मक्‍का काबा मे विराजित प्रसिद्ध मक्‍केश्‍वर महादेव शिवलिंग



'काबा' अरब का प्राचीन मन्दिर है। जो मक्का शहर में है। विक्रम की प्रथम शताब्दी के आरम्भ में रोमक इतिहास लेखक 'द्यौद्रस् सलस्' लिखता है - यहाँ इस देश में एक मन्दिर है, जो अरबों का अत्यन्त पूजनीय है।
क्या मक्का पहले मक्केश्वर महादेव शिवलिंग था 
क्या मक्का पहले मक्केश्वर महादेव शिवलिंग था
मक्का मदीना का सच 
मक्का मदीना का सच
makkeswar shivling (मक्केश्वर शिवलिंग)
makkeswar shivling (मक्केश्वर शिवलिंग)
सम्‍पूर्ण विश्‍व क्‍या भारत के लोग ही यह कटु सत्‍य स्‍वीकार नही कर सकते कि इस्लाम ने हिन्दू की आस्‍था माने जाने वाले असंख्‍य मंदिर तोड़े है और उनके स्‍थान पर उसी मंदिर के अवशेष से मस्जितों को निर्माण करवाया। इस्‍लामिक विध्‍वंशक गतिविधियां इतनी प्रंचडता के साथ की जाती थी कि तक्षशिला विश्वविद्यालय और सोमनाथ मंदिर विध्‍वंश किये गये। इस्लाम नीव इस आधार पर रखी गई कि दूसरों के धर्म का अनादर करों और उनको नेस्‍तानाबूत और पवित्र स्थलों को खंडित कर वहाँ मस्जित और मकबरे का निर्माण किया किया जाए। इस काम बाधा डालने वाले जो लोग भी सामने आये उन लोगो को मौत के घाट उतार दिया जाये। भले ही वे लोग मुस्लिमो को परेशान न करते हो। मुहम्‍मद साहब और मुसलमानों के हमले से मक्‍का और मदीना के आस पास का पूरा इतिहास बदल दिया गया। इस्लाम एक तलवार पे बना धर्म था है और रहेगा और इसका अंत भी उस से ही होगा किंतु पी एन ओक ने सिद्ध कर दिया है मक्केश्वर शिवलिंग ही हजे अस्वद है। मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं।

द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का मानना है कि मक्का में मक्केश्वर महादेव मंदिर है। मुहम्मद साहब भी शैव थे, इसलिए वे मक्केश्वर महादेव को मानते थे। एक बार वहां लोगों ने बुद्ध की मूर्ति लगा थी, वह इसके बहुत विरोधी थें। अरब में मुहम्मद पैगम्बर से पूर्व शिवलिंग को 'लात' कहा जाता था। मक्का के कावा में जिस काले पत्थर की उपासना की जाती रही है, भविष्य पुराण में उसका उल्लेख मक्केश्वर के रूप में हुआ है। इस्लाम के प्रसार से पहले इजराइल और अन्य यहूदियों द्वारा इसकी पूजा किए जाने के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। इराक और सीरिया में सुबी नाम से एक जाति थी यही साबिईन है। इन साबिईन को अरब के लोग बहुदेववादी मानते थे। कहते हैं कि साबिईन अर्थात नूह की कौम। माना जाता है कि भारतीय मूल के लोग बहुत बड़ी संख्या में यमन में आबाद थे, जहां आज भी श्याम और हिन्द नामक किले मौजूद हैं। विद्वानों के अनुसार सऊदी अरब के मक्का में जो काबा है, वहां कभी प्राचीनकाल में 'मुक्तेश्वर' नामक एक शिवलिंग था जिसे बाद में 'मक्केश्‍वर' कहा जाने लगा।
अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है 'मक्केश्वर लिंग' (मक्केश्वर महादेव)
अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है 'मक्केश्वर लिंग' (मक्केश्वर महादेव)
मक्का के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है नॉन-मुस्लिम्स का अंदर जाना माना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं।
मक्का के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है नॉन-मुस्लिम्स का अंदर जाना माना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं।

मक्का के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है नॉन-मुस्लिम्स का अंदर जाना माना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं।
मुसलमाने के पैगम्‍बर मुहम्‍मद एक ऐसे विध्‍वंसक गिरोह का नेतृत्‍व करते थे जो धन और वासना के पुजारी थे। मुहम्‍मद ने मदीना से मक्का के शांतिप्रिय मुर्तिपूजकों पर हमला किया और जबरजस्‍त नरसंंहार किया। मक्‍का का म‍दीना के अपना अगल अस्तितव था किन्‍तु मुहम्‍मद साहब के हमले के बाद मक्‍का मदीना को एक साथ जोड़कर देखा जाने लगा। जबकि मक्‍का के लोग जो कि शिव के उपासक माने जाते है। मुहम्‍मद की टोली ने मक्‍का में स्‍थापित कर वहां पे स्थापित की हुई 360 में से 359 मूर्तियाँ नष्ट कर दी और सिर्फ काला पत्थर सुरक्षित रखा जिसको आज भी मुस्‍लिमों द्वारा पूजा जाता है। उसके अलावा अल-उज्जा, अल-लात और मनात नाम की तीन देवियों के मंदिरों को नष्ट करने का आदेश भी महम्मद ने दिया और आज उन मंदिरों का नामो निशान नहीं है (हिशम इब्न अल-कलबी, 25-26)। इतिहास में यह किसी हिन्दू मंदिर पर सबसे पहला इस्लामिक आतंकवादी हमला था।उस काले पत्थर की तरफ आज भी मुस्लिम श्रद्धालु अपना शीश जुकाते है। किसी हिंदू पूजा के दौरान बिना सिला हुआ वस्त्र या धोती पहनते हैं, उसी तरह हज के दौरान भी बिना सिला हुआ सफेद सूती कपड़ा ही पहना जाता है।
मक्‍का मे विराजित प्रसिद्ध मक्‍केश्‍वर महादेव शिवलिंग
जिस प्रकार हिंदुओं की मान्यता होती है कि गंगा का पानी शुद्ध होता है ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी अबे जम-जम के पानी को पाक मानते हैं। जिस तरह हिंदू गंगा स्नान के बाद इसके पानी को भरकर अपने घर लाते हैं ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी मक्का के अबे जम-जम का पानी भर कर अपने घर ले जाते हैं। ये भी एक समानता है कि गंगा को मुस्लिम भी पाक मानते हैं और इसकी अराधना किसी न किसी रूप में जरूर करते हैं।

जिस प्रकार हिंदुओं की मान्यता होती है कि गंगा का पानी शुद्ध होता है ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी अबे जम-जम के पानी को पाक मानते हैं। जिस तरह हिंदू गंगा स्नान के बाद इसके पानी को भरकर अपने घर लाते हैं ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी मक्का के अबे जम-जम का पानी भर कर अपने घर ले जाते हैं। ये भी एक समानता है कि गंगा को मुस्लिम भी पाक मानते हैं और इसकी अराधना किसी न किसी रूप में जरूर करते हैं।

