थी?→ 1874
  • भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री कौन रहे हैं? → सरदार वल्लभ भाई पटेल
  • सबसे लम्बी अवधि तक एक ही विभाग का कार्यभार संभालने वाले केन्द्रीय मंत्री कौन थे? → राजकुमारी अमृत कौर
  • दादरा एवं नगर हवेली किस न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है? → मुम्बई उच्च न्यायालय
  • मूल संविधान में राज्यों को कितने प्रवर्गों में रखा गया? → 4
  • लोकसभा की सदस्यता के लिए उम्मीदवार को कितने वर्ष से कम नहीं होना चाहिए?→ 25 वर्ष
  • भारतीय संविधान किस दिन से पूर्णतरू लागू हुआ? → 26 जनवरी, 1950
  • पहली बार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कब की गई? → 26 अक्टूबर, 1962
  • डोगरी भाषा किस राज्य में बोली जाती है? → जम्मू और कश्मीर
  • भारत के नागरिकों को कितने प्रकार की नागरिकता प्राप्त है? → एक
  • भारतीय स्वाधीनता अधिनियम को किस दिन ब्रिटिश सम्राट की स्वीकृति मिली? → 21 जुलाई 1947
  • भारतीय संविधान कितने भागों में विभाजित है? → 22
  • केन्द्र और राज्य के बीच धन के बँटवारे के सम्बन्ध में कौन राय देता है?→ वित्त आयोग
  • किस तरह से भारतीय नागरिकता प्राप्त की जा सकती है? → जन्म, वंशानुगत, पंजीकरण
  • भारतीय संविधान ने किस प्रकार के लोकतंत्र को अपनाया है? → लोकतांत्रिक गणतंत्र
  • केन्द्रीय मंत्रिपरिषद का अध्यक्ष कौन होता है? → प्रधानमंत्री
  • जब भारत स्वतंत्र हुआ, उस समय कांग्रेस का अध्यक्ष कौन था? → जे. बी. कृपलानी
  • मूल संविधान में राज्यों की संख्या कितनी थी? → 27
  • 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में किन शब्दों को नहीं जोड़ा गया? → गुटनिरपेक्ष
  • किस राज्य के विधान परिषद की सदस्य संख्या सबसे कम है? → जम्मू-कश्मीर
  • भारत में किस प्रकार की शासन व्यवस्था अपनायी गयी है? → ब्रिटिश संसदात्मक प्रणाली
  • भारत की संसदीय प्रणाली पर किस देश के संविधान का स्पष्ट प्रभाव है? → ब्रिटेन
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों की प्रेरणा किस देश के संविधान से मिली है? → आयरलैण्ड
  • भारतीय संविधान की संशोधन प्रक्रिया किस देश के संविधान से प्रभावित है? → दक्षिण अफ्रीका
  • भारतीय संघ में सम्मिलित किया गया 28वाँ राज्य कौन-सा है। → झारखण्ड
  • हिमाचल प्रदेश को राज्य का दर्जन कब प्रदान किया गया? → 1971 में
  • पहला संवैधानिक संशोधन अधिनियम कब बना? → 1951
  • राष्ट्रपति पद के निर्वाचन हेतु उम्मीदवार की अधिकतम आयु कितनी होनी चाहिए? → कोई सीमा नहीं
  • भारत का संविधान कब अंगीकर किया गया था? → 26 नवम्बर,1949
  • किस वर्ष गांधी जयंती के दिन केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की स्थापना की गयी? → 1985
  • विधान परिषद को समाप्त करने वाला आखिरी राज्य कौन है? → तमिलनाडु
  • लोकसभा का सचिवालय किसकी देख-रेख में कार्य करता है? → संसदीय मामले के मंत्री
  • ‘विधान परिषद’ का सदस्य होने के लिए कम से कम कितनी आयु होनी चाहिए? → 30 वर्ष
  • “राज्यपाल सोने के पिंजरे में निवास करने वाली चिडिया के समतुल्य है।” यह किसका कथन है? → सरोजिनी नायडू
  • देश के किस राज्य में सर्वप्रथम गैर-कांग्रेसी सरकार गठित हुई? → 1957, केरल
  • किस राज्य की विधान परिषद की सदस्य संख्या सर्वाधिक है? → उत्तर प्रदेश
  • प्रत्येक राज्य में अनुसूचित जाति और जनजातियों की सूची कौन तैयार करता है? → प्रत्येक राज्य के राज्यपाल के परामर्श से राष्ट्रपति
  • भारतीय संविधान में तीन सूचियों की व्यवस्था कहाँ से ली गयी है? → भारत शासन अधिनियम 1935 से
  • किस वर्ष सिक्किम को राज्य का दर्जा दिया गया था? → 1975 में
  • जनता पार्टी के शासन के दौरान भारत के राष्ट्रपति कौन थे? → नीलम संजीव रेड्डी
  • कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय कौन करता है?→ लोकसभा का अध्यक्ष
  • दल-बदल से सम्बन्धित किसी प्रश्न या विवाद पर अंतिम निर्णय किसका होता है? → सदन के अध्यक्ष
  • 1922 में किस व्यक्ति ने मांग की थी कि भारत की जनता स्वयं अपने भविष्य का निर्धारण करेगी? → महात्मा गाँधी
  • संसद पर होने वाले खर्चों पर किसका नियंत्रण रहता है? → नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
  • राज्यसभा की पहली महिला महासचिव कौन हैं? → वी. एस. रमा देवी
  • संसद का कोई सदस्य अपने अध्यक्ष की पूर्वानुमति लिये बिना कितने दिनों तक सदन में अनुपस्थित रहे, तो उसका स्थान रिक्त घोषित कर दिया जाता है? → 60 दिन
  • पांडिचेरी को किस वर्ष भारतीय संघ में सम्मिलित किया गया? → 1962
  • भारत का संविधान भारत को किस प्रकार वर्णित करता है? → राज्यों का संघ
  • वह कौन सी सभा है, जिसका अध्यक्ष उस सदन का सदस्य नहीं होता है? → राज्य सभा
  • पूरे देश को कितने क्षेत्रीय परिषदों में बाँटा गया है? → 5
  • क्या पंचायतों को कर लगाने का अधिकार है? → हाँ
  • जवाहरलाल नेहरू के निधन के पश्चात किसने प्रधानमंत्री पद ग्रहण किया? → गुलजारीलाल नन्दा
  • राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत किस जिले से हुई? → नागौर
  • किसकी सिफारिश पर संविधान सभा का गठन किया गया? → कैबिनेट मिशन योजना
  • संविधान सभा में विभिन्न प्रान्तों के लिए 296 सदस्यों का निर्वाचन होना था। इनमें से कांग्रेस के कितने प्रतिनिधि निर्वाचित होकर आए थे? → 208
  • कैबीनेट मिशन योजना के अनुसार, संविधान सभा के कुल कितने सदस्य होने थे? → 389
  • किसी क्षेत्र को ‘अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्र’ घोषित करने का अधिकार किसे है? → राष्ट्रपति
  • पुनर्गठन के फलस्वरूप वर्ष 1947 में संविधान सभा के सदस्यों की संख्या कितनी रह गयी? → 299
  • संविधान सभा में किस देशी रियासत के प्रतिनिधि ने भाग नहीं लिया था?→ हैदराबाद
  • भारतीय संविधान में किस अधिनियम के ढांचे को स्वीकार किया गया है? → भारत शासन अधिनियम 1935
  • मुस्लिम लीग ने संविधान सभा का बहिष्कार किस कारण से किया? → मुस्लिम लीग मुस्लिमों के लिये एक अलग संविधान सभा चाहता था
  • वर्ष 1938 में किस व्यक्ति ने व्यस्क मताधिकार के आधार पर संविधान सभा के गठन की मांग की? → जवाहर लाल नेहरू
भारतीय विधि से संबधित महत्वपूर्ण लेख