मक्का मदीना का सच
मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इस सम्‍बन्‍ध में प्रख्‍यात प्रसिद्ध इतिहासकार स्व0 पी.एन.ओक ने अपनी पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में समझाया है कि मक्का और उस इलाके में इस्लाम के आने से पहले से मूर्ति पूजा होती थी। हिंदू देवी-देवताओं के मंदिर थे, गहन रिसर्च के बाद उन्होंने यह भी दावा किया कि काबा में भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है। पैगंबर मोहम्मद ने हमला कर मक्का की मूर्तियां तोड़ी थीं। यूनान और भारत में बहुतायत में मूर्ति पूजा की जाती रही है, पूर्व में इन दोनों ही देशों की सभ्यताओं का दूरस्थ इलाकों पर प्रभाव था। ऐसे में दोनों ही इलाकों के कुछ विद्वान काबा में मूर्ति पूजा होने का तर्क देते हैं। हज करने वाले लोग काबा के पूर्वी कोने पर जड़े हुए एक काले पत्थर के दर्शन को पवित्र मानते हैं जो कि हिन्‍दूओं का पवित्र शिवलिंग है। वास्‍तव में इस्लाम से पहले मिडिल-ईस्ट में पीगन जनजाति रहती थी और वह हिंदू रीति-रिवाज को ही मानती थी।
मक्‍केश्‍वर महादेव शिव
एक प्रसिद्ध मान्‍यता के अनुसर है कि काबा में “पवित्र गंगा” है। जिसका निर्माण महापंडित रावण ने किया था, रावण शिव भक्त था वह शिव के साथ गंगा और चन्द्रमा के महात्‍म को समझता था और यह जानता था कि कि क‍भी शिव को गंगा से अलग नही किया जा सकता। जहाँ भी शिव होंगे, पवित्र गंगा की अवधारणा निश्चित ही मौजूद होती है। काबा के पास भी एक पवित्र झरना पाया जाता है, इसका पानी भी पवित्र माना जाता है। इस्लामिक काल से पहले भी इसे पवित्र (आबे ज़म-ज़म) ही माना जाता था। रावण की तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर भगवान शिव ने रावड़ को एक शिवलिंग प्रदान किया जिसें लंका में स्‍थापित करने का कहा और बाद जब रावड़ आकाश मार्ग से लंका की ओर जाता है पर रास्ते में कुछ ऐसे हालत बनते हैं की रावण को शिवलिंग धरती पर रखना पड़ता है। वह दुबारा शिवलिंग को उठाने की कोशिश करता है पर खूब प्रयत्न करने पर भी लिंग उस स्थान से हिलता नहीं। वेंकटेश पण्डित के अनुसर यह स्थान वर्तमान में सऊदी अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है। सऊदी अरब के पास ही यमन नामक राज्य भी है जहाँ श्री कृष्ण ने कालयवन नामक राक्षस का विनाश किया था। जिसका जिक्र श्रीमदभगवत पुराण में भी आता है।
मक्का मदीना की फोटो जिसमें मक्केश्वर महादेव है
मक्का मदीना की फोटो जिसमें मक्केश्वर महादेव है
पहले राजा भोज ने मक्का में जाकर वहां स्थित प्रसिद्ध शिव लिंग मक्केश्वर महादेव का पूजन किया था, इसका वर्णन भविष्य-पुराण में निम्न प्रकार है :-
"नृपश्चैवमहादेवं मरुस्थल निवासिनं !
गंगाजलैश्च संस्नाप्य पंचगव्य समन्विते :
चंद्नादीभीराम्भ्यचर्य तुष्टाव मनसा हरम !
इतिश्रुत्वा स्वयं देव: शब्दमाह नृपाय तं!
गन्तव्यम भोज राजेन महाकालेश्वर स्थले !! "

चित्रों की प्रमाणिकता में शिव लिंग और मक्का
मक्का स्थित प्रचीन शिव लिंग


 मक्का की आन्तरिक संरचना और भगवान शिव लिंग


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142 comments:

सूबेदार जी पटना said...

बहुत सुंदर बृहत जानकारी इस्लाम के पहले मुहम्मद के फॉर फादर महाराजा विक्रमादित्य के सामंत हुआ करते थे सारा विश्व जनता है की यहाँ आज भी शिवलिंग मौजूद है, जिस दिन हमारी क्षमता बढ़ेगी इस्लाम तो अपने-आप समाप्त होने वाला है यह उन्हीं भगवान की ही कृपा से फिर हिन्दू गंगा जल वहाँ चढ़एगे।

Abdul Shahid Lahory said...

गूगल तू पहले होश में आ / तुझे कोई हक़ नहीं मक्का मुन्नवर के बारे में गलत लिखने का
तुमसे सर्टीफिकीट नहीं लेना हमें के इस्लाम क्या है | तुम्हारे धर्म से तो अच्छा ही है
कोन कब ख़त्म होगा इसका फेसला तुम करोगे | तुम्हारा धर्म सच्चा होता तो भारत व् नेपाल के अलावा भी और मुल्क होते

अब्दुल शाहिद लाहोरी said...

गूगल तू पहले होश में आ / तुझे कोई हक़ नहीं मक्का मुन्नवर के बारे में गलत लिखने का
तुमसे सर्टीफिकीट नहीं लेना हमें के इस्लाम क्या है | तुम्हारे धर्म से तो अच्छा ही है
कोन कब ख़त्म होगा इसका फेसला तुम करोगे | तुम्हारा धर्म सच्चा होता तो भारत व् नेपाल के अलावा भी और मुल्क होते

Anonymous said...

गूगल तू पहले होश में आ / तुझे कोई हक़ नहीं मक्का मुन्नवर के बारे में गलत लिखने का
तुमसे सर्टीफिकीट नहीं लेना हमें के इस्लाम क्या है | तुम्हारे धर्म से तो अच्छा ही है
कोन कब ख़त्म होगा इसका फेसला तुम करोगे | तुम्हारा धर्म सच्चा होता तो भारत व् नेपाल के अलावा भी और मुल्क होते

Abdul Shahid Lahory said...

गूगल तू पहले होश में आ तुझे कोई हक़ नहीं मक्का मुन्नवर के बारे में गलत लिखने का
तुमसे सर्टीफिकीट नहीं लेना हमें के इस्लाम क्या है तुम्हारे धर्म से तो अच्छा ही है
कोन कब ख़त्म होगा इसका फेसला तुम करोगे तुम्हारा धर्म सच्चा होता तो भारत व् नेपाल के अलावा भी और मुल्क होते

रवी शर्मा said...

हम होश है तुम बेहोशी मे ना रहो

रवी शर्मा said...

तुम रहो होश में

रवी शर्मा said...

तुम रहो होश म्

uday kashyap said...

सचाई को ग्रहण करो या मुर्ख प्राणी

uday kashyap said...

सचाई को ग्रहण करो या मुर्ख प्राणी

uday kashyap said...

सचाई को ग्रहण करो या मुर्ख प्राणी

uday kashyap said...

सचाई को ग्रहण करो या मुर्ख प्राणी

uday kashyap said...

सचाई को ग्रहण करो या मुर्ख प्राणी

uday kashyap said...

सचाई को ग्रहण करो या मुर्ख प्राणी

uday kashyap said...

सचाई को ग्रहण करो या मुर्ख प्राणी

uday kashyap said...

सचाई को ग्रहण करो या मुर्ख प्राणी

uday kashyap said...

सचाई को ग्रहण करो या मुर्ख प्राणी

Nasim Alam said...

ईस का फैसला तो क़यामत के दिन अल्लाह कर देगा कि कौन अल्लाह राह के राह पे हैं

Nasim Alam said...

ईस का फैसला तो क़यामत के दिन अल्लाह कर देगा कि कौन अल्लाह राह के राह पे हैं

vinee gupta said...

सत्य को स्वीकार करो दोस्त

vinee gupta said...

सत्य को स्वीकार करो मेरे दोस्त
सबसे पुराना धर्म सत्य सनातन धर्म है।
और वो ही सत्य है

Anonymous said...

अगर तुम्हारा धर्म इतना ही मजबूत है तो बताओ
क्यों हिन्दुओ को मक्का में नही जाने देते
क्यों मंदिरो को ढहा क्र तुम्हे मस्जिदे बनानी पड़ी
क्यों तुम्हारे धर्म के क्रूर शासको ने जबरन लोगो को इस्लाम कबूल करवाया
क्यों अधिकतर आतंकवादी (लगभग 100% मुस्लिम है)
तुम्हारे पैगम्बर ने तो अपने बेटे की बलि दी थी फिर तुम क्यों बेचारे बकरो को काटते हो
क्यों आज भी तुम्हारे घर की ओरते अनपढ़ है
क्यों आज भी तुम्हारे धर्म के लोग अल्लाह के नाम पे निर्दोषो का गला काटते है

इन सवालो के जवाब तुम्हारे पास नही होंगे क्योंकि मुस्लिम खुद असमंजस में है की इस्लाम क्या है और वे क्या है

Anonymous said...

अगर तुम्हारा धर्म इतना ही मजबूत है तो बताओ
क्यों हिन्दुओ को मक्का में नही जाने देते
क्यों मंदिरो को ढहा क्र तुम्हे मस्जिदे बनानी पड़ी
क्यों तुम्हारे धर्म के क्रूर शासको ने जबरन लोगो को इस्लाम कबूल करवाया
क्यों अधिकतर आतंकवादी (लगभग 100% मुस्लिम है)
तुम्हारे पैगम्बर ने तो अपने बेटे की बलि दी थी फिर तुम क्यों बेचारे बकरो को काटते हो
क्यों आज भी तुम्हारे घर की ओरते अनपढ़ है
क्यों आज भी तुम्हारे धर्म के लोग अल्लाह के नाम पे निर्दोषो का गला काटते है

इन सवालो के जवाब तुम्हारे पास नही होंगे क्योंकि मुस्लिम खुद असमंजस में है की इस्लाम क्या है और वे क्या है

Unknown said...

अरे मूर्ख मुस्लिम तुम लोग सच को क्यों नही मानते की तुम शिवलिंग की पूजा करते हो परिक्रमा लगा ते हो

Unknown said...

तुम्हे पता नहीं जम्बू महाद्वीप किसे कहते थे
ये पूरा विश्व सम्पूर्ण भरतखण्ड था जरा हिस्ट्री देख।
अरब में इस्लाम आने से पहले किन किन संस्कृतियोने राज किया

Unknown said...

तुम्हे पता नहीं जम्बू महाद्वीप किसे कहते थे
ये पूरा विश्व सम्पूर्ण भरतखण्ड था जरा हिस्ट्री देख।
अरब में इस्लाम आने से पहले किन किन संस्कृतियोने राज किया

Anonymous said...

हम सभ हिन्दू हे क्या मुस्लिम औरत मुस्लमान बच्चा पैदा करती हे नहीं वो सिर्फ हिन्दू बच्चा ही पैदा करती है
और यही सच है।

Anonymous said...

एक दिन आएगा जब भगवन शिव makka madina ka destroyed kr denge ...or saare muslim kharm ho jaayenge agar loi hindu ..shivling pe..gangaa jal arpit kr de to ...but esa jb hoga na..jab ..muslim hindu ki entry hone denge makka main..but whan hindu ki entryy nhi ..unko darr h ki ..kahin ..koi hindu gangaa jal na chada de..shivlinggg pe...inka koi dharm nhi hai....

दीपक (राजस्थान) said...

'या' देवी सर्व भूतेशु शक्ति रूपेण संस्थिता l
'या' कुंदेन्न्दु तुषार हार धवला l

में यहाँ हमारे मुसलमान भाईयो को बताना चाहूँगा की वो 'या' अल्लाह क्यू बोलते है जबकि ये तो संस्कृत का एक शब्द है l जबकि आप लोग तो उर्दू को अपनी देव भाषा मानते हो l

मेरा यहाँ बस बताने का बस यही उद्देश्य है की ' हिन्दू धर्म एक महान सागर है जिसमे सर्व धर्म रूपी नदिया आकर समाहित हो जाती है l
तभी तो हम हर अनुष्ठान में बोलते है l
सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया: सर्वे भद्राणि पश्यन्तु: माँ कश्चित् दुःख भागभवेत: ll
क्या आपके धर्म या किसी अन्य में ऐसा बोला जाता है ?
जय सनातन धर्म l

दीपक (राजस्थान) said...

'या' देवी सर्व भूतेशु शक्ति रूपेण संस्थिता l
'या' कुंदेन्न्दु तुषार हार धवला l

में यहाँ हमारे मुसलमान भाईयो को बताना चाहूँगा की वो 'या' अल्लाह क्यू बोलते है जबकि ये तो संस्कृत का एक शब्द है l जबकि आप लोग तो उर्दू को अपनी देव भाषा मानते हो l

मेरा यहाँ बस बताने का बस यही उद्देश्य है की ' हिन्दू धर्म एक महान सागर है जिसमे सर्व धर्म रूपी नदिया आकर समाहित हो जाती है l
तभी तो हम हर अनुष्ठान में बोलते है l
सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया: सर्वे भद्राणि पश्यन्तु: माँ कश्चित् दुःख भागभवेत: ll
क्या आपके धर्म या किसी अन्य में ऐसा बोला जाता है ?
जय सनातन धर्म l

Suresh Kumar said...

bhai google kabi jhut nhi bolta

unknown manav said...

Hum kisi dharm ke against me nhn he swayam bhagaban krishna g ne bole he vagwat me "sarba dharman parityajya mamekam smaranam braja aham twam sarba papevyo mokhshaisyami ma sucha" tum muslims nhn ho tum v bhagwan ka santan ho .kisi nakisi rupse tum bhagwan ko hi pujte ho allah g ko mante ho .sanskrit me allah ka matlab maa mother amma.toh tum anjan ban kar hi maa mahashakti ko pujaa karte ho.ye sach he.tum raban rupi jyani ho maha devi bhakt aur shiv ji k upashak ho.khud ko khud pehchano.....

Unknown said...

अरे भाइयों ये जो कहें वही सच है, और कोई कुछ भी कहे वो झूठ है चाहे वो गूगल हो या विकीपीडिया

Navin Singh said...

अरे भाइयों ये जो कहें वही सच है, और कोई कुछ भी कहे वो झूठ है चाहे वो गूगल हो या विकीपीडिया

Anonymous said...

जय श्री राम

Anonymous said...

रामायण में सभी राक्षसों का वध हुआ था लेकिन💥
सूर्पनखा का वध नहीं हुआ था
उसकी नाक और कान काट कर छोड़ दिया गया था ।
वह कपडे से अपने चेहरे को छुपा कर
रहती थी ।
रावन के मर जाने के बाद वह
अपने पति के साथ शुक्राचार्य के पास
गयी और जंगल में उनके आश्रम में रहने लगी ।

राक्षसों का वंश ख़त्म न
हो
इसलिए, शुक्राचार्य ने शिव
जी की आराधना की ।
शिव जी ने
अपना स्वरुप शिवलिंग शुक्राचार्य को दे कर
कहा की जिस दिन कोई "वैष्णव" इस पर
गंगा जल चढ़ा देगा उस दिन
राक्षसों का नाश हो जायेगा ।
उस आत्म
लिंग को शुक्राचार्य ने वैष्णव मतलब
हिन्दुओं से दूर रेगिस्तान में स्थापित
किया जो आज अरब में "मक्का मदीना" में है ।
सूर्पनखा जो उस समय चेहरा ढक कर
रहती थी वो परंपरा को उसके बच्चो ने
पूरा निभाया आज भी मुस्लिम औरतें
चेहरा ढकी रहती हैं ।
सूर्पनखा के वंसज
आज मुसलमान कहलाते हैं ।
क्युकी शुक्राचार्य ने इनको जीवन दान
दिया इस लिए ये शुक्रवार को विशेष
महत्त्व देते हैं ।
पूरी जानकारी तथ्यों पर आधारित सच है।⛳

जानिए इस्लाम केसे पैदा हुआ..
👉असल में इस्लाम कोई धर्म नहीं है .एक मजहब है..
दिनचर्या है..
👉मजहब का मतलब अपने कबीलों के
गिरोह को बढ़ाना..
👉यह बात सब जानते है कि मोहम्मदी मूलरूप से
अरब वासी है ।
👉अरब देशो में सिर्फ रेगिस्तान पाया जाता है.
वहां जंगल
नहीं है, पेड़ नहीं है. इसीलिए वहां मरने के बाद जलाने
के
लिए लकड़ी न होने के कारण ज़मीन में दफ़न कर
दिया जाता था.
👉रेगिस्तान में हरीयाली नहीं होती.. एसे में रेगिस्तान
में
हरा चटक रंग देखकर इंसान चला आता जो की सूचक
का काम करता था..
👉अरब देशो में लोग रेगिस्तान में तेज़ धुप में सफ़र करते थे,
इसीलिए वहां के लोग सिर को ढकने के लिए
टोपी 💂पहनते थे.
जिससे की लोग बीमार न पड़े.
👉अब रेगिस्तान में खेत तो नहीं थे, न फल, तो खाने के
लिए वहा अनाज नहीं होता था. इसीलिए वहा के
लोग
🐑🐃🐄🐐🐖जानवरों को काट कर खाते थे. और अपनी भूख मिटाने के
लिए इसे क़ुर्बानी का नाम दिया गया.
👉रेगिस्तान में पानी की बहुत कमी रहती थी,💧 इसीलिए
लिंग (मुत्रमार्ग) साफ़ करने में पानी बर्बाद न
हो जाये
इसीलिए लोग खतना (अगला हिस्सा काट देना ) कराते
थे.
👉सब लोग एक ही कबिले के खानाबदोश होते थे इसलिए
आपस में भाई बहन ही निकाह कर लेते थे|
👉रेगिस्तान में मिट्टी मिलती नहीं थी मुर्ती बनाने
को इसलिए मुर्ती पुजा नहीं करते थे|
खानाबदोश थे ,
👉 एक जगह से दुसरी जगह
जाना पड़ता था इसलिए कम बर्तन रखते थे और एक
थाली नें पांच लोग खाते थे|

👉कबीले की अधिक से अधिक संख्या बढ़े इसलिए हर एक
को चार बीवी रखने की इज़ाजत दि..
🔥अब समझे इस्लाम कोई धर्म नहीं मात्र एक कबीला है..
और इसके नियम असल में इनकी दिनचर्या है|
नोट : पोस्ट पढ़के इसके बारे में सोचो.
#इस्लाम_की_सच्चाई
अगर हर हिँदू माँ-बाप अपने बच्चों को बताए कि अजमेर दरगाह वाले ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने किस तरह इस्लाम कबूल ना करने पर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को मुस्लिम सैनिकों के बीच बलात्कार करने के लिए निर्वस्त्र करके फेँक दिया था और फिर किस तरह पृथ्वीराज चौहान की वीर पुत्रियों ने आत्मघाती बनकर मोइनुद्दीन चिश्ती को 72 हूरों के पास भेजा थातो शायद ही कोई हिँदू उस मुल्ले की कब्र पर माथा पटकने जाए

"अजमेर के ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को ९० लाख हिंदुओं को इस्लाम में लाने का गौरव प्राप्त है. मोइनुद्दीन चिश्ती ने ही मोहम्मद गोरी को भारत लूटने के लिए उकसाया और आमंत्रित किया था... (सन्दर्भ - उर्दू अखबार "पाक एक्सप्रेस, न्यूयार्क १४ मई २०१२).