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भारतीय संसद के तीन अंग राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा



The Parliament of India is the supreme legislative body in India. Indian-Parliament-President-Rajya-Sabha-and-Lok-Sabha
संसद (पार्लियामेंट) भारत का सर्वोच्‍च विधायी निकाय है। यह द्विसदनीय व्यवस्था है। भारतीय संसद में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन- लोकसभा (लोगों का सदन) एवं राज्यसभा (राज्‍यों की परिषद) होते हैं। राष्‍ट्रपति के पास संसद के दोनों में से किसी भी सदन को बुलाने या स्‍थगित करने अथवा लोकसभा को भंग करने की शक्ति है। भारतीय संसद का संचालन 'संसद भवन' में होता है। जो कि नई दिल्ली में स्थित है। लोक सभा में राष्ट्र की जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं जिनकी अधिकतम संख्या ५५२ है। राज्य सभा एक स्थायी सदन है जिसमें सदस्य संख्या २५० है। राज्या सभा के सदस्यों का निर्वाचन / मनोनयन ६ वर्ष के लिए होता है। जिसके १/३ सदस्य प्रत्येक २ वर्ष में सेवानिवृत्त होते है। भारत की राजनीतिक व्‍यस्‍था को, या सरकार जिस प्रकार बनती और चलती है, उसे संसदीय लोकतंत्र कहा जाता है। 

From the Roli Archives: The Indian Parliament under construction.

सन 1883 के चार्टर अधिनियम में पहली बार एक विधान परिषद के बीज दिखाई पड़े। 1853 के अंतिम चार्टर अधिनियम के द्वारा विधायी पार्षद शब्‍दों का प्रयोग किया गया। यह नयी कौंसिल शिकायतों की जांच करने वाली और उन्‍हें दूर करने का प्रयत्‍न करने वाली सभा जैसा रूप धारण करने लगी।  1857 की आजादी के लिए पहली लड़ाई के बाद 1861 का भारतीय कौंसिल अधिनियम बना। इस अधिनियम को ‘भारतीय विधानमंडल का प्रमुख घोषणापत्र’ कहा गया। जिसके द्वारा ‘भारत में विधायी अधिकारों के अंतरण की प्रणाली’ का उदघाटन हुआ। इस अधिनियम द्वारा केंद्रीय एवं प्रांतीय स्‍तरों पर विधान बनाने की व्‍यवस्‍था में महत्‍वपूर्ण परिवर्तन किए गए। अंग्रेजी राज के भारत में जमने के बाद पहली बार विधायी निकायों में गैर-सरकारी लोगों के रखने की बात को माना गया।


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मेरी प्रिय कविता - सुमित्रा नंदन पन्त रचित "नारी"



मेरी प्रिय कविता - सुमित्रा नंदन पन्त रचित "नारी"

यदि स्वर्ग कहीं है पृथ्वी पर, तो वह नारी उर के भीतर,
दल पर दल खोल हृदय के अस्तर
जब बिठलाती प्रसन्न होकर
वह अमर प्रणय के शतदल पर!
मादकता जग में कहीं अगर, वह नारी अधरों में सुखकर,
क्षण में प्राणों की पीड़ा हर,
नव जीवन का दे सकती वर
वह अधरों पर धर मदिराधर।
यदि कहीं नरक है इस भू पर, तो वह भी नारी के अन्दर,
वासनावर्त में डाल प्रखर
वह अंध गर्त में चिर दुस्तर
नर को ढकेल सकती सत्वर!


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