Anonymous said...

Wah kya likta h yar dil khus ho gaya y h real story.i liked,.

Anonymous said...

Bhai bada jabardast likha hai..

Anonymous said...

बहुत बडिया भाई गोरव से कहेगे हिंदू है हम हर हर महादेव

dinesh kumar m said...

इन मुसलिम जाती का तो जरूर एक दिन विनाश होगा भगवान शिवलिंग कि कृपा से

Vipin Punjani said...

मुस्लिम धमॅ का मूल हिन्दू धर्म ही है यह जानते हुवे भी मुस्लिम क्यों नफरत की आग मे सुलगते हैं,,,,,,,,,,,?

sabirAhamad khilji said...

मक्का में मूर्ति पूजा होती थी यह बात कुरआन में लिखी है ।परन्तु उन मूर्तियों के सामने रोज़ एक नवजात बालक की बली दी जाती थी,जिसका विरोध मुहम्मद सा,ने किया और मूर्ति पूजा का विरोध किया
उन्होंने एकेशरवाद का सिध्दांत स्वीकार किया ।

Shyam Vilas said...

उन्हे ईश्वर ने भेजा था उनके पास इतनी पत्नियों क्यों यही ईश्वर के पैपैगम्बर है

Shyam Vilas said...

उन्हे ईश्वर ने भेजा था उनके पास इतनी पत्नियों क्यों यही ईश्वर के पैगम्बर है

Shyam Vilas said...

उन्हे ईश्वर ने भेजा था उनके पास इतनी पत्नियों क्यों

Shyam Vilas said...

उन्हे ईश्वर ने भेजा था उनके पास इतनी पत्नियों क्यों यही ईश्वर के पैगम्बर है

Ajay Sahu said...

ओम नम: शिवाय "जिस दिन मक्के पर गंगा अर्पण होगा उस दिन से वह पवित्र हो जाएगा।"

Anonymous said...

ऐ पुरा ईस्लाम धर्म तलवार की
धार पर बलवान हुवा मिटजायेगा तलवार की धार पर

Vandana Singh said...

मूर्तीपूजा के लिए एक बच्चे की बलि दी जाती थी तो बलि का विरोध करना था न की मूर्तिपूजा का। निराधार बातें न करो। बलि देना मुहम्मद साहब को पसंद न होता तो आज बकरे और ऊंट की बाली क्यों देते हो? क्या नवजात बालक की बलि और बकरे की बलि में कोई समानता नही? नवजात बालक भी नही पता होता है की वो मरने जा रहा और बकरे को भी। दोनों अपना दर्द वेदना बोलकर नही बता सकते। तो आज भी आप लोग बकरे की बाली देते हो जो नवजात की बाली देने के बराबर है और एक तरफ अहिंसावादी बनते हो।

Vandana Singh said...

मूर्तीपूजा के लिए एक बच्चे की बलि दी जाती थी तो बलि का विरोध करना था न की मूर्तिपूजा का। निराधार बातें न करो। बलि देना मुहम्मद साहब को पसंद न होता तो आज बकरे और ऊंट की बाली क्यों देते हो? क्या नवजात बालक की बलि और बकरे की बलि में कोई समानता नही? नवजात बालक भी नही पता होता है की वो मरने जा रहा और बकरे को भी। दोनों अपना दर्द वेदना बोलकर नही बता सकते। तो आज भी आप लोग बकरे की बाली देते हो जो नवजात की बाली देने के बराबर है और एक तरफ अहिंसावादी बनते हो।

vikas karma said...

agar islam itna sahi hai to jaisa roop bhagwan ne diya hai waise hee kyu nahi rehte hai,,
kyu daadhi sahi tarike se nahi katate,,
kyu 'MOOCHCHE' kaat dete hai aur daadhi hee rakhte hai aur 'KHATNA' kyu katwate hai, kya unke allah ne unhe aisa karne ko kaha hai, aur agr kaha bhi hai to fir unhe hindu dharm ke jaise kyu paida kiya, agr allah ko tumhe muslim banana hota to tumhe pehle se hee KHATNA AUR MOOCHCHE nahi deta..
kya tumhe itna bhi samjh nahi aata ke allah ne jis tarah janm diya hai hum usi trh rahe, aur doosro ko bhi jine de

vikas karma said...

agar islam itna sahi hai to jaisa roop bhagwan ne diya hai waise hee kyu nahi rehte hai,,
kyu daadhi sahi tarike se nahi katate,,
kyu 'MOOCHCHE' kaat dete hai aur daadhi hee rakhte hai aur 'KHATNA' kyu katwate hai, kya unke allah ne unhe aisa karne ko kaha hai, aur agr kaha bhi hai to fir unhe hindu dharm ke jaise kyu paida kiya, agr allah ko tumhe muslim banana hota to tumhe pehle se hee KHATNA AUR MOOCHCHE nahi deta..
kya tumhe itna bhi samjh nahi aata ke allah ne jis tarah janm diya hai hum usi trh rahe, aur doosro ko bhi jine de

son of india said...

मुशिलम ये बात क्यों नहीं समझते कि वह भी कभी हिंदू थे नाम बदलकर रहने से कुछ नहीं होता है तो वे भी एक हिन्दू ही।

Ravi Daal said...

M aap kesat. Hu jai hindu

Ravi Daal said...

Jai sivsankek jai mere manse aap ko Ganga jal aarpit karta. Har har har mahadev. Mera. Ganga jal savikar kro aap vaha. Par maka madina me or. Dika du aap pani sakati om nam sivaye sivaye nam Har Har Har MahAdev. Ki.

anees said...

bahut achchhi jankari.islam ko dho kar rakh diya
lekin ye satya man nahi sakte kyoki ye lato ke bhut hai bato se nhi manege

Anonymous said...

भाई आप भी मुस्लिम हैं, क्योंकि हर इंसान मुस्लिम ही पैदा होता है, चाहे वह हज़रत-ए-आदम हों या फिर दुनिया का सबसे आखिर में पैदा होने वाला इंसान हो

Anonymous said...

तुम लोग आतंकवादी ही हो सकते हो और ये भी निश्चित है तुम सारे मुसलमान कुते की मौत मारोगे

Nisha Gautam said...

हर हर महादेव.....

Nisha Gautam said...

हर हर महादेव.....

Kshitij Chouhan said...

ईश्वर ही सच हैं...

आर एस सिकरवार said...

इस्लाम असुर गुरु शुकशुक्राचार्य और स्वरुपणखाँ द्वारा स्थापित संम्प्रदाय है। स्वरुपणखाँ नाक ढके आज भी घूमती मिल जायगी। उस समय खाँ केवल एक ही थी जिससे ये सारे खाँ पैदा हुए, बाकी सब असुर मारे गये ये ही बची जिससे असुर कुल चला आज भी बदला लेरही है कटी नाक का। शुक्राचार्य शिव के अनन्य भकभक्त हैं। असुर भी शिव के भक्त हैं, शुक्रवार ही जुम्मे का दिन है कुल मिलाकर धरती पर आज भी देवासुर संग्राम चल रहा है। भगवान कल्कि के हाथ मरेंगे रावण या कंस की तरह फिर सतयुग आरम्भ होगा पुनः अधर्म का विनाश कर भगवान धर्म की स्थापना करेंगे यह उनकी लीला का अंग है।

abhishek rajput said...

Bol bhen k labde katuye... Teri naa ka bhosda kutte k beej abdul

Anonymous said...

हम सब गूगल की बात गलत मान लेंगे। ईस्लामधर्म के मानने वाले लोग कृपया ये तो बताओ कि मुहम्मद साहब के पहले ईस्लामधर्म किसने शुरू किया। अन्यथा जो गूगल पर वर्णित है उसे मानना चाहिए।

Anonymous said...

हम सब गूगल की बात गलत मान लेंगे। ईस्लामधर्म के मानने वाले लोग कृपया ये तो बताओ कि मुहम्मद साहब के पहले ईस्लामधर्म किसने शुरू किया। अन्यथा जो गूगल पर वर्णित है उसे मानना चाहिए।

Anonymous said...

Juth ko koi nhi phoch sakta

Naved khan said...

Toh hindu log bhi kyu apni daadhi kaat te ho.. jabki tumare purane sant, maharaj , jo tapassya karte the wo bhi daadhi rakhte the, aur medical science ne bhi proof kiya hai , ki KHATNA karne se aur Daadhi rakhne se bht faayde hai... kabhi time mile to google pr search karlena.

Naved khan said...

sab banane wala ek hai allah
aur tum log apne apne bhsgwan maante ho jo crore hai. ab koi ek hi puri duniya pure galaxies ko bana sakta hai.
islaam ne har ek jeete jaagti cheez k liye kanoon banaya hai. ki kaise life bitaya jaaye. aur mohammad (pbuh) uske idop hai.
unhone sab practically karke btaya hai.. aur wo baaki tumare bhagwano ki tarah ye nahi bolte the ki unhe pujo wahi bhagwan hai nd all. pehle islaam ko jaano. fir pura janne k baad koi galat baat ho to batana aise manki banayi hui baate to koi bhi banata.

Naved khan said...

jise bhi ye lagta hai ki muslim baadsha hasrat AURANGZEB ne jabardasti temples tode unhe ye padna chahie.
aur ye saare records indian history me kanoon me entered hai.. ki jo bhi mandir tode gaye unke piche pakka saboot tha ki unme dange karne walo ki aur samaj ko bhadkaane ki saazishe hoti thi.. aur inn sab mandiro ko todne me uss waqt k bade bade panditto ne b maana tha ye sach .. aur AURANGZEB ne har mandir todne k waqt uska record register karwaya tha.. aur pandittoo sant sadhuo ne bhi iski sehmati dii thi.. islie apne mann hi baate naa banaye ..
agr aisa hota to AURANGZEB ko indian JUDICIARY INDIAN CONSTITUTION galat maanta par wo AURANGZEB ko sahi maante hai .aur unke paas sabke saboot hai records bhi hai...
ek baar ye padle ya kisi se padwa kr samjle.





It thus became a policy when fighting rebellions against central authority, that the temple that spawned that rebellion also be destroyed. An example of this was a 1669 rebellion in Banaras led by a political rival, Shivaji, who used the local temple to rally support to his cause. After capturing Shivaji, Aurangzeb destroyed a temple in Banaras that was used as a political recruiting ground against his reign. Another example occurred in 1670 in Mathura when Jats rebelled and killed a local Muslim leader. Again, to end the rebellion Aurangzeb had to destroy the temple that had supported it.

Overall, the policy of desecrating temples was used as a political punishment for disloyal Hindu officials, not as a sign of religious intolerance as some may argue. A further argument that the lack of mosque desecration means he was religiously bigoted also holds no ground, as mosques did not double as political institutions as temples did. While the policy of obliterating a political opponent’s base of operations is one that may have its detractors, the arguments that Aurangzeb’s actions were religiously motivated are clearly baseless. Instead, Aurangzeb was a religiously-minded leader who strove hard to ensure an Islamic character permeated through all his actions as leader. This did not however mean religious intolerance as he followed guidelines for protection of non-Muslims that is mandated by Islamic law.

Naved khan said...

It thus became a policy when fighting rebellions against central authority, that the temple that spawned that rebellion also be destroyed. An example of this was a 1669 rebellion in Banaras led by a political rival, Shivaji, who used the local temple to rally support to his cause. After capturing Shivaji, Aurangzeb destroyed a temple in Banaras that was used as a political recruiting ground against his reign. Another example occurred in 1670 in Mathura when Jats rebelled and killed a local Muslim leader. Again, to end the rebellion Aurangzeb had to destroy the temple that had supported it.

Overall, the policy of desecrating temples was used as a political punishment for disloyal Hindu officials, not as a sign of religious intolerance as some may argue. A further argument that the lack of mosque desecration means he was religiously bigoted also holds no ground, as mosques did not double as political institutions as temples did. While the policy of obliterating a political opponent’s base of operations is one that may have its detractors, the arguments that Aurangzeb’s actions were religiously motivated are clearly baseless. Instead, Aurangzeb was a religiously-minded leader who strove hard to ensure an Islamic character permeated through all his actions as leader. This did not however mean religious intolerance as he followed guidelines for protection of non-Muslims that is mandated by Islamic law.

Naved khan said...

It thus became a policy when fighting rebellions against central authority, that the temple that spawned that rebellion also be destroyed. An example of this was a 1669 rebellion in Banaras led by a political rival, Shivaji, who used the local temple to rally support to his cause. After capturing Shivaji, Aurangzeb destroyed a temple in Banaras that was used as a political recruiting ground against his reign. Another example occurred in 1670 in Mathura when Jats rebelled and killed a local Muslim leader. Again, to end the rebellion Aurangzeb had to destroy the temple that had supported it.

Overall, the policy of desecrating temples was used as a political punishment for disloyal Hindu officials, not as a sign of religious intolerance as some may argue. A further argument that the lack of mosque desecration means he was religiously bigoted also holds no ground, as mosques did not double as political institutions as temples did. While the policy of obliterating a political opponent’s base of operations is one that may have its detractors, the arguments that Aurangzeb’s actions were religiously motivated are clearly baseless. Instead, Aurangzeb was a religiously-minded leader who strove hard to ensure an Islamic character permeated through all his actions as leader. This did not however mean religious intolerance as he followed guidelines for protection of non-Muslims that is mandated by Islamic law.

Naved khan said...

It thus became a policy when fighting rebellions against central authority, that the temple that spawned that rebellion also be destroyed. An example of this was a 1669 rebellion in Banaras led by a political rival, Shivaji, who used the local temple to rally support to his cause. After capturing Shivaji, Aurangzeb destroyed a temple in Banaras that was used as a political recruiting ground against his reign. Another example occurred in 1670 in Mathura when Jats rebelled and killed a local Muslim leader. Again, to end the rebellion Aurangzeb had to destroy the temple that had supported it.

Overall, the policy of desecrating temples was used as a political punishment for disloyal Hindu officials, not as a sign of religious intolerance as some may argue. A further argument that the lack of mosque desecration means he was religiously bigoted also holds no ground, as mosques did not double as political institutions as temples did. While the policy of obliterating a political opponent’s base of operations is one that may have its detractors, the arguments that Aurangzeb’s actions were religiously motivated are clearly baseless. Instead, Aurangzeb was a religiously-minded leader who strove hard to ensure an Islamic character permeated through all his actions as leader. This did not however mean religious intolerance as he followed guidelines for protection of non-Muslims that is mandated by Islamic law.

Naved khan said...

GANGA jal to asuddh ho chuka hai jab itna pavitra maante ho to usm hi saari gandagi kyu daalte ho... aur ganga jal agar itna hi pavitra hai to fir sarkar ko yaani government ko ganga safai ki yojna kyu chalana padri.. agar wo itni shuddh hai to wo khud hi saari gandagi mita degi..
aur ZAM ZAM k pani jaisa koi paani nahi h duniya me.. aisa koi kuwwa (well) batao duniya me jisse pure dekh ko aur pure world me paani jata ho... itne desert area me bhi vaha se din raat paani nikala jaata hai .. aur vaha aane wale logo ko sath m lane k liye bhi diya jata hai aur vaha unke rehne k liye use karne k liye peene k liye nahane k liye sabke liye diya jaata hai aur pure SAUDIA ARABIA country m uss kuwwe (well) ke pani ka supply hota hai...

hai aisa koi kuwwa (well) duniya me. aur wo bhi desert wale area me.
tumare khudke dharam ki kitaabo me likha hua hai sab kuch ki MOHAMMAD (PBUH) shahab kon the. .. BHAVIWHYA PURAAN.. GITA... MANU SMIRTI... tumare dharam ki charoo books me.. MOHAMMAD sahab k bareme likha hua hai.. aapko apne hi dharam k bareme nahi pata to isme hamari kya galti.. jo dharam ko tum apna maante itna b

Naved khan said...

Islaam dharam muhammad (pbuh) ke pehle duniya k sabse pehle insaan aur ham sab manav jaati k maa baap ADAM aur HAUWWA hai.. aur iska proof medical science ne bhi diya hai aur Christians JEWS ki jo kitaabe hai BIBLE TOURAAT inbe bhi likha hua hai.. aur sabse imp baat GITA me BHAVISYA PURAAN .. MANU SMIRTI...ye sab kitaabon me bhi likha hai.. aur hindu dharam ki charoon kitabo me MUHAMMAD (PBUH) k bareme me bhi likha hua hai. . aap logo apne dharam ki kitaabo k bareme nahi pata to ham kya kare. .. log kyu islaam me enter hote jab wo tumahri hi kitaabo me likha hua sach jaan lete tab unki aankhe khul jaaati.. pehle apne dharam ki shiksa loo fir jo sach hai wo pata chalega... kisiko bhi maano SHIV ko RAM ko kisi ko bhi par pehle apne dharam ko samjho kitaabo se.

Naved khan said...

jo atankwaad failaate wo islaam me nahi mane haate.. ye quraan kehta gai aur MOHAMMAD shahab ne bhi yahi kaha hai.. aur ISLAAM shanti ka dharam hai sbse saccha aur sabs

Mayur ghavat said...

Har har mahadev har masjid mahadev

Mayur ghavat said...

Har har mahadev har ghar mahadev

Mayur ghavat said...

Har har mahadev har ghar mahadev

Mayur ghavat said...

Har har mahadev har masjid mahadev

Anonymous said...

Srikrishna bhagwan the unki itni patniyan hankar bhagwan unki itni patniyan

Unknown said...

Google sahi hai
Aur ye puri duniya janti hai ki hamara dharma hindu sabse prachin darma hai
Hame garw hai ki ham hindu hai

SANTOSH PATEL said...

Google sahi hai
Aur ye puri duniya janti hai ki hamara dharma hindu sabse prachin darma hai
Hame garw hai ki ham hindu hai

Anonymous said...

Ye kya logic ki hai hindu dharam sirf nepal aur bharat me hai to wo bada nahi hai...
Hindu sabhi dharmo ko 1 saman mante hai
Aur puri svatantra se apne mutabik dharam chunane ka vikalp dete hai

Hum kabhi nahi kehte hai jo hindu naa usko maar do
Hum humesha vishwa kalyan aur shanti ki kamna karte hai

krish said...

Har har mahadev makkeswar mahadev ki Jay ho Jay mahakal Jay bhawani

gajanan jadhaw said...

no comment's

Kamal Jonwal said...

एक बात मैं भी कहना चाहूंगा की, हम हिन्दू आज भी इतने प्रैक्टिकल है कि अपने धर्म का निर्वाह करते हुए अपने धर्म को जानने का प्रयत्न करते है. तभी तो आधुनिक उपकरणों कि सहायता से आज कई बाटे सिध्द हो चुकी है कि पुरानो में जो बाटे लिखी है वो सत्य है जैसे कि श्री राम, श्री कृष्ण ने भारत भूमि पे अवतार लिया कब लिया कहा लिया यहाँ तक कि उनकी जन्म तिथि तक का पता चल गया है और भी अध्ययन चल रहे है. कहने मतलब ये है की हम अपने धर्म में विश्वास है लेकिन प्राचीनतम धर्म होने के कारन इसमें कुछ गलत चीज़े शामिल हो गयी, जैसे बलि प्रथा, सटी प्रथा, घूँघट प्रथा, जो की बाहरी आक्रमणों की दें थी ... लेकिन आज हम अपने धर्म का सही अध्ययन करने के बाद इन कुप्रथाओ को त्याग रहे है. ये है हिन्दू धर्म

Tauqir Ahmed said...

ISLAM EK COLLECTIVE MIND DARAM HAI YE HUMAN BEING (INSAN) KE D.N.A ME HAI ISS LIYAY YE MUN KI GHARAIYOUN ME RAHEGA HER SAHI ADMI ISS KO SAMAGH KAR MANE GA

Unknown said...

इसिलीए शिव लिंग मंदिरकी चर्चाके बारमे कही नहीं सुना !? पर राम मंदिर की चर्चा ए सुनी जाति रही है।
प्रेम और ध्यान-दो शब्द जिसने ठीक से समझ लिए, उसे धर्मों के सारे पथ समझ में आ गए। दो ही मार्ग हैं। एक है प्रेम का, हृदय का। एक मार्ग है ध्यान का, बुद्धि का। ध्यान के मार्ग पर बुद्धि को शुद्ध करना है- इतना शुद्ध कि बुद्धि शेष ही न रह जाए। प्रेम के मार्ग पर हृदय को शुद्ध करना है- इतना शुद्ध कि हृदय खो जाए। दोनों ही मार्ग से शून्य उपलब्धि करनी है, मिटना है। कोई विचार को काट-काटकर मिटेगा; कोई वासना को काट-काटकर मिटेगा।
प्रेम है वासना से मुक्ति। ध्यान है विचार से मुक्ति। दोनों ही तुम्हें मिटा देंगे; और जहाँ तुम नहीं हो, वहीं परमात्मा है।
शुभ प्रभात। ईश्वर प्रेम गली अति साकरी तामे दो न समाय। ध्यान करोगे तो यां तुम हम सब ईश्वर अंश बचेंगे यां स्वयं ईश्वर बचेंगे फैसला आपके हाथ है। यह शरीर बना बनाया शरीरका खेल भी निर्धारित है पहले से तो हम अपने आपको ईश्वर साक्षात्कार से ईश्वर साक्षी रहकर बना बनाया खैल का आनंद क्युं नहि ले सकते ? ध्यानसे आत्म साक्षात्कार आत्म साक्षात्कारसे ईश्वर शरणागति ईश्वर शरणागति से सारे रचे रचाये परमात्माके खेलके साक्षी धन्यवर धन्यवाद।

Anonymous said...

Ave gadhe sun ham log ke nepal ke alwa aur koi mulk nahi hai q ki ham sab jo ki hindu hai aur pure world is dhram bada koi dharm nahi tum log v to paida hote wakt hindu hi hote ho aur rahi baat dusre mulk ki to tune jangle to dekhi hogi jangle kuch tree kitne akr me hote hai lakho ke sankhy me par jiska koi kaam nahi hota hai par kuch tree bahut kaam ke hote hai jo ke jangle bahut kam hote hai to tumhare dhram waisa he hai jo ki koi kam ka nahi hai tumhare dhram me saadi karne ki aajadi hai,bacche paida karo aur chord do jo hamre me nahi hai

Unknown said...

समय बलवान है नहीं मनुष्य बलवान, सोचने वाली बात यह है के, के जब मै पैदा हूवा तब आझादी तो मील गयी थी पर यह हिंदु मुस्लिम के जगडे अंग्रैजोकी लडाई के वक्त भी थे क्या ? के बात कुछ और ही है। ? जैसे भाई बहनके जगडे और भाई भाई के जगडे होते है वैसे तो नहीं के एक ही चिज वस्तूओं के बिच दो मनुष्यो के जगडे ?

Unknown said...

एकदम सही है और इसिलिए धर्म श्रीमद्भगवद गीता मे कहा गया जो सर्व ४ वेदो, १८ पुराणो और ६ शास्त्रोका सार है। १८वें अध्याय में अर्जुन से कहते हैं- सर्व धर्मान परित्यज्ये, मा मेकं शरणं व्रज। सर्वधर्म समभाव’ ही भारत का ‘जीवन दर्शन’

Anonymous said...

Islam ki aise ki raise hm Hindu h is liye bache ho atankwadi kahi k aur bolte ho atank ka koi dharm ni hota kamino ESA bolne k baad v tm log is desh me ho sarm karo musalmano l

Anonymous said...

NYC line sir ji

mahesh patil said...

जिस दिन मक्केश्वर महादेव लिंग पर गंगा जल चढेगा उस दीन हर एक मुसलमान बलि वही चढेगा.....

Unknown said...

चुप्बे चोदु

Anonymous said...

Hello sir sab log muslim hain iske bareme aapko patta bhi hain ki zaakir nayak ka kaha sunarahe hoo. Zisko khud ye maloom nahi hain ki islam kya hain.

Anonymous said...

भाई, सब्र करो।
धर्म और मजहब दोनों समान है।
जो भी इनकी तुलना करेगा, निश्चित ही नरकगामी होगा, मैं ये वादा परमात्मा की तरफ से करता हूँ।
5000 साल पूर्व हजरत इब्राहीम ने मौला से दुआ की, तब फरिश्ते इस पत्थर को जन्नत से मदीना में लाए थे, जहां पर ईमान लाने वालो की धार्मिक यात्रा पूर्ण हो सके।
इसी प्रकार स्वयंभू शिवलिंग कहलाने वाले पत्थर भी परमात्मा के पार्षद (फरिश्ते) ही लेकर आए थे।
असली फसाद परस्पर तुलना ही हैं।

मानें तो आपका भला, ना मानें तो परमात्मा आपका भला करे।

Anonymous said...

अवश्य।।।।
हर हर महादेव।।।।।

Anonymous said...

अवश्य।।
हर हर महादेव।।।

Anonymous said...

माफी
मदीना के स्थान पर मक्का पढें।

Ahmad Rifai said...

Mr, muslim,hibrow bible k mutabik ibrahim jab 100 sal k they tub unko aulad hui thi jis ka name issac hai,unki nokrani ko ibrahim se beta huva uska name ismail hai,or bani israil se makka ka fasla 1200 km hai ,to wo kaise waha pohche? Or kaba ka agar ibrahim ne banya to wo kite sal k they ? Hakikat ye hai ki waha ibrahim gaye he nahi,or rahi bat 5 namaz ki to wo jhon baptis jis ko jaboor kehte hai us kitab se uthai gai thi

Ahmad Rifai said...

Hagar ki santan ismaili kehlai ha ibrahim ne yahowa se dua mangi thi ki mere gulam hagar or is k bache ki hifazat karna kyu ki ibrahim ne hagar ko nikal diya tha,hagar maa bani thi to usko proud ho gaya tha ibrahim k nikal ne k bad wo arvastan (arabia) chali gai thi waha usko pohchte 20 sal lag gaya tha to makame ibrahim aya kaise ?

Unknown said...

☆ कुरान से पहले मुस्लिम कौन सी किताब का अनुसरण करते थे…?
कुरआन में चर्चित चार किताबों को आसमानी किताबें माना जाता है. वे तौरात (जो मूसा पर प्रकट हुई), ज़बूर (जो दाउद पर प्रकट हुई), इंजील (जो ईसा मसीह पर प्रकट हुई)
जैसे चार ग्रंथ वैसे ही चार किताबे आगे देखो लेखक ने क्या लिखा है वैसे मैं आगे बता देता हूँ विकिपीडिया से जानकारी ले जादा सही रहेगा मुसलमान जो कुरान से पहले 3 किताबों के बारे मे बताते है उसमे भी गड़बड़ है ये है लिंक आप कॉपी पेस्ट करके तीन किताबों के बारे मे जानकारी प्राप्त कर सकते है क्या कहती है तीन किताबे https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%95

5000 साल पहले लाये थे पत्थर को ......वह वह क्या बात है आगे देखो
हजरत इब्राहीम ने मौला से दुआ की ........वह वह बहुत बढ़िया बात है
पत्थर को जन्नत से मदीना में लाए थे .........वह वह .........
सही कह रहे हो भाई मैंने भी कुरान मे पढ़ा है और जो कुरान से पहले की किताब है उसमे भी है सही और सऊदी मे जब हड़प्पा की खुदाई हुई थी उससे भी जो प्रूफ मिले है उसके आधार पर तुम्हारी बात सही है लेकिन



चुप्बे चोदू ..............वह वह क्या तहजीब है दी है तुम्हारे अल्लाहह ने क्या तमीज़ और तहजीब दी है इस्लाम की तभी तो सब के सब एक दूसरे को चोद रहे है मुसलमान होकर मुसलमान को ही चोद रहा है सीरया से लेकर पाकिस्तान हो या और जो भी इस्लामिक देश है सब चुद रहे है अच्छे से एक दिन पूरा चुद चुके होंगे तब तुम कहोगे अबे अब हम तो ही बचे है आओ और हम को ही चोद डालो ... ये है हिंदुस्तान के जाहिल ,हिंदुस्तान मे आराम से मिल रहा है खाने को और क्या चाहिए डॉ जाकिर नायक को यही एक डॉक्टर जाकिर नायक काबिल था जिसने लोगो को काबिल बना दिया नहीं तो लोगो को पता ही नहीं था अपने बारे मे मैं क्या हूँ और यैसे लोगो का काम होता है आखिर मे अपना कमेंट डालने का हम तो यही कहंगे येसे लोगो को जितना छोड़ोगे उतना ये पीछे पड़े रहंगे तो मैं यही कहना चाहता हूँ की येसे गंदे लोगो पर जरूर कमेंट किया करो छोड़ो मत मक्केश्वर के मानने वाले हमारे दोस्तो जंहा पर देखो जिस आर्टिक्ल मे देखो कमेंट पर कमेंट जरूर करो नहीं तो एक दिन पूरा गूगल का पूरा पेज़ हमारे बारे मे कुछ नहीं इनके बारे मे सारी जानकारी मिलेगी वो भी आप जानते हो फिर कैसी

Shener Ganj said...

कुरआन, कम से कम तीन आसमानी किताबों का ज़िक्र करती है, जो के कुरआन से पहले प्रकट हुए.
तौरात : कुरआन के अनुसार, तौरात मूसा पैगम्बर पर प्रकट हुई.[2] लैकिन मुसलामानों का ऐसा मानना है कि, आज कल जो तौरात देखी जाती है उसको लोग अपने हिसाब से बदल दिए हैं, और स्वच्छ पुराणी तौरात बाकी नहीं है. जैसे जैसे काल गुज़रता गया वैसे वैसे इस किताब में लोग बदलाव करदिये. यह तौरात मूसा और उनके भाई हारून पैगम्बर पर प्रकट हुई, जो बनी इस्राइल को सन्देश देने के लिए भेजी गयी थी. मूसा के पैरूकार यहूदी इस किताब को अपना पवित्र ग्रन्थ मानते हैं.

read more विकिपीडिया से लिंक को कॉपी करे और पेस्ट करे जानकारी पढे किताबों के बारे मे क्या कहती है ३ किताबे https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%95

चुप्बे चोदु ..........ये कौन है सीरिया हो या पाकिस्तान या इस्लामिक देश कोई भी हो सब चुद रहे है ये भी किसी दिन चुद जाएगा पूरा

Anonymous said...

जितनी भी बाते दी गई हैं वह सत्य हैं,बहुत ही जल्द ये मानव विरोधी नष्ट हो जाएँगे !

Anonymous said...

जितनी भी बाते दी गई हैं वह सत्य हैं,बहुत ही जल्द ये मानव विरोधी नष्ट हो जाएँगे !

Anonymous said...

uper di huyeee jo bih bate kaba tullah ke bare me ye RSS (hinduwadi) media jo bata rahi hai uska ap hindunisam se koi lena dena nahi or na hi shivling se koi lena dena hai ,

ager wo shiv ling hota or hum usko poojte to hum usko sirf wahin nahi rakhe har jageh poojte, na ki sirf kaba me ,

kaba sarif wo hajrate ibrahim ki nisani hai or allah ne use apna ghar kaha hai ,
or hum musalman hajreaswat or use kale pattar ko nahi poojte , hum use choomte hai isliye qun ki humare nabi ne use chooma tha, (na-ki isliye ki wo god hai ya god ka koi roop hai isliye),

or ek bat islam kaise faila ye app hindu log mat socho ki talwar ke jor pe faila ya kisi or wajeh se ager app logo ko kuch dout hai to quran pado or hamare nabi ki life pado uske bat apna judge ment do ??????????????

Anonymous said...

Tunhara dharm agar achha hota to tumlogo ko Talwar aur Salwar nahi uthane parte
Hinduism Sanatanism is greatest
Kai Mahakal
Rawn ki tarah tumhara bhi vinash nandik hai.

Cheemanjit Kumar said...

यही कहानी मेरे पिता जी सुनाते रहे हैं पर हम लोग ध्यान नहीं देते थे अब पक्का विश्वास हो गया कि पिता जी सही कहानी सुनाते रहे हैं...

VINIT JOSHI said...

Allah hi Krishna hai
Shiv mane Krishna ka avtar hai
Kaliyug ka ant Ho jave

Unknown said...

*किसी ने पूछा... अच्छाई और बुराई में क्या अंतर है... हमने कहा... एपी जे अब्दुल कलाम साहब के जनाजे में 82% हिन्दू थे आेर 18% मुस्लिम....!*
*मोहम्मद रफी साहब के जनाजे में 80% हिन्दू थे आेर 20% मुस्लिम....!*
*पर याकूब और बुरहान के जनाजे मे 100% मुस्लिम थे...... बस यही फर्क है.....अच्छाई और बुराई में.!!*

🚩🙏जय हिन्द 🙏🚩

Nitin Maheshwari said...

*किसी ने पूछा... अच्छाई और बुराई में क्या अंतर है... हमने कहा... एपी जे अब्दुल कलाम साहब के जनाजे में 82% हिन्दू थे आेर 18% मुस्लिम....!*
*मोहम्मद रफी साहब के जनाजे में 80% हिन्दू थे आेर 20% मुस्लिम....!*
*पर याकूब और बुरहान के जनाजे मे 100% मुस्लिम थे...... बस यही फर्क है.....अच्छाई और बुराई में.!!*

🚩🙏जय हिन्द 🙏🚩

Nitin Maheshwari said...

*किसी ने पूछा... अच्छाई और बुराई में क्या अंतर है... हमने कहा... एपी जे अब्दुल कलाम साहब के जनाजे में 82% हिन्दू थे आेर 18% मुस्लिम....!*
*मोहम्मद रफी साहब के जनाजे में 80% हिन्दू थे आेर 20% मुस्लिम....!*
*पर याकूब और बुरहान के जनाजे मे 100% मुस्लिम थे...... बस यही फर्क है.....अच्छाई और बुराई में.!!*

🚩🙏जय हिन्द 🙏🚩

SK said...

Yeh sub musalman asal mai tau Hindu hi hai Mugalo ne hazaro Hindu streeo ko Bandi Banakar usper BALATKAR karke yeh sab Bhartiya Asian musalmanko paida kiya hai

Ravinder Khatri said...

dharam koi bhi bura nahi hai lekin muslim dharam me kuch logo ne muslim ko badnam kar diya hai pure muslim bhaion ne unko alag thalag kar dena chiye

Anonymous said...

Agar itni sure ho to makka ko wapas le lo, jaise ram mandir liye.
Dusri ganga ko pawitr kaise kahte ho jab usme tum sab nahate ho.
Aabe zam-zam ke pani hum gande halat me touch bhi nai karte.

Anonymous said...

Eslam dharm chutiya hai aabe jam jam ke pani se land dhote ho aur kahate ho pak hai

Anonymous said...

आपने तथ्यों से परिचित करवाया, धन्यवाद!!!

nurima begum said...

Aapne meri baton ko saraha uske liye bhi dhanyawad..
Me to yehi kahungi ki hum sabko milkar rahna chahiye dharm ko lekar comment dene se koi naam nhi ka raha balki khud ko sharmsaar kar raha he...purwaj kis dharm ke the ye jankar ladna v koi badappan nhi he milkar rahna he or maut ke baad ek hi jagah jana he.

Nurima said...

Aapne meri baton ko saraha uske liye bhi dhanyawad..
Me to yehi kahungi ki hum sabko milkar rahna chahiye dharm ko lekar comment dene se koi naam nhi ka raha balki khud ko sharmsaar kar raha he...purwaj kis dharm ke the ye jankar ladna v koi badappan nhi he milkar rahna he or maut ke baad ek hi jagah jana he.

Anonymous said...

Tera baap leke aaya kya D. N. A me islam
abe bhosdike hat yaha se chutiye....

Gopal Sharma said...

http://www.bbc.com/hindi/international/2015/11/151118_atheism_taboo_in_arab_world_sr?ocid=socialflow_facebook%3FSThisFB#share-tools

Gopal Sharma said...

http://www.bbc.com/hindi/international/2015/11/151118_atheism_taboo_in_arab_world_sr?ocid=socialflow_facebook%3FSThisFB#share-tools

Gopal Sharma said...

http://www.bbc.com/hindi/international/2015/11/151118_atheism_taboo_in_arab_world_sr?ocid=socialflow_facebook%3FSThisFB#share-tools

VINIT JOSHI said...

Ha ji
Atma hai hum

Gopal Sharma said...

http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/akroshit-mann/entry/http-readerblogs-navbharattimes-indiatimes-com-akroshit-mann-entry-anchor1?sortBy=author

Anonymous said...

Mujhe gaali jo de rahe ho usse tumhe kya milega....kuch v nhi.D.N.A dharam nhi batata. Padai nhi ki he to padh lo or jo galiya tumne sikhi he usse to tumhare barein me yehi pata chalta he ki tum insaan to nhi ho or jo jo manushya nhi use dharam par bhi comment dene ka koi matlab nhi. Mein koi jhagde karne ya karwane ki baat kah nhi rahi.Tum kis family background se relate karte ho wo to tumhare galiyo se sabko dikh or samajh aa rahi he. Try to think big and do good for all.

Anonymous said...

Akshashah satya kaha yadi hindu ki entry ho jaye aur shivling par vah jal chada de to.. .. .

Nurima said...

Ye to mannewalo par depend karta he. Me musalman hu tab v sabhi dharm sthalo par jati hu or barabar se respect deti hu. Iska karan sirf itna he ki humne koi dharm leke janam nahi liya par sabse badaa to shristkarta he jise jo chaho bol lo par uska astitva kabhi kam nhi hone wala or mrityu pashchat unke pas hi jana he. Fir ek dusre par comments dekar kya hasil hoga. Apne hisse ka karm karna hi dharm manti hu.

Nurima said...

Ji haa apne bilkul sahi kaha ...hum sab atma he or atma ka koi dharm nhi hota. Sabhi ko apne hisse ka karya purn karna he or ek din mitti me mil jana he...chahe jalkar ya fir kabr me..baat to ek hi he.

sunil said...

nurima ka bat sahi hai par tumhare logo me sabhi ka bichar muslim ko rakhna iunsaniyat Ko nahi. par Hindu dharm kisi ka bura nahi cahta hai na 7 shadiya karta hai ki jan sankhya bada kar kisi ko khatm karne ka soch rakhta hai hindu dharm ( Muslim to ladkiyo ko koi azadi hi nahi deta jaise ke ladkiya sirf bachha paida karne ka mashin ho)

sunil said...

Hindu aur Muslim hi karte rahoge kya

sunil said...

nurima ka bat sahi hai par tumhare logo me sabhi ka bichar muslim ko rakhna iunsaniyat Ko nahi. par Hindu dharm kisi ka bura nahi cahta hai na 7 shadiya karta hai ki jan sankhya bada kar kisi ko khatm karne ka soch rakhta hai hindu dharm ( Muslim to ladkiyo ko koi azadi hi nahi deta jaise ke ladkiya sirf bachha paida karne ka mashin ho)

sunil said...

nurima ka bat sahi hai par tumhare logo me sabhi ka bichar muslim ko rakhna iunsaniyat Ko nahi. par Hindu dharm kisi ka bura nahi cahta hai na 7 shadiya karta hai ki jan sankhya bada kar kisi ko khatm karne ka soch rakhta hai hindu dharm ( Muslim to ladkiyo ko koi azadi hi nahi deta jaise ke ladkiya sirf bachha paida karne ka mashin ho)

Nurima said...

Ji sunil apne v sahi kaha. Muslims ho ya hindu dharm ke naam par khud ko sarvshresth banne ke liye apni dalile dete he.ye sab galat he. Agar Geeta or kuran ke mayne log samajhte to shayad insab baton ko bolne se pahle pandit or moulavi log samajhte to aisa nhi bolte. Kuch nhi rakkha he dharm me sirf or sif insaniyat hi sabse bada dharm he.me sirf isi logic se chalti hu or maulaviyo ko sikhakar bhejti hu. Koi v dharm ye nhi sikhata ki ek dusre se lado or jeet hasil karo.balki ek baat sikhata he ki ek dusre ko samman karo or sath chalo. Sabhi ko ek din marna he or isse bada koi satya nhi.

Anonymous said...

har har mahadev jai mahakaleshwar

Unknown said...

👍

Chandrashekhar Rajak said...

sabhi ka dharm bhale hi alag ho lakin sabhi dharm me ek hi bat likha hai satya ki hamesa vijay ho

Nurima said...

Ekdam sahi kaha chandrashekhar ji ne. Me sehmat hu apke baat se. Dharm ne to baad me janam liya par insan ne sabse pahla janam liya.Dharm bolke kuch nhi he sirf sarwashaktiman ko manne ka or smaran karne ka tarika sabka alag alag he. Isliye ek disre ko samman or pyar se rahne ka naam hi jindagi he. Jindagi khatam to sabkuch khatam.

Paresh Parmar said...

Insaan jab is Dunia me aya tab na koi Dharm tha na koi Mandir or na Maszid.Hum ne Dharm or Mazhub ke naam per sirf vinaash hi dekha hai.
Hum se achee to Aadimanv the.

Paresh Parmar said...

Insaan ne Dharm Banaya Insaan ne Mandir or Maszid Banayi par Dono ki jade Khokhli hai. Insaaniat sab se bada Dharm hai mazhub hai. Itana bhi na samaj paye to Insaan Aadimaanv hi bhetar tha.

Paresh Parmar said...

Insaan ne Dharm Banaya Insaan ne Mandir or Maszid Banayi par Dono ki jade Khokhli hai. Insaaniat sab se bada Dharm hai mazhub hai. Itana bhi na samaj paye to Insaan Aadimaanv hi bhetar tha